albaadi baalkaan key kissey.

म्हारे गाम में दुकानां आली गाल में एक बाणिया था ,नाम ते भूल, गा इब्ब | वो जितने चाहियें उतने पाद मार दिया करदा | जब हाम उहने कहंदे अक पाद मार के दिखाते वो एक पाद मार देंदा | पर दुसरे कहंदे ते न्यू कहंदा अक पहलम किम्मे खरीदो फेर मार के दिखाउंगा एक बे सुरेंदर ( अल्बादी बालकां की तिकड़ी ) ने उह ताहीं एक पाद के पांच पिस्से (पांच पिस्स्याँ में पांच मिट्ठी गोली आया करदी जब ) दे के ने १५ पाद मरवाए थे,लगातार | हाम उइह ने पादू बाणिया भी कहया करदे |
 
इबके गाम में गया जब सुरेंदर ने या बात बताई थी | जब वो पहली बार बी.अस.अफ. में लागें पाछे छुट्टी आया ते एक भाई गाम का उह की गेल पड़ग्या अक मन्ने दारु की पार्टी दे अर गेल्याँ पालक पनीर की सब्जी होणी चाहिए | हामने बालकपन में कालेज के छोरे ते देखे थे टी पार्टी मांगदे होए पर इहने यु पालक पनीर का चस्का किथों लाया था , बेरा ना | सुरेंदर ने तंग आ के ने एक दिन वो बुला लिया अक आज सांझ ने आ जाइए म्हारे घरां ,तन्ने छात पे पार्टी दयुन्गा | सांझ ने उहने गंडे की सुखी होड़ डाट ( गंडासे मांह के गंडे के बणे होए छोट्टे-छोट्टे टुकड़े ) कट्ठी करी अर चकोर काट ली अर गेर के ने पालक में आछा सा मसाला अर वे डाट जा धरया उह के आगे पालक पनीर | भाई ने दो पेग तार के ने अर बोल्या अक रे किम्मे करडी-करडी सी लागे सें ये पनीर की डली | सुरेंदर बोल्या अक भाई गाम में ते मिलदा कोणी पनीर अर में मोटर साइकल पे लाया था ,रोहतक तें हाथ में लटका के , राह में बाल लाग के ने यु माड़ा सा सूख गा | भाई ते मार के ने एक-दो पेग और अर ऊछल्दा गया , आज ताहीं तारीफ़ करे से सुरेंदर की अक ,यु आंडी पालक पनीर बणाया करे| खोई खाणा यार |
 
या बात मेरी बुआ हर ने बताई थी | म्हारी गाल में म्हारे घरां में एक ताई थी | उह के हाथ पाँ बा के कारण जुड़ रे थे अर कड़ भी जुड़ री थी | ज्यां तें उह ने खाट पे ठा क: ने बिठाया करदे | वा साह्ब्णी थी ( गाम में जा कोए सूबेदार या ओफ्फिसर के पद पर तें रिटायर हो के आ जांदा ते उह ने साहब कहया करदे अर उह की घर आली ने साह्ब्णी )वो मेरा ताऊ ऑनरेरी लेफ्टिनेंट तें रिटार हो के आया था | ते वा अपाहिज होयें पाछे भी घणे नखरे मारया करदी | एक नंबर की चुगल खोर थी सारी गाल की लुगाइयां ने आंदे-जांदे उड़े बिठा के ने आपणे धोरे सारी खबर राख्या करदी | उह की एक छोरी ते रोहतक कोलेज में पढ्या करदी , ते वा ते किहे भी काम के हाथ नि लाया करदी | अर दूसरी अनपढ़ थी ,वा-ए घरका सारा काम करया करदी | छोरे बियाह नि राखे थे जब ताहीं | ते वा के करदी अक उह की छोरी ने कुंए के कम गेडे करणे पड़ें ,किहे हो गाल में आंदी-जांदी छोरी पे एक आध बासन पाणी का घल्वा लिया करदी | न्यू-ए रोज की रोज उह की छोरी ३-४ बासन ल्यांदी अर वा २-३ बासन घल्वा लेंदी | कई छोरी ते दूसरी गाल में आया जाया करदी अक ना ते ल; कुबड़ी ( उह का नाँ काढ राख्या था ) पाणी घल्वावेगी | जब के बालक नाट्दी हाण शर्म भी मान्या करदे \ एक दिन दो छोरियां ने के करया अक जाण के ने जोहड़ का पाणी भर ल्याई | अर उह के घर आगे के जाण लागी ते उह ने आपणी आदत के अनुसार "ए-बेटी पीवण का पाणी ना रहर्या घाल जाइओ " बस न्यू कहंदे-ए उन् ने ते दोनु बासण रीता दिए उनके पीण आले पह्न्ड़े में | उह दिन पाछे उह ने फेर नि कही किहे ताहीं अक म्हारे पाणी घालिये | फेर चुह्डी ला ली पाणी भरण खात्र अर पीण का पाणी उह की छोरी ल्यांदी | किहे के सादे पण का फेदा नि ठाणा चाहिए |
 
