र: तख्ती सुखांदी हाण (घुमा-घुमा के )एक कविता गाया करदे , किहे के याद आवे ते "हरयाणवी बाल कविता" आले तागे में लिखिओ | में भी याद करण की कोशिश करण लागरया सूं काल का | बोल शायद इस्से कीमे थे :- तख्ती पोती-तख्ती पोती ,तख्ती राम सुखावे ......| अर जा ना याद आई किहे के ते फेर इन्ने लाइनां पे नई बणा के चेप देवांगे |
hmm isi e si lines thi shyad.......main b yaad karan ki koshish karu hu...........Google per b search kar liya per koni paya