इब्ब एक तागे में गंडासे अर सांनी का जीकर होर्या था ते मेरे एक अल्बाद याद आगी | होया न्यू अक एक बे मेरा नया कुडता- पाजामा सीम्या था , अर सांझ सी-अक ने खेल्दी हाण वो पाट ग्या | बालक आलीये गेल -गेल घरां बताण खातर अक रविंदर का पजामा पाट ग्या ,| ये बालक बड़े सुवादु होया करें | मेरा बाबू फोजी , बिना बूझें मार्या करदा ,चाहे गलती किहे की हो छितना हामने पडया करदा | ते बालकां ने सोची, अक इब्ब इह क्र लागेंगे ,खींच-खींच के, अर हाम सुवाद ल्यांगे | पर मेरे बाबू ने पहलम ते घेर की छात पे पुली ला राखी थी , वे तरवाई २०-२५, अर गंडासे आगे गिरवादी, मन्ने सोची आज ते छितन तें , अर बेजती तें बच गा मखा | जब ताहीं म्हारे बिजली का गंडासा ना लाग्या था | अर में ११-१२ साल का था | मन्ने सोची अक त्ड्कें -तड़क गेरे लुवावेगा , ज्यां तें गिरवाई सें | में ते हरया न्यार अर बिरसम काट्या करदा , अर जुवार की पुली मेरा बाबू | जब मन्ने पुली तार ली , ते मेरा बाबू बोल्या अक हो जा शुरू | इब्ब रात के ९ बज लिए थे , अर में ला दिया जुवार की सुखी पुली काटअन | आपे गेरे लाऊं अर आपे किनछ-किनछ के गंडासा घुमाऊं | मेरा बाबू न्यू कह के ने , अक जब ये सारी पुली काट ले गा , जब सोणा स , अर ना ते तडके ताहीं लाग्या रह ,अर में तडके -तड़क आण के ने देखूंगा | चार पांच पुली काटअन में-ए एक घन्टा सारा लाग ग्या मन्ने | फेर मेरे दीमाग ने आपणा अल्बादी मोड़ ऑन कर दिया , अर बाकी बची होई पुली ते मन्ने जा धरी उलटी-ए छात पे अर ओबरे माहं तें चार-पांच छाबडे सानी के ल्या गेरे गंडासे आगे | अर में ते सो ग्या ,मखा देखि जा गी ताड्कें उठ के ने | के ते बाबा रेल में अर के बाबा जेल में | मेरा बाबू ते तडके सरसरी सी नजर मार के ने खेत में चाल्या गया अक हाँ छोरे ने काम ते तगड़ा कर राख्या स | पर मेरे बाबू ने जब पाछे सुवाद आ ग्या अर हर गलती पे पुली काटअन की सजा देवन लाग्या | कई बे ते मेरी माँ पेंडा छुडवांदी अक बालक स जाण दे , न्ल्याँ में दर्द हो जा गा | घणी स्यानपत भी कई बे सेध जाया करे | एक गलती की अनेक सजा |