जट्टू कवितायें ॥

.
छोहरा रमलू था चारूं भाइयां मैं सब-तैं छोटा
बाकी सारे मरियल थे पर वो था घणा मोटा
जितना था वो छोटा, उसतैं फालतू था खोटा
दूर तैं इसा लागै था जणूं खेत मैं खड़्या सै झोटा !


(self composed)
 
"मैँ हूँ जाटां का छोरा..
मैँ हूँ छैल-छबीला ते गोरा।
जडा खड गया...
लठ की तरां गड गया।
पहल करदा नी...
दूज छोड दा नी।
मरण ते डरदा नी...
पिच्छा हटदा नी।
यारां वास्ता मरजूंगा...
दुश्मन के सर कलम करजूंगा ।
सरदारां आली करदा नी,
जाटां आली ते पिच्छा हटदा नी।

बानियां की तरां कंजूस नी,
s.c/b.c की तरां काडदा जुलूस नी।

अपनी अकड़ मां रहवांगे,
चाहे कुछ भी होजा अपनी जाटां आली कहवांगे।

तलवे किसे के चाटते नहीं ,
जो गलत होगी उसने बिस्रहा देंगे
आछी होगी तो सरहवांगे .
पर सही बात ने मन्वावंगे.
कौम तो बहुत स दुनिया में पर
जाटा जैसी कौम नहीं .
याद करेंगी कई कई पीढ़ी
हम इसे -इसे काम कर जावेंगे .
चाहे कुछ भी होजा अपनी जाटां आली कहवांगे।



-----------बेरा कोणी ।
 
Last edited:
जय-जय हिन्द के वीर ज़वान
तेरी शूरमा सूरत पै जाऊँ कुर्बान

सुथरा तगड़ा छैल-छबीला
कर्द मुच्छैल रौब-रोबीला
सिंह जैसे तेरे नैन चमकीले
फड़-फड़-फड़कैं बाजू जोशीले
खूब-गज़ब की सै तेरी शॉन
जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

बहाणां का भाई, तू माँ का प्यारा
बूढ़े बाप की आख्यां का तारा
जिस गैल ब्याहया, वा सूरत प्यारी
गज बण गोरी केसर क्यारी
जन-जन का तू सै भगवान
जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

हाथ बन्दूक, जाणो राखै खिलौणा
गोली-बारूदां का बिछा बिछौणा
कट-कट बाजैं बूट तेरे कॉले
चमकैं सैं फीत, पॉटैं सैं चाले
लोह की टोपी पहरै बलवान
जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

आया जब दुश्मन भक्षक बण कै
सरहदां पै अड्या तू रक्षक बण कै
वतन पै बख्त बुरा जब आया
हामनै आगै खड्या तू पाया
बैरी का ना छोडै निशान
जय-जय हिन्द के वीर ज़वान

-----------बेरा कोणी ।
 
जब तक सूरज चाँद रहैगा
बस म्हारा हिन्दुस्तान रहैगा
बेशक दुःखी बिरान रहैगा
पर म्हारा भारत महान रहैगा

मर्दानी झाँसी की राणी
शहीद भगत सिंह की कहाणी

बस पढ़ांगे हाम इतिहास मैं
पर बात कहूँ सूं एक खास मैं

म्हारे बालकाँ कै मन मैं बस कै
रितिक अर शारूखान रहैगा

जब वीर सूरमा अड़े रहैंगे
सीमा पै डटकै खड़े रहैंगे

तब संसद मै होगा रोला-रप्पा
पकड़म-पकड़ाई आइस-पाइस, धप्पा

खेलैंगे म्हारै नेता मिल कै,
लोकतंत्र की राह पै चल कै

शैतानां गैल्यां मिटिंग करैगे
बेरा ना के के चिटिंग करैगे

भूख-प्यास तैं जब मरैगा बालक अर बड़याँ का टोला
वाटरप्रूफ कफ़न पै लिख्या होगा प्रायोजक है पैप्सी कोला

