albaadi baalkaan key kissey.

इब्ब एक तागे में गंडासे अर सांनी का जीकर होर्या था ते मेरे एक अल्बाद याद आगी | होया न्यू अक एक बे मेरा नया कुडता- पाजामा सीम्या था , अर सांझ सी-अक ने खेल्दी हाण वो पाट ग्या | बालक आलीये गेल -गेल घरां बताण खातर अक रविंदर का पजामा पाट ग्या ,| ये बालक बड़े सुवादु होया करें | मेरा बाबू फोजी , बिना बूझें मार्या करदा ,चाहे गलती किहे की हो छितना हामने पडया करदा | ते बालकां ने सोची, अक इब्ब इह क्र लागेंगे ,खींच-खींच के, अर हाम सुवाद ल्यांगे | पर मेरे बाबू ने पहलम ते घेर की छात पे पुली ला राखी थी , वे तरवाई २०-२५, अर गंडासे आगे गिरवादी, मन्ने सोची आज ते छितन तें , अर बेजती तें बच गा मखा | जब ताहीं म्हारे बिजली का गंडासा ना लाग्या था | अर में ११-१२ साल का था | मन्ने सोची अक त्ड्कें -तड़क गेरे लुवावेगा , ज्यां तें गिरवाई सें | में ते हरया न्यार अर बिरसम काट्या करदा , अर जुवार की पुली मेरा बाबू | जब मन्ने पुली तार ली , ते मेरा बाबू बोल्या अक हो जा शुरू | इब्ब रात के ९ बज लिए थे , अर में ला दिया जुवार की सुखी पुली काटअन | आपे गेरे लाऊं अर आपे किनछ-किनछ के गंडासा घुमाऊं | मेरा बाबू न्यू कह के ने , अक जब ये सारी पुली काट ले गा , जब सोणा स , अर ना ते तडके ताहीं लाग्या रह ,अर में तडके -तड़क आण के ने देखूंगा | चार पांच पुली काटअन में-ए एक घन्टा सारा लाग ग्या मन्ने | फेर मेरे दीमाग ने आपणा अल्बादी मोड़ ऑन कर दिया , अर बाकी बची होई पुली ते मन्ने जा धरी उलटी-ए छात पे अर ओबरे माहं तें चार-पांच छाबडे सानी के ल्या गेरे गंडासे आगे | अर में ते सो ग्या ,मखा देखि जा गी ताड्कें उठ के ने | के ते बाबा रेल में अर के बाबा जेल में | मेरा बाबू ते तडके सरसरी सी नजर मार के ने खेत में चाल्या गया अक हाँ छोरे ने काम ते तगड़ा कर राख्या स | पर मेरे बाबू ने जब पाछे सुवाद आ ग्या अर हर गलती पे पुली काटअन की सजा देवन लाग्या | कई बे ते मेरी माँ पेंडा छुडवांदी अक बालक स जाण दे , न्ल्याँ में दर्द हो जा गा | घणी स्यानपत भी कई बे सेध जाया करे | एक गलती की अनेक सजा |
Babu karda manas tha jab yu haal hai je honda mada sa sudha to gaam mein ek e manas rehna tha.
 
Babu karda manas tha jab yu haal hai je honda mada sa sudha to gaam mein ek e manas rehna tha.

रंग-ढंग ते तेरे भी इस्से-ए लागें सें | बस फरक इतना स अक में ढीम तले का हींश सूं अर तू बेर का झाड |
 
रंग-ढंग ते तेरे भी इस्से-ए लागें सें | बस फरक इतना स अक में ढीम तले का हींश सूं अर तू बेर का झाड |

भाई जी जय थम दोनू कठे हो जावो त सारे जाटलैंड आला के लत्ते पाड दो उलझा उलझा क |
 
भाई जी जय थम दोनू कठे हो जावो त सारे जाटलैंड आला के लत्ते पाड दो उलझा उलझा क |


ना राणा जी , इस्सी बात ना स ,फेर ते आपने बोझडयाँ का बेरा कोणी | जाट लेण्ड के जंगल में एक ते एक बड्डे उलझ-पुलझ रूंख सें | बेरा नि पाटदा के तागे पढ़-पढ़ के ?
 
ना राणा जी , इस्सी बात ना स ,फेर ते आपने बोझडयाँ का बेरा कोणी | जाट लेण्ड के जंगल में एक ते एक बड्डे उलझ-पुलझ रूंख सें | बेरा नि पाटदा के तागे पढ़-पढ़ के ?

