हाम जिब चोथी पाच्मी किलास म ए पढ्या करते | हामने, मन्ने आर मेरे भाई ने प्लान बनाई आक आज स्कूल म नही जावा | आर भाई हाम गये म्हारी माँ धोरे आर जा के नु बोल्ये माँ आज कोय्से मास्टर का ब्याह सै आज छुट्टी ताव्ली हो ज्यागी आर आज पढ़ाई बी ना होवे | माहरी माँ न थोड़ी सी हाण तो रोला राख्या पण हमने मना ए ली आखर म | हमने कहदी आक आज हाड़े इ पढ़ ल्यांगे | हाम थोड़ी सी वार तै पढये आर फेर क्यू डटे थे गये डांका | तो जिब आधी छुट्टी का टेम होया तो बालक आण लागरे तो एक छोरी ( जो म्हारी बैरण होया करती खासकर मेरी , जिब बी कद्दे मेरी पिटाई होया करती या मुर्गा बनाया जाता, कुछ बी होता, सारी मेरी माँ आग़े पूर दिया करती पिटवान खातिर ) घरां आई आर बोली ताई आज ये स्कूल म क्यू ना गये मेरी माँ ने उस तै बुज्या आक थारी छुट्टी क्यू ना होई और थारे कुण्से मास्टर का ब्याह सै आज | उ न बेरा पाटग्या आक झूठ बोल के एहये है उसने और के चाहिए था एक दो अपनी ओर तै और फूक दी आर बोली ताई आज तै पढाई बी भोत बढ़िया होई | फेर के था मेरी माँ ने ठाया सोटा आर लिकड्गी, हमने टोवन लागी | आर हाम भारने भी छेड़ करते पाए, उड़े इ मारण लागी, मरती-२ घरां लायी आर जिसे थे उसानए ही झोले पकड़ा दिए आर सोटे मारती-२ ले गी स्कूल म आर छोड़ दिए स्कूल के गेट प इब हाम भीतर क्यूँकर जावा इब मास्टरा का बी डर लागे था फेर बी हाम भीतर चले गये इब १२ सवा बारा स्कूल म पहुचे जिब मास्टर बी देख क हैरान हो गे, फेर उड़े मास्टरा न गेर के काटे उस दिन पाछे कदे इसा बहाना कोणी बनाया