albaadi baalkaan key kissey.

Mama Bhanja

बाई मैं यो पोस्ट अपनी कुरुक्षेत्र आली भासा मान लिखूंगा, थोड़ी अलग हो सका है, एक मैं सरदार हूँ, थोड़ी पंजाबी का फलेवर बी आवागा, ठेठ जाटू भाषा ते अलग हो सका, पर मन्ना घनी प्यारी योही स |

सो एन्जॉय...


मेरा एक चाचा आ, यादविंदर अहलावत,
मेरी बुआ का छोकरा आया एक बारी, ओह था तो ३-४ साल का पर बड़ा शरारती था,
उस ते कुछ बी जोर दे का कह देयो ओह जोर जोर का रोण लग जा था, न कदी किसी का कहना माना था,
उन्ह पक्का दबंग |
जे कोई कहदे अक बेटे यो काम करिए अग्गे ते अक्कड़ का पड़ा था,
ओह मेरे चाचे यादविंदर ते बड़ा चल्या करा था,
उस दिन मेरा चाचा अपनी कार पा कपडा मार रया था,
ओह उसके धोरा आके खड़ा होगेया,
मेरा चाचा बोल्या जा बेटे एक मग्गा पानी का भर का ल्या |
बाई यो कहन दे ओह अकड़ का पड्या, आर बोल्या आपी लिया ना,


मेरे चाचे ना ठान ली अक इन्ना इब का सुधार का भेजूंगा,
उसना ओह पुचकार का कार के मांह बठा लिया, आर Stereo की आवाज़ खोल दी,
सीसे उप्पेर करका
बस फेर पकड़ लिया, दे थपड, दे मुक्का, दे गद्दा... न्यू कहा छोड़ दे इब मानुगा कहना,
आर चिन्घाड़ा मारा बुरी तरा, पर किस ना सुना...


अच्छी टकोर करका छोड्या, भाजता होया गया मेरी बुआ धोरा, रोने ते ना अटा,
बुआ बोली क्या होया इसका, चाचा बोलेया, हाथ सीसे मां आगेया जद रोवा |


उस दिन ते बाद चाचे की आँख ते चलण लग गया, पर बई शरारत ते बाज नि आया रब का बंदा...
 
बाई मैं यो पोस्ट अपनी कुरुक्षेत्र आली भासा मान लिखूंगा, थोड़ी अलग हो सका है, एक मैं सरदार हूँ, थोड़ी पंजाबी का फलेवर बी आवागा, ठेठ जाटू भाषा ते अलग हो सका, पर मन्ना घनी प्यारी योही स |

सो एन्जॉय...




मेरा एक चाचा आ, यादविंदर अहलावत,
मेरी बुआ का छोकरा आया एक बारी, ओह था तो ३-४ साल का पर बड़ा शरारती था,
उस ते कुछ बी जोर दे का कह देयो ओह जोर जोर का रोण लग जा था, न कदी किसी का कहना माना था,
उन्ह पक्का दबंग |
जे कोई कहदे अक बेटे यो काम करिए अग्गे ते अक्कड़ का पड़ा था,
ओह मेरे चाचे यादविंदर ते बड़ा चल्या करा था,
उस दिन मेरा चाचा अपनी कार पा कपडा मार रया था,
ओह उसके धोरा आके खड़ा होगेया,
मेरा चाचा बोल्या जा बेटे एक मग्गा पानी का भर का ल्या |
बाई यो कहन दे ओह अकड़ का पड्या, आर बोल्या आपी लिया ना,


मेरे चाचे ना ठान ली अक इन्ना इब का सुधार का भेजूंगा,
उसना ओह पुचकार का कार के मांह बठा लिया, आर Stereo की आवाज़ खोल दी,
सीसे उप्पेर करका
बस फेर पकड़ लिया, दे थपड, दे मुक्का, दे गद्दा... न्यू कहा छोड़ दे इब मानुगा कहना,
आर चिन्घाड़ा मारा बुरी तरा, पर किस ना सुना...


अच्छी टकोर करका छोड्या, भाजता होया गया मेरी बुआ धोरा, रोने ते ना अटा,
बुआ बोली क्या होया इसका, चाचा बोलेया, हाथ सीसे मां आगेया जद रोवा |


उस दिन ते बाद चाचे की आँख ते चलण लग गया, पर बई शरारत ते बाज नि आया रब का बंदा...



तेजा भाई इह में अल्बाद कित स ?
 
हाँ भाई कह ल्यो | इब्ब सुधे माणस नु कोए किम्मे भी कह ले | गरीब की जोरू सब की भाभी |

Sudha Manas .......................................... Gareeb ..............................................