रविंदर जी मै तो नुए मजाक करूं था पर, बेरा पाटन लगया स इब |
खबरदारी के लिए धन्यवाद |
 
एक बर की बात स ,जब हाम कई साल बाहर रह के ने नए-नए गाम में रहण आये थे |अर मन्ने गाम के किरिया कलापां का घणा सा बेरा ना था | मेरे एक ताऊ का छोरा ( पालीयाँ आली तिकड़ी में तें एक ) धार लावे था गंडासे के ,अर में उह के धोरे बेठा देखूं था | जब गंडासा तेज हो ग्या ते मेरे ताऊ का छोरा बोल्या " रबिंदर धार देखिये लाग गी एक नि"? अर उह ने जाण के ने मेरी गेल्याँ या अल्बाद करी थी ,क्यूंकि उह ने बेरा था अक मन्ने धार देखणी कोणी आवे | मन्ने के बेरा था गण्डास्से की धार आड़ी आंगली फेर के ने देखणी स | मन्ने धार की सीध में आंगली फेर दी अर आधी आंग्ली कट गी | लाग्या खून का फुवारा | चलो आंगली ते ठीक होगी पर एक सीख मिलगी थी अक "जा गण्डास्से ( दोनु ढाल का समझ ल्यो ) ने ठीक तें हेंडल ना करे ,तो वो खून भी कर सके स" | जब पाछे गण्डास्स्याँ तें मन्ने भोत डर लागण लाग्या |
 
एक बर की बात स ,जब हाम कई साल बाहर रह के ने नए-नए गाम में रहण आये थे |अर मन्ने गाम के किरिया कलापां का घणा सा बेरा ना था | मेरे एक ताऊ का छोरा ( पालीयाँ आली तिकड़ी में तें एक ) धार लावे था गंडासे के ,अर में उह के धोरे बेठा देखूं था | जब गंडासा तेज हो ग्या ते मेरे ताऊ का छोरा बोल्या " रबिंदर धार देखिये लाग गी एक नि"? अर उह ने जाण के ने मेरी गेल्याँ या अल्बाद करी थी ,क्यूंकि उह ने बेरा था अक मन्ने धार देखणी कोणी आवे | मन्ने के बेरा था गण्डास्से की धार आड़ी आंगली फेर के ने देखणी स | मन्ने धार की सीध में आंगली फेर दी अर आधी आंग्ली कट गी | लाग्या खून का फुवारा | चलो आंगली ते ठीक होगी पर एक सीख मिलगी थी अक "जा गण्डास्से ( दोनु ढाल का समझ ल्यो ) ने ठीक तें हेंडल ना करे ,तो वो खून भी कर सके स" | जब पाछे गण्डास्स्याँ तें मन्ने भोत डर लागण लाग्या |


Ravinder ji aajkal ke ashiq naa darde gandaase te unka to ibi yo a kahna hai manas maar gandaase haam tere pyaar ke pyaase.
 
Ravinder ji aajkal ke ashiq naa darde gandaase te unka to ibi yo a kahna hai manas maar gandaase haam tere pyaar ke pyaase.

कह ते देवें सें ,पर कत्तल भी ते हो जावें सें | फेर भाई म्हारे अर आज के जमाने में भी ते २५ साल का फरक स |
 
एक बे कई साल घणी गर्मी पड़ी थी | शायद ४५-४६ डिग्री पारा चढ़ जाया करदा | ते म्हारे सकूल में ग्रांट आई थी सविमिंग पूल बाणान की | हामने ते मुंबई में आण के ने बेरा पाट्टया था अक स्वीमिंग पूल किस्से होया करें | हाम ते जोहड़ में नहाया करदे अर रूंखा के ढाले डेश बोर्ड होया करदे | हेडमास्टर के सिविल इंजिनियर था , उह ने एक 30x30 का खड्डा पथवा दिया | उह की थालास्मा सी भींत अर एक ओड़ ने आठ दस पेडी बणवा दी | हाम पंचमी छट्टी के बालक उह में उघाड़े नहाया करदे | घनिए ईंट बच गी थी अर वे उह स्वीमिंग पूल के सहारे-ए ऊँ-ए पड़ी थी | जब गर्मी जा ली ते हामने टेम पास करण खातर किम्मे नया चाहिए था ,ते हामने वे ईंट ऊह स्वीमिंग पूल की मुंडेर पे इह ढाल अन्गुलर धर के ने अक एक दूसरी ने धक्का दे के ने आप पाणी में जा पड़े | हेडमास्टर का कमरा धोरे-ए पड़े था ,छपाक-छपाक की आवाज सुन्न के ने वो आंदा इतने हाम भाज जांदे | बात या थी अक जाड्डयाँ में उन् ईंताँ की रेल बणा -बणा के ने हाम ने वो स्वीमिंग पूल आँट दिया | पर हामने इस अल्बाद की सजा भी मिली थोड़े दिनाँ पाछे जिला सिक्षा अधिकारी का जब आगमन होवण आला था | ते म्हारे पि.टी. ने पान्च्मी,छटी अर सातमी के बालक ला दिए वे ईंट काढअण खातर एर गेल्याँ ग्यार भी काढणी पड़ी किन्छ-किन्छ के |
 