म्हारा एक मासटर था रोहतक का बाणिया ,उह्का नाँ हाम टोपली धर रे थे | उह की देहि पे कित्ते भी बाळ ना थे , ज्यां तें वो आपणे चश्मे में रुमाल ने इस्सी ढाल फंशा लिया करदा अक वा टोपी सी बण जांदी | जब हाम दशमी में थे | एक दिन गाम में दंगल (कुस्ती) था अर सारे बालक जाणा चावें थे , बखत तें , अर मास्टर तें कहवें क्यूकर | उह मास्टर की दो घंटी दोफारे पाछे कठी लाग्या करदी | हाम ने ते किहे ने बेरा ना था , पर चार - पांच उत से बालकां ने पलान बनाई अर और बालकां तें माड़ी पहलम सी जा के ने , उह टोपली मास्टर तें बतलान लागे | अर एक जणे ने उह के साहरे खड्या हो के ने रंगीन चाक का पोडर गेर दिया उह की कमीज पे | अर फेर एक छोरे ने उह ताहीं न्यू कह के ने अक मास्टर जी आप की कमीज तें पाछे तें घणी भुंडी होरी स बेरा ने लाल पीला के लाग रया स , ल्या इह ने धो ल्यावाँ ,मास्टर ने और गेल्याँ जाए होडे बालकां पे बुझी ते उन् ने भी कह दी अक हाँ किम्मे ते लागर्या स | वे ते उह की कढवा के ने कमीज अर धोवण के बाहने जा के नलके पे बैठ गे अक और वार लाग ज्या | पांच सात मिनट में बाकी क्लास भी आ ली जिन्न में छोरी अर छोरे सब थे | मास्टर जी ने मूँद के ने किवाड़ अर भीतर तें-ए कह दी अक आज क्लास कोणी होवेगी | बालक ते दो मिनट में जांदे रहए | अर फेर उन् मास्टर के सहायता करनिये बालकां ने मास्टर जी ताहीं वा कमीज ल्या के ने दे दी | मासटरजियां ने उन् ताहीं धन्यवाद भी दिया | अर वे ठा के ने आपणी किताब कापी जांदे रहए दंगल में |
 