Bhai sa aa baat bhi albaad hu kam koni .........................

:) :) :)
 
बाई मैं यो पोस्ट अपनी कुरुक्षेत्र आली भासा मान लिखूंगा, थोड़ी अलग हो सका है, एक मैं सरदार हूँ, थोड़ी पंजाबी का फलेवर बी आवागा, ठेठ जाटू भाषा ते अलग हो सका, पर मन्ना घनी प्यारी योही स |

सो एन्जॉय...


मेरा एक चाचा आ, यादविंदर अहलावत,
मेरी बुआ का छोकरा आया एक बारी, ओह था तो ३-४ साल का पर बड़ा शरारती था,
उस ते कुछ बी जोर दे का कह देयो ओह जोर जोर का रोण लग जा था, न कदी किसी का कहना माना था,
उन्ह पक्का दबंग |
जे कोई कहदे अक बेटे यो काम करिए अग्गे ते अक्कड़ का पड़ा था,
ओह मेरे चाचे यादविंदर ते बड़ा चल्या करा था,
उस दिन मेरा चाचा अपनी कार पा कपडा मार रया था,
ओह उसके धोरा आके खड़ा होगेया,
मेरा चाचा बोल्या जा बेटे एक मग्गा पानी का भर का ल्या |
बाई यो कहन दे ओह अकड़ का पड्या, आर बोल्या आपी लिया ना,


मेरे चाचे ना ठान ली अक इन्ना इब का सुधार का भेजूंगा,
उसना ओह पुचकार का कार के मांह बठा लिया, आर Stereo की आवाज़ खोल दी,
सीसे उप्पेर करका
बस फेर पकड़ लिया, दे थपड, दे मुक्का, दे गद्दा... न्यू कहा छोड़ दे इब मानुगा कहना,
आर चिन्घाड़ा मारा बुरी तरा, पर किस ना सुना...


अच्छी टकोर करका छोड्या, भाजता होया गया मेरी बुआ धोरा, रोने ते ना अटा,
बुआ बोली क्या होया इसका, चाचा बोलेया, हाथ सीसे मां आगेया जद रोवा |


उस दिन ते बाद चाचे की आँख ते चलण लग गया, पर बई शरारत ते बाज नि आया रब का बंदा...


दरअसल इस्मा गलाई (अल्बादी) करण आल्या न काबू करण की तरकीब बताई मन्ना |
 
Last edited:
दरअसल इस्मा गलाई (अल्बादी) करण आल्या न काबू करण की तरकीब बताई मन्ना |

Aaaaa Maree Yaar ............Sidha Naa Keh Deyee Balhara Sahab Ka Illaz Laya Sun Kaad k..............
 
na bhai Ravinder, albaad ka 'patent' te tere dhore ae se :D , or ke kisse pe hove se albaad :rock

ना भाई मन्ने कद कही स अक होर कोए कोणी कर सकदा | तू कर ले अल्बाद ,तेरे के किस्से ने गोला लाठी दे राखी स |
 
Aaaaa Maree Yaar ............Sidha Naa Keh Deyee Balhara Sahab Ka Illaz Laya Sun Kaad k..............

राणा साब आप समझ गे फेर, हैं? पर जान का न लिखी मन्ना अक पहलां ही रविंदर बाई साब मेरी किसे पोस्टिंग न लाइक न करते, और सब की कराँ | मखा किते होर मेरा इ इलाज करदे |
 
मेरे काका हर का एक बड्डा जत्था होया करदा स्कूल के खिलाड़ी बालकां का | वे २०-२५ जणे हर १०-१५ दिना में रोहतक जाया करदे फिलम देखन खातर | एर वे एक तेथन करलिया करदे सालम ,लावण एर लेजावाण खातर| एर हमेशा रात का आख़री शो देख्या करदे ,घर्कयाँ तें लूक्मा | एक बे तेथन आला उनने छोड़ कें कित्ते चालया गया | तो वे बाय पास पे आगे एर एक ट्रक में लद्द लिए रात के एक बजे | जब महारा गाम आया तो ट्रक आले ने रोक्या-अ कोणी | वो दारु पी रया था | ऊनेंने उका सारा सामान मदीने की थलियाँ धोरे तले बागा दिया | तिरपाल ,तखते, जेवड़े , स्टेपनी एर आखिर में उनके जैक थया गया | वो मर्या ट्रक के बोनट पे २०-२५ किलो का | ट्रक सन्तर में उतर कें थम गया | फेर ड्राईवर एर क्लीनर दोनुआ की ठुकाई करी आछी धालाँ | एर वो सारा बगाया होया सामान चक लाये एर माहरे घेर में लूको दिया | गाम के एक आदमी धोरे २-३ ट्रक थे ऊ ताहि वो सामान बेच दिया | उनका ३-४ मिन्हा का फिलम देखन का जुगाड़ हो गया |

ravinder jee, aap to khandani albadi dikho ho.........:) :)
(bura mat maniyo, majak s)
 