बेईमान ऐसा खेल रचैगा
जो फिक्सिंग कर लैगा वो-ए बचैगा

किते मकान की फिक्सिंग
किते दुकान की फिक्सिंग

किते वोट की फिक्सिंग
कत्ल और चोट की फिक्सिंग

पंजाब सिंध गुजरात मराठा
सारै कै बॉज़ रहया लॉठा

पर दिल इबै भी टूट्या नहीं सै
हाथ तैं बासण छुट्या नहीं सै

सुणया सै इब तोले हम चांद पै जावैंगे
उड़ै हाम आपणा तिरंगा लहरावांगे

पाँच सौ-पाँच सौ गज के प्लाट कटवावंगे
किमै चक्कर चला कै अपणे नाम अलाट करवावांगे

युनान, मिस्र, रोम मिट गये जहाँ से
पर म्हारै जिसे ढीठ आयेंगे कहाँ से

हूण, शक, मंगोल आये
अब्दाली नै भी जूल्म ढाये

फिरंगी नै करी किसी शैतानी
बीर-बांकुरे कर गये कुरबानी

बेशक आपणा सिर कटवाया
पर भारत का नाम बचाया

इब वो-ए टैम फेर आ लिया
चुगरदै काला धूम्मां छा लिया

एक कुलछिणा पड़ौसी म्हारा सै शैतान
आपणा उजाड़ै फिरैं, म्हारै पै धर लिया ध्यान

लातां के भूत तैं के करणी बात
मारो बम बताओ उसकी औकात

जब ना नक्शै पै पाकिस्थान रहेगा
तब जा कै शान्ति तै ज़हान रहैगा

ना दुखी अर बिरान रहैगा
बस म्हारा हिन्दुस्तान रहैगा

-----------बेरा कोणी ।
 
आपणा बोलता नचीत करगे,
लोग बेरा ना क्यूकर-क्यूकर मरगे

कोय मरग्या रेल मैं,
कोय मरया जेल मैं

कोय मरया बिन आई,
कोय मरया खेल-खेल मैं

कोय मरया हारी-बीमारी मैं,
कोय मरया झूठी यारी मैं

इश्क का किसे कै नाग लड़या,
कोय मरया खाट मैं पड़या-पड़या

किसे नै मारग्या गली का गुण्डा,
ले बैठ्या किते रैली का झण्डा

किसे नै ले बैठ्या भारी करज़,
किसे नै मारगी घणे की गरज़

किसे नै मारग्या दिल का रोग,
रेल तलै कटगे कितणे लोग

कोय पूरे करग्या सौ-के-सौ,
किसे की बख्त तैं बुझगी लौ

लोग आवैं सैं अर जावैं सैं,
बस न्यूँ-ए मर जावैं सैं

पर कुछ जवानी इसी मरै सैं,
सबके दिल पै घा करै सैं

मैं तो कहूँ इसा काम करियो,
मरणा हो तो उनकी ढाल मरियो

जित तड़-तड़ तड़-तड़ गोली चालैं,
गोले-बारूदाँ तैं पहाड़ भी हालैं

पर वीर जवान तो चाल्या जा सै,
इसा घर भी कितै घाल्या जा सै

भाई-बहाण माँ अर बाप सै देश,
मौत सै ब्याहली, उसका दूल्हे-सा भेष

रोकै ना मन्नै, जाण दे भाई,
आज हिमालय पै बणैगी सगाई

अर के होग्या, जै मौत भी आई,
पाछै बैठया मेरा माँ-जाया भाई

ले तिरंगा चढ्या शिखर पै,
गोली बरसै चाहे सिर पै

मौत भी एक बै तो घबराई,
जब रणबाँकुरे नै आवाज़ लगाई

आज देख या हिम्मत कर दी,
गोली छाती के मैं ठण्डी कर दी

इब घरां जाऊँगा बड़ी शॉन तैं,
जान लुटा कै हिन्द की ऑन पै

मौत तो बस इसी-ए होवै,
जब मरण पै कोय आँख ना रोवै

कायरां का के जिक्र आवैं अर जावैं सैं,
क्यूँ धरती पै आ कै बिरथा भीड़ बढावैं सैं

इसी शहादत बता किसनै पाई,
जय-जय हिन्द के वीर सिपाही
जय-जय हिन्द के वीर सिपाही

-----------बेरा कोणी ।
 
भोगा, बुरी रै कंगाली, धन बिन कीसी रै मरोड़!

धनवन्त घरां आणके कह जा

निरधन ऊँची-नीची सब सह जा

सर पर बंधा-बंधाया रह जा

माथे पर का रै मोड़ ।

अरै मैं बुरी कंगाली धन बिन कीसी रै मरोड़!

निरधन सारी उमर दुख पावे

भूखा नंग रहके हल बाहवे

भोगा, बिना घी के चूरमा

तेरी रहला कमर तै रै तोड़

अरै मैं बुरी कंगाली धन बिन कीसी रै मरोड़ !

-----------बेरा कोणी ।
 
जाट का मैं लाडला ,
तिरखा लगी सरीर

अगन लगी बुझती नईं,
बिना पिए जल-नीर,

बिना पिए जल-नीर,
--रस्ते में कुयाँ चुनाया

किस पापी ने यै जुल्म कमाया,
उस पै डोल ना पाया!

