यह clu वाला खेल हर सरकार मे खेला जाता हैं |
अभिक राणा रही बात आरक्षण की क्या बता सकते हो की आप कितने आंदोलन मे गए कितने लठ खाये ? आंदोलन की बहुत जानकारी रखते हो क्या बता सकते हो कितने इस आंदोलन मे मरे ? मैंने पहले भी कई बार लिखा हैं की कितने मरे और कैसे मरे | जो शहीद हुए सरकार ने उनके परिवारों को हर तरह की मदद की हैं और रही मुकदमो की बात हर आंदोलन मे मुकदमे बनते हैं और समय के हिसाब से खत्म भी हो जाते हैं |हम लोगो पर जिनपर मुकदमे बने वो इतना नहीं चिंता कर रहे जितनी आप कर रहे हैं |
राणा आपको पता होगा की 9 राज्यों के जाटों को आरक्षण मिला हैं , क्या पूरे 9 राज्यों मे आंदोलन हुआ ? आंदोलन के बारे मे थोड़ी जानकारी दे दु क्योंकि सबसे ज्यादा मगज़मारी आप जैसे कागजी शेर करते हैं | अनोडलन की शुरुआत 2008 से की गई थी इसमे 2010 मे कोमन वेल्थ खेलो मे मशाल को काले झंडे दिखाये गए | सितंबर 2010 मे सांकेतिक रोड जाम किए गए थे | उसके बाद मुरादनगर मे दिल्ली का पानी रोका गया जिसमे 20-25 हजार की भीड़ जुटी थी यू पी व हरियाणा से | 2011 मे हरियाणा मे 14 रेल ट्रैक जाम किए गए और यू पी मे एक किया गया था जो की बीच मे खाली कर दिया गया | यह आंदोलन सबसे बड़ा आंदोलन था | हरियाणा मे भी मुख्य रूप से सिर्फ भिवानी , हिसार , जीन्द, फ़तेहाबाद का कुछ हिस्सा व रेवाड़ी का बावल बस इतने ही लोग आंदोलन मे हमेशा शक्रिय रहे थे | आप क्या सोचते हो की केंद्र की कांग्रेस सरकार सिर्फ तीन जिलो के लोगो से डर गई ? क्या कांग्रेस इतनी बेवकूफ हैं की सिर्फ जाटों को आरक्षण दे कर बाकी सबकी नाराजगी ले ले | देख भी लिया होगा एनसीबीसी की सुनवाई व आरक्षण मिलने के बाद कैसे दूसरे लोग कौर्ट की तरफ भागे | यदि सरकार ने डर कर भी दिया तो यह तो फिर जाट्टों की धाक हुई की सिर्फ तीन शहादत 9 राज्यों के जाटों को आरक्षण दिलवा गई जबकि गुज्जर 70 शहीद हुए और नतीजा आज भी वहीं का वहीं जबकि गुजरो के भी नेता थे कांग्रेस मे !
इसका कारण भी बता दु क्योंकि आप लोगो पर शंकराचार्य की औल्लादों ने पट्टी बंद रखी हैं | 2011 मे रेल रोको आंदोलन के दौरान जीन्द मे मुख्यमंत्री हुड्डा से आरक्षण समिति के लोगो की बैठक थी तो हुड्डा साहब कुछ कागज रेकॉर्ड साथ मे लिए हुए उनकी तरफ इशारा करके बोले की आप आरक्षण न मांगो इससे नुकसान होगा और वैसे भी हरियाणा मे हम ( मैं और चौटाला ) जाटों का काम कर रहे हैं रेकॉर्ड देख लो | इस पर कमांडेंट साहब ने कहा की सीएम साहब आप दोनों कब तक जाट कौम पर एहसान करते रहोगे , कल यदि आप लोग सरकार मे नहीं रहे कोई दूसरा आ गया तो फिर कौन काम करेगा ? आप लोगो ने कौम पर इतना एहसान किया हैं तो बस एक एहसान और कर दो कौम को आरक्षण दिला दो , कौम को अपने पैरों पर खड़ा होने दो | यह मीटिंग पूरे साढ़े पाँच घंटे चली थी आखिर मे हुड्डा साहब को समझ आई और बोले की आप लोग मुझे जाट समझते हो तो विश्वास करो जाटों को आरक्षण पक्का दिलाऊँगा और मैं ऐसे अभी घोषणा नहीं करूंगा तरीके से काम करूंगा पहले हरियाणा मे आयोग बनाऊँगा , मुझे भी पता हैं की मैं हमेशा सीएम नहीं रहूँगा | और आखिर मे केंद्र मे दिलाया आज तहशीलों मे जाके देखना जाटों की लाइन लगी हुई मिलेगी ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए |
* हरियाणा मे जब जाट आरक्षण की मांग उठाई आंदोलन की शुरुआत की तब तक कोई बड़ी जाति यानि ब्राह्मण ने आरक्षण के लिए आवाज़ नहीं उठाई | इन लोगो ने आवाज़ तब उठाई जब हमारे ही नेता कहने लगे की सबको आर्थिक आधार पर आरक्षण दो | और ऐसे बयानो से इन खीर खानी जात का हौसला बढ़ गया जिस कारण हरियाणा मे आर्थिक आधार पर भी देना पड़ा |
मुझे यह भी पता हैं आप जैसों को अब भी समझ नहीं आएगा आप लोगो ने बोलना ही उल्टा हैं क्योंकि आप लोगो ने खाकी चड्डी वालों का झूठा खा रखा हैं |