जट्टू कवितायें ॥

रोते बालक न मिल जाती जैसे माँ की झोली स
या फागन की मस्ती ले कर आती ज्युकर होली स ,

हरियाणे की आन बान जो शान घनी अनमोली स
लेखक कविया संता न जो परखी और टटोली स

सरस्वती ने जिसमे अपणे प्यार की मिसरी घोली स
सब त बढ़िया सब त मीठी हरियाणे की बोली स

बात -बात म रश टपके स जब जब भी बतलावे स
दूध राबड़ी गुँड की भेली खांवे और खिलांवे स

कठी हो के गीत सुणाती बीर मरद की टोली स
सब त बढ़िया सब त मीठी हरियाणे की बोली स ||

--------बेरा कोणी ।
 
मने क्यों दे री से घेरे में
मेरी नज़र पड़ी र बैरन तेरे में !

लंबे लंबे बाल तेरे, ढुंगे चोटी लटके से
नाक सुवा सा मुह बटवा सा
आँख मर्ग ते मोटी से
जणु खिल रया चाँद अंधेरे में
मेरी नज़र पड़ी र बैरन तेरे में !

बारोटी पे आ के ने
तेरे दर्शन पावेगे
बड़ी साली करे आरता
उसके प्रश्न लावेगे
मेरे चावल मारिये सिर में
मेरी नज़र पड़ी र बैरन तेरे में !

4 बजे सी फेरे होंगे
मन अपणा समझा लिए
फेरा उपर बचन होंगे
कापी में लिखवा लिए
रोज बाच्या करंगे चोबारे में
मेरी नज़र पड़ी र बैरन तेरे में !!

--------बेरा कोणी ।
 
नाश जाइयो उनका जिन्नै करा सै गैंगरेप
कोए जाणै भी सै यो काम होया क्यूं सै।।

रात नै फिल्म देखणी के जरूरी थी यारो
बिना काम उन्नै यो झगड़ा झोया क्यूं सै।।

घणा बड़ा जुल्म करा सै जालिमां नै छोरी गैल
इलाज करदी हाण डाक्टर भी रोया क्यूं सैं।।

दिल्ली म्हं जाकै कट्ठे होरे सै लोग-लुगाई
हराम खोरा नै बीज बिघन का बोया क्यूं सै।।

फांसी नहीं होनी चाहिए इन काले मुंह आलां की
तड़फा के मारो सालां नै, पूंछै यो लोया क्यूं सै।।

पश्चिमी संस्कृति का झटका देखण लागरे सां हाम
संदीप कंवल नै लिखण का यो टोपिक टोया क्यूं सै।।

by:-संदीप कंवल भुरटाना
 
सीधी साची बात करूँ सूं
मेहनत कर कै पेट भरूँ सूं

अखबारां का चेहरा पढ़ कै
जीते जी मैं रोज मरुँ सूं

हर माणस मं कहैं जानवर
किस मं के सै खोज करूँ सूं

चील सांप और शेर बघेरा
पर बगुल्याँ तै घणा डरूं सूं

जो देखूं वो मुहं पै कह कै
बिन माफ़ी की खता करूँ सूं

जिनके मन मं महक वतन की
उन 'पागलां' तै प्यार करूँ सूं

खोट रोज दो शाम-सवेरै
भारत माँ नै नमन करूँ सूं !!!

--------बेरा कोणी ।
 
ख्याली पुलाव त कुछ कोन्य होवे
बेकार तनाव त कुछ कोन्य होवे

दरिया पार जाना स तो तैरके जा
कागज़ की नाव त कुछ कोन्य होवे

घर बसाणा स तो काम करया कर
जुल्फां की छाव त कुछ कोन्या होवे

कल्याण तो देश का हरयान्वी ए करेगी
... अंग्रेजी कांव-कांव त कुछ कोन्या होवे

हर जगह छारे स माहरे गाबरू
कौन कहवे स गांव त कुछ कोन्या होवे ??

