ayushkadyan
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भारत माता की जय-राष्ट्रवाद या राजनीति?
राष्ट्रवाद पूरे उफ़ान पर है| इस उफ़ान में अब भारत माता की जय का नारा भी जुड़ गया है| फतवों और पंचायतो का दौर चल निकला है| मुस्लिम संस्था दारूल-उलूम ने तो इसे इस्लाम विरोधी क़रार दे ही दिया है| जो कि ग़ैरज़रूरी मालूम होता है| इस्लाम में भी तो मादरेवतन को सलाम सदियों से चलन में है| यह सच है कि इस्लाम में खुदा के सिवा किसी और की इबादत करने की इज़ाज़त नहीं है| लेकिन भारत माता की जय कहना किसी हिन्दू देवी की इबादत नहीं बल्कि मुल्क के लिए एहतराम (कृतज्ञता/इज्ज़त) जताना है| यह नारा आज़ादी से पहले देशवासियों में राष्ट्रवाद का भाव भरने के लिए बोला गया था| तब हर मज़हब को मानने वाले एक सुर में यह नारा बोलते थे|
लेकिन अब क्या हो गया? क्या इस भारत माता में वो आजादी से पहले वाली बात नहीं रही? क्या यह भारत माता चरित्रहीन हो गयी है? या फिर यह संघ की गोद में बैठ गयी है? या यह भारत माता इस्लाम को लेकर असहिष्णु हो गयी है ? क्या भारत माता की जय की मुखालफ़त बस इसलिए हो रही है कि कुछ तथाकथित सेकुलरवादियो को यह नारा संघ प्रायोजित हिन्दू राष्ट्रवाद की साजिश लगता है?
हमेशा की तरह मुल्क के मुस्लिमो को संघ का डर दिखाया जा रहा है| क्या संघ विरोध पर राजनीति करने वालो के लिए यह मुस्लिम तुष्टिकरण का नया हथियार है?
सवाल यह भी है कि क्या वाकई यह नारा किसी की देशभक्ति का प्रमाणपत्र है? शायद नहीं| देशभक्ति ज़ाहिर करने के और भी ज़रिये है| लेकिन यह एक चीज़ तो साफ़ कर ही देता है कि आप अपने धर्म को राष्ट्र से पहले रखते है तभी तो आपको नारे से पहले अपने धर्म की याद आती है| यहाँ बात इस्लाम की हो रही है| देश के मुस्लिमो को तय करना है कि वो कैसे अपनी मोहब्बत-ए-मुल्क बयाँ करते है| लेकिन औवेसी या कोई दूसरी इस्लामी संस्था अपनी मर्ज़ी मुस्लिमो पर ना थोपे| बागपत की एक खाप पंचायत ने तो अपना फरमान भी सुना दिया इन भारत माता की जय न बोलने वालो के लिए|
http://aajtak.intoday.in/story/panc...who-dont-say-bharat-mata-ki-jai-1-862144.html
आप ज़बरदस्ती किसी को भारत माता की जय कहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते| यह तो खुद के अन्दर से निकला भाव है जो किसी भी धर्म और राजनीति से ऊपर है| मुल्क से मोहब्बत किसी संघ या औवेसी या दारुल उलूम की मोहताज़ नहीं है| यह तो हमेशा दिलो में रहेगी| इस मोहब्बत को किसी की राजनीति की नज़र न लगे| बस इतनी सी दुआ है|
राष्ट्रवाद पूरे उफ़ान पर है| इस उफ़ान में अब भारत माता की जय का नारा भी जुड़ गया है| फतवों और पंचायतो का दौर चल निकला है| मुस्लिम संस्था दारूल-उलूम ने तो इसे इस्लाम विरोधी क़रार दे ही दिया है| जो कि ग़ैरज़रूरी मालूम होता है| इस्लाम में भी तो मादरेवतन को सलाम सदियों से चलन में है| यह सच है कि इस्लाम में खुदा के सिवा किसी और की इबादत करने की इज़ाज़त नहीं है| लेकिन भारत माता की जय कहना किसी हिन्दू देवी की इबादत नहीं बल्कि मुल्क के लिए एहतराम (कृतज्ञता/इज्ज़त) जताना है| यह नारा आज़ादी से पहले देशवासियों में राष्ट्रवाद का भाव भरने के लिए बोला गया था| तब हर मज़हब को मानने वाले एक सुर में यह नारा बोलते थे|
लेकिन अब क्या हो गया? क्या इस भारत माता में वो आजादी से पहले वाली बात नहीं रही? क्या यह भारत माता चरित्रहीन हो गयी है? या फिर यह संघ की गोद में बैठ गयी है? या यह भारत माता इस्लाम को लेकर असहिष्णु हो गयी है ? क्या भारत माता की जय की मुखालफ़त बस इसलिए हो रही है कि कुछ तथाकथित सेकुलरवादियो को यह नारा संघ प्रायोजित हिन्दू राष्ट्रवाद की साजिश लगता है?
हमेशा की तरह मुल्क के मुस्लिमो को संघ का डर दिखाया जा रहा है| क्या संघ विरोध पर राजनीति करने वालो के लिए यह मुस्लिम तुष्टिकरण का नया हथियार है?
सवाल यह भी है कि क्या वाकई यह नारा किसी की देशभक्ति का प्रमाणपत्र है? शायद नहीं| देशभक्ति ज़ाहिर करने के और भी ज़रिये है| लेकिन यह एक चीज़ तो साफ़ कर ही देता है कि आप अपने धर्म को राष्ट्र से पहले रखते है तभी तो आपको नारे से पहले अपने धर्म की याद आती है| यहाँ बात इस्लाम की हो रही है| देश के मुस्लिमो को तय करना है कि वो कैसे अपनी मोहब्बत-ए-मुल्क बयाँ करते है| लेकिन औवेसी या कोई दूसरी इस्लामी संस्था अपनी मर्ज़ी मुस्लिमो पर ना थोपे| बागपत की एक खाप पंचायत ने तो अपना फरमान भी सुना दिया इन भारत माता की जय न बोलने वालो के लिए|
http://aajtak.intoday.in/story/panc...who-dont-say-bharat-mata-ki-jai-1-862144.html
आप ज़बरदस्ती किसी को भारत माता की जय कहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते| यह तो खुद के अन्दर से निकला भाव है जो किसी भी धर्म और राजनीति से ऊपर है| मुल्क से मोहब्बत किसी संघ या औवेसी या दारुल उलूम की मोहताज़ नहीं है| यह तो हमेशा दिलो में रहेगी| इस मोहब्बत को किसी की राजनीति की नज़र न लगे| बस इतनी सी दुआ है|