Shayri (Continued)

चुपके से एक भेजा मैंने गुलाब उनको,

सुगन्ध ने नगर भर में,

तमाशा बना दिया!


 
Dill Se Jab Aaah Nikli To Gulon Ne Suni
Kalyon Ne Bhee Suni Bulbulon Ne Suni
Dard Se Jo Bikhriiii To Fizaaaon Ne Suni
Magar Jis ke Lye Thi Us Ko Sunayaa Jab
Us Dilber Ne Daikho Sun Ke Bhi Na Suni
 
बड़ा भोला बड़ा सादा बड़ा सच्चा है।
तेरे शहर से तो मेरा गाँव अच्छा है॥

वहां मैं मेरे बाप के नाम से जाना जाता हूँ।
और यहाँ मकान नंबर से पहचाना जाता हूँ॥

वहां फटे कपड़ो में भी तन को ढापा जाता है।
यहाँ खुले बदन पे टैटू छापा जाता है॥

यहाँ कोठी है बंगले है और कार है।
वहां परिवार है और संस्कार है॥

यहाँ चीखो की आवाजे दीवारों से टकराती है।
वहां दुसरो की सिसकिया भी सुनी जाती है॥

यहाँ शोर शराबे में मैं कही खो जाता हूँ।
वहां टूटी खटिया पर भी आराम से सो जाता हूँ॥

यहाँ रात को बहार निकलने में दहशत है...
मत समझो कम हमें की हम गाँव से आये है।

तेरे शहर के बाज़ार मेरे गाँव ने ही सजाये है॥
वह इज्जत में सर सूरज की तरह ढलते है।

चल आज हम उसी गाँव में चलते है.....
उसी गाँव में चलते है.....

saujanya : Sarvjan Sewa - सर्वजन सेवा
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!! .. कोशिश के बाद भी जो मुकम्मल ना हो सके .. !!

!! .. तेरा नाम भी उन्ही ख्वाहिशों में शामिल है .. !!!
 
[h=5]खता तो जब हो हम हाल ए दिल किसी से कहें .....
किसी को चाहते रहना कोई गुनाह तो नहीं ............
[/h]
 
"बिन मांगे ही मिल जाती हैं तकदीरें किसी को,
कोई खाली हाथ रह जाता है हज़ारों दुआओं के बाद..!!"
 
तुम पर यकीं है मौत पर ऐतबार है
देखें आता है कौन पहले दोनों का इंतजार है
 
वो आए तो वक्त - ए - दफ़न !
कैसे कह दूं उन्हे मेरी फ़िक्र नहीं !!
 
चले जाएंगे तुझे तेरे हाल पर छोड़कर...
कदर क्या होती है ये तुझे वक्त सिखा देगा...
 
खता तो जब हो हम हाल ए दिल किसी से कहें .....
किसी को चाहते रहना कोई गुनाह तो नहीं ............
रविंदर जीत मै कितने दिन का या बात समझावण लाग रह्या था i चलो आखर आप नै मान ही लिया कि

दिल पर किसी का जोर नहीं, ज़ालिम न जाने कब किस पे आ जाता है
उम्र की हर दहलीज़ पर नादाँ मचलता है और तबीयत सब की बहलाता है
 
Padha Na Farq Anokhi Zubaan Likhne Se

“Zameen” Zameen Hi Rahi Aasmaan Likhne Se

Raha Jis Se Taaluq Har Ghari Mera

Vo ßan Sakki Na Meri Jaan “Jaan” Likhne Se
 
♥ Dil De Bola Nu Koi "Shayari" Kaha Ta Dard Nahi Hunda__,
● Takleef Ta Odo Hundi Ha Jado Lok "Wah" "Wah" Karda Ne ♥
 
बेठे बेठे रोने लगती हु ....
काश तुम इतना याद ना आते ...

इंतज़ार करते हुए मर गयी में ....
काश तुम मेरे जाने के वाद ना आते
 
वो आये हैं बड़ी मुद्दत के बाद, चौहदवीं का चाँद बन कर
घटा सी जुल्फें बिखराए चेहरे पर, सावन की आग बनकर I

ये आँखों की स्याही, ये होंठों की लाली ये दुल्हन ज्यों शर्माना,
ये मंद मंद मुश्कान, ये अदा की शोखी कह रही हैं कोई फ़साना I

आते थे वो कभी महफ़िल में हर रोज़ मगर ये मशरूफियत का दौर है
कोई दौर था जो देते थे वो दोस्तों को तवज्जो अब मगर बात कुछ और है

रहतें हैं ख़वाबगाह में हर दम, भुला दिया फेसबुक को ज़ालिम नशेमन ने,
कह गए अलविदा इस गुलशन को,, फूल हैं अब वो किसी और के चमन के I

----by Vijya Pal Singh.
 
रविंदर जीत मै कितने दिन का या बात समझावण लाग रह्या था i चलो आखर आप नै मान ही लिया कि

दिल पर किसी का जोर नहीं, ज़ालिम न जाने कब किस पे आ जाता है
उम्र की हर दहलीज़ पर नादाँ मचलता है और तबीयत सब की बहलाता है


उमर की राह में जज्बात बदल जाते हैं ,
वक्त की आंधी में हालात बदल जाते हैं ,
ये किसी के बस की बात नहीं वि,पि. ,
वक्त के थपेड़े शेर की चाल बदल जाते हैं ।।
 
Kitni ajeeb judaaii thi ke Tujhe Alvida bhi na keh sake...
Teri saadgi mein itna fareb tha ke Tujhe bewafaa bhi na keh sake....!!
 
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