-----------बेरा कोणी ।
 
मालिक मेरे ने बाग लुआया,
खूब खिलीं कलिएँ !

कोई तौ दिन हाँड़ लै गलिएँ !
मौत-मलिन फिरै बाग मैं,
हात लई डलिए !

कोई तौ दिन हाँड़ लै गलिएँ !

कचे पाकाँ की सैर नै जानी,

तोड़ रई कलिएँ !
कोई तौ दिन हाँड़ लै गलिएँ

-----------बेरा कोणी ।
 
सीधी साची बात करूँ सूं
मेहनत कर कै पेट भरूँ सूं

अखबारां का चेहरा पढ़ कै
जीते जी मैं रोज मरुँ सूं

हर माणस मं कहैं जानवर
किस मं के सै खोज करूँ सूं

चील सांप और शेर बघेरा
पर बगुल्याँ तै घणा डरूं सूं

जो देखूं वो मुहं पै कह कै
बिन माफ़ी की खता करूँ सूं

जिनके मन मं महक वतन की
उन 'पागलां' तै प्यार करूँ सूं

खोट रोज दो शाम-सवेरै
भारत माँ नै नमन करूँ सूं !!!

-----------बेरा कोणी ।
 
काले बणिये तं गोरे भाट तं !
कसुते अनपढ़ जिददी जाट तं !!
तरेड़ आयड़े चाक्की गे पाट तं !!
।। कत्ती बच गे रहणा चाहिये ।।
हड़बड़ाए हुये गल्ली के कुत्ते तं !
कड़कड़ाए हुए पैर के जुत्ते तं !!
आर गली म मलंग ताऊ सुत्ते तं !!
।। कत्ती बच गे रहणा चाहिये ।।
घणी रूसड़ी लुगाई तं !!
ज्यादा पढ़डे जमाई तं !!
नयी कुत्ती बियाई तं !!
।। कत्ती बच गे रहणा चाहिये ।।
भाई घणे बोलण आरे यार तं!
जमा नई दांती की धार तं !
मिट्ठे बोलणीये दुकानदार तं !
।। कत्ती बच गे रहणा चाहिये ।।

-----------बेरा कोणी ।
 
ताऊ राम राम
राम राम भाई राम राम
ताऊ के हाल चाल सै
मैं तो ठीक सु तू सुना तेरा के ख्याल सै
चाल ताऊ तन्ने दिल्ली घुमा ल्याऊ
दिल्ल में के सै मैं तो ना जाऊ
ताऊ आज दिल्ली में रेल्ली सै
ना भाई घरा तेरी ताई अकेली सै
चाल्ले ने ताऊ ताई के किते भाज के जावेगी
भाज गी तो दिल्ली में के नयी मिल जावेगी
चाल ताऊ तन्ने सब्जी पूरी खुवाऊंगा
ना भाई तेरी ताई धोरे चूरमा बनवाऊंगा
चाल्ले ने ताऊ बैठ के जाना बैठ के आना सै
मैं ठाल्ली कोन्या मन्ने खेत बुवाना सै
ताऊ हुडे बड़े बड़े नेता आवेंगे
फेर म्हारे के टिक्का करके जावेंगे
ताऊ साँझ ने दारु का भी प्रोग्राम है
ना भाई ये रेल्ली वेल्ली ठाल्ली आदमिया के काम सै
और किस बात की रेल्ली से तू इतना जोर ला रहा से
नु तो बेरा ना ताऊ वो मंत्री जी का फोन आ रहा सै
बस भेजू सु गाम महा ते भर ल्याइए
और दो गाड्डी अपनी भी कर ल्याइए
ताऊ बोल्या क्यों इस जनता का बेवकूफ बनाओ सो
भेड़ बकरिया की तरिया भर भर ले जाओ सो
नु हे तो या सरकार काम ना करवाती
और बेरोजगारा ते रोजगार न दिवाती
अक सरे लोग काम पे लाग जावेंगे
तो इनकी रेल्लिया में कोण जावेंगे
हम ने के इनकी इसी तीसी करी सै जो रेल्ली में जावांगे
हम तो अपने खेता में हे कमावंगे
चल्ला जा ना ते तू भी जूती खावेगा
किते ना रेल्ली में जावेगा

-----------बेरा कोणी ।
 
""यारो सिरसा का लाणा ,
भिवानी का बाणा
अर्र दुनिया मं मशहुर स हिसार का दाना .
जींद का सम्ध्याना ,
नारनोल का न्याना ,
अर्र दुनिया म मशहुर स महेंद्रगढ़ का खाना .
रोहतक की चतुराई ,
सोनीपत की अंगडाई ,
अर्र दुनिया म मशहुर स पानीपत की लड़ाई

करनाल का साथ ,
पंचकुला का पाठ अर्र
दुनिया म मशहुर स चंडीगढ़ का हाथ
अम्बाला की चाट ,
कैथल की खाट ,
अर्र दुनिया म मशहुर स हरयाने का जाट..