जब हाम दशमी में पढ्या करदे ,जब की बात स ,म्हारा एक मास्टर होया करदा विज्ञान का | था ते वो बाणीये का ,रोहतक का रहनिया पर वो पढ़ाया भोत आछा करदा | इब्ब असली नाँ ते उह का याद कोणी पर हामने उह का नाँ काढ राख्या था "टोपली "| टोपली नाँ काढअन का कारण था उह का बाल रहित शरीर | उह की देहि पे एक भी बाल कोणी था ना पलकां में ना सर पे अर ना डाढी मुन्छ्याँ में ,कती सफा चट | या कुणसी बीमारी हो ,उह का नां ते डाक्टरआँ ने-ए बेरा होगा | पर यु डी.अन.ए. में मुटेशन के कारण हो स | हामने ते इस्सा माणस पहली बार देख्या था ,अर कई दिन ते हाम उह मास्टर ने देख हंसन लाग जाया करदे | वो सर पे रुमाल ने इस्सी ढाल लपेट्या करदा च्स्म्याँ में टांग के ने अक उह की टोपी सी बाण जाया करदी , पर उह ने कदे बुरा ना मान्या | म्हारा साइंस लेब का कमरा आछा लाम्बा था ,उह में वो तफरियां के बखत झपकी लिया करदा | एक दन तफरियां पाछे म्हारी साइंस की क्लास थी प्रेक्टिकल की ते कई बालक पहलम चाले गए लेब में , जब ताहि टोपली उठ्या-ए ना था | बाल्कान ने वा उह की टोपी अर चस्मा ठा लिया अर लुको लिया |मास्टर जी उट्ठे अर आपणा चस्मा अर टोपली (रुमाल) टोहण लागे | इतने सारे छोरे अर छोरी भी पोंच्गे उड़े (जब ताहीं म्हारे गाम का स्कूल छोरे-छोरियां का कट्ठा-ए था नोमी-अर दशमी का )| इस्सी शकल अर कती लोटे बर्गा सर देख के ने सब हांसें| फेर बालकां ने टोपली मास्टर खातर सारे स्कूल में टोह गेर दि चश्मे अर रुमाल की | बालक कई हाण ताहीं मास्टर ने भालोये रहए अक कदे बांदर ठा ले गे हों | फेर छुट्टियां के बखत टोपली मास्टर का चश्मा अर रुमाल दिया ,न्यू दिखा के ने अक हाम बड़ी मुस्किल तें टोह के ने ल्याए सां अर खूब मस्ती करी इतने | मास्टर जी की भी दो-तीन और घंटी उक गी | गंजे सर अर बिना चश्मे के वो बाहर ना लिकड़ा |
 
