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    Population of Jats in joint Punjab, 1931

    1881-1931 के दौरान भारी अदला-बदली हुई थी। 1881 के आंकड़े देखें और फिर 1931 के, जबर्दस्त बदलाव हुआ था। अंबाला जिले में 1881 में हिन्दू व सिक्ख जाटों की संख्या देखें और फिर 1931 में, 1931 में हिन्दू जाट लगभग आधे हो गए, सिक्ख जाटों की संख्या बढ़ी परंतु जिस अनुपात में हिन्दू जाट संख्या घटी उस अनुपात...
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    Population of Jats in joint Punjab, 1931

    1881 से 1931, संयुक्त पंजाब में जाटों की आबादी में उतार-चढ़ाव- 1881 से 1931, जाटों की कुल आबादी 47.3% बढ़ी। इन 50 साल दौरान में - हिन्दू जाट आबादी = -31.3% घटी। सिक्ख जाट आबादी = +90.1% बढ़ी। मुस्लिम जाट आबादी = +90.4% बढ़ी। ब्रिटिश टेर्रिटोरी में सबसे ज्यादा सिक्ख जाट आबादी में बढ़ोतरी हुई...
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    Population of Jats in Rajsthan in 1911

    1911, राजस्थान की जनगणना का डाटा। सन 1911 की जनगणना अनुसार राजस्थान में जाटों की आबादी 9,58,987 थी, जो कुल आबादी का 8.82% थे। जाटों के बाद दूसरी बड़ी आबादी ब्राह्मणों की 9,25,211 थी, जो कुल आबादी का 8.51% थे। ब्राह्मणों की बड़ी संख्या जयपुर में थी, जो 3,08,972 थी। राजस्थान में तीसरी बड़ी आबादी...
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    Population of jats in United province in 1931

    1931, यूनाइटेड प्रोविन्स (उत्तर प्रदेश) में जाटों की आबादी ? ब्राह्मणिक हिन्दू जाट ? 7,12,803 मुस्लिम जाट ? 19,689 आर्य जाट ? 47,027 ब्रह्मों जाट ? 4 राधा स्वामी जाट ? 59 जैन जाट ? 217 सिक्ख जाट ...
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    Population of Jats in joint Punjab, 1931

    1931, संयुक्त पंजाब में हिन्दू, सिक्ख, मुस्लिम जाट आबादी - -राकेश सिंह सांगवान 1931 संयुक्त पंजाब मेँ मुसलमानों की कुल आबादी ? 1,49,29,896 पंजाब मेँ मुस्लिम धर्म मेँ मुख्य जातियाँ ? Jat ? 29,40,849 (19.70%) Rajput ? 17,18,532 (11.52%) Arain ? 13,28,532 (8.90%) Bloch ? 6,24,691 (4.18%)...
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    Kya Jat Sabse jyada lalchi ya darpok kaum hai?

    क्या जाट सबसे कायर या सबसे ज्यादा लोभी-लालची कौम है? मैंने संयुक्त पंजाब और यूपी की सन् 1931 की जनगणना रिपोर्टों के आधार पर जाटों की जनसंख्या संबन्धित पोस्ट लिखी थी, इसमें मैंने हिन्दू, सिख, मुस्लिम व अन्य धर्मों को मानने वाले जाटों के अलग अलग आंकड़े दिये थे। इस पर कुछ ब्रेनवाश्ड जाटों ने कमेंट...
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    Janeu Kranti

    जनेऊ क्रांति -2 पंजाब में जनेऊ क्रांति 1880 के दशक मे शुरू हुई थी। जनेऊ हिन्दू/सनातन धर्म में स्टेट्स सिम्बल है। इस धर्म की उंच जातियाँ ही इसे पहन सकती हैं। और उंच जातियों में इसके सूत/गांठ का फर्क होता है। हिन्दू धर्म में विधवा के पुनर्विवाह की अनुमति नहीं थी। जिसे पंजाब में करेवा प्रथा या...
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    Janeu Kranti

    जनेऊ क्रांति! 1920 के बाद राजस्थान, पुर्वांचल राज्यों में जनेऊ क्रांति का दौर शुरू हुआ। हालांकि, संयुक्त पंजाब और यूपी में जनेऊ क्रांति की नींव 1880 के दशक में रख दी गई थी। असल में यह क्रांति आर्य समाजियों द्वारा शुरू की गई थी। आर्य समाज में भी दो ग्रुप थे, एक ग्रुप खुद को हिन्दू ही मानता था और...
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    Sir Chhoturam

    ऐसे ही नहीं ये किश्ती मझधार से निकल कर यहाँ तक आई है | इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी है | सर छोटूराम एक ऐसे समाज हितेषी थे जिन्हें अपने ज़माने में लगभग हर गाँव के होनहार बच्चे की खबर रहती थी | जो कोई गरीब होनहार बच्चा होता तो उसके घर बिना खबर के आगे की पढाई के लिए वजीफा जाना शुरू हो जाता | ऐसा ही...
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    Sir Chhoturam

    पूर्वी पंजाब जाट महासभा के एक सम्मलेन , जो सोनीपत में हुआ था , में सर छोटूराम के भाषण के कुछ शब्द ( ये भाषण 2 अप्रैल, 1940 को दी ट्रिब्यून अख़बार के पृ.1 पर छापा था) जाटों को संबोधित करते हुए विकास मंत्री सर छोटूराम ने कहा : ... मैं आपको यकीन दिलाता हूँ की सर सिकंदर हयात खान कभी भी पूर्ण इस्लामिक...
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    Sir Chhoturam