 
"आज एक बाप अपणी बेटी तै हार गया
सारे लाहणे वो पल मै तार गया
आपणी लाडो के चा पुगाणे मन मै मार गया
पैरा मै रुल्गी पगड़ी अर इज्जत तार तार
आज एक बाप अपणी बेटी तै हार गया
दोस्तो या कविता सै तार तार होंदे आज के
रिश्त्या पै . नोजवान तो गलती कर एक कनै
हो ज्या सै पर माँ बाप पै उस गलती की के बीतै
या कती नी सोचदे . इसे ही कुछ सवाल लेके पेश
है या कविता ''आज एक बाप अपणी बेटी तै हार
गया ''
आपणी इज्जत की गेल खुभैत कररया सै
ताऊ सुरता आज पंचैत कररया सै
थ्याई माणसां तै भर री सै
अर खाट भी चर्चा कर री सै
खड्या हो कै एक पंचायती बोल्या
अर पंचायती रोले का राज खोल्या
ताऊ सुरता की छोरी रामफल गेल भाजगी
जिसतै म्हारे सारे गाम की इज्जत लाजगी
पंचैत मै खुसर फुसर चाल पड़ी
सारया की खंडके बंधी नाड़ हाल पड़ी
एक बोल्या फेर इसमे रामफल का के खोट सै
ताड़ी एक हाथ ना बजती दोनुवा की ज़ोट सै
दूसरा बोल्या फेर दोनुवा नै मजा चखा दयो
गाम के रिश्ते के हो सै दोनुवा नै बता दयो
फेर एक और खड्या होलिया
अपणे सिर पै तै तार कै तोलिया
बोल्या दोनुवा नै मारे पाछै कुणसा सुख
हो ज्यागा
एकला छोरा सै रामफल माँ बाप नै दुख हो ज्यागा
सुरता बोल्या एकला सै तो मनै के आंट सै
लागै सै छोरे इसमै तेरी भी सांट गांठ सै
छोरा बोल्या ताऊ सांट गांठ तो तेरी छोरी करगी
जो तेरे खंडके नै अर मुछा नै छात पै धरगी
तू जद नी बोल्या जद ओ रामफल यार बणाया
गाम की गाम मै तेरी छोरी नै भरतार बणाया
सुरता का रंग लाल होगया
अर पंचायत मै बवाल होगया
लोग एक दुसरे की आँख्यां मै देख देखकै हाँसै थे
बात बात पै हुंगारे भर भरकै खांसै थे
ताऊ सुरता उनकी हरकता नै खूब पीछानै था
एक एक आदमी की ओकात नै आछी तरियां जानै
था
रै ये वाए लोग थे जो कदे उसका झूठा खाया करदे
बोलणा तो दूर की बात कदे नाड़ नी ठाया करदे
आज भरी पंचैत मै इज्जत की बिरान
माटी होरी थी
किस तै कहंदा सुरता करण आली खुद
की छोरी थी
रै व़ा छोरी जिस के कहणे ओ पल मै पुगाये करदा
गेल रोंदा गेल हासदा अर गेल्याए गाये करदा
मासूम सी दिखण आली छोरी आज सारा कीमे
उजाड़गी
बचपन मै मुछां तै खेलण आली आज उननै जड़
तैए पाड़गी
फेर एक छोरा बोल्या ताऊ कयूँ इतना कठ कर
रया सै
अर सबर कर ले इसे मै कयूँ गात का मठ कर
रया सै
सुरता पंचैत कानी लखाया
पर उसका हिमायती कोए नी पाया
खड्या होकै बोल्या रै क्यूकर सबर कर लयू
इस तै आछा तो कुए मै पड़ कै म़र लयू
रै बियाह तै तीन दिन पहलया जिस
की छोरी चली जा सै
उस बाप की पगड़ी सारे बाजार छली जा सै
रै के इसे दिन खातर लोग छोरियां नै चाहवै सै
सयाणे सै वै लोग जो छोरीया नै पेट मै मरवावै सै
जे मै भी आपणी छोरी नै पेट मै मरवा खडदा
तो यू दिन मनै कदे भी नी देखना पड़दा
रै व़ा के छोरी जो अपणे बाप की पगड़ी नै रुलवा दे
अपणे गाम की चोगरदे नै हाँसी करवा दे
ना सूरते न्यू रामफल का बाप बोल्या
अर खंगार कर कै आपणा सूखा गला छोल्या
रै पेट मै मारे तै यो रोला नी झुकया करदा
बाल पाडे तै कदे मुर्दा का वजन नी मुकया करदा
रै गलती आपणी ए सै आप बालका नै
नी सीखा पाए
अर सही संस्कारा का उन नै रह नी दिखा पाए
एकला सै तो के होया मै घर मै नी बड़ण द्यूंगा
रामफल अर उस छोरी नै बार नै नी खडण द्यूंगा
सुरता बोल्या रै मेरा इतने मै क्यूकर सर ज्यागा
मनै तो जिब सबर आवै जद तेरा छोरा मर ज्यागा
रै आये बेठे रिश्तेदारा तै मै के मुह दिखाउंगा
जिस दिन थयागे मै दोनुवा नै पाणी पियाउंगा
थयाई मै चोगरदे नै सी सा सुप थी
इस बात पै पूरी पंचैत चुप थी
फेर बोल्या सुन ल्यो ए जे कोए छोरी सुणदी हो
आपणे बाप की रे रे माटी करण के सपने बुणदी हो
जिन्दे जी आपणी खुशिया कै आग ना लायीयो
अर आपणे बाप की पगड़ी कै कदे दाग
ना लायीयो
या बड़ बड़ करदा सुरता घर नै चाल पड्या
सुण कै उसकी बात सारया का कालजा हाल
पड्या
आगले दिन बखत सारे गाम की हासी खा गया
ताऊ सुरता घरा जांदे रात ए नै फासी खा गया
बेचारा सुरता बस इतने मै ए सार गया
अक आज एक बाप आपणी बेटी तै हार गया"
BY @ Ramesh Chahal
 