--------बेरा कोणी ।
 
दर्द नै सहणा तो दवाई सिखावे सै
आदमी नै पीणा लुगाई सिखावे सै

जन्मजात नही होता कोए खुदगर्ज़
या हुश्यारी तो असनाई सिखावे सै

शादी के बाद क्यूकर बसाणा सै घर
यो ख्वाब सजाणा सगाई सिखावे सै

जिनका वास्ता पड्या सै वे जाणे सै
बड़े नै के कुछ छोटा भाई सिखावे सै

तेरे साथ नै तो सदा बेचैन करया सूं
महोब्बत तो मैंने तन्हाई सिखावे सै

--------बेरा कोणी ।
 
किलो हरी मिर्च खा ल्यो दिल के टूटन के बाद
जोहडा में जाके नहा ल्यो दिल के टूटन के बाद

कोए नही आवेगा याद खुद नै सम्भालते पाओगे
पहलवान तै देई तुडवा ल्यो दिल के टूटन के बाद
...
सारा ए भूत उतार देगा पुजारी थारे इश्क का
मन्दिर में तै जूते ठा ल्यो दिल के टूटन के बाद

थम ग़मगीन गजल सुनोगे तो दुःख ए पाओगे
हनुमान के भजन गा ल्यो दिल के टूटन के बाद

दर्द महोब्बत आल्ला बेचैन छू मन्त्र हो जावेगा
बालका पै बुडके भरवा ल्यो दिल के टूटन के बाद

by- bhai Bechain
 
किलो हरी मिर्च खा ल्यो दिल के टूटन के बाद
जोहडा में जाके नहा ल्यो दिल के टूटन के बाद

कोए नही आवेगा याद खुद नै सम्भालते पाओगे
पहलवान तै देई तुडवा ल्यो दिल के टूटन के बाद
...
सारा ए भूत उतार देगा पुजारी थारे इश्क का
मन्दिर में तै जूते ठा ल्यो दिल के टूटन के बाद

थम ग़मगीन गजल सुनोगे तो दुःख ए पाओगे
हनुमान के भजन गा ल्यो दिल के टूटन के बाद

दर्द महोब्बत आल्ला बेचैन छू मन्त्र हो जावेगा
बालका पै बुडके भरवा ल्यो दिल के टूटन के बाद

by- bhai Bechain
 
दर्द नै सहणा तो दवाई सिखावे सै
आदमी नै पीणा लुगाई सिखावे सै

जन्मजात नही होता कोए खुदगर्ज़
या हुश्यारी तो असनाई सिखावे सै

शादी के बाद क्यूकर बसाणा सै घर
यो ख्वाब सजाणा सगाई सिखावे सै

जिनका वास्ता पड्या सै वे जाणे सै
बड़े नै के कुछ छोटा भाई सिखावे सै

तेरे साथ नै तो सदा बेचैन करया सूं
महोब्बत तो मैंने तन्हाई सिखावे सै

by- bhai Bechain
 
र भगतो मन्ने गुलाबो फेट गी ब्याहें पाछे जब मन्ने
उसपे पूछी अक मोटी हो गी इब तो ,फेर बेरा है के
बोली वा ल्यो थाम आपे सुण ल्यो .........
जब ते ब्याही पल के ने तू झोटी होगी र ,
के के सौदा खाया गुलाबो मोटी होगी र ,
दो दो दर्जन पति मेरा केले लावे से।
तेरे जीसा नन्गड़ कोन्या वो खर्चा ठावे से।
तेरा कसूता फिगर था इब पहल्यां आला गात नहीं ,
शहर मैं काचे काटूँ सु इब पहल्यां आली बा
त नहीं ,
लाम्बी लाम्बी दिखया करदी छोटी होगी र ,
के के सौदा खाया गुलाबो मोटी होगी र ,......
बर्गर छोले चिप्स कुरकुरे रोज पिलावे ठन्डे ,
भूल गयी क्यों मेरी गेल्याँ चूसा करती गंडे ,
के गंडयां की बात करे वो शरबत प्यावे से ,
तेरे जीसा नन्गड़ कोन्या वो खर्चा ठावे से।
बॉबी कट राख्या करदी थे घणे कसुते केश तेरे ,
जले मेरे ते मन्ने देखके उड़गे से क्यों भेष तेरे ,
झोटे के पुछड बरगी तेरी चोटी हो गयी र ,
के के सौदा खाया गुलाबो मोटी होगी र ,
दहिया सोनीपत आला तो मन्ने राखे जी ते प्यारी,
पहले आली बात मेरे क्यों याद दिवावे से ,
तेरे जीसा नन्गड़ कोन्या वो खर्चा ठावे से।

--------बेरा कोणी ।
 
याद आवे मनने स्कूल गाम का
न्यारा तरिक्का रटवान का
2 एक्कम 2, 2 दूनी चार
रोटी नूनी घी अर्र फाड़ का अचार

