Shayri (Continued)

Aise hain hmare desh k Neta....
Lagate hain Deshbhakti k naare....
Bharashtachaar me doobe hue hain ye saare....

Hoti hai jo desh me ghatna....
Kehte hain Videshi haath hai....

Sarhad pe khoon bhaye jab Sainik hmare....
Shabaashi inko mile jaise khud hi lade ho bechaare....

Apne Desh ka Rashtriya Geet bhi inko yaad nahi....
Desh kya?? Deshkbhakti kya?? Inko kuch yaad nahi....

Maaf karo yaaro.... Maine kuch galat nahi kaha....
Ye wo Atyachaar hai... Jo aapne aur maine done ne saha....
 
राहुल है नादान अभी, नहीं है उसको झूठ का ज्ञान
पर करना चाहता है वह भी कुछ अच्छे-2 से काम
गिनवा रहा उपलब्धियां, बस अब यही है उसका काम....
पर कांग्रेस की कमियों से मोदी ने बनाई अपनी ढाल
गुजरात के अलाबा है सब बेकार और देश का बुरा हाल
काले धन को वापिस लाएगा, गर मिला बोटरों का साथ
2 महिने चुनावी राजनीति की चक्कलस होगी बड़ी धमाल
 
दलबदलू नेताओं को समर्पित
चुनावी समर में पार्टी-विचारधारा पर एतबार किसको है
ऐसे में मिले किसी भी पार्टी टिकिट तो इंकार किसको है

कुछ तो हम 'दलबदलुओं'की मजबूरी को समझों ऐ,बोटरों
वरना थूक कर चाटने और झूठ बोलने से प्यार किसको है
 
मुझे जगाना मत कभी,मुझे सोने की आदत है..
मुझे हसना मत कभी,मुझे रोने की आदत है...
ज़िन्दगी भले मुझे कितने भी मौके दे दोस्तों ..
मुझे बताना मत कभी, मुझे खोने की आदत है…
 
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हाथों की लकीरों में जो, ढूँढते है मंजिल अपनी..
उन्हें क्या खबर रास्तों में, ठोकरों का अपना ही मजा है।
 
अब मुझे पत्थर ही रहने दो यारो ,
कंचन बना दिया तो मुझमे खोट भी होगा !!
 
तेरे पास भी कम नही, मेरे पास भी बहुत है |
यह परेशानियाँ आजकल फुरसत मे बहुत है ||
 
"दर्द देने का अंदाज कुछ ऐसा है
दर्द दे कर कहते है अब हाल कैसा है,
ज़हर दे कर कहते है अब पीना होगा,
जब पी लिए तो कहते है अब जीना होगा."
 
मेरी पीठ का घाव दोस्ती की निशानी है,
पर सीना तो आज भी दुश्मनों के इंतजार में है।
 
जन्म लिया है तो केवल साँसें मत लीजिये,
जीने का शौक भी रखिये.
 
मंज़िल से जरा कह दो,
अभी पहुंचा नही हूँ मैं
मुश्किलें जरुर है,
मगर ठहरा नही हूँ मैं.
 
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पहाड़ी रास्तों सी होती हैं उम्मीद की राहें,
हर मोड़ के बाद एक रास्ता जरूर मिलेगा !


 
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सहर भी ये रात भी, दोपहर भी मिली लेकिन
हमीने शाम चुनी, हमीने शाम चुनी है
नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है।
- गुलज़ार
 
Last edited:
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खड़ी चारपाई पर लेटी धूप सुस्ता रही है,
थके किसान की लाचारी नज़र आ रही है!
 
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खड़ी चारपाई पर लेटी धूप सुस्ता रही है,
थके किसान की लाचारी नज़र आ रही है!

Magar Jat kisan ki suniye kiya kahta hai;

thodee der aaur susta le meri jhakolla,
wo dekh, teri amma chaon aa rahee hai.

RK^2

PS: Jhakolla is a sort of name calling to females in our area.
 
चले तो थे दोस्तों का पूरा काफिला लेकर,
पर कुछ जुदा हो गए और कुछ खुद हो गए,
कुछ गुमशुदा तो कुछ शादीशुदा हो गए !

Kafile ke tukde hazar hue.
koi yaha gira koi wahan gira.

RK^2
 
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तुमने तय कर तो ली है
पतंगों के साथ कुछ उचाइयां हमदम
सभल कर रहना के
मौसम बारिशो का है!
 
धड़कन में तवाज़ुन उधर भी शायद कम नहीं
क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब साथ में हमदम नहीं
मगर क्यों रात की सियाही तुमको डरा रही है,
ये सुबहगाही का आगाज़ है यों ही रूह घबरा रही है i
ना इस क़द्र छोड़िये उम्मीद का दामन हाथों से हज़ूर ,
ना तोड़िये यों हिम्मत के साहिल, वे आयेंगे ज़रूर
 
सियासत किस हुनर मंदी से सच्चाई छिपाती है |
कि जैसे सिसकियों का दर्द शहनाई छिपाती है ||
 
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