राष्ट्रवाद की अविरत गंगा - Sense of Nationalism
रुके नहीं वो झुके नहीं, सीने पर गोली झेली थी।
रँगे दिवाने लाल खून में, खूनी होली खेली थी ।।
एक एक सौ सौ पर भारी, इँकलाब का नारा था ।
शहीद हुये आजाद कराकर, हिन्दुस्तान हमारा था।।
दुश्मन आके फिर सीमा पर, भारत पर आघात करे ।
कायर है दिल्ली का शासन...