तडके रूक्का दादी का
बखत देख ल्यो शर्म करल्यो
सूरज चढ़रया सिखर मै
सोवे ना सोनं दे मारे सारे फिकर मै

दूध बिल्लोवे बड़ी ताई
छोटी चुन ओस्संने
माँ बाल्ले आग धन्स्र्याँ की
बालक बजावे सीटी फूंकनी की

नाहा धो के हम बैठ लिए
झोटा -बुग्गी मै लद लिए
राही के मै खांचा होरया
काका के जी नै साक्का होरया

उल्टे आये धूलम-धुल
हो रे सिनकल्ले -भिनकले
लागी कामची 4-4 मचाई रोहा -राट
सुन्नी सबकी गाली दिन हो चाहे रात

झोल्ली भर के नाज की गए
बनिए की दूकान पै
दादी नै जब बेरा पाट्या
धरे थपड कान पै चार

--------बेरा कोणी ।
 
मैं अकेला बता क्यूकर कसूरवार होया
ऐसी तैसी दोनों की हुई तो प्यार होया

तेरे ना यकीन आवे तो के ज्यान दे दूं
तेरी जुदाई में मेरे कितणा बुखार होया

वो नींदा में भी कुछ कुछ बड़बड़ावे सै
चालू अर झूठा जिसका दिलदार होया

मैंने तो सपने में भी हवालात दिखे सै
तेरा बाप जिस दिन तै थानेदार होया

ब्याह के बाद भी हाथ पैर चलाणे पड़ेंगे
कोर्ट मैरिज होगी तो ना सोच पार होया

कोए देख ना ले मैंने आंख्या में बस्या
शायद तू आजकल न्यू चश्मेदार होया

--------बेरा कोणी ।
 
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था
एक नाई, एक खाती ,एक काला लुहार था ।
छोटे घर थे ,हर आदमी बङा दिलदार था
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।

कितै रोटी खां लेतै ,हर घर मे भोजऩ तैयार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।
बिटोङे पे घिया तौरी हो जाती
जिसके आगे शाही पनीर बेकार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।

दो मिऩट की मैगी ना ,झटपट दलिया तैयार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।
नीम की निबॊँली और शहतुत सदाबहार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था
अपणा घङवा कस बजा लेते “
तिलक गिरावङ “पुरा संगीतकार था
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था

--------बेरा कोणी ।



 
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था
एक नाई, एक खाती ,एक काला लुहार था ।
छोटे घर थे ,हर आदमी बङा दिलदार था
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।

कितै रोटी खां लेतै ,हर घर मे भोजऩ तैयार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।
बिटोङे पे घिया तौरी हो जाती
जिसके आगे शाही पनीर बेकार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।

दो मिऩट की मैगी ना ,झटपट दलिया तैयार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था ।
नीम की निबॊँली और शहतुत सदाबहार था,
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था
अपणा घङवा कस बजा लेते “
तिलक गिरावङ “पुरा संगीतकार था
छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था

