जब सत्य निष्प्राण हो, विधर्मी का कल्याण हो !
सत्य हो डरा हुआ, और असत्य को प्रणाम हो !
जाट तुम झुको नहीं, युद्ध से डरो नहीं !
जब शौर्य हो झुका हुआ, घुटनों पर टिका हुआ !
दम तोड़ता हो न्याय जब, बैसाखियो पर खड़ा हुआ !
जाट तुम झुको नहीं, युद्ध से से डरो नहीं !
जब साथ में न मित्र हो...