Jeevan ki aapadhapi me----
जीवन की आपाधापी में कब वक्त मिला
कुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूं,
जो किया, कहा, माना उसमें भला बुरा क्या।
जिस दिन मेरी चेतना जगी मैनें देखा,
मैं खडा हुआ हूं दुनिया के इस मेले में,
हर एक यहां पर एक भुलाने में भूला,
हर एक लगा है अपनी अपनी दे-ले में,
कुछ देर रहा...