Mil Malamaal kisan kangal: amar ujala
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शुगर मिल मालामाल, किसान कंगाल
बकाया से करोड़ं का मिल को मुनाफा
चौधरी अजित सिंह भी गंभीर अजय तोमर
बागपत। छपरौली विधायक अजय तोमर ने कहा कि चौधरी अजित सिंह भी इस मुददे परगंभीर हैं, उन्होंने मिल अधिकारियों पर जल्द पेमेंट का दबाव बनाया हुआ है और वह उनसे वार्ता कर रहे हैं, वह भी खुद मिल वालों पर पेमेंट का दबाव बना रहे हैं,रालोद जिलाध्यक्ष के नेतृतव में पिछले दिनो डीएम से मिलकर कार्यकर्ताओें ने भी इसपर रोष जताया था और कार्रवाई की मांग की थी।
जून तक बकाया पेमेंट करना होगा : डीएम
बागपत। डीएम मयूर महेश्वरी का कहना है कि चीनी मिल परसख्ती की जा रही है। मिल के लिए एक लाख बोरे प्रति माह बेचने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे बेचकर वह किसानों का पेमेंट करेंगी।डीसीओ इसकी निगरानी करेंगे, मिल को स्पष्ट हिदायत दे दी गई है कि मिल को जून तक इस पेराई सत्र का चुकता पेमेंट करना होगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो कार्रवाई की रणनीति बनानी होगी।
ब्याज सहित करना होगा पेमेंट : डीसीओ
बागपत। डीसीओ शेरबहादुर सिंह का कहना है कि चीनी मिल को लेट पेमेंट का ब्याज किसानो को देना होगा, यह किसानो का ्रहकहै और इसे उन्हें दिलाया जाएगा, ब्याज के लिए भी मिल को लिखा जा चुका है। यदि ब्याज का प्रावधान हो जाएगा तो मील मनमानी नहीं कर सकती है।
महेंद्र सिंह टिकैत से हो रही वार्ता : भाकियू
बागपत। मलकपुर मिल का तो हर साल का यह किस्सा हो गया है,किसानों को महीनो बाद पेमेंट करना उसकी आदत बन गई है, किसानो को समय पर पेमेंट दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है,किसान पेमेंट ना मिलने से कर्ज लेने को मजबूर हो रहा है,वह इस मामले पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत से वार्ता कर रहे हैं। किसान की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण कई लोगों तो आत्महत्या कर चुके हैं और अन्य कई तो रोटी के लिए भी जूझ रहे।
कड़वा सच
बागपत। किसानों के गन्ने से चीनी मिलें दोहरा मुनाफा कमा रही है, पहला चीनी बनाकर और दूसरा किसानों के गन्ने का पेमेंट रोककर। जनपद की तीन चीनी मिलों पर किसानों का एक अरब 39 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें से मलकपुर मिल पर ही किसानों का एक अरब 13 करोड़ बकाया है। पेमेंट न मिलने से किसानों के बच्चो के दाखिले और शादियां अटक गई हैं, वहीं चीनी मिलें पेमेंट रोककर ही ब्याज के रुप में दो करोड़ से भी ज्यादा का मुनाफा महीने वार कमा रही हैं।
पेराई सत्र शुरू होने पर मिलों के लिए जो नियमावली लागू की जाती है उसके मुताबिक चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 15 दिन केभीतर पेमेंट करना होता है, लेकिन मिलों केलिए यह नियम कोई मायने नहीं रखता। जनपद की तीनों मिलों पर किसानों का एक अरब 39 करोड़ गन्ना मूल्य बकाया है।
पिछले साल की तरह इस बार भी मलकपुर मिल ने किसानों का पेमेंट रोक लिया है। गन्ना विभाग केआकंडों के मुताबिक मलकपुर मिल ने अब तक 82.72 लाख कुंतल गन्रा खरीदा है जिसका पेमेंट एक अरब 96 करोड केआसपास बैठता है लेकिन मिल ने इसमें से 24 जनवरी तक की खरीद का ही महज 83 करोड़ का ही पेमेंट किया है। करीब दो महीने का बकाया मिलों पर हो गया है जिसमें से डेढ़ महीने का लेट पेमेंट मिल पर बैठता है। बकाया रकम पर दो प्रतिशत ब्याज की दर से आकलन किया जाए तो करीब दो करोड़ से अधिक का मिल को प्रति माह मुनाफा अलग से होता है। पेमेंट केमामले में पिछले सालों में भी मिल ने यही किया था। क रोड़ं बकाया होने पर भी कलि को मिल ने अपने पेमेंट में सुधार नहीं किया और इस साल भी किसानो को पेमेंट में रुलाया।
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अटक गई शादी और एडमिशन
मलकपुर मिल से किसानों का गन्ना पेमेंट अटक जाने से उनकेबच्चों के एडमिशन अटक गए हैं।
छपरौली के किसान ओमपाल सिंह ने बताया कि उनका करीब सवा चार लाख रुपये मलकपुर मिल पर बकाया है। उनका बेटा इंजीनियरिंग कर रहा है लेकिन, अब फीस जमा करने को धन नहीं है। पिछले साल भी मलकपुर मिल ने इसी तरह परेशान किया था जिस कारण उनसे इस साल केवल 25 बीघा में ही गन्ना बोया है, जबकि पिछले साल उन्होंने 90 बीघा में गन्ने की फसल बोई थी।
रणवीर सिंह का कहना था कि उसका मिल पर डेढ़ लाख बकाया है। उसके दो बच्चे दिल्ली में पढ़ते हैं लेकिन उनकी फीस के लिए उनके पास धन नहीं है। नत्थू ने 2500 कुंतल गन्ना मिल को दिया है उसके करीब अभी भी तीन लाख रुपये मिल पर बकाया है।
अतर सिंह ने बताया कि उन्हें अपने बेटे की शादी करनी थी लेकिन, शादी के लिए धन ही नहीं है मलकपुर मिल पर उनका तीन लाख बकाया है। पिछले साल भी मिल ने उन्हें पेमेंट में रुलाया था जिस कारण इस बार उसने 40बीघा से घटाकर 25 बीघा फसल कर दी है।
सहदेव सिंह का कहना है कि मलकपुर मिल का तो हर साल का ही यही किस्सा है, पिछले साल भी उन्हें महीनो बाद पेमेंट मिला था इस साल भी उनका तीन लाख पेमेंट मिल पर है। उनकी बेटी एमसीए कर रही है जिसके एडमिशन और पढ़ई में दिक्कत हो रही है। किसान मिल के पेमेंट से रोष में थे उनका कहना था कि हर साल मलकपुर मिल यही करती है लेकिन कोई सुनता नहीं। किसानों का कहना है कि उनके पास और कोई विकल्प नहीं है। सरकार को इसमें कुछ करना चाहिए।