Again a Gotra-Marriage Row!!

What right does anyone have to harm some one who has not harmed anyone.
What good do these societies and panchayats do to people? over and above that they won't even let people live the way they want, the way that gives them happiness and fulfillment.
A person goes and marries someone he/she loves and is compatible with. If you don't like it, don't talk to them. But how can anyone justify making their and thier family's life difficult. It's outrightly criminal. Such people should in fact be given strict punishment. People have their roots, livelihood and so many other things connected to their birth/home place/village. How can someone order them to leave everything and displace them. This is violation of basic human rights. Who gives us the rights to play dons? how can we support such things.
If you hear the bbc program on link given by Atish, it says around 90% of such cases happen in Haryana, Punjab and Western UP. So many people are being murdered. All those of us who support such views are kind of partly responsible for these murders.
And one more thing, such things are not followed in rest of the India and I don't see that all those parts of India/ world are cultureless/insensitive or anything. In fact I find many other parts far more culturely rich, better family structures, better educated and disciplined. So what exactly have we gained by trying to stick at such things which are even leadind to criminal acts like murders and human right viloations.
Why don't our panchayats sit and take decisions on trying to save family structures, speading peace and love, saving our folk music and other heritage or trying better agricultral methods, doing something to save the environment, trying to better the horrible education system in government schools (which is depriving so many children from quality life) and the list is unending. I haven't seen any 52 panchayats meetings on such important issues..
Meaningless and criminal waste of time is all I feel about this whole thing...
 
2 अगस्त को झज्जर में ढराना गौत्र विवाद के चलते सर्व खाप पंचायत का आयोजन किया गया | इस पंचायत में हमारे बड़े भाई नरेंदर जी खरब व भारती जी सिन्धु ने भी सिरकत की | सर्व खाप पंचायत में कई आवश्यक फैसले लिए गए | पंचायत द्वारा लिए गए फैसले :-
1) कादयान खाप को तन - मन - धन से सहयोग का वचन |
2) हिन्दू कोड में परिवर्तन के लिए न्यायलय तथा सरकार के सामने जाना होगा |
3) जाट समाज के जो लोग गोत्र प्रथा का विरोध कर रहे हैं उन्हें चेतावनी देनी होगी कि वे इस दुष्प्रचार को बंद करे नहीं तो समाज उनके विरूद्व प्रतिबन्ध लगाने पर विचार करेगा |
4) दुसरे समाज के लोग विशेषकर शाहनी जैसे खत्री जाति के व्यक्ति जो मानवधिकारों के बहाने हमारे समाज को तोड़ने का षड़यंत्र कर रहे हैं उनके समाज के खिलाफ जाट समाज को सख्त फैसले लेने होंगे |
5) मीडिया जाट पंचायतो को तालीबानी कह रहा हैं और हमारे समाज के भाई - बहन बच्चों को प्रेमी युगल कहकर उनकी हत्या करवा रहा हैं जो इसके लिए जिम्मेवार हैं | मीडिया एक तरफी बात का प्रचार न करे | जाटों कि गोत्र प्रथा को पुर्णतः समझ कर ही अपना प्रचार करे अन्यथा जाट कौम ने भी मीडिया के विरोध में कोई फैसला लेना होगा |
6) भांजी का मामला छोड़ दिया जाये |
7) पूर्ण मुदे का निचौड़ हैं कि हिन्दू कोड में गौत्र प्रावधान न होने पर हिन्दू जाटों को छोड़ दुसरे 80 करोड़ हिन्दुओ को हिन्दू कोड से कोई शिकायत नहीं तो साफ़ अर्थ हैं कि हिन्दू जाट हिन्दू नहीं हैं | वह आर्य हैं और उसकी संस्कृति और धर्म वैदिक हैं |
 
Gotra Row
Khap panchayat gets Jats’ support
Ravinder Saini​
Jhajjar, August 3
In a significant development in the ongoing row over the Kadyan Barha khap panchayat’s verdict to expel the Gehlout family from Dharana village here for alleged “violation” of social norms by marrying Ravinder Gehlout with a girl of Kadyan gotra, a large group of persons belonging to the Jat community have not only decided to support the stand of the khap panchayat, but also prepared a 10-point agenda for placing it at the Sarva khap panchayat meeting scheduled to be held on August 9 in Beri town here to take decisive steps regarding the controversy.

