तख्ती - मुलतानी मिट्टी से तख्ती को पोतना

र: तख्ती सुखांदी हाण (घुमा-घुमा के )एक कविता गाया करदे , किहे के याद आवे ते "हरयाणवी बाल कविता" आले तागे में लिखिओ | में भी याद करण की कोशिश करण लागरया सूं काल का | बोल शायद इस्से कीमे थे :- तख्ती पोती-तख्ती पोती ,तख्ती राम सुखावे ......| अर जा ना याद आई किहे के ते फेर इन्ने लाइनां पे नई बणा के चेप देवांगे |

hmm isi e si lines thi shyad.......main b yaad karan ki koshish karu hu...........Google per b search kar liya per koni paya:(
 
ha ha ha ... raat ke 1:30 baje raam raam leni padi neend me te uthke vikas ko...:)

re bhai kamre me kai vaar ki awaaz ave thi RAM RAM....mane sochi bhoot to RAM ka naam leve ni aur Kerala me b koi na bole itne pyar aur bhaichare te.
fer dhyan aaya ki koi sa bhai Jatland pe yaad kar ra se......dekha to yu bhai paya sath me kutta lera se..........hahhahahhahahaha
 
विकास कुत्ते नै देख कै चिमक (frightened) ग्या..आँख मीचते ही कुत्ता दीखे...जणु इब पाड्या.....रात के डेढ़-दो बजे का बैठ्या राम, राम, राम ...राम करण लाग रह्या सै

re bhai kamre me kai vaar ki awaaz ave thi RAM RAM....mane sochi bhoot to RAM ka naam leve ni aur Kerala me b koi na bole itne pyar aur bhaichare te.
fer dhyan aaya ki koi sa bhai Jatland pe yaad kar ra se......dekha to yu bhai paya sath me kutta lera se..........hahhahahhahahaha
 
विकास कुत्ते नै देख कै चिमक (frightened) ग्या..आँख मीचते ही कुत्ता दीखे...जणु इब पाड्या.....रात के डेढ़-दो बजे का बैठ्या राम, राम, राम ...राम करण लाग रह्या सै

k kara bhai dar to lage se jab 14 injection lage se to bera patte se..........ache ache pehlewan ron lage se 14 injection dekh k to,main to fer me kamjoor sa manas su.
 
ले भाई ,काल मेरे बाबू पे बुझी ,मेरे ते याद भी कोणी आवे थी ,ऐ एक और थ्या गी तकती पोतदी हाण कहया करदे :--तख्ती सुखांदी हाण कहया करदे :-
मेरी तख्ती सुखियो ,
बड़ का डाहला टूटियो,
डाहले पे बेठ्या बांदर,
बान्दर का सर फुटियो,
बड़ का डाहला टूटियो,
मेरी तख्ती सुखियो ,


जब ताहीं सूख ना जांदी इतणे कहयें जांदे |


तकती पोतदी हाण कहया करदे :--


मेरी तख्ती पुती जा ,
मोटी बिल्ली सूती जा ,
बिल्ली के मारो डला,
तख्ती पोत में ते चला |
 
शनिवार का खास डाईलाग "तख्ती पे तख्ती तख्ती पे दाना कल की छुट्टी परसों आना "
कुण सा सै मेरा भाई जो एक डोभा देवेगा ?

वैसे थोडा सा अजीब सवाल है इसा के है जो आज आड़े के माननीय सदस्यों को गाँव जाने से रोक रहा है ? आड़े बैठ के संदेसे आते हैं और चिट्ठी आयी है को साक्षात् करने की बजाये अगर दो घंटे ख़राब करोगे तो गाम में पहुँच जाओगे !नियत हो तो कीमे मुश्कल ना आर बाकी कीबोर्ड के ऊपर कुला करनी हैं तो कोए बात ना !



इसे दादा आदम के ज़माने की चीज ना है तख्ती लांडी गाल आले काने बनिए के आज भी पड़ी हैं !
 
शनिवार का खास डाईलाग "तख्ती पे तख्ती तख्ती पे दाना कल की छुट्टी परसों आना "
कुण सा सै मेरा भाई जो एक डोभा देवेगा ?

वैसे थोडा सा अजीब सवाल है इसा के है जो आज आड़े के माननीय सदस्यों को गाँव जाने से रोक रहा है ? आड़े बैठ के संदेसे आते हैं और चिट्ठी आयी है को साक्षात् करने की बजाये अगर दो घंटे ख़राब करोगे तो गाम में पहुँच जाओगे !नियत हो तो कीमे मुश्कल ना आर बाकी कीबोर्ड के ऊपर कुला करनी हैं तो कोए बात ना !



इसे दादा आदम के ज़माने की चीज ना है तख्ती लांडी गाल आले काने बनिए के आज भी पड़ी हैं !

गाम में जाके ते आड़े सारे आवें से जो जा सके सें...बात ते से गाम में बितायी अपनी पुराणी बातां ने याद करण की....दो घंटे गाम मैं जाके बितावान ते के पुराना टेम उल्टा आ ज्यागा....

हाडे तख्ती के बहाने ते लोग अपने बचपन ने याद कर रे सें....संदेशे अर्र चिठ्ठी ते आवें इ सें... अर्र कई ते गाम ते इतने दूर सैन अक जे उन भैया ने तू दो घंटे मैं रोज़ गाम में पोह्चादे तो वे ते फेर गाम में ते इ up down कर लेंगे,अर्र kingfisher में तेरी नोकरी पक्की..इतनी तगड़ी ऐर्लिनेस ना डूब सके..
...लोगां की मजबूरी से जो जगा जगा पड़े सें ..नहीं ते कुन अपने घर ने अर्र परिवार ने छोड़ के राज़ी सा..
..अर्र भाई लोग बालकपन ने याद करके खुस हो रे सें ..इसमें लांडी गाल आला बनिया के सांग करके खुस करेगा..
 
Last edited:
तख्ती सूख ली हो इब तो सत्तर (लाइन) मारणे शुरू करणे चाहियें / किसे पै पिल्सण ना हो तो सट्टा ( रेडिए की बैट्री आला ) ले लियो /
अर विकास ताहीं गुटकणे (rough lines by pencil ) बी काढ कै देणे सै /
 
Oho.. tasvir bhai kasuta chandna karya tanne aake ne.. Mai bhi sochu ak JL kholte ae chaundhe laage aaj...
eeb berya paatya kun aa rhya se aade.. ha ha ha :applause:
 
हम एक और काम करा करते मुलतानी त लिपि औड तख्ती पे गेंदे का फूल रगड़ के उसने रंगीन बना लिया करते, फेर उसपे काली स्याही तै सुथरा सुथरा लिखते कति मोती की ढाल अक्सर चमका करते।
हा संजीव भाई हम तो तख्ती को शीशी से घोट क चिकनी करे थे सुथरी चिकनी हो जा थी अर खड़िया घोल क स्याही बना लेवे थे फिर उससे लिखे थे | कई बार प्लास्टिक की गेंद हलकी वाली से रेसिस में क्रिकेट भी खेला करे थे | बड़े मजे के दिन थे |
 
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