नरेंदर हर ने आपणे घेर में एक लेट्रीन बणा राखी थी | घेर की कुण में एक चार बाई चार की भींत सी खींच के ने | वा लेट्रीन उप्पर तें खुल्ली थी ओटड़याँ जितणी ऊंचाई पे | उहने उनके घर की लुगाई-ए बर्त्या करदी | ९-१० बजे चुह्ड़ी ला राखी थी वा साफ़ कर जांदी | नरेंदर के घरां में एक ताऊ का छोरा आछी बड्डी सी उम्र का (उह का ना "कोरी" था (कँवर सिंह )अर यु वो -ए था जो आए साल होली की लाकडीयाँ की गाड्डी भर लाया करदा ,अर हामने उनके बिटोड़याँ में आग लाइ थी ) ११-१२ बजे सी जब घेर में कोए नि होन्दा, आंदा ,अर उह में रोग काट जांदा | ये न्यू सोचदे अक कुण से जो आड़े यु काम करे स | नरेंदर एक दिन बोल्या अक आज्या उह ने पाकडाँगे कुण स | उनके घेर के साहरे एक जाल थी ,हाम तीनू जाने उह पे लुक के ने बैठ गे | माडी सी वार पाछे-ए कोरी आ लिया अर न्यून-न्यून लखा के ने बड़ग्या | नरेंदर हर के घेर के सहारे एक खाली गीतवाड़ा पडया था | हाम गए ते न्यू थे अक उह के डले मार के ने भाज ज्यांगे ,पर हामने न्यू सोची अक यु गेल भाज के कदे म्हारे मार ना दे | हामने उड़े छड़े पड़े थे कीकर के वे उह लेट्रीन में गेर दिए ओटड: के उप्पर के | कोरी दब गा तले अर मारे चिंघाड़ | हाम ते जांदे रहे उथों | पर उह दन पाछे कोरी की हिम्मत ना रही लेट्रीन में बैठ के पाछे पे आराम तें खाज करण की | हग्दोड़ा चोर |
 
नरेंदर हर ने आपणे घेर में एक लेट्रीन बणा राखी थी | घेर की कुण में एक चार बाई चार की भींत सी खींच के ने | वा लेट्रीन उप्पर तें खुल्ली थी ओटड़याँ जितणी ऊंचाई पे | उहने उनके घर की लुगाई-ए बर्त्या करदी | ९-१० बजे चुह्ड़ी ला राखी थी वा साफ़ कर जांदी | नरेंदर के घरां में एक ताऊ का छोरा आछी बड्डी सी उम्र का (उह का ना "कोरी" था (कँवर सिंह )अर यु वो -ए था जो आए साल होली की लाकडीयाँ की गाड्डी भर लाया करदा ,अर हामने उनके बिटोड़याँ में आग लाइ थी ) ११-१२ बजे सी जब घेर में कोए नि होन्दा, आंदा ,अर उह में रोग काट जांदा | ये न्यू सोचदे अक कुण से जो आड़े यु काम करे स | नरेंदर एक दिन बोल्या अक आज्या उह ने पाकडाँगे कुण स | उनके घेर के साहरे एक जाल थी ,हाम तीनू जाने उह पे लुक के ने बैठ गे | माडी सी वार पाछे-ए कोरी आ लिया अर न्यून-न्यून लखा के ने बड़ग्या | नरेंदर हर के घेर के सहारे एक खाली गीतवाड़ा पडया था | हाम गए ते न्यू थे अक उह के डले मार के ने भाज ज्यांगे ,पर हामने न्यू सोची अक यु गेल भाज के कदे म्हारे मार ना दे | हामने उड़े छड़े पड़े थे कीकर के वे उह लेट्रीन में गेर दिए ओटड: के उप्पर के | कोरी दब गा तले अर मारे चिंघाड़ | हाम ते जांदे रहे उथों | पर उह दन पाछे कोरी की हिम्मत ना रही लेट्रीन में बैठ के पाछे पे आराम तें खाज करण की | हग्दोड़ा चोर |