A decision to this effect was taken at a meeting held under the joint meeting of Om Prakash Dhankhar and Hawa Singh Sangwan here yesterday.
The meeting also decided to move the government as well as courts for getting amendments in the Hindu Marriage Act done besides warning the other communities against attempts to create division among the Jat community on the pretext of the human rights.
Jats, who attended the meeting, also maintained that they were ready to give all sorts of sacrifices to save the gotra custom, as it was an age-old system based on the principles of science.
Meanwhile, people belonging to the Gehlout gotra at Kheri Saadh village in Rohtak district have launched a campaign to mobilise the Gehlout khap members to come to the rescue of the affected family.
At a meeting held in the village, the villagers decided to convene a meeting of the Gehlout clan on Wednesday to take stock of the situation and evolve strategy to extend help to the affected Gehlout family.
The indefinite dharna by the Kadyan Barha khap members on the outskirts of Dharana village is on since Thursday.
The police is also deployed in the village and near the dharna venue to prevent any untoward incident.
The Gehlout family has also been living in Dharana village under heavy security cover after a week-long “exile” from the village bowing to the verdict of the khap panchayat.
 
महापंचायत ने निकाला रास्ता
राजेश कुमार, झज्जर ढराणा गोत्र विवाद को लेकर बेरी के राजकीय वरिष्ठ विद्यालय में रविवार को आयोजित सर्व खाप महापंचायत ने रविंद्र को अपनी पत्नी शिल्पा के साथ आजीवन और उसके पिता रोहताश गहलोत को तीन माह के लिए ढराणा गांव से बाहर रहने का फैसला सुना दिया। साथ ही रोहताश के भाइयों नसीब व वेदप्रकाश और कादियान बाहुल्य गांव में अपनी बेटी का रिश्ता करने वाले शिल्पा के पिता वेदप्रकाश निवासी सिवाह (पानीपत) के परिवार पर भी महापंचायत ने एक-एक कौड़ी का जुर्माना लगाने तथा किसी भी पक्ष द्वारा फैसला न माने जाने पर जातीय बहिष्कार का निर्णय भी किया। उधर महापंचायत के फैसले को मानते हुए देर शाम रोहतास ने अपने परिवार के साथ गांव छोड़
​
महापंचायत ने निकाला.. दिया। वे तीन माह बाद गांव लौटेंगे। इसके साथ ही गहलोत परिवार द्वारा अपने सभी मुकदमों को वापस लेने का फैसला भी दिया गया है। कादियान खाप के बुलावे पर बेरी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में रविवार को आयोजित सर्वखाप महापंचायत की अध्यक्षता दहिया खाप को दिए जाने पर दहिया खाप के प्रधान सुभाष दहिया ने महापंचायत की अध्यक्षता की। वहीं सर्वखाप महापंचायत में कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट भी हुई और एक छायाकार के कैमरे को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। गौरतलब है कि गांव ढराणा निवासी रोहतास गहलोत के पुत्र रविंद्र द्वारा कादियान गोत्र की लड़की शिल्पा के साथ शादी करने से भड़की कादियान खाप ने रविवार को सर्व खाप पंचायत बुलाई थी। महापंचायत में 50 से अधिक