samarkadian
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हा हा हा...कुछ लोगों ने फैसला किया है कि वे कुतर्कों से मेरा मुंह बंद करेंगे। मैं हिंदी बोलकर गद्दारी कर रहा हूं (ऐसा कहने वालों को अपने दिमाग का इलाज कराने की जरूरत है)। हिंदुओं ने फ़ारसियों को नहीं कहा कि तुम हिंदुस्तान आओ और हमें अपने शब्द दो। उन्होंने हिंदी को कुछ गिनती के शब्द दिए तो यहां राज भी तो किया। वे शब्द तो उस राज के बदले कुछ भी सामान नहीं हैं। मैं हिंदी का सम्मान करता हूं, मैं हिंदी को गाली बक ही नहीं रहा। ऐसे तो कल को कोई कहने लगे कि जो ऑक्सिजन मैं ले रहा हूं वो ऑस्ट्रेलिया से बहकर आती है, इसलिए मैं उसे लेकर गद्दारी कर रहा हूं तो ये तो कुतर्क है, बकवास है। हा हा हा...मैं अंग्रेजी बोलता हूं, लेकिन अंग्रेज़ों को गाली बकता हूं हर दूसरे दिन। मैं कभी ऐसा नहीं करता। जो चीजें मैंने अपनाई हुई हैं, मैं उनके प्रति कभी असम्मान व्यक्त नहीं करता। मैने मेहनत करके अंग्रेजी सीखी है। मैं तो और भी कई भाषाएं सीखना चाहता हूं, खास तौर पर उर्दू। मौजूदा अंग्रेज़ों से कहां हिंदुस्तानियों का कोई वैर है? वे तो पुराने अंग्रेज़ थे, जिन्होंने भारत को गुलाम बनाया। हमने उन्हें मार भगाया। उनकी जो चीजें यहां रह गईं अंग्रेजी सहित वे हमारी हुईं, क्योंकि उन्होंने हमें सताया था। हिंदुओं ने जाटों को नहीं सताया। कुछ लोग कहेंगे कि 'शूद्र' कहा। संविधान ने तो नहीं कहा। कुछ लोग कहेंगे कि वर्ण व्यवस्था में स्थान नहीं दिया। जाटों ने खुद कभी वर्ण व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनना चाहा। यह उनकी विशेषता है। जाट तो हैं ही असली हिंदू। जाट से बढ़कर कोई हिंदू है ही नहीं। ऐसे में जो दिग्भ्रमित जाट किसी सोशल पोर्टल पर हिंदू धर्म को बुरा कहेंगे या तो वे हिंदू धर्म को छोड़ दें या इसकी बुराई करना बंद करें, नहीं तो गद्दार गिने जाएंगे।
मै, मै, मै, मै, मै, मै, मै, मै, मेरा, मन्ने, मुझे !!!!