म्हारे स्कूल में जिब्ब भी कोए नया मास्टर आंदा ,ते उहने बालक बकरा बणाया करदे | खासकर जब न्यू बेरा हो अक यु मास्टर जाट कोणी | मास्टरआँ की जात का भी न्यारा-ए बेरा पाट जाया करदा | जाट मासटर -धोती-कुडता अर क: फेर पजामा-कुडता पहरया करदे ,जाट भेंजी -सलवार-सूट पहरया करदी | भामण-बाणीये मास्टर पेंट -शर्ट बाहर लिकड़ी होड़ अर कोए-कोए एक आध कुडता-पजामा पहरया करदा |भाम्णी-बानणी-श्र्नार्थन भेंजी साडी पहरया करदी |शरणार्थी मास्टर पेंट में शर्ट दाब के आया करदे घनखरे | ते पहरावे तें-ए बेरा पाट जांदा अक यु कुण हो सके स ज़ात का | जाट मासटर -भेंजी हमेशा धमका कें बोल्या करदे ,भामण -बाणीये या एक आध और ज़ात का होंदा वो खिसिया कें बोल्या करदा | शरणार्थी मासटर भेंजी के मुंह पे कोए भाव कोणी होया करदा ,पाथर से मुंह आले मशीन की ढाल पढ़ा के ने स्टाफ रूम में बड़ जांदे |
एक बे एक मास्टर आया था कोए लोकल था ,नाइ का था करा, झाझर कानी का | पह्ल्डा दिन उह का सकूल में अर म्हारी दशमी की क्लास में उह का नंबर लाग ग्या अंग्रेजी पढान का | में सार्या में आगे बेठा करदा बेन्चां पे एक कुण आले खिड़की के साहरे आले बेंच पे | उ-ए पे ७-८ साल पहलम मेरा काका कँवल सिंह भी बेठ्या करदा ,इब्ब ताहीं उह का नाँ था बेंच पे खुर्च्या होड़ | मेरे पाछे परा कोयेसा भाई भी उह पे बेठ्या होगा करा | न्यू समझ ल्यो अक यु माहरा खानदानी बेंच था सकूल में | ते उह मास्टर ने आपना परिचय दिया अर फेर उह की नजर मेरे पे पड़गी अर वो न्यू बोल्या "तुम यहाँ क्या कर रहे हो अपनी क्लास में जाओ "| ( मेरे हाण के बालक चोथी-पंचमी-छट्टी में पढ्या करदे , ज्यां तें वो मन्ने उड़े घुस्पेटिया समझ गा ) उत बालक बात ने लह गे अर बोले हाँ मासटर जी यु रोज आड़े आ के बैठ जावे स ,हाम कहवाँ ते जांदा कोणी | मन्ने कही अक मास्टर जी म, इस्से क्लास का सुं , अर मन्ने मेरा नाम भी बताया "रविंदर जीत सिंह "ते बालक बोले अक यु इह का नाम कोणी ,लुकोवे स ,यु ते म्हारे ड्राइंग मास्टर सरदार जी का नाम स | फेर ते उह के कती जच गी अक किम्मे गड़बड़ स | पर दुसरे बालक हंसें अर सुवाद ले रे मास्टर का अर न्यू बोले यु लुक रया स ,इहने हेडमास्टर धोरे ले जाओ | अर वो मास्टर मन्ने हेडमास्टर धोरे ले के ने चाल पड्या | हेडमास्टर उह बखत था म्हारा रतन सिंह दांगी ,म्हारे गुहांड मदीने गाम का | वो बोल्या अक इह ने क्यूँ पकड़ लाया ,यु ते सीधा बालक स के होया ?वो हेडमास्टर ताहीं बोल्या अक यु लुकर्या था दशमी की क्लास में अर आपणा नाँ भी गलत बतावे स | रतन सिंह जी भोत कम हांस्या करदे अर पहलम ते वे सुथरी ढाल हांसे ( इतने ते उह मास्टर की हालत देखण लायक होगी थी , अर वो समझ गा था अक उह का बकरा बण ग्या स | )फेर बोले यु साची कह स ,बालकां ने तू भका दिया |फेर वो मास्टर कदे म्हारी क्लास में ढंगसर खड्या नि हो पाया ,सारी हाण डर्या-डर्या सा रहन्दा अक किम्मे पंगा ना पा दें ये | घणा उतावला ,बणे बावला |
 
this thread is still running. hats of ravinderjeet ji. i will read it in ful with time. it is a book in itself.
 