मजनुआ आल्ला अंदाज़ राम न प्यारा होग्या
ब्याह बाद धोलू जद भाईओ न्यारा होग्या
खड़े ट्रक की हवा सी लिकड़गी , ग्रहस्थी की चिंता दिमाग में बडगी
जींस पहरनी छोड़ग्या,चश्मा लगाना छोड़ ग्या
चार दिन में एक ब ढाढ़ी बनान लाग्या
फ़िज़ूल खर्ची त पिंड छुटान लाग्या
सिगरेट की जगह बीडी प आ लिया था
तंगहाली न धोलू पाड़-पाड़ के खा लिया था
किसे क समझ नहीं आवे था, मारे दर्द के सिर पाटता जावे था
घर में बन्नो नहीं उसकी शामत आ री थी,
जो लिपस्टिक पौडर लगाके उसने चिढ़ा री थी
इब रात दिन चिंता में धोलू माड़ा होग्या था,
साच्च्ली बताऊ तो उसके जी न खाड़ा होग्या था
मन्ने तो उसपे बहुत रहम आवे था
पर मेरे रहम त उसके के थ्यावे था
मैं खुद बेरोजगार, कोए मेरा ए कर दो उदार
फेर बी मैं उसका दर्द समझ सकू था
गृहस्थी की हवा सर्द समझ सकू था
न्यारा होवन का दुःख मैं आच्छी दाऊ जाणु सु
बर्तन कौन-कौन से खुडक्या करे,
एक-एक न पिछाणु सु
धोलू तीन-चार दिन पहलया मिल्या तो एकदम उदास लाग्या
उसकी बाता में मन्ने दुनियादारी का अहसास लाग्या
बोल्या- यार बेचैन कमाल होरया स
आलू के भा में बहुत उछाल होरया स
दाल,चीनी- चावल कुछ भी तो सस्ती कोन्या
कोए पूछनिया हो-
इन दुकानदारा के सिवा , के किसे की गृहस्ती कोन्या
अर पहल्या तो राशन इतना महंगा नहीं था,
मैं मन ए मन सोचु, तू पहल्या बाज़ार गया कद था
उसकी बात सुनके मन्ने हांसी आगी थी
गुदी उसकी गृहस्थी क थ्यागी थी
या गुदी उसकी कोए और पकड लेता तो झगड़ा कर लेता
थप्पड़ चार खाता तो, दो उसके आसानी त धर देता
पर इबके तो मामला ए कुछ और था,
धोलू फसग्या र फसग्या
चोगरदू शोर था
यो वोहे धोलू था
जो छोरिया न बाइक प बिठा के घुम्या करदा
अर लव लेटर ज्वाइनिंग लेटर की ज्यू चुम्या करदा
यो वोहे धोलू था,जो बात-बात प पार्टी दिया करता
शराब देसी नहीं हमेशा अंग्रेजी पीया करता
यो वोहे धोलू था जो सिगरेट के कश मारया करता
साबत दिन में ड्रेस एक नहीं चार उतरा करता
पर आज---
आज तो धोलू आशिक नहीं बिचारा होरया स
उसका तो बड़ी मुश्किल त गुज़ारा हो रया स
या फेर न्यू कहू ---
बर्बाद करके धर दिया आशकी न धोलू
न घर न घाट का, कर दिया आशकी न धोलू
इसलिए भाई ओ --- मेरा सारया त सुझाव स
आशकी ना करियो, या छिद्र आली नाव स
इसमे बैठे तो खानदान समेत डूब जाओगे
फेर अपने आप न धोलू की जगह खड़े पाओगे .......
फेर अपने आप न धोलू की जगह खड़े पाओगे .......फेर अपने आप न धोलू की जगह खड़े पाओगे .......फेर अपने आप न धोलू की जगह खड़े पाओगे .......
फेर अपने आप न धोलू की जगह खड़े पाओगे .......