कई दिन पहलम "टाइम पास फोटू " में एक फोटू छापूँ था ,ते उह में एक घणी लांबी गाडी पांच -छः खिड़कियाँ आली थी ,अर वो फोटू म्हारे गाम के बस अड्डे का था | उह के बेकग्राउंड में एक घर दीखे स , बिना सफेदी का अर पलास्तर कर्या होड़ , वो देख के ने मेरे एक अल्बाद याद आगी | इब्ब ऊ बन्दे का नाम ते याद कोणी जिह का वो घर स | उह का ब्योंत माडा -ए था जब ,ते उह की सहायता करण खातर उह के साले ने जो फौज में था ,उह घर में चाकी लुवा दी उह की | जब सिक म्हारे गाम में ७-८ चाकी होया करदी ,पर गाम बड्डा होणे के कारण सारी फुल चाल्या करदी | गामां में जब ताहीं आजकाल की ढाल घर गेल चाकी कोणी होया करदी | अर लुगाइयां ने त्ड्कें बखत तें उठ के ने चाकी चलाणी बंद कर दी थी ,बस पीस्णा कर के ने धर दिया करें थी ,म्हारे घरां ते में बड्डा था ज्यां तें पीस्णा भी मेरी माँ मेरे पे-ए करवाया करदी | ते उह चाकी आले के चार छोरे अर शायद दो छोरी थी ,सारे पहलम ते कती मरियल-मरियल से थे | [पर सब मुफ्त का चुन मिलन लागें पाछे कती घुस्हड़ से हो गे थे | इब्ब ते उनके एक छोरा बचर्या स ,बाकी सारे दुश्मनी ,बीमारी अर अक्सिडेंट में मर लिए स | उन् के शायद वो-ए घर-अर घेर था ,बड्डी दुकडिया सा ,एक ओड़ ने डांगर बांध्या करदे ,अर एक ओड़ सी ने वे रहया करदे | अर एक कुण में चाकी ला राखी थी | चाकी इस्सी ढाल थी ,अक एक ओड़ ने जित ताखड़ी बाट थे ,तोलन खातर न्यून एक बाहरना था ,अर जीतोड़ चाकी का मुंह था ,न्यून पिस्से होड़ पीपे धर दिया करदे ,न्यून भी एक बाहरना था ,सड़क कानी | एक बे के होया अक में एक पीपा धर के ने आया गिहूँ पिसवान खातर ,अर जब लवण गया आगले दन ,ते वो बन्दा न्यू बोल्या ,अक तूँ कद धर के ने गया था ? इब्ब कीमे पर्ची ते थी कोणी अक धर के ने गया था अक नि | पर इब्ब डर न्यू लागण लाग्या अक मेरा बाबू न्यू सोचे गा अक कदे रविंदर बेच के ने खा गा हो | गाम में दाणे ,गुड कपास बेच्णा बालकां की आम बात थी | में माडा सा ठाडू बोल्या ते उह ने में धमका दिया , अर न्यू बोल्या बेच खाया होगा किते अर म्हारे सर लावे स | पर मन्ने न्यू बेरा था ,अक कई मानसं का इह की गेल पहलम भी रोला हो, या था | यु पीपे लुको लिया करदा ,अर जा कोए ठाड़ा माणस आज्या ते और किहे का ठा के ने दे देंदा | इह के तावला अमीर होण का चस्का लाग्र्या था | दुसरे दिन में सड़क पे ओट से में खड्या होग्या अर यु जुकर एक पीपा भार्या होड़ चाकी तले तें हटा के ने ,अर दुसरा ला के ने और किहे काम खातर भीतर ने चाला गया ,मन्ने ते पीपा लाया कान्ध्याँ के अर दुडकी गया, में भी न्यू सोच्या अक जो १५ किलो का पीपा में आप नहीं ठा सकूँ था वो कान्ध्याँ पे पोंच्या क्यूकर | अर पचास-अक मीटर चाल्दें दो बुड्ढे बेठे होका पीवें थी उनकी पोली के आगे ,उन् ने मेरी तारीफ़ भी करी अक र बड़ा कमाऊ स ,इतना छोटा सा छोरा अर पीपा ठा रया | उन् ने न्यू भी बुझी अक रे किः का स ,मन्ने बता दी , अर टस्कदा -टस्कदा चालें गया | मेरे न्यू भी डर बेठ्गा अक जा उह चाकी आले ने बुझ ली उन् पे ते वो घरां भी पाँच सके स | पर आपणे घरां ते में भी शेर था,छोटा ही सही | ते उह की चाकी धोरे तें सड़क-सडक महारा घर ४००-५०० मीटर दूर पड़े था | इतने में घरां नि पोंच्या इतने मेरा मूत लिकडन ने होया रहया ,उह के डर तें ,में मुड़-मुड़ के ने देखें गया अक कदे गेल तें आंदा ते नि स वो | मेरे माँ- बाबू ने बेरा भी ना पाट्टया अक यु और किहे का पीपा ठा के ने लार्या स | या घटना जब उह दिन मेरे याद आई ते में घणी वार ताहीं हँसे गया | इब्ब अनिल सांगवान न्यू कह्वेगा अक भाई केपसन ना दिया , ते भाई इह का स " जा हक़ माँगने तें ना मिले ते खोस लेणा चाहिए "|
 
