आज का सुविचार !!!!!!!!

समय, सत्ता, संपत्ति एवँ शरीर चाहे साथ दे ना दे, परन्तु स्वभाव, समझदारी, सत्संग तथा सच्चे संबंध सदैव साथ देते हैं।
 
जो व्यक्ति स्वयँ को दूसरों में और दूसरों को स्वयँ में देखता है उसे किसी प्राणी से घृणा नहीं होती । ऐसा गुण केवल भगवान में होता है।
 
स्त्री वो होती है जो रिश्तों से इतना जुड़ी होती है कि कभी स्वयँ से नहीं जुड़ पाती।
 
ये बात सुविचार तो नही हो सकती...
स्त्री वो होती है जो रिश्तों से इतना जुड़ी होती है कि कभी स्वयँ से नहीं जुड़ पाती।
 
बुद्धिमान व्यक्तियों की प्रशंसा की जाती है, धनवान व्यक्तियों से ईर्ष्या की जाती है, बलशाली व्यक्तियों से डरा जाता है,


परन्तु

विश्वास केवल चरित्रवान व्यक्तियों पर ही किया जाता है।
 
कानों में कही बात जब सामने आती है, कहने वाले की इच्छा (मंशा) भी जुड़ जाती है।
 
हमारे काम का पुरस्कार वो नहीं जो हमें मिलता है अपितु वो है जो हम बनते हैं।
 
कानों में कही बात जब सामने आती है, कहने वाले की इच्छा (मंशा) भी जुड़ जाती है।
 
जीवन में अच्छे लोगों की तलाश ना करो, स्वयँ अच्छे बन जाओ, कदाचित आपसे मिलकर किसी की तलाश पूरी हो जाए।
 
समय कैसा भी हो, बदलता अवश्य है। इसलिए अच्छे समय में कुछ ऐसा गलत मत करो कि बुरे समय में लोग आपका साथ छोड़ दें।
 
किसी मूर्ख व्यक्ति की पहचान उसकी वाचालता से होती है तथा बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान उसके मौन रहने से होती है।
 
हर व्यक्ति अपने आप को अधिक बुद्धिमान समझने वाले को एक बार तो प्रकृति का तमाचा लगता ही है। वो सुधर जाये तो मुकेश अंबानी ना सुधरे तो राहुल गांधी बनता है।
 
जीवन की रेखा और भाग्य की लक्ष्मी केवल कठोर परिश्रम एवँ कर्म से ही प्राप्त होती है।
 
जीवन में बहुत रिश्ते होना आवश्यक नहीं है पर जो रिश्ते हैं उनमें जीवन होना आवश्यक है।
 
अपमान करना किसी के स्वभाव में हो सकता है, पर सम्मान करना हमारे संस्कार में होना चाहिए।
 
महिलाओं के प्रति आप पक्षपाती विचारधारा रखते हैं। स्त्री पुरुष का संबंध आप कांग्रेस बीजेपी का संबंध क्यूँ बना देते हैं???.
किसी पुरुष के साथ सुख पूर्वक रहने के लिए उसे बहुत समझें और थोड़ा प्यार करें।



किसी स्त्री के साथ सुख पूर्वक रहने के लिए उसे ढेर सारा प्यार करें परन्तु समझने/समझाने की चेष्टा कदापि ना करें।


:cool:
 
महिलाओं के प्रति आप पक्षपाती विचारधारा रखते हैं। स्त्री पुरुष का संबंध आप कांग्रेस बीजेपी का संबंध क्यूँ बना देते हैं???.


नहीं नहीं ! सुविचार में कोई राजनीति नहीं. ये प्राचीन समय में हमारे ऋषि-मुनियों की कही हुई बातें हैं.
 
संकट एवँ असफलताएँ केवल यह जानने के लिए आती है कि व्यक्ति किस सीमा तक साहस संजोये रह सकता है !
 
परंतु श्रीमान यह आवश्यक नही है कि ऋषि - मुनियों द्वारा कही गयी हरेक बात सुविचार हो। अपने विवेक का इस्तेमाल भी अवशयक है , विशेषतः जब आप इन विचारों को किसी सार्वजनिक स्थान पर व्यक्त कर रहे हों ।
नहीं नहीं ! सुविचार में कोई राजनीति नहीं. ये प्राचीन समय में हमारे ऋषि-मुनियों की कही हुई बातें हैं.
 
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