खापों व जाट समाज के संगठनों के सैकड़ों प्रतिनिधियों के अलावा कादियान खाप से जुड़े लगभग तीन हजार लोगों ने भाग लिया। सर्वखाप महापंचायत में दिन भर चली जिरह के दौरान कई बार नौबत टकराव तक आ गई, जिसके चलते कादियान खाप से जुड़े लोगों ने अन्य खापों के कई प्रतिनिधियों के साथ मारपीट भी की। हालांकि बुजुर्गो व मौजिज लोगों के बीच-बचाव के बाद पंचायत की कार्रवाई सुचारु हो पाई। महापंचायत की कार्रवाई आरंभ होते ही सभी खापों से एक-एक प्रतिनिधियों की कमेटी बनाई गई और कमेटी के निर्णय को मानने पर सहमति भी हुई। कमेटी के प्रतिनिधियों द्वारा फैसला सुनाते ही कादियान खाप से जुड़े सैकड़ों व्यक्ति भड़क गए और फैसले को न मानते हुए मारपीट पर उतारू हो गए। महापंचायत के मद्देनजर जिला प्रशासन ने गहलोत परिवार की सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी कर दिए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने भी गांव ढराणा का दौरा किया। महापंचायत में दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि प्रदेशों से आए प्रतिनिधियों के अलावा अहलावत 27 खाप के जय सिंह, कथूरा बारह से भले राम, गुलिया खाप से सतबीर, दहिया खाप के सचिव रणजीत सिंह, गहलावत के जगदीश मितराऊ आदि प्रतिनिधि भी मौजूद थे। कादियान बारहा खाप की अगुवाई कर रहे राज सिंह कादियान ने सर्वखाप महापंचायत के फैसले को माने जाने की बात कहते हुए सोमवार को एक बार फिर फैसले की समीक्षा के लिए धरनास्थल पर पंचायत करने की बात कही। फैसले के बावजूद धरनास्थल पर खाप से जुड़े लगभग चार दर्जन व्यक्ति मौजूद रहे। महापंचायत में वक्ताओं द्वारा जब-जब भी दोनों पक्षों की बात सुनकर फैसला दिए जाने की बात कही गई तो कादियान खाप से जुड़े व्यक्ति भड़कते नजर आए। इतना ही नहीं फैसले के विरोध में कादियान खाप के लोगों द्वारा किए गए हमले में अहलावत खाप के जगदीप अहलावत, गहलावत खाप के वीरेंद्र एडवोकेट, गांव सिवाना के दिनेश आदि को भी चोट पहुंची। अहलावत खाप के जगदीप अहलावत को जब एक गाड़ी में वहां से निकालने की कोशिश की जा रही थी तो उसे मारने पर उतारू भीड़ से उसे बचाने के दौरान पुलिस विभाग के एसआई पोहप सिंह व सिपाही राजबीर के साथ भी लोगों ने मारपीट की। हिंदू विवाह कानून है सभी विवादों की जड़ : विभिन्न खापों के प्रतिनिधियों ने हिंदू विवाह कानून में मौजूद खामियों को गोत्र विवाद का प्रमुख कारण बताया। अखिल भारतीय जाट महासभा के सचिव युद्धवीर सिंह ने कहा कि सामाजिक मूल्यों की परंपरा को बचाए रखना है तो समाज को एकजुट होकर हिंदू विवाह कानून में बदलाव के लिए संघर्ष करना होगा। कादमा बारह हवेली के प्रधान ने कहा कि जब तक सरकार बिल में संशोधन नहीं करती है सभी खापों के प्रबुद्ध लोगों की कमेटी का गठन कर नियम निर्धारित किए जाएं, जिनसे सभी खापों को अवगत कराया जाए। ​
 
रही बात हत्या की तो जो आदमी खानदानी हो स , उसकी छोरी इसा काम कर दे तो उसके लिए मरने जैसा हो जाता हैं इस लिए वो लोग हत्या करते हैं | नहीं तो अपने औलाद ने मार के कोई राजी कोनी हो | यहाँ जो लोग ऐसी बात कर रहे हैं वो लोग खानदानी नहीं लगते क्योंकि जो खानदानी होगा उसके खून में उबाल जरुर आएगा |
 
Khandan murder karne sikhaya karein!!! ya baat tai manne aaj tak bera e na tha!!!