रोहतक में एक सब्जी मंडी स | जब रोहतक बस अड्डे (पुराणा) पे तें माता दरवाजा कानी जावे ते राह में पड़े स | उह मंडी के पछीत में एक गाल स , चुहड़याँ की | एक बे एक मेरा काका हरिया (हरचंद ) अर एक म्हारे घरां में एक मेरा भाई जीते (जीत सिंह ) जो की मेरे बाबू के हाण सी का था ,आवण लाग रे थे बस अड्डे कानी | उड़े एक बुड्ढी चुहडी जीते के चिपट गी , अक हे महारा पताशो का बटेऊ आग्या ( उनका कोए बटेऊ कई साल तें खूर्या था )| जीते था भी काला चुहड़याँ बरगा-ए | अर किम्मे उह की शकल उनके बटेऊ तें मिलदी होगी | बुढिया लागी रोण , अक बेटा कित चाल्या गया था आपणी लुगाई ने छोड़ के ने | उन् दोनुआँ का जिब ताहीं बियाह भी ना होया था | हरचंद ते इब्ब ताहीं न्यू-का न्यू स , अर जीते का पाछे मिताथल बियाह हो गा था ( कितोड़ स मिताथल बेरा ना ,पर हाम म्हारी भाभी ने बागड़ो कहया करदे ,ते इह का मतलब दादरी कानी किते होगा केरा )| अर वा म्हारी भाभी जीते की बहु भी कती चुहडीयाँ बरगी-ए आई | ते उह बुढिया ने वे दोनु बिठा लिए खाट पे अर सारी गाल की लुगाई कट्ठी कर ली , अक हे देखो पताशो का बटेऊ बोह्डाया | म्हारी छोरी के भाग जाग गे | पताशो भी टोही गई पर बेरा पाट्टया अक वा ते घाश छिल्लन ( न्यार पाडना,चूहड़े इह ने घाश छिलना-ए कहया करें, अर म्हारे खेताँ कानी-ए आया करदी रोहतक की चुहडी -चमारी न्यार पाडन )जा री स | ये भी बोल चुपाके बैठ गे बटेऊ बण के ने | अर इन् ताहीं एक-एक गिलास दूध प्याया | फेर पाछे गाल के सारे माणस इनकी गेल लाग लिए अक थारे ताहीं सूरी का दूध प्याया था | चुहड़ी बुढिया ने जीते पे कसम खुआई अक इबके पताशो ने जरूर ले के जा गा , अर दोनु बटेऊआँ ताहीं १०-१० रपिये दिए | जब १० रपिये आज के ५०० की बराबर ला ल्यो | दोनु राज्जी होए डाँकाँ आये अर आज ताहीं सारी गाल के लोग इनका मजाक उड़ाया करें | रंडुए खसम |
 
