drrajpalsingh
New member
आल इंडिया पंजाबी जागृति मंच द्वारा खुले तौर पर इनैलो का समर्थन करना हिसार सीट पे किस के लिए कितना भारी हो सकता है:
यह निर्भर करता है कि आल इंडिया पंजाबी जागृति मंच जो कि मुख्यत: हरियाणा में ही सबसे ज्यादा प्रभावित है, जिसका कारण भी साफ़ है क्योंकि हिन्दू पंजाबी, पंजाब-दिल्ली से भी ज्यादा हरियाणा में है| जातीय जनसँख्या व् वोट के हिसाब से जाट (35% तीनों धर्मों के मिला के) और ब्राह्मण (6.87%) के बाद तीसरी बड़ी वोटिंग ताकत है हिन्दू पंजाबी /खत्री (6.25%) है। हालाँकि अगर पंजाबी के नाम से कुल मिला के देखा जाए यानि अगर 4% सिख जाट भी इसमें मिला दिया जाए तो यह संख्या 10% के पार हो जाती है लेकिन सिख जाट का जितना रूझान पंजाबी शब्द के साथ रहता है, हरियाणा में उससे ज्यादा जाट शब्द के साथ रहता है जिसका ताजा उदाहरण अभी खत्म हुआ जाट आरक्षण आंदोलन था जो कि ना सिर्फ सिख व् आर्यन (हिन्दू धर्म का सबसेट) बल्कि मुस्लिम जाटों तक ने भी मिल के लड़ा और लिया भी| और जब-जब एंटी-जाट वोटिंग की बात हुई तो सिख जाट इसमें आर्यन (हिन्दू) जाट के साथ ही गिना गया|
खैर जाट बनाम गैर-जाट की राजीनीति का बीज बोने वाले यानि स्वर्गीय चौधरी भजन लाल तो हमारे बीच नहीं परन्तु उनके पुत्र महाशय कुलदीप बिश्नोई हिसार सीट से मैदान में हैं और अपने पिता द्वारा दी गई परिपाटी पर ही चलते नजर आते हैं और एंटी-जाट राजनीती करने में तो बाप से भी ऐसे दो कदम आगे निकल जाते हैं कि वैसे तो सबके लेकिन उल्लेखनीय रूप से जाटों के इर्द-गिर्द सिकोड़ दिए गए खाप सामाजिक तंत्र (पूर्णतया गैर-राजनैतिक संस्था) तक को भी कोसने और बैन करवाने तक पे भी बोलने से परहेज नहीं करते|
अब हालाँकि हर जाति का कुछ % कट्टर समर्थक हर पार्टी के साथ जुड़ा होता है जैसे कि इनैलो में पंजाबी प्रतिनिधित्व की बात करें तो माननीय अशोक अरोड़ा जी शुरू दिन से इनैलो का पंजाबी चेहरा रहे हैं, लेकिन अब ऐन लोकसभा इलेक्शन की संध्या पर रोहतक से कांग्रेस के मंत्री व् विधायक रहे लेकिन आजकल बागी चल रहे श्रीमान सुभाष बत्रा व् अन्य जाने-पहचाने हरियाणवी हिन्दू पंजाबी चेहरों से सजे आल इंडिया पंजाबी जागृति मंच के खुलकर इनैलो के समर्थन में आने से हिसार सीट पर बिश्नोई के लिए कितनी मुश्किलें खड़ी होंगी यह तो इसपे निर्भर करेगा कि इस मंच की बात को कितना पंजाबी खत्री समाज मानता है| हालाँकि पिछले दिसंबर में रोहतक में हुए इसी मंच के सम्मलेन में खासा पंजाबी समुदाय एकत्रित हुआ था और फिलहाल उसी को मैं इस मंच के जनाधार के रूप में देख सकता हूँ|
2011 के बाई-इलेक्शन में महाशय बमुश्किल 4-5 हजार वोटों की जीत से अपनी सीट बचा पाये थे, वो भी बावजूद इसके कि एक तो हिसार क्षेत्र में पिता की मृत्यु की मार्मिक लहर थी, दूसरा बीजेपी-हजका का गठबंधन भी था, तीसरा बसपा ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था (गौर फमाइएगा 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा का उम्मेदवार इस सीट से 96000 वोट ले गया था, जो कि 2011 में अधिकतर इन्हीं जनाब को चढ़ा), चौथा "आप" जैसी कोई पार्टी मैदान में नहीं थी, पांचवा कांग्रेस के जाने-माने चेहरे द्वारा उचाना से अपना सारा वोट अंदर-खाते भाई-साब को चढ़वाया गया था, छटा हिसार सीट पे भी कांग्रेस का वोट अंदर खाते भाई-साहब को गया ऐसे कयास उठे थे|
लेकिन अबकी बार एक तो करनाल से अपने आशिक भाई को टिकट दे के पारी शुरू करने से पहले ही अपनी फजीहत करवा चुके हैं, दूसरा एक लाख वोट सीधा-सीधा बसपा वाला खींचेगा, तीसरा पंजाबी बिरादरी का इनैलो को समर्थन जनाब की नींद उड़ाएगा, चौथा कांग्रेस के सम्पत सिंह का भी वोट व् प्रभाव उन जगहों पर सबसे ज्यादा है जहां कि इन जनाब का जैसे कि भूना-नलवा-हिसार आदि यानि बाकी की जगहों पर या तो कांग्रेस ही भारी रही है या फिर इनैलो, पांचवा कयास हैं कि "आप" पार्टी भी जितना वोट लेगी उसमें इन्हीं का ज्यादा नुक्सान होगा| अब अकेले मोदी की लहर पर जनाब की कितनी नैया पार होती है, देखने वाली बात होगी|
- Phool Kumar Malik
Good insight on the polls in Hisar Lok Sabha constituency.