And those who say that this parampara of jats is based on scientific facts, how will then one justify not allowing marriage of Kadyans and gehlawats.. they cannot be genetically connected. And as far as the scientific fact is concerned, people can always convince kids about its harms and dissuade them from marrying within cousins.That won't need such harsh steps to implement. Moreover it is believed (scientifically) that possibility of genetics problems becomes almost zero after 3-4 generations, how do we argue on that basis that in such large villages, (or even for different villages with same gotra) marriages are disallowed on the basis of science. I seriously don't believe that all these panchayats are taking these decisions very scientifically.
 
रही बात हत्या की तो जो आदमी खानदानी हो स , उसकी छोरी इसा काम कर दे तो उसके लिए मरने जैसा हो जाता हैं इस लिए वो लोग हत्या करते हैं | नहीं तो अपने औलाद ने मार के कोई राजी कोनी हो | यहाँ जो लोग ऐसी बात कर रहे हैं वो लोग खानदानी नहीं लगते क्योंकि जो खानदानी होगा उसके खून में उबाल जरुर आएगा |

agar itne hi khaandaani hote hai to aatamhatya kyun nahi kar lete. doosre ki hatya kyun karte hai?......ye log khaandaani nahi ego se bhare log hote hai. doosre ko maarne ka haq unhe nahi hai, haan khud ko jaroooor maar sakte hai khushi se
 
agar itne hi khaandaani hote hai to aatamhatya kyun nahi kar lete. doosre ki hatya kyun karte hai?......ye log khaandaani nahi ego se bhare log hote hai. doosre ko maarne ka haq unhe nahi hai, haan khud ko jaroooor maar sakte hai khushi se
yo to gottar ka rola s jat to unn a rola ho kise gailya to bhi manas maar diya kare ;)
 
Originally posted by AATISH MOHAN [Head of panchayat Raj singh's opinion over gotra marriage:"humari parampra ye kehti hai ki jis gotra ka kheda ho us gotra ke andar ussi gotra ki ladki bhayi hui nahi aa sakti"
I am completely agree with this statement.

ये जरूरी नहीं की सब परम्पराएँ मानव कल्याण के लिए हो. कुछ परम्पराएँ कुरितिअन भी होती है . आदमी को परम्परे का अंधाधुन्द पालन नहीं करना चाहिए, उसे अपने विवेक से सोचना चाहिए की ये परंपरा समाज के कल्याण , हित के लिए है या नहीं, या हम लोग सिर्फ इसे एक भोझ की तरह उठे रहे हैं
कुछ १००-२०० s साल पहले बनी परम्पराओं को तो हम छाती से चिपका कर बैठे है और पुरातन सत्य सनातन वैदिक परम्पराओं को हमने छोड़ दिया है. जिनको आप परंपरा कह रहे है ये ४००-५०० साल से ज्यादा पुराणी नहीं है और हो सकता है वो उस समय के लिए ठीक हो , पर अब उनका अन्धानुकरण ठीक नहीं , परंपरा , कानून समाज कल्याण के लिए है, समाज या मनुष्ये इनके लिए नहीं है.
सब कार्ये धर्मानुसार , यथायोग्ये विचार करके करने चाहिए , न की बस परंपरा के पालन के लिए
जो भी समाज के हित मैं हो उसी को एक नयी परंपरा बना लेना चाहिए , और पुराणी को छोड़ देना चाहिए
वेद् मैं लिखा है की अपने पिता के गोत्र मैं और माँ के कुल की ६ generations मैं विवाह नहीं करना चाहिए ,, इस से ऊपर आपको क्या प्रामाण और परंपरा चाहिए ?
khaap की परंपरा वेद् की परंपरा से तो ऊपर नहीं है न भाई
 
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7) पूर्ण मुदे का निचौड़ हैं कि हिन्दू कोड में गौत्र प्रावधान न होने पर हिन्दू जाटों को छोड़ दुसरे 80 करोड़ हिन्दुओ को हिन्दू कोड से कोई शिकायत नहीं तो साफ़ अर्थ हैं कि हिन्दू जाट हिन्दू नहीं हैं | वह आर्य हैं और उसकी संस्कृति और धर्म वैदिक हैं |