    सर छोटूराम जब पंजाब में मंत्री थे तो उन्हें मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश के जाट कालेज के उत्सव पर बुलाया गया । उस प्रोग्राम में एक जिलाधीश भी आमंत्रित थे। जिलाधीश महोदय ने जो कि गैर जाट जाति से संबंधित थे, अपने भाषण में चौधरी छोटूराम को पूर्ण सम्मान देते हुए कहा कि-"किसानों को सरकारी नौकरियों के पीछे...
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    Sir Chhoturam

    4 सितम्बर , 1935 को लायलपुर में ज़मींदारों की एक सभा को संबोधित करते हुए चौधरी छोटूराम ने कहा था – अब पूंजीवाद के दिन लद गए हैं ... .... हमें मोटी तोंद वाले टैक्स वालों की जरुरत है , जब तक कि सरकार जमींदार को वह राहत न दे दे जो उसे देनी चाहिए | हाल में मैं राजस्व घटाने के पक्ष में नहीं हूँ ...
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    Sir Chhoturam

    ....... राजा नरेन्द्रनाथ की प्रार्थना पर चुनाव की तारीख आगे के लिए बढाई गई क्योंकि उनका कहना था कि हमने अपना दूसरा उम्मीदवार अभी तैयार नहीं किया है | मियां साहब और चौधरी साहब ने उनकी समय लेने की बात को मान लिया | डॉक्टर नारंग मोर्चे पर आये | एक तो डॉक्टर साहब वैसे ही प्रभावशाली थे दुसरे सभी...
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    Sir Chhoturam

    गवर्नर के साथ संघर्ष मोंटिग्यु – चेम्सफोर्ड के सुधारों के विधान में यह व्यवस्था थी कि इन सुधारों के लागू होने के अनन्तर कौंसिल के पहले चार अधिवेशन होने तक कौंसिल का अध्यक्ष गर्वनर द्वारा नामजद होगा | पांचवें अधिवेशन में कौंसिल के मेम्बरों द्वारा अध्यक्ष चुना जा सकता है | अब तक मिस्टर केशन जो कि...
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    Sir Chhoturam

    मजदूर-हितों की रक्षा भी पंजाब से शुरू चौधरी छोटूराम जी को जिस भांति किसानों की चिंता रहती थी , उसी भांति मजदूरों के भले के लिये भी वे चिंतित रहते थे | सन 1935 के शासन-सुधारों के बाद बनी मिन्सिट्री में विकास के अतिरिक्त उद्द्योग विभाग भी उन्हीं के पास था | उद्योगों की उन्नति भी उनके समय में खूब...
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    Sir Chhoturam

    " पुत्रा दे बैर ना मुके , माँ मुक गई पंजाबा दी " पाकिस्तान के एक चैनल पर महाराजा रणजीत सिंह पर एक परिचर्चा .... जो लोग कहते हैं कि हमने ' गुड गवर्नेंस' की हैं उनको असल में तारीख का नहीं पता उनको तो सर छोटूराम पढ़ लेना चाहिए | पंजाब की अगर हुकमरानी को पढ़ना हैं तो सिर्फ सर छोटूराम को पढ़ लें महाराजा...
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    Sir Chhoturam

    एक बार संयोगवश चौधरी छोटूराम और जनाब जिन्ना का एक साथ कालका में आना हो गया | चौधरी साहब के किसी मुस्लमान मित्र ने इस आशय से दोनों को अपने यहाँ भोजन पर निमंत्रित किया कि यहाँ उनकी आपस में कोई बातचीत हो जाये | जनाब जिन्ना पहले आकर कुर्सी पर बैठ चुके थे , चौधरी साहब थोडा देरी से पहुंचे | एक दुसरे...
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    Sir Chhoturam

    जब सन 1927 मे पंजाब गवर्नर व हिंदू महासभाइयों की साजिश से सर छोटूराम को मंत्रिमंडल मे शामिल नहीं किया गया सर फैजले हुसैन को बड़ा दुःख हुआ | पार्टी के मुसलमानों को भी दुख हुआ किन्तु जब फिरोज खान नून को गवर्नर ने मिनिस्टर बना दिया तो मेम्बर शांत हो गए | कौंसिल के प्रथम अधिवेशन में उनके विरोधी और...
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    Sir Chhoturam

    चौधरी सर छोटूराम द्वारा मियां सर फैज़ले हुसैन को लिखे एक ख़त के आखिर में नोट में उन्होंने श्री दीपचंद वर्मा जी के बारे में बताया है कि वर्मा जी हिन्दू सभा के शिक्षकों से पढ़ें हैं परन्तु अब वे पूरी तरह से हमारी विचारधारा में परिवर्तित हो चुके हैं | सर छोटूराम जिस विचारधारा की बात कर रहें हैं यही वह...
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    Sir Chhoturam

    सन 1942 में गांधी जी ने अंग्रेज़ो को बिना कोई देरी किये भारत छोड़ चले जाने के लिए कह दिया था | सर छोटूराम ने गांधीवादी निष्क्रिय प्रतिरोध की योजना के विकल्प के रूप में अपनी ही सक्रिय प्रतिरोध की योजना बना ली थी और इस को गंभीर स्वरूप प्रदान करने तथा अर्थपूर्ण बनाने , महत्व देने के लिए 29 नवंबर 1942...
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