--------बेरा कोणी ।



 
छोरा आई ए एस बनगया र मेरी जिंदगी सफल होगी
इस गाम राम ना नाम ऊँच्चा करग्या वो,
बेशक जख्म त मेरा कालजा भरग्या वो
पर,, बेटा तो मेरा ए कुहावेगा, वो दुनिया में जित भी जावेगा
पर के बेरा, मेरे नाम त उसने नीची देखनी पड़े
और माहरी वो बोडिया, उसने घर जाती ए लडे
अक तैने अपने बाप का नाम घासीराम क्यू बताया...?
एक आई ए एस होके भी कुछ समझ नहीं आया
मिस्र्टर जी आर कह देवे अर, आधुनिकता की शय देवे अर
घासीराम नाम तो किसे घसियारे का लागे स
और थोडा धीरे बोल मेरे बालक जागे स
पर इसमे मेरा के कसूर स, यो तो रिश्त्या का दस्तूर स
बेटे गेल्या बाप का नाम जरुर लागेगा,
वो अलग बात स, बेटा छोड़ के भागेगा
पर भागेगा कित,
फैशन के पीछे,शोहरत के पीछे
धन के पीछे, औरत के पीछे
और भागता- भागता एक दिन, इतनी दूर लिकड ज्यागा
के गरीबी आला नूर, उसके चेहरे त झड़ ज्यागा
फेर बन जवेगा आई ए एस , वो अर उसका यश
इस्सा लागेगा जणु खानदानी स
इसका बाप भी कोए अफसर रह्य होगा,
इसने के गरीबी का दुःख सहया होगा
पर कौन जाने इसके अतीत न, उस बाजरे की रोटी अर सीत न
जिसने खा पीके यो स्कूल जाया करता
और फीस खातर बाप इसका कुण्डी ठाया करता
कई ब तो महीने में चार ब करके फीस भरता
पर आजकल तो सब कुछ ल्हूक रहया स
वो दौर जा लिया, यो दौर झुक रहया स
इब ना जाने स्वाद यो बाजरे की रोटी अर सीत का
इब कोए जिक्र ना छेड़ो इसके आगे अतीत का
पाछे सी अक , दिवाली पे घर न आया
अर आके बोल्या ---ठीक स बापू...
पर टूटी होई खाट पर बैठ्या कोन्या
इबके बचपन की तरहिया सीत प एठ्या कोन्या
मैं एक ब उसने देखू अर एक ब उसकी मैडम न
फेर आँख मूँद के पीग्या सरे गम न
और सोच्या, चलो र ले टाबर स
बैठो चाहे खड्या रहो, इसका घर स
और चा बनाके स्टील के गिलासा में घाल दी
मेरा इतना करना था, के मैडम चाल दी
और बेरा न छोरे न अंग्रेजी में के बोली
सुनके उसने फट टेची खोली
अर एक कागच सा लिकाड़ के बोल्या ----
ले बाबु चेक ,,पचास हज़ार का स
मैं तो चालू, मेरा दौरा बाहर का स
इब के आवां, तो काफी प्याइए , चा ना ल्याइए
इस कच्चे ढूंड न बाहर कढवा दिए
और उरे सुणी सी एक कोठी गढवा दिए
तैने पाल पोष के ओड जोड़ करया सु,,
आखिर मेरा भी तो किम्मे फर्ज़ स
वा अलग बात स, आज मैंने ना किसे त गर्ज़ स
और हाँ... पिस्से सारे खर्चने स, ना किसे न भीख दिए
और कोठी के बाहर जी आर भवन लिख दिए
इतना कह के छोरा जा बैठ्या कार में
मैं चेक हाथ में लेके पड़ग्या सोच विचार में
अक जा रे घासीराम ...तू आज त जी आर हो लिया स
एक आई ए एस का बाप बणन न तैयार हो लिया स
एक आई ए एस का बाप बणन न तैयार हो लिया स ...........


--------बेरा कोणी ।
 
हरियाणे मे टोटा पड़ रहया,दिखती कोन्यां छोहरी
न्यूं गायब हो रही सै जणूं सामण मै गण्डे की पोरी
रिश्ते आळे कती ना आते म्हारे गाम कुलताणे मै
फेर हाम कित ढूढां छोहरी -हरसाणे या सिसाणे मै ?
पहल्यां दो भाई हुया करते,एक रहै था कवारा।
झंझट सारे दूर रहै थे, कती ना हो था बटवारा
ईब तै भाई सब नै चाहिये बन्नो, वो भी सुन्दर लाली
हाम कड़े तै ल्यावा इन ताही,बिहारिण या नेपाली ?
मारे हाण्डै सै बन्नो खातिर,सब जगह करै तलास
देख आये पर बात बणी ना छुछकवास और साल्हावास
इब हरियाणे मै छोरयाँ के रिस्ते होण कि छुटती जा री सै आस

--------बेरा कोणी ।
 
एक एकम एका !
आगे मिल्ग्या ठेका !
दो एकम दुआ
मन्न लिया पुआ
तीन एकम तिया
मन्न ओट म होके पिया
चार एकम चौका
नशा होग्या चौखा
पाँच एकम पन्जा
म बंग्या पूरा रान्जा
छह एकम छिक्का
नशा होण लाग्या फीका
सात एकम सत्ता
हालत होगी खस्ता
आठ एकम आठा
रोग होग्या ठाठा
नौ की नवाई
कन्न कोणी रही पाई
दस की दहाई
आ दारू बोहत माडी हो स भाई