अगर जाट का धर्म वैदिक आर्य है तो फिर ये खाप उसका पालन क्यूँ नहीं कर रही .
वेद् मैं तो केवल इतना लिखा है की पिता के गोत्र मैं और माँ के कुल की ६ generations मैं विवाह नहीं करना चाहिए .
ये भाईचारे वाली बात कही भी नहीं लिखी गयी ,
खाप नेतो इस नियम को बहोत पेचीदा बना दिया है, उसमे उल जलूल नियम जोड़कर उसे भानुमती का पिटारा बना दिया
एक सीधा सा नियम वेद् मैं दिया गया है, उसे वैसे ही क्यूँ नहीं रहने देते भाई ?
पर अगर ऐसा न करें तो ये खाप अपनी घटिया राजनीती कैसे खेलेंगी ,
 
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/haryana/4_6_5701281.html

परम्पराओं को दरकिनार कर होने वाली शादियों(खासतौर पर जाट समाज से जुड़ी) से होने वाले विवादों व ऑनर-किलिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इनकी रोकथाम के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा कानून बनाए जाने की घोषणा के बाद जाट समुदाय से जुड़ी खापों व संगठनों ने हिन्दू मैरिज एक्ट को निशाने पर लेते हुए परम्पराओं को बचाए रखने के लिए उसमें संशोधन करवाने की खातिर मुहिम छेड़ने का निर्णय ले लिया है। सदियों से चली आ रही परम्पराओं को कायम रखने के लिए जहां पूरे समुदाय को अभियान चलाकर एकजुट करते हुए संघर्ष किया जाएगा, वहीं ऐतिहासिक तथ्यों को जुटाकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक्ट में संशोधन के लिए याचिका भी डाली जाएगी। इस संबंध में रणनीति तैयार करने व उसे अमलीजामा पहनाने के लिए 23 अगस्त को दिल्ली के एक पंचतारा होटल में जाट समाज के लेखकों व बुद्धिजीवियों के अलावा लगभग 3 दर्जन विभिन्न जाट संगठनों के पदाधिकारियों का जमावड़ा लगेगा, जिसमें सिर्फ इसी विषय को लेकर गहन मंथन किया जाएगा। जाट तख्त के महासचिव डॉ. ओमप्रकाश धनखड़ ने पूरे मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि 23 अगस्त की बैठक में रणनीति तैयार करने के बाद तथ्यों के साथ मीडिया को भी जाट समाज की समृद्ध परम्पराओं व उनके वैज्ञानिक आधार के साथ अवगत कराया जाएगा। इतना ही नहीं सामाजिक मामलों में विशेष रुचि लेने वाले एडवोकेट चन्द्र सिंह दलाल द्वारा भी हिन्दू मैरिज एक्ट में संशोधन के लिए तैयार की जाने वाली रणनीति पर कार्य शुरू कर दिया गया है और उन्होंने भी सितम्बर माह में रोहतक की छोटूराम धर्मशाला में विभिन्न खापों व जाट संगठनों के प्रतिनिधियों तथा समाज से जुड़े बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों की एक महापंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया है। महापंचायत की तिथि भी शीघ्र ही विचार विमर्श के बाद निर्धारित कर दी जाएगी। डॉ. धनखड़, पूर्व कमांडर हवा सिंह सांगवान, अखिल भारतीय जाट महासभा के सचिव युद्धबीर सिंह आदि जाट संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार जाट समाज की परम्पराओं को हिन्दू मैरिज एक्ट में स्थान नहीं दिया गया, क्योंकि इस बिल को बनाते समय उनके समाज से जुड़ा कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं किया गया था। इतना ही नहीं विभिन्न जाट संगठनों के प्रतिनिधि जाटों को हिन्दू न मानते हुए मूल रूप से आर्य बताते हुए वैदिक धर्म के अनुयायी मानते है और मुख्य रूप से इसी को आधार मानते हुए मैरिज एक्ट में बदलाव चाहते है। इतना ही नहीं अपनी परम्पराओं के संबंध में ऐतिहासिक तथ्यों सहित वैज्ञानिक तथ्यों का भी हवाला दे रहे है। दरअसल परम्पराओं के टूटने से आहत होने के अलावा विवादों के चलते कानूनी दांव-पेंचों में उलझने से होने वाली परेशानियों के चलते ही जाट समुदाय के लोगों ने इस परेशानी की जड़ हिन्दू मैरिज एक्ट को ही माना है। इस संबंध में डॉ. धनखड़ का कहना है कि संविधान निर्माण के समय हर क्षेत्र के जाति व धर्म के आधार पर उनकी परम्पराओं को तो शामिल कर लिया गया लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश व राजस्थान के कुछ हिस्से के अलावा पूरे हरियाणा राज्य में बसने वाली जाट बेल्ट की परम्पराओं को संविधान में स्थान नहीं दिया गया और कानून के पक्ष में होने के चलते ही अनेक युगल परम्पराओं को तोड़ने का दम-खम दिखा रहे है।
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http://in.jagran.yahoo.com/news/local/haryana/4_6_5701281.html