चौमास्याँ में हाम जोहड़ की पाळ पर तें थल्सन बणा लिया करदे | उप्पर तें मिंह बरसदा हो ते थलस के ने जोहड़ के पाणी में द्धम्म तें टक्कर मारण में बड़ा मजा आया करदा | आज- काल के बालक ते वे-ए सुवाद "वाटर किंगडम" में जा के लेवे सें २०० रपियाँ की टिकट ले के ने | म्हारी गेल ,म्हारे तें ३-४ साल बड्डा एक छोरा था "मस्तु"(जिह की मेन्ह्स धांसी थी ) ",वो हामने सब ने तंग कार्या करदा ,अर आपणे हर खेल के आप नियम बणा लिया करदा ,आपणे फायदे खातर | हाम किम्मे भी खेल्दे ते हर चीज में धींगताणा करया करदा | जब हामने थल्सन बनाई ,ते उह ने आगले दिन बेरा पट्ट्या ,ते वो न्यू बोल्या अक सब तें पह्ल्म में थ्ल्सुं गा आज | मखा ठीक स तू थलस लिए | हाम आगले दिन उह के आगे जा के ने अर थल्सन में काँकर गाड दी (शुरू आले दिन ते हाम पाछे के तले किम्मे मोटा लत्ता ला के ने पहलम थल्सन ने चिकनी बणाया करदे ,अर किम्मे काँकर -डिहकड़े हों ते वे काढ दिया करदे ,अर फेर उघाड़े थल्स्या करदे ) हामने ते भाई खातर पाणी-पूणी गेर के ने थल्सन त्यार कर दी | अर वो ते काढ के ने लत्ते अर थल्स गा | लगभग २० मीटर की थल्सन में ६-७ काँकर गाड राखी थी मखा आधी-अक ते पाडेंगी उह के पाछे ने | वो ते तले किलकी मारदा पोंह्च्या अर न्यू कह हाय री माँ मरग्या | उह के पाछे पे पांच -छः चीरे पड़ गे थे | फेर हंडे पाछे के हाथ ल्याएं | उह पे करडी थां कई दिन ताहीं बेठ्या नहीं गया | अर थल्स्ना ते कती भूल गा | पर म्हारे कसुता डर बैठ गा था ,अक कसाई कदे बदला लवन के चक्कर में और किम्मे ना गाड ज्या | हाम रोज पहलम देखि कर के ने फेर थल्स्या करदे | पाछापाड़ बदला |
 
या बात मेरे बाबू ने बताई थी ,राँघड भाजे (१९४७) जब की बात स | ,म्हारे गाम में के रांघडाँ के बड्डे-बड्डे जत्थे जाया करदे अर उन् के दोनु ओड़ ने उनकी रुखाली खातर घोड़ा पुलिस अर क: सेना के जवान चाल्या करदे | म्हारे गाम की फिरनी ते माड़ी सी दूर खेताँ के मांह अर सड़क के काठे एक जोहड़ अर तीन चार किल्ल्यां की पड़ता जमीन होया करदी , उड़े वे रात ने डेरा(केम्प ) लाया करदे | चाल्दे-चाल्दे ,जा उन् का किम्मे पड़ जांदा ते गाम आले ठा लिया करदे | क: फेर केम्प में वे आगले दिन गेर जरुरी समझ के ने , या फेर बोझ घणा हो जांदा ते उन् के बल्धां पे खीन्च्दा कोणी , ते वे सामान लोहे का क: फेर लाकडी का गेर जांदे ,अर गाम आले जा के ने ठा ल्यांदे | एक दिन तडके तड़क के होया अक कई कुंगर बखत तें पोंच गे अर जुकर जत्था उठ्या ,उन् ने एक नई संदूक थ्या गी | पहलम की संदूक लाकडी की होया करदी पर उन् के उप्पर पीतल अर लोहे की नक्काशी दार पतरियाँ तें मढ़ी होड़ होया करदी अर वे भोत सुथरी लाग्या करदी | उन् ने ते राजी हो के ने वा खोली अक आज ते भोत माल थ्या गा ,पर उह में किम्मे कोणी था | इब्ब एक संदूक अर बांडअनिये कई जाणे | बांडा होवे कोणी ते उन् ने एक अल्बाद की प्लान बनाई ( असली बात आखिर में ,जिब्बे सुवाद आवेगा ) अर उह के मुताबिक़ उस संदूक के दो ताले ला दिए अर उह ने गाम में ठा ल्याए | गाम में लोग बोले अक भाई इह में खजाना हो सके स अर जो किम्मे भी लिकड़े गा वो सारे गाम का अर पंचायत के धोरे जमा हो जा गा | बिचली परस में ,जिह ने भी बेरा पाट्टया वो-ए पोंच गा ,अक मुसलमान खजाना छोड़ के ने गए सें | २००-३०० माणसआँ की भीड़ के आगे वा संदूक गाम के सरपंच ने लुहार बुलावा के ने खुलवाई | अर गाम आल्याँ के हान्स-हान्स के पेट फूट गे ,अक ल्यो बांड ल्यो अर कर ल्यो पंचायत धोरे जमा | असल में उन् कुंगराँ ने उह संदूक में हाग दिया था अर मखोल कारण खातर यु सांग रच दिया | वे १०-१२ जाणे थे अर उन् में तें घनखरे ते मर लिए दो-तीन जाणे रह रे सें ज़िंदा बस | अल्बादी गाम के अल्बादी बालक |
 
