Shayri (Continued)

बहुत रोका ................. कहा तक लेकिन |
मुहब्बत बढती ही गयी मेरे गुनाहों की तरह ||
Kadam Ruk Se Gaye Hain Phool Biktey Dekh Kar
Woh Aksar Kaha Krta Tha Muhabbat Phool Jaisi Hai
 
कटी पतंग का रुख़ था मेरे घर की तरफ़ मगर,
उसे भी लूट ले गये ऊँचे मकान वाले.
 
तुम कुछ ना कर सकोगे मेरा..... मुझसे दुश्मनी करके,
मुहब्बत कर लो मुझसे अगर मुझे मिटाना ही चाहते हो....
 
Kagaz ki kashti thi paani ka kinara tha....
Khelne ki masti thi dil ye aawara tha.....

Kahan aa gye is samajhdari ke dal dal mei....
Vo nadaan sa bachpan hi sabse pyara tha.....
:(
 
कटी पतंग का रुख़ था मेरे घर की तरफ़ मगर,
उसे भी लूट ले गये ऊँचे मकान वाले.

Irade ho to hawa bhi rukh badal leti hai,
ghar ke andar baithne walo ko to dhoop bhi naseeb nhi hoti
 
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तुम कुछ ना कर सकोगे मेरा..... मुझसे दुश्मनी करके,
मुहब्बत कर लो मुझसे अगर मुझे मिटाना ही चाहते हो....
Mitane ki batien to dushman kia karte hai,
Hum to irade nisaan chdne ke rakhte hai.
 
Mitane ki batien to dushman kia karte hai,
Hum to irade nisaan chdne ke rakhte hai.


यह कह कर मेरा दुश्मन मुझे हँसते हुए छोड़ गया....
के तेरे अपने ही बहुत हैं तुझे रुलाने के लिए....
 
यह कह कर मेरा दुश्मन मुझे हँसते हुए छोड़ गया....
के तेरे अपने ही बहुत हैं तुझे रुलाने के लिए....
Umeed rakhne wale aksar dusro ko kosaa hi karte hai,
mann ki jo keh de log usse dushman hi kehte hai,

:stupid:
 
मुझे ज़िंदगी का इतना तो तज़ुर्बा नही....
पर सुना है लोग सादगी में जीने नही देते....
 
मुफ्त का एहसान ना लेना यारो,
दिल अभी और भी सस्ते होंगे !!
 
कश्तियां उन्हीं की डूबती है , जिनके
ईमान डगमगाते है । जिनके दिल में
नेकी होती है , वो हरदम झूमते गाते है ......
अगर जिन्दगी में कुछ पाना है तो तरीके
बदलो - इरादे नहीं ।।
 
मुझे ज़िंदगी का इतना तो तज़ुर्बा नही....
पर सुना है लोग सादगी में जीने नही देते....
Waqt eksa Nhe Rehta Kabhi Sun Lo,
Khud Bhi Ro Padte hai auron Ko Hasane Wale.
 
बचपन की वो अमीरी न जाने कहाँ खो गयी,
जब बारिश के पानी में, हमारे भी जहाज तैरा करते थे! ;)

 
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