इतना ही नहीं विभिन्न जाट संगठनों के प्रतिनिधि जाटों को हिन्दू न मानते हुए मूल रूप से आर्य बताते हुए वैदिक धर्म के अनुयायी मानते है और मुख्य रूप से इसी को आधार मानते हुए मैरिज एक्ट में बदलाव चाहते है।
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PS: Ravi Ji, Laxman Ji, Dnd Ji, Narender Kharab Ji,

Since this is official statement of various representatives including Historians.

My point is:-

1)Shall we stop considering Scythian, Indo-Scythian origion of Jats ? So shall we re-consider what has been written in Jatland Wiki about Scythian?

2) Is Statement in Red true factualy, historicaly , scientificaly and established?

Please be precise and decisive.
 
Police is thinking to setup safe houses for these lovers...

For eg. Chora chori gaam main teh baaje. .Sehr main jaa ke rehan laag gaye (Safe house main Police walon ke nigrani main) ..Mama har bhi ek ke gaam main ar Chacha-Bua bhi usse Gaam main..

Gajab ke scheme hai police ke..

On the serious note, We need a brain storming session to resolve this issue because there are almost 10-15 cases coming per month and something has to be changed..
Read the full story below:

http://timesofindia.indiatimes.com/...es-for-runaway-lovers/articleshow/4887806.cms
 
2 अगस्त को झज्जर में ढराना गौत्र विवाद के चलते |
7) पूर्ण मुदे का निचौड़ हैं कि हिन्दू कोड में गौत्र प्रावधान न होने पर हिन्दू जाटों को छोड़ दुसरे 80 करोड़ हिन्दुओ को हिन्दू कोड से कोई शिकायत नहीं तो साफ़ अर्थ हैं कि हिन्दू जाट हिन्दू नहीं हैं | वह आर्य हैं और उसकी संस्कृति और धर्म वैदिक हैं |

क्यों बाकी हिन्दुवों में भी एसे ही गोत्र बचाते है क्या . गुज्जरों में भी
एसे ही गोत्र खाप का कायदा चलता है . पंडितो में भी गाँव
या आस पास के गाँव में रिश्ते नही होते . फरक सिर्फ इतना है
की जाट ये सामाजिक बंधन तोड़ने वालो को दंड दे देते है .
और बाकि हिन्दू चुपचाप बैठ जाते है
 
