Shayri (Continued)

आवश्यक नहीं कि प्रार्थना हो हर समय,


और उसमें भगवान का नाम आये,


जीवन तो स्वयँ एक प्रार्थना है,


शर्त ये है कि किसी के काम आये।
 
समझा ना कोई दिल की बात को;
दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया
जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से;
तो हमको ही पत्थर दिल कह दिया।
 
Aa bhi jao ke Zindagi kam hai....
Tum nahi ho toh har khushi kam hai....


Apni aankhon ke samundar mein utar jaane de
tera mujrim hun mujhe doob ke mar jane de
aye naye dost na samjhunga tujhe bhi apna
pehle maazi ka koi zakhm to bhar jaane de
 
Zindagi tasveer bhi or taqdeer bhi hai...
Fark toh bas rango ka hai....
Mann chahe rango se bane toh tasveer...
Aur anchahe rango se bane toh taqdeer....
 
Har baat ka koi jawab nahi hota...
Har Ishq ka naam khraab nahi hota...
Yun toh jhoom lete hain nashe me peene wale...
Magar har nashe ka naam Sharaab nahi hota....
 
वो शख़्स जो झुक के तुमसे मिला होगा ...
य़कीऩन उसका क़द तुमसे बड़ा होगा ...!
 
मरने नहीं देंगे तुम्हे जीने नहीं देंगे |
देंगे हज़ार जख्म पर सीने नहीं देंगे ||
अंधी है सियासत यहाँ शातिर है हुक्मरान |
पानी तुम्हे देंगे मगर पीने नहीं देंगे ||
 
मैं तो अनमोल हूँ, तुम मेरे दाम नहीं हो,


कर दे मुझे मदहोश, ऐसा कोई जाम नहीं हो,


मुझे पाने के लिए लेना होगा दूसरा जनम,


क्योंकि मैं जिसकी राधा हूँ,


तुम वो श्याम नहीं हो।





"अज्ञात"
 
एक कोशिश और कर, बैठ न तू हार कर,
तू है पुजारी कर्म का, थोडा तो इंतजार कर,
विश्वास को दृढ बना, संकल्प को कृत बना,
एक कोशिश और कर, बैठ ना तू हार कर....
 
ऐ मेरे हमनशीन चल और कहीँ,
इस चमन अब अपना गुजारा नहीँ....
बात होती गुलों तक तो सह लेते हम,
अब तो काँटों पे भी हक हमारा नहीं....

 
मुहब्बत में नहीं है फ़र्क, जीने और मरने का....
उसी को देखकर जीते हैं, जिस काफ़िर पे दम निकले....
 
इतनी मिलती है मेरी ग़ज़लों से सूरत तेरी

लोग तुझको मेरा महबूब समझते होंगे।।
 
Sochta hu bna loon koi qabristan dil mein..!

"aye ishq"

Ke khwaab ek ek karke martey ja rhey hai..!!
​
​
 
Last edited:
क्या खूब तरक्की की है आज की दुनियाँ ने,
मरीज-ए-इश्क तो आज भी लाईलाज बैठे हैं।
 
Pinjre me bulbul ki jindgani bhi dekhi....
Kaanton me ek gul ki jawani bhi dekhi....


Har pal dard ka ek naya mod leti...
Mohabbat ki kasmin kahaani bhi dekhi....

Mere ishq ko thukrane se thik pehle...
Tere lab ki dilkash pareshani bhi dekhi....

 
अरविन्द केजरीवाल के अहमदाबाद फ्लॉप रोड़ शो को दृष्टिगत रखते हुए उनके लिए के लिए दो शब्द:-


अर्ज है :-



गए थे तेरे शहर में तुझको बदनाम करने,


पर स्वयं अपमानित होकर आ गए!
 
खामोश हूँ मगर चेहरोँ की शिकन से वाकिफ हूँ ।
क्या हो रहा है जमाने के चलन से वाकिफ हूँ ।।
 
मुझमें ऐब बहुत होंगे...
.
.
.
.
मगर
.
.
.
.
एक खूबी भी है.......
मैं किसी से ताल्लुक.....
मतलब (स्वार्थ के लिए) के लिए नहीं रखता......!"
 
Back
Top