कई दिन पहलम एक आपबीती राकेश सांगवान ने बताई थी जाटलैंड पर ते हाम भोत हांसे थे | जब या बात मन्ने मेरे बाबू ताहीं बताई ते उहने भी एक इस्सी-ए घटना बताई | प्रस्तुत स :---

मेरा बाबू फौज में भारती होग्या ते गाम का रहना छुट गा , शकल बदल गी ते गाम के कम पिछाणन लागे | चिड़ी गाम म्हारे गाम तें १५-१८ की.मी. पड़े स | उड़े मेरे बाबू की बुआ बियाह राखी थी | मेरा बाबू उड़े जार्या था , वे कई जाणे गाभरू छोरे पोली में बेठे होक्का पीवें थे | सामी तें गाल में दो जाणे चाले आवें थे | एक जणा बोल्या अक रे ये कुण सें ओपरे माणस लागे | मेरा बाबू बोल्या अक इन् ने ते में जाणु सूं | ये म्हारे गाम के सें | वे उड़े-ए पोली में आगे अर न्यू बुझ के ने अक र होक्का जट्टां का-ए स पीवण लागे | मेरे बाबू ने देख्या अक इन् ने में पिछान्या कोणी ,ते आपणे दुसरे भाइयां ( बुआ आले ) कानी चुप रहण का इशारा कर के ने न्यू बोल्या अक------
मेरा बाबू ------- "जी आप कुण्से गाम के सो "?
गामोली -------- हाम ते "भाऊ" के सां ( भाऊ अकबर पुर ,म्हारा गाम )|
मेरा बाबू ------- आड़े के काम आये सो ?
गामोली -------- हाम ते मेन्ह्स देखदे हांडआँ सां |
मेरा बाबू ------- तम निगाहिया अर राम सिंह हर ने जाणो सो ? ( मेरे दादा हर के नाम )
गामोली -------- हाँ ,जानाँ सां ,म्हारे घरां धोरे -ए उनके घर सें |
मेरा बाबु ------ तम मन्ने जाणो सो ?
गमोली -------- ना हाम ना जाणदे | तेरी के रिश्तेदारी स उनके ?
मेरा बाबू ------- मेरी माँ बियाह राखी स उनके |
गामोली ------- माड़ी हाण ताहीं होक्क्का पियें गया अर फेर मेरे बाबू कानी घूर के ने लखाया अर उछल के पड्या ,ओ तेरी के ,तू ते घणा कसुता माणस स निराकार ( मेरे बाबू का नाम ,निराकार सिंह स )

 
जब कोए गमीणा करे ते किम्मे-ना किम्मे फल वगेरा ले के जाया करें |ख़ास कर बालकां ने ते बाट होया करदी अक कोए आवे रिश्तेदारियां मांह ते ,आर किम्मे चीजो खावन ने मिले | आजकाल ते फेर भी बालक गामां में भी नदीदे कोणी फलां के ,पर आज तें तीस चालीस साल पहलम ते इस्सा-ए सा नजारा था ,कदे कदाऊ खावन ने मिल्या करदे | एक बे दूसरी गाल में मेरी माँ चाली गई , किम्मे काम खातर | जिह लुगाई तें काम था , वा ते पाई कोणी ,उह की छोरी थी , मेरे सी हाण की | उह ताहीं मेरी माँ बोली अक -ए बेद्ली ( बेद्कौर ) तेरी माँ ताहीं कह दिए अक ताई आई थी अर जरुरी बुलावे थी | बेद्ली बोली " आँ ताई , तू म्हारे आई ,अर केले कोणी ल्याई , खाली हाथ चाली आई , फेर में मेरी माँ ताहीं क्यूँ बताऊँ अक तू बुलाण आई थी"| उह का बियाह होया इतने हाम उह ने सारी हाण चिडाएं जाया करदे अक केले मिलें सें अक नहीं |
 