-----------बेरा कोणी ।
 
एस इ जेड आगए है और जाट की जमीन बिकगी है
जितने पैसे मिले उनकी कोठी बना ली है,
बाकि बचे पैसो की सफारी कड़ा ली है,
पर खाद बिज अब भी उधर आवे है ,
देशी छोड़ अब अंग्रेजी ते यारी कर ली
राबड़ी लगे कडवी मुर्गे ने सस्ता बतावे है,
घर घर में आगी रिवाल्वर,बन्दुक और बहु यूपी बंगाल ते लावे है
सरपंची का पाला शोक, सगे भाई पे गोली चलावे है
धरती की इज्जत भुलगे, शोक जारी का फरमावे है
किस धोखे में जी रे जाट, जान का गेडा आ लिया है
जे यो ही हाल रहा तो कोई तेरी अर्थी ने कन्धा न देनेया है

-----------बेरा कोणी ।
 
हरियाणा के जाट
नहीं किसे ते घाट
जो बोलया माहरे आगे कड़क
मींटान मैं काढ़ी उसकी रड़क
शेर बरगा टोहरा माहरा हाथी जितनी जान
जाटा ते ए ह हरियाने की शान
माहने नही देखी कदे किसे की बाट...........

दिन मैं खेताँ मैं करा कमाई
शाम न करा बजार की घुमाई
टोहवाँ कोई छोरी प्यारी
जिसकी टोहर हो सारियाँ ते न्यारि
करा सुथरी छोरियाँ की छाँट.......

अपनी ही मस्ती मैं रहते
फालतू ना किसे ती कहते
खाण पीन के खुल्ले खाते
यारं दोस्ता गेल मौज मारते
माहम नि करते किसे की काट.......

छोड़ के सब दुनिया दारी
जाट ने निभाई बस यारी
झेलं यारं पे होए वार
यारं पे जान देन न सदा रहवाँ त्यार
यारी निभाण मैं ना देखा बाट.....

गिल्ल करे जाट की बड़ाई
हक सच की जाट न करी कमाई
बाप दादान की जमीन इनने जान ते प्यारी से
सारे जग मैं जातं की टोहर न्यारि से
रोज सांझ ने घालं कोठी आगे खाट.....

Credit: Jit Gill
 
चोट इतनी दिल पै खाई सै मनै,
दर्द की दुनिया बसाई सै मनै।

भूल गया मैं अपने आप्पे नै कती,
याद उसकी जिब तै आई सै मनै।

टूटणा बेसक पड्या सै बार-बार,
अपणी बिगड़ी खुद बणाई सै मनै।

फूल-सा दिक्खै था पथरीला बदन,
चोट न्यूं भी दिल पै खाई सै मनै।

सींच कै अपणै लहू तै दोस्तो,
प्यार की बगिया सजाई सै मनै।

त्याग की ज्वाला मैं तप कै रैत-दिन,
बूंद भर नेक्की कमाई सै मनै।

मतलबी लोग्गां का जमघट सै 'कंवल'
सारी दुनिया आजमाई सै मनै।
 
तू छोरी स सहर चंडीगढ़ की, मेरी गेल घनी तंग पावेगी ,,
म सु ठेठ जाट हरयाने का ,तू लक्क 28 आली कुकर जाटनी कुहावेगी,,

