Shayari (Part 2)

जिन्हें सपने देखना अच्छा लगता है, उन्हें रात छोटी लगती है
जिन्हें सपने पूरे करना अच्छा लगता है, उन्हें दिन छोटा लगता है....
 
इस जहाँ में कब किसी का दर्द अपनाते है लोग
रुख़ हवा का देखकर अक्सर बादल जाते है लोग.....
 
अभी न पूछों हमसे कि मेरी मंज़िल कहाँ है
अभी तो बस हमने चलने का इरादा किया है
न हारे है और न हारेंगे कभी
ये हमने खुद से वादा किया है
 
सीने मे जलन आखों में तूफ़ान सा क्यों है
इस जगह पर हर शख्स परेशान सा क्यों है
 
एक कड़वा सच

चार लोग सिर्फ तभी एक दिशा में चलते हैं
जब पांचवा कंधों पर हो.
 
जिस कश्ती के मुकद्दर में लिखा हो डूब जाना,....तूफां से बच भी जाये तो किनारे रूठ जाते हैं!..
 
चार लोग सिर्फ तभी एक दिशा में चलते हैं
जब पांचवा कंधों पर हो.


चार लोग नहीं अपितु चार हिन्दू कहिये। हिन्दू जात - पाँत के नाम पर बहुत बंटा हुआ है तभी तो कहते हैं कि चार हिन्दू एक दिशा में तभी जाते हैं ५ वाँ कंधे पर हो.
 
धर्म के उस्तादों ने, वफादारी का रास्ता दिखाया, पर कैसे की जाती है, यह नही सिखाया
इसलिए शागिर्द, करते है निभाने की बात, मगर बफादारों में किसी ने नाम नही लिखाया
 
प्रेम की बेड़ियाँ, फूलों का हार, विरह के अश्रु, और अविरल गंगा की धार.....
समझे जो वेदना, प्रिय के मन की, मूल है ये जीवन का, और यही है सार.....
 
लोग प्यार को भगवान का नाम देते हैं,
कोई करता है तो इल्जाम देते हैं।
कहते हैं पत्थर ह्रदय रोया नहीं करते
एवँ पत्थर के रोने को झरने का नाम देते हैं।
 
कुछ सपनों को पूरा करने निकले थे गाँव से,
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किसको पता था कि गाँव जाना ही एकसपना बन जायेगा।
 
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