ऊँ ते अल्बाद सारी ख़तम हो ली, पर कदे कदाऊ कोए घटना हो ज्या स , ते एक आधी याद आजावे स | काल एक फांड़ी लुगाई दीख गी , ते मेरे म्हारी एक मास्टरनी की याद आगी, उह का असली नाँ ते याद कोणी , पर सारा सकूल उहने फांड़ी कहया करदा | वा मुस्साँ साढे तीन-एक फीट की होगी ,अर उह के पाँ बरेकटआँ ( ) की ढाल थे | वा सरणारथण थी , अर रोहतक तें रोज तेथन में बैठ के ने आया करदी | तेथन में भी उह ने ड्रेवर आगली सीट पे बिठाया करदा ,अर फेर चढ़ान्दी हाण अर तारदी हाण सहारा देणा पड्या करदा ,उह के पाँ इतंने उट्ठया-ए ना करदे अक वा आप चढ़ सके | ऊँ ते वा भेंजी छठी तें ले के ने अर आठमी ताहीं पढ़ाया करदी | पर कदे कदाऊ जब मास्टराँ का काल पडदा, ते हेड मास्टर उह की घंटी नोमी -दशमी में भी ला दिया करदा | में जब दशमी में था अर म्हारी क्लास में उम्र अर कद दोनुआँ में सब तें छोट्टा | वा भेंजी जब क्लास में बडदी ,ते सारयां में पहलम ते छोरी हान्स पड़दी { न्यू कहया करें अक छोरी शर्माऊ हों सें, अर अल्बाद ना करदी ,पर इह भेंजी ने ते छोरी-ए घणी सताया करदी } | फेर वा छोह में आके ने बोल -बाली पढ़ाण लाग जांदी अर क्यां-ए ना क्यां-ए के ओड़े काम्ची मारण की कोशिश करदी | घन्खरे छोरे ते छः फूटे थे , जा उन् में तें किहे ने न्यू कहवे, अक हाथ आगे ने कर ल्यो , ते वे हाथ उह भेंजी के सर पे दो फूट उप्पर ने कर के ने खड़े हो जांदे ,इब्ब बीचारी मारे क्यूकर ,म्हारे बर्गे गरीब से बालक जा हान्स पडदे , ते उन् के फेर वा मार के ने आपणा छोह ढीला करदी |

जाड्डयाँ में म्हारे मास्टर अर भेंजी छात पे कम्ठाना बणाया करदे , उड़े तावाला सा हेड मास्टर गेडा भी कोणी मार्या करदा, अर मास्टर जो बाल्कां पे गंडे अर टाट मंगाया करदे वे फुर्सत तें बैठ के ने खाया करदे | पड्काले के तरले भाग में पेडी की थां एक पेडा था | वो लगभग दो फूट उंचा होगा उस पे चढ़ के ने-ए आगे पड्काले में चढ्या जाया करदा , अर उह फांड़ी भेंजी पे उह पेडे पे चड्या कोणी जाया करदा | ते मास्टराँ ने , म्हारी क्लास में एक भीम सिंह था , खातियाँ का छोरा , उह ताहीं कह के ने एक ,एक फूट ऊंचा काठ का पाटडा सा बणवा दिया अर उह पड़े के सहारे धर दिया | एक दिन इस्सा होया अक आखरी घंटी थी म्हारी , अर उह पड्काले के आगे हाम बेठे थे , मास्टर किम्मे समझावे था अर वो सवाल पूरा करदें करदें ,सकूल की छुट्टी हो गी अर बाकी सकूल के बालक अर मास्टर सकूल तें बाहर जा लिए | म्हारी क्लास के थोड़े से बालक आपने बसते ठीक ठाक करण लाग रे थे | बाहर तेथन आली थी भेन्जियाँ ने पोंचान खातर | जिब्बे फांड़ी भेंजी की छात पे तें आवाज आई अक रुकियो में भी आऊं सूं , रुकियो माड़े | म्हारी क्लास में एक छोरा था, उत सा , कप्तान सिंह उह का नाम था ( दो साल पहलम केंसर तें उह की मौत हो गी ) | जब उह ने देख्या अक मास्टरनी एकली रह ऱी स, ते उह ने वो पाटडा हटा दिया अर लुको दिया | हाम सारे दूर जा के ने लुक गे अर भेंजी तगाजे में आई धडधडांदी , अर तले पाटडा ते था कोणी भेंजी का बेलेंस बिगड़ ग्या तगाजे में अर उह का धडाका लाग्या , हंडे उह के ऊन के गोले लुढ़कते | हाम ते देख के ने नजारा अर गए खेँ दे सी ने | पाछे जब वा ना आई , तेथन में बेठन, जब बाट देख के ने , उह के साथ आले मास्टर उह ने ठा के ने ले गे | मास्टरनी फांड़ी ,बालक आंडी |
 