तू खावे स पिज्जे बर्गर, मेरे खात्र चूरमा कीत्त त्त बनावेगी ,
रहवे स तू AC रूम में तू कीत्त के खेत कमावेगी ,

'दहिया ' ने तो रहना स अपने गाम में,तनने गाम की हवा कुकर भावेगी,
यु छोरा तो पहरे स कुड़ता पजामा,तू कीत्त के Looser Nerro फसावेगी,
तू छोरी स सहर चंडीगढ़ की मेरी गेल घनी तंग पावेगी
,तू कर्रे किट्टी पार्टी ,तन्ने चौपाल क्यूकर सहुवावेगी...
मैं खाऊं देसी घी सारी हाण ..तू आपने फिगर कहन लखावेगी ...
तू चाले गाडी honda accord मैं ..
मेरी गेल झोटा बग्गी मैं क्यूकर धुप सहुवावेगी ...
मैं यारा का सु यार कसुत .
मेरी बाट मैं क्यूकर गाल कहान लखावेगी ..
तू छोरी स चंडीगढ़ सहर की ..
तन्ने आदत डिस्को बार की .. क्यूकर रागनी सहुवावेगी ..
मन्ने आदत आशीर्वाद कमान की ..
तू क्यूकर माँ के पा दबावेगी ...
तू छोरी स चंडीगढ़ सहर की ...

मैं तडके तडक ऊठू सु 4 बजे ,फेर अखाड़े म जाऊ सु ..
उड़े त आ के फेर खेत कमा के लाऊ सु ...
तू बेशक गात तोड़े स gym मैं .. तू क्यूकर न्यार पाड के ल्यावेगी ..
तू use कर्रे microwave..
क्यूकर चूल्हे पे खाना बनावेगी ...
तू क्यूकर गोबर ठावेगी ..
तन्ने खाया नरा डालडा घी ..देसी घी क्यूकर ओट पावेगी ...
तू चश्मे लावे घाम्म मैं ..क्यूकर तन्ने धुल सहुवावेगी ..
तन्ने आदत महल अटारी की ..
मेरे काचे घर मैं क्यूकर शबर कर पावेगी ..
तू छोरी स चंडीगढ़ सहर की.....

तू जावे अंग्रेजी toilet मैं ..
क्यूकर खेत मैं घूमन जावेगी ..
तू लावे लाली पावडर स ..
बिन मेअक अप क्यूकर थम ज्यावेगी ...
तू छोरी श चंडीगढ़ सहर की

तू सोयी गद्दे आले बेड पे ..
तेरे खाट की ज्योडी गड्ड ज्यावेगी ...
तू पीवे लिम्का वोदका ..
देसी म क्यूकर तान बजावेगी ..
तू छोरी स चंडीगढ़ सहर की ..

तन्ने आदत इंग्लिश गाने की ..
तन्ने मोर की पीहू पीहू क्यूकर राश आवेगी ..
तू बोले गिटपिट गिटपिट अंग्रेजी ..
हरयाणवी कितनी समझ आवेगी ..
मैं करू राम राम गाम ने ..
तेरी हाई हेल्लो किस ने समझ आवेगी ...
मैं मीठे बोला का लाडदा शु ...
तू क्यूकर इन्ह ते पेटा भर पावेगी ..
tu chhori sh chandigarh sehar ki..

तू जीरो फिगर की तोड़ी हौड ...
याढ़े गोलुमोलू सी भावेगी ...
किम्मे गात घाल ले बैर्रण तू .
ना मन्ने घन्नी सुन्न्वावेगी ..
तेरा ऊँचा टॉप तेरी लो waist jeans..
तू मेरी इज्जत के घाह्क ल्वावेगी ..

किम्मे सांग न तेरा कुछ श न सवा ..
तू खामखा फ़ालतू मैं घनी गिर्वाव्व्गी ...
तेरा रहन -सहन,चाल- चलन ना म्हारे हिसाब का ..
तोह क्यूकर बद्दाई सुन्न पावेगी ..
तू छोरी स चंडीगढ़ सहर की ....
तू 61-62 करती चाले से ..
गाम में लठ बजवावे गी ,
ऑल्हे पाले का तने ज्ञान नहीं ...
बड़े बूढ़ा ने नहीं भावेगी ,
हेल्लो हीई ते तेरा काम चले ...
क्यूकर माँ -दादी के पा हाथ लावेगी ,
तू छोरी से चंडीगढ़ सेहर की ......
 