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/haryana/4_6_5701281.html

परम्पराओं की खातिर

झज्जार।
परम्पराओं को दरकिनार कर होने वाली शादियों(खासतौर पर जाट समाज से जुड़ी) से होने वाले विवादों व ऑनर-किलिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इनकी रोकथाम के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा कानून बनाए जाने की घोषणा के बाद जाट समुदाय से जुड़ी खापों व संगठनों ने हिन्दू मैरिज एक्ट को निशाने पर लेते हुए परम्पराओं को बचाए रखने के लिए उसमें संशोधन करवाने की खातिर मुहिम छेड़ने का निर्णय ले लिया है। सदियों से चली आ रही परम्पराओं को कायम रखने के लिए जहां पूरे समुदाय को अभियान चलाकर एकजुट करते हुए संघर्ष किया जाएगा, वहीं ऐतिहासिक तथ्यों को जुटाकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक्ट में संशोधन के लिए याचिका भी डाली जाएगी। इस संबंध में रणनीति तैयार करने व उसे अमलीजामा पहनाने के लिए 23 अगस्त को दिल्ली के एक पंचतारा होटल में जाट समाज के लेखकों व बुद्धिजीवियों के अलावा लगभग 3 दर्जन विभिन्न जाट संगठनों के पदाधिकारियों का जमावड़ा लगेगा, जिसमें सिर्फ इसी विषय को लेकर गहन मंथन किया जाएगा। जाट तख्त के महासचिव डॉ. ओमप्रकाश धनखड़ ने पूरे मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि 23 अगस्त की बैठक में रणनीति तैयार करने के बाद तथ्यों के साथ मीडिया को भी जाट समाज की समृद्ध परम्पराओं व उनके वैज्ञानिक आधार के साथ अवगत कराया जाएगा। इतना ही नहीं सामाजिक मामलों में विशेष रुचि लेने वाले एडवोकेट चन्द्र सिंह दलाल द्वारा भी हिन्दू मैरिज एक्ट में संशोधन के लिए तैयार की जाने वाली रणनीति पर कार्य शुरू कर दिया गया है और उन्होंने भी सितम्बर माह में रोहतक की छोटूराम धर्मशाला में विभिन्न खापों व जाट संगठनों के प्रतिनिधियों तथा समाज से जुड़े बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों की एक महापंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया है। महापंचायत की तिथि भी शीघ्र ही विचार विमर्श के बाद निर्धारित कर दी जाएगी। डॉ. धनखड़, पूर्व कमांडर हवा सिंह सांगवान, अखिल भारतीय जाट महासभा के सचिव युद्धबीर सिंह आदि जाट संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार जाट समाज की परम्पराओं को हिन्दू मैरिज एक्ट में स्थान नहीं दिया गया, क्योंकि इस बिल को बनाते समय उनके समाज से जुड़ा कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं किया गया था। इतना ही नहीं विभिन्न जाट संगठनों के प्रतिनिधि जाटों को हिन्दू न मानते हुए मूल रूप से आर्य बताते हुए वैदिक धर्म के अनुयायी मानते है और मुख्य रूप से इसी को आधार मानते हुए मैरिज एक्ट में बदलाव चाहते है। इतना ही नहीं अपनी परम्पराओं के संबंध में ऐतिहासिक तथ्यों सहित वैज्ञानिक तथ्यों का भी हवाला दे रहे है। दरअसल परम्पराओं के टूटने से आहत होने के अलावा विवादों के चलते कानूनी दांव-पेंचों में उलझने से होने वाली परेशानियों के चलते ही जाट समुदाय के लोगों ने इस परेशानी की जड़ हिन्दू मैरिज एक्ट को ही माना है। इस संबंध में डॉ. धनखड़ का कहना है कि संविधान निर्माण के समय हर क्षेत्र के जाति व धर्म के आधार पर उनकी परम्पराओं को तो शामिल कर लिया गया लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश व राजस्थान के कुछ हिस्से के अलावा पूरे हरियाणा राज्य में बसने वाली जाट बेल्ट की परम्पराओं को संविधान में स्थान नहीं दिया गया और कानून के पक्ष में होने के चलते ही अनेक युगल परम्पराओं को तोड़ने का दम-खम दिखा रहे है।
 
Last edited:
Aryans were a branch of Scythians.


PS: Ravi Ji, Laxman Ji, Dnd Ji, Narender Kharab Ji,

Since this is official statement of various representatives including Historians.

My point is:-

1)Shall we stop considering Scythian, Indo-Scythian origion of Jats ? So shall we re-consider what has been written in Jatland Wiki about Scythian?

2) Is Statement in Red true factualy, historicaly , scientificaly and established?

Please be precise and decisive.
 
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