B for BJP, B for Baniya B for Bahman And J for Anti-Jat

It is not true. Please see the cast of all the MP elected from Delhi.
In Delhi it was BJP in 1995 which increased Land Acquisition Rate 30 Times .
Please see the Land Acquisition Rate given to Farmers in Delhi before BJP and In BJP rule in Delhi.
You can file an RTI and know the fact.


With new ordnance on Land Acquisition clubbed with MSP on Wheat/Rice and increase in diesel price despite of international falling rates proves only and only the anti-farmer and anti-jat motives of BJP.

Now you are not anymore owner of your land but its the businessmen seating in the land of BJP. Black day and times for farmers. Courtsey- BJP


To view this content we will need your consent to set third party cookies.
For more detailed information, see our cookies page.
 
swaal yeh hai aap dono se: kya aapko ab tak ki BJP sarkaar ki nitiya kisan virodhi nahi lag rahi.....agar nahi to kyoun....?

aur BJP ke neta main kisano ke liye jo Maharashtra main kaha uske liye aapka comment nahi aaya....?..kya aapke commnet bas pappu aur chappuo tak hi seemit hai...BJP ke saamhi pindi kaampe hai?


mujhe nitiya kisan virodhi lag rahi hai aur kaarn maine issi thread ki post 8 main diye hai..ab aap log apna paksh raho..shayd main kuch miss kar raha huin...

प्रशांत भाई,

सच कहूँ तो अभी तक के सरकार के कार्यकाल को देखकर तो ऐसा लगता है जैसे किसान उनकी प्राथमिकता में नही है| विकास करने के सरकारी दावो के बीच असहाय किसान कही पीछे छूट गया प्रतीत होता है| हालाँकि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दो पर सरकार का रूख़ क़ाबिले तारीफ़ है| उम्मीद तो यही है क़ि कभी इस देश के किसानो पर भी सरकार की नज़रें इनायत होगीं|

यहाँ हमें यह भी याद भी रखना होगा कि अभी तक पूर्ववर्ती सरकारो के कार्यकाल में भी किसान उपेक्षित ही रहा है| सच्चाई तो यही है क़ि कृषि को विकास की मुख्यधारा में लाए बिना किसानो की स्थिति नही सुधार सकती है| बिना कृषि क्षेत्र पर ध्यान दिए सरकार का विकास का दावा खोखला सा प्रतीत होता है| मैं इस सरकार को किसान विरोधी तो नही कहूँगा| सरकार के अब तक के निर्णयों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुचना और सरकार को किसान विरोधी करार देना उतावलापन ही कहलायेगा|

हाँ इतना ज़रूर है अभी तक सरकार में बैठे कुछ लोगो को कृषि और किसान की अहमियत समझ नही आई है| अगर सरकार आगे भी इसी ढर्रे पर चलती रही तो यक़ीनन किसान विरोधी कहलाएगी|

दिक्कत एक और चीज़ की है| वो है सरकार से हमारी अपेक्षायें हद से ज़्यादा होना| सरकार के हर कदम को हम विकास के पैमाने पर नही परख सकते| वैसे इस स्थिति के लिए भी सरकार ही ज़िम्मेदार है| पिछली सरकार के कुशासन से त्रस्त जनता की उम्मीदों को पंख लगाने वाली यह सरकार अब हर बार कसौटी पर कसी जाएगी|

लगता है खेतिहर किसान के लिए अच्छे दिनो का सूखा अभी ख़त्म नही होने वाला| उम्मीदों की बारिश वाला "अच्छा" मानसून कही और अटक गया लगता है| अभी "कृपा" आनी बाकी है|
अच्छे दिनो की आस पाले बैठे किसानो को कुछ ख़ास करना होगा|

ग़ालिब का यह शेर बड़ा ही मुफ़ीद लगता है इस मंज़र पर|
दीदार की तलब हो तो ग़ालिब नज़रें ज़मा के रखिए,
क्योंकि वक़्त हो या पर्दा, सरकता ज़रूर है|


लगता है अपने दिन बदलने का किसानो को थोड़ा सब्र रखना होगा वैसा ही जैसे आषाढ़ के माह में मानसून की बाट जोहते किसान की टकटकी लगाए हुए आसमान क़ी ओर देखती आँखें|
 
Back
Top