बेरा ना या अल्बाद पहलम भी मन्ने बताई स अक नि | याद आगि स ते बता दयूं घणे-तें घणी एक पुन्झडि लाग जा गी जा पहलम बताई हो गी ते | जब हाम छोट्टे थे अर एक बड्डे बालकां के मिक्स गेंग में रहया करदे | म्हारे गाम की सडक टूट रि थी , अर घणे बड्डे-बड्डे खड़े बण रे थे , अर उन् में पांणी भर्या रंदा सारी हाण , बेरा भी ऩा पाटदा , अक कुन्सा खड्डा किन्ना डूंघा स | कई बे ते ट्रक भी धंस के ने खड़े हो जाया करदे , अर उनकी कमाणी वगेरा भी टूट जांदी ,जिन्न ने हाम ठा लिया करदे , अर फेर रहड़ी आलयाँ पे लोहे के बदले चीजो खाण के काम आंदी | म्हारा टाइम पास थे सडक के खड्डे | हाम सडक के साहरे संतर में खड़े रह्डू में आपणा कमठाणा बणा लेंदे अर बाट देखें जांदे अक कब सी किः के सुवाद ल्यां | उन् तीन-चार मिह्न्याँ में ईतने सड़क ठीक ऩा हो ली , ईतने हामने निरे ते केले खाए | हिस्सार कानी केल्यां के भरे ट्रक जाया करदे , उन् में तें केल्यां के गुछे काढ लेंदे , अर तुडे में दाब देंदे ,दो-तीन दिन वे खाण जोगे हो जांदे | एक दिन एक स्कूटर पे कोए मोटा सा बाणिया जावे था , घणे मोटर साइकल आले या सकूटर आले ते उतर के जाया करदे | पर यु बाणिया मोटा घणा था ,इह पे उतर्या भी ऩा जावे था | मेरे ख्याल में उह पे आप भी ऩा चाल्या जांदा होगा ,सकूटर ने ते जब ले जा था घशीट के | किहे ने गेल तें रुक्का मार दिया , अक लाला जी संभल के ने जाइओ, खड्डे सें कदे पड़ जाओ | उह ने कई ट्रक भी लोजे लेंदे देख लिए | वो घबरा के ने म्हारी गाल आगे , सड़क के बीचाले खड्या होगा | अर लाग्या बुझण अक कितोड़ के जाऊं | म्हारे मांह तें कोए ते न्यू कह दे , अक उराँ के हो ल्यो , अर कोए न्यू कह दे , अक पराँ के हो ल्यो | सामी खड्डा स | जित वो खड्या था ,जा उथों सीधा चाले जांदा , ते साफ़ लिकड जांदा , पर कराड़ के जिस्से लेणे थे | दोनु ओड़ ने खड्डे थे ,जीतोड़ के भी जांदा घल्ना था जरूर | वो हिम्मत सी कर के अर माहरे कानी हो लिया , सकूटर ले के ने , अर गया सुधाँ स्कूटर गोड्डयाँ डूंघे खड्डे में छपाक तें | फेर हामने वो काढ्या मुस्साँ सी अर उह ने म्हारे ताहीं निरी दुआ दि अक बालकां ने उह की भोत सहायता करी | कराड़ बेचारा ,सुवाद म्हारा |

विशेष :- इब्ब कोए भाई न्यू शिक्सा ऩा दिओ अक हामने बानिये की गेल्याँ अमानवीय व्यवाहर का गलत काम कर्या |
 
मन्ने न्यू सोची , अक इब्ब ते कोए अल्बाद बची-ए कोणी , कई बे याद करण की कोशिश भी करी ,पर कदे-कदाऊ किम्मे याद आ-ए जावे स | जब सिक म्हारी गाल में पंजाब नेशनल बेंक खुला था , जनरल जंग शमशेर सिंह की हेल्ली में | होया न्यू , अक हाम सारी हाण सुणदे ,बेंक आल्याँ पे , जब वे आपणे खाता खोलण आणियाँ ताहीं सम्झान्दे , अक तम इतने दिन खातर इतने पिस्से जमा करोगे , ते तमने दुगने पिस्से मिलेंगे | ते मन्ने भी आपणा बेंक खोल लिया , अर लाग्ग्या उह में गंडे की पोरी ,लोहा , नुणी घी ,मलाई ,पिस्से अर खाण की दूसरी चीज जमा करण (हजम करण ) | पहलम ते आपणे भाई भानाँ का जमा कर्या | शरत या थी अक एक मिहने में दुगना मिलेगा | मिहने पाछे किहे के पांच गंडे उधार हो गे मेरे कानी , मेरे भाई भानाँ की मलाई अर नुणी घी आधा-आधा किल्लो उधार चढ़ ग्या | किहे धोरे पत्रा या लोहा दुगणा देण के बहाने चीजो ले के ने खा गा ,किहे के केले खा लिए ,किहे की मीठी गोली खा ली , किहे की सोढ़ा बोत्तल पी गा | बालक राजी होरे अक मिहना होग्या इब्ब ते सब सौदा दुगना मिलेगा | मन्ने बेंक दिवालिया घोषित कर दिया , अक मेरे धोरे किम्मे भी कोणी , जब पाछे मेरे ताहीं मेरे दोस्ताँ कई मिहने ताहीं गंडे की दो पोरी भी उधार कोणी दी | दिवालिया बच्चा बेंक |
 
कितोड़ स मिताथल बेरा ना ,पर हाम म्हारी भाभी ने बागड़ो कहया करदे ,ते इह का मतलब दादरी कानी किते होगा केरा )

भाईसाब,

मिथाथल : भिवानी तें महम आले रोड पे पहला गाम स "कालूवास".....(विजेंदर बोक्सर आला). कालूवास तें रोड जा स मिथाथल नै...........
 