भियो जमा भिघनी पड्या स तू भी ....................हहहहहहहहहहाहा
 
म्हारे घरां में ,मेरा एक ताऊ था, चतरू (चतर सिंह ) यु भी अते-हे का तकिया कलाम लाया करदा,अर माड़ा सा रावला था | असल में इस्से तें इह के छोरे सतबीर(जिह की कड़ तले सूल धरी थी मन्ने ) ने अते-हे कहणा सीख्या था | एक बे वो जहाज गढ़ (बेरी अर दादरी के बीचले सी एक गाम ) के डाँगराँ के मेले में आपणा बलध बेच के आया | अर मेरी ताई (चतरू की घराली )ताहि लाग्या कहन अक बता मन्ने बलध कीतने का बेच्च्या | वा बोली ,"उत को पूत, मन्ने के बेरो"| वा भी जहाज गढ़ की थी अर उनकी बोली बागडू थी | चतरू बोल्या " कह ते बता दे ना तेरी खाल तारुंगा शाटयां " | अर आपणी लुगाई के चारुं ओड़ हंडे सांटे ने घूमान्दा | "बतावे स अक नि ,तन्ने क्यूँ नि बेरा जब मन्ने बलध थारे गाम के मेले में बेच्या " | मेरा काका कँवल सिंह (जो रात ने फिल्म देख के आया करदे अर जिन्न ने टरकाँ का सामान बेच्या था ,वो-ए ) ,किम्मे काम खातर उनके चाल्या गया | उहने देख्या, अक यु के करणं लाग्र्या स | मेरी ताई बोली "देवर इह बावलियो ने समझाइये माड़ो सो| बावली-बावली बात करे स "| मेरा काका बोल्या चतरू ताहि अक भाई जा तू मेरी बात का जबाब दे-दे ते फेर बेसक भाभी के मार लिए | चतरू बोल्या ठीक स | कँवल बोल्या "तू न्यू बता अक आज मन्ने कितनि रोटी खा राखी सें अर कितने बखोरे सीत पी राख्या स | चतरू चकर्या गा अर बोल्या अक "मन्ने के बेरा मन्ने के रोटी खाई सें | रोटी ते तन्ने खाई सें "| कँवल बोल्या फेर भाभी ने के बलध बेच्या स ,बलध ते तन्ने बेच्या स | जब जा के ने चतरू ने आपणी घराली का पेंडा छोड्या | या अल्बाद ते कोणी पर मन्ने ज्यां तें लिखी स अक अल्बादी बालकां के दीमाग भोत हो स अर बखत पे काम आवे स |


बखत पे काम समारे,
बिगड़े होयां ने सुधारे ,
वा अल्बाद सुकम्मी स |
 
हाम नए-नए न्यारे होए थे | मेरा छोट्ला काका कँवल सिंह फोज में था एर उनके जब ताहि बालक ना होए थे | वो खान की चीजो लांदा तो हाम-ए खाया करदे | पर न्यारे होंए पाछे मेरी काकी हामने चीजो ना देंदी ,लुको लेंदी| ऊन धोरे बालक ना थे जयां तें , हेली का दुमंजला पर का चुबारा उन् ताहि दे दिया था | एक बे कँवल छुट्टी आया एर मेरी काकी ने चीजो लुको दी | एर नु बोली इबके किम्मे ना लाया | एर वा पानी लेवन चाली गई कुवे पर तें (जब ताहि नलके ना लागे थे ) | मन्ने चीजो पे हाथ साफ़ करण का पलान बनाया | चोक में तो मेरा बाबु एर मेरा काका बेठे थे , उड़े के तो में जा नि सकूं था उप्पर , में पड़ोसियां की छात पर के चढ़ गया एर एक दर्जन केले एर ७-८ संतरे टास्क-टास्क के खा कें एर उनके छोतके मेरी काकी की संदूक के तले लुको के , जित के आया था उत के-ए उतर्ग्या | मेरी काकी ने जब वे फल ना पाए तो मेरी माँ आगे रोला मचाया एक और बालक तो छोटे सें यो रविंदर का काम से | पहलम तो उकी चोरी पकड़ी गयी , अक वा नाट्गी थी अक किम्मे ना लाया, एर एब्ब नु कहवे से एक रविंदर फल खाग्या, एर में भी नाट गया ,अक मन्ने कोणी खाए | एर सारे नाट गे अक यो तो उप्पर गया कोणी हाम तले चोक में बेठे थे | पर जब सांझ नु मेरे पे रोटी कोणी खायी गई जब मेरी माँ नु बेरा पाट्या अक मेरा झेद कयाँ तें भर्या से |

सर जी , आप के चरण कहाँ हैं .................
 
सर जी , आप के चरण कहाँ हैं .................

सुदेश जी ,चरणां का के करोगी ,मेरी चोटी देख लियो ,अर एक बखोरा दूध प्या दियो ,मेरी चोटी औए बध जा गी ख़ुशी में |
 
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