सुनो बालको यो आलस एक ऐसा खोटा यारी है,

प्यारा बणकै, बुद्वि नै हरकै, इसनै घण्या की मत मारी है।।

ज्यब किताब हाथ मैं ठावैगा, यो चैगरदै चक्कर काटैगा,

कदे आडा, कदे सीधा, आख्यर मैं तनै लुटावैगा

ज्यब तक नींद नहीं आ ल्यंति, यो करता पहरेदारी है।

सुनो बालको यो आलस एक ऐसा खोटा यारी है,

प्यारा बणकै, बुद्धि नै हरकै, इसनै घण्या की मत मारी है।।

तूं तड़कऐ उठणा चहावै बखत तैं, यो उठण तैं नाटैगा,

दिल करड़ा करकै तूं चहावै घूमणा, यो घूमण तैं नाटैगा,

तेरी वृद्धि कि जड़ काटैगा, यो इसा सर्प विशधारी है।

सुनो बालको यो आलस एक ऐसा खोटा यारी है,

प्यारा बणकै, बुद्धि नै हरकै, इसनै घण्या की मत मारी है।।

जिसनै इसतैं यारी तोड़ी विघावान गुणी बणज्ञ्या

सुबह उठ कै कसरत करकै सेहतमंद बली बणज्ञ्या

इसतै नाता तोड़ो अपणा, इसै मैं होशियारी है

सुनो बालको यो आलस एक ऐसा खोटा यारी है,

प्यारा बणकै, बुद्धि नै हरकै, इसनै घण्या की मत मारी है।।

-----------बेरा कोणी ।
 
रंग-बिरंगी होली आई
...
ओअली आई, सओली आई
... रंग-बिरंगी होली आई

कोय मारै रंग, कोय मारै गुब्बारा
कोय मारै गोबर, कोय मारै गॉरा

मेरे भी खेलण की उठी खुमारी
मैं भी ठा लाया एक पुरानी पिचकारी

आच्छा-सा घोल त्यार करया
पिचकारी मैं रंग भरया

दूर तैं चॉली आवै एक छोरी
लागै थी सुथरी शक्ल की गोरी

लहरावैं थे लाम्बे बॉल
गज़ब की थीं उसकी चाल

मन्नै पिचकारी दबाई
पर रंग की फुहार ना आई

मैं बोल्या, पिचकारी, तेरे के सै बीमारी
चालती क्यूँ ना, रंग डालती क्यूँ ना

पिचकारी बोली-कोन्या चालूँ
तरे घी-सा कोन्या घालूँ

मैं बोल्या, चॉल पड़, क्यूं होली का मौका ख़ोरी
फागण मैं ऐकली कित पावैगी इसी गोरी

पिचकारी बोली, तूँ निपट सै कोरा
ध्यान तै देख, छोरी कोन्या, यू सै छोरा

किसी चॉल्ली फ़ैशन की बीमारी
साच कह री सै तूं पिचकारी

मन्नै सांस सब्र का घाल्या
पिचकारी नैं ले कै आगै चाल्या

फेर देख्या एक जोड़ा चाल्या आवै
चूपचाप थे दोनूँ, ना आपस में बतलावै

मै बोल्या, इनके मारूँ, होली का खुमर तारूँ

पिचकारी बोली, रहण दे
इन दोनुआ नै जाण दे

मैं बोल्या, क्यूं, के फांसी आगी
पिचकारी नै हांसी आगी

न्यू बोली, इन्न पैं तू के रंग चढ़ावैगा
इनकी करणी सुण के दुखी हो जावैगा

ये आये सैं भविष्य के रंग मिटा कै,
रामू डॉक्टर धोरै दोनूँ जाकै

छोरा-छोरी का पता लगा कै
अजन्मी कन्या नै कोख़ तैं हटा है

ना सोची इनैं कुछ भी समाज़ की
किसी पीढ़ी से या आज की

कित तैं आवैंगी बहू, जै जन्मैंगी ना छोरी
बिना रंगा के रहैगी होली, फागण की या मस्ती कोरी

मैं बोल्या, पिचकारी, तू के घर घॉलैगी
बता तो दे, तू किते चालैगी, के ना चॉलैगी

पिचकारी बोली, मैं चालूँगी,
रंगा तैं घर भर डालूँगी

जिस दिन हर तरफ़ हो ज्यागी ईमानदारी
बेटा अर बेटी सबनैं लागैंगी एक-सी प्यारी

छोटे बड़े का मान होगा, ना होगी किते तब लाचारी
खुशियाँ के रंग बरसावैगी, म्हारे संस्काराँ की पिचकारी

-----------बेरा कोणी ।
 
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