म्हारे घरां में एक मेरा दादा था ,छोटुआ ( छोटू सिंह अर क: फेर छोटू राम नाम हो गा उह का सही ते ) वो कसुता काला अर भराडा था | उनका घेर ( बारजा कह्या करदे वे उस घेर ने ) सड़क पे पडे था , गाम ते लिकड़माँ सी | एक बे एक बुड्ढा सा चूहड़ा उनके घेर आगे उतर लिया ,तेथन मांह तें, अर उड़े एक छोरा खड्या था( इब्ब मेरे उह का नाम याद कोणी , मान ल्यो सतबीर ) ,जो की धरमपाल ( छोटुए का बड्डा छोरा , यु धरम पाल म्हारे गाम की स्कूल की फूटबाल टीम का गोलची था ,अर कई बे नेशनल खेलर्या था ) के हाण का था , अर उनका पडोसी था , उह पे बुझ्न लाग्या अक रे भाई चुहड़याँ के घर कित सी सें ? वो सतबीर बोल्या अक के काम था ? चूहड़ा बोल्या मन्ने ते छोरा देखणा था | सतबीर बोल्या अक एक ते यु रहया छोटुए चूहड़े का घेर ,छोटुआ भीतर-ने-ए बेठ्या स , अर इन् का छोरा धरमपाल भी ब्याहन जोगा होर्या स अर भोत बढ़िया फूटबाल का खिलाड़ी भी स | चूहड़ा राजी हो के ने अर छोटुए के धोरे जा बेठ्या ,उह के भी जंच गी अक वो दीखे भी इस्सा-ए था | अर लाग्या आपणी छोरी की तारीफ़ करण | छोरे के बारे में भी बुझ ली अर एक ढाल तें चूहड़े ने सब किम्मे पसंद कर के ने अर पक्की कर दी अक छोरी ने देख ल्यो आ के ने | माडी वार पाछे चूहड़े ने बुझ ली अक थारा रेवड़ कितना बड्डा स | छोटुआ बोल्या अक जमींदारां क : रेवड़ का के काम | चूहड़ा लाग्या बुझ्न , अक अल तम चूहड़े कोणी के ?

चूहड़ा आगे-आगे अर लाठी लियें छोटुआ पाछे-पाछे | सतबीर ने सुवाद लिए खूब अर फेर जांदा रहया उथों |अर गाम में भी बता दी अक ये चुहड़याँ की सगाई लेवें थे | सारा गाम लाग्या धरमपाल ने चिडान |
 
मेरी माँ की बताई होई से या अल्बाद. एक ब जब मेरी माँ और उनकी साथन खेत मैं ते आवन लग री थी. उनकी उम्र होगी कोई १४-१५ साल. उन खूब भूख लाग री थी. रस्ते मैं कोई औरत अपने पीहर तै आव थी. वा सर पे गठड़ी ले री थी. उन साथना मैं ते एक ने उस गठड़ी मैं गुलगुले और सुहाली दिख गी. फेर के था. दो जनियाँ ने वा बातन ला ली और तीसरी गुलगुले और सुहाली पास करती गयी, चौथी तक. आर जब भतेरी होगी तो वाँ बोली एक हुमनो तो दुसरे राहि जाना से. और फेर खूब गुलगुले और सुहाले खाए.
 
मेरी माँ की बताई होई से या अल्बाद. एक ब जब मेरी माँ और उनकी साथन खेत मैं ते आवन लग री थी. उनकी उम्र होगी कोई १४-१५ साल. उन खूब भूख लाग री थी. रस्ते मैं कोई औरत अपने पीहर तै आव थी. वा सर पे गठड़ी ले री थी. उन साथना मैं ते एक ने उस गठड़ी मैं गुलगुले और सुहाली दिख गी. फेर के था. दो जनियाँ ने वा बातन ला ली और तीसरी गुलगुले और सुहाली पास करती गयी, चौथी तक. आर जब भतेरी होगी तो वाँ बोली एक हुमनो तो दुसरे राहि जाना से. और फेर खूब गुलगुले और सुहाले खाए.


गीता जी , कदे आपने खुद करी हो या अल्बाद , अर इब्ब माँ का नाम लेंदी हो |
 
गीता जी , कदे आपने खुद करी हो या अल्बाद , अर इब्ब माँ का नाम लेंदी हो |

Kash kari hoti Ravinderji. gulgule aur suhali khae to bahut par chori ke aur wo bhi khet mein -unki ke rees ho sai
 
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