--------बेरा कोणी ।
 
किसे और की कहाणी कोन्या इसमैं राजा रानी कोन्या
सै अपनी बात बिराणी कोन्या, थोड़ा दिल नै थाम लियो।।
यारी घोड़े घास की भाई, नहीं चलै दुनिया कहती आई
मैं बाऊं और बोऊं खेत मैं, बाळक रुळते मेरे रेत मैं
भरतो मरती मेरी सेत मैं, अन्नदाता का मत नाम लियो।।
जमकै लूटै सै मण्डी हमनै, बीज खाद मिलै मंहगा सबनै
मेहनत लुटै मजदूर किसान की, आंख फूटी क्यों भगवान की
भरै तिजूरी क्यों शैतान की, देख सभी का काम लियो।।
चाळीस साल की आजादी मैं, कसर रही ना बरबादी मैं
बाळक म्हारे सैं बिना पढाई, मरैं बचपन मैं बिना दवाई
कड़ै गई म्हारी कष्ट कमाई, झूठी हो तै लगाम दियो।।
शेर बकरी का मेळ नहीं, घणी चालै धक्का पेल नहीं
टापा मारें पार पडैग़ी धीरे, मेहनतकश रुपी जितने हीरे
बजावैं जब मिलकै ढोल मंजीरे, रणबीर का सलाम लियो।।

----------डा रणबीर सिंह दहिया ।
 
ब्यन बाप का बेटा सून्ना अर ब्यन माता की छोरी|
ब्यन भूमि जमींदारा सून्ना ब्यन बालम के गोरी ||

हे रै ब्यन बेटे के बेटे नैं कोए आच्छी-भुंडी कहजा,
थप्पड़-घुस्से लात मार दे; बेठ्या-बेठ्या सहजा|
जिसका मरज्या बाप ओ चन्दा की ज्यूँ गहजा,
मन म उठें झाल समंदर आँख्यां म्ह कै बहज्या||
हो रै करकें याद पय्त्या नैं रोवै या काया काची कोरी,
ब्यन भूमि जमींदारा सून्ना ब्यन बालम के गोरी ||

हे रै ब्यन माता की छोरी कै कती रहजा मन की मन म,
सारी रात नींद ना आवै सपने आवें दयन म|
याणी उमर म दुःख होज्या जिसकी माँ मरज्या बचपन म,
हे यें ओढ़न-पहरण खाण-पीण की रह ज्यां मन की मन म||
बन्या माँ किहसी लाडली ज्यूँ चन्दा ब्यन चकोरी,
ब्यन भूमि जमींदारा सून्ना ब्यन बालम के गोरी ||

हो ब्यन भूमि कै जमींदार की चाल्ले किते मरोड़ नहीं,
हे रै अय्न्द्र बरसै घूर-घूर कें जल ओटण नैं ठोड नहीं |
हे रै महफ्य्ल बैठी है भाइयों की किते कुवां साझा जोहड नहीं,
हे रै उठा ब्यस्तर चल्या जाइये हमनैं तरी लोड नहीं||
या धरती उगळए हीरे मोती तेरी कोई जोड़ नहीं,
ब्यन भूमि जमींदारा सून्ना ब्यन बालम के गोरी ||

हे रै ब्यन बालम की गोरी का कती फीका बाणा हो सै,
हे रै आच्छी-भुंडी कोए कह ज्या आप्पा मारणा हो सै|
हे रै साज-बाज ब्यन जाट मेहर सिंह यो के गाणा हो सै,
जन्म जाट घर ले लिया इब न्यूं शर्माणा हो सै||
साच्ची बात बख्त पै कह दी भला इसमें के शर्माणा हो सै,
ब्यन भूमि जमींदारा सून्ना ब्यन बालम के गोरी ||
ब्यन बाप का बेटा सून्ना अर ब्यन माता की छोरी|
ब्यन भूमि जमींदारा सून्ना ब्यन बालम के गोरी ||

-------
जाट मेहर सिंह
 
बोवोगे बंदूक तो बंदूक जाम्मेगी
बात मेरी याद सदा राखियों छोरयो
ईट का जवाब पत्थर गेल मिलेगा
छोटे कानी हाथ ना बाँकियो छोरयो

नशा करे नाश देई और पिस्स्या का
धुम्मा दारू कदे भी ना चाखियो छोरयो
बुढ़ापे तक थारा पक्का साथ देवेगी
बात बड़े-बुढया की हांकियो छोरयो

शेर न सदा ए सवा शेर मिल्या स
भूल के भी एंडी ना पाकिओ छोरयो
इश्क में बेचैन नहीं होणा पड़ेगा
महबूब आगे गप्पे ना हाकियो छोरयो

--------भाई बैचेन ।
 
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