Last edited:
मन्ने न्यू सोची , अक इब्ब ते कोए अल्बाद बची-ए कोणी , कई बे याद करण की कोशिश भी करी ,पर कदे-कदाऊ किम्मे याद आ-ए जावे स | |

Munnai nyu sochi ke is Kissa A albaadi ke saare adhyaaye khatam ho liye...K bera tha ibbe tai picture baaki sai ;)
 
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भाईसाब,

मिथाथल : भिवानी तें महम आले रोड पे पहला गाम स "कालूवास".....(विजेंदर बोक्सर आला). कालूवास तें रोड जा स मिथाथल नै...........
eeb theek se ke ?
ar ye rahe GPS co-ordinates : 28°53'31?N 76°10'11?E
 
Last edited:
Sai tai yu e,, lekin Kaluwas gaam tai road koni dikha rakha..Meham Road tai Road jaya karee Mitathal kaani..Google maps saare road koni dikhata..
bhai odde raah poochhan ne aadmi ae itne hain ak na GPS ki jaroorat ar na google maps ki :livid:. Leh ladakh te Kanyakumari chalya ja beshak bina maps ar GPS ke.
 
Sahi kahi Pannu!! India mai tai chugarde kai alleyways sain..GPS ki gobhi khud jaagi jai ye saare alleyways dikha diye tai..Hahahaha!!

Kayiyan ka tai koye naam bi koni...Bhojh baaj kai e thik sai! Ke GPS karega uskai aage :)

bhai odde raah poochhan ne aadmi ae itne hain ak na GPS ki jaroorat ar na google maps ki :livid:. Leh ladakh te Kanyakumari chalya ja beshak bina maps ar GPS ke.
 
Sahi kahi Pannu!! India mai tai chugarde kai alleyways sain..GPS ki gobhi khud jaagi jai ye saare alleyways dikha diye tai..Hahahaha!!

Kayiyan ka tai koye naam bi koni...Bhojh baaj kai e thik sai! Ke GPS karega uskai aage :)
ek or ho jaaya kare kayi be. jiste raasta boojhya ho vo kahga ak manne bhi udde ae jaana hai, bittha le paachhe . bata GPS kit paaani maange hai isi-isi service aage.
 
Ghani baat nai kaaree rah ruh ki Paanu... Na tai Ravinder bhai saab nai ek aur kissa yaad aa jaga :triumphant:!!

ek or ho jaaya kare kayi be. jiste raasta boojhya ho vo kahga ak manne bhi udde ae jaana hai, bittha le paachhe . bata GPS kit paaani maange hai isi-isi service aage.
 
म्हारे गाम में दुकानां आली गाल में एक बाणिया था ,नाम ते भूल, गा इब्ब | वो जितने चाहियें उतने पाद मार दिया करदा | जब हाम उहने कहंदे अक पाद मार के दिखाते वो एक पाद मार देंदा | पर दुसरे कहंदे ते न्यू कहंदा अक पहलम किम्मे खरीदो फेर मार के दिखाउंगा एक बे सुरेंदर ( अल्बादी बालकां की तिकड़ी ) ने उह ताहीं एक पाद के पांच पिस्से (पांच पिस्स्याँ में पांच मिट्ठी गोली आया करदी जब ) दे के ने १५ पाद मरवाए थे,लगातार | हाम उइह ने पादू बाणिया भी कहया करदे |
bhaisaab, aaj ke tem issa-2 jugaad cylinder bharan k kaam aa sake hai.
 
कसुते माणस सें ,किते हो , किम्मे हो बतलाण लाग्ज्याँ सें |
 
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