Baba Ramdev to float political party

Absolutely !!!!!!!!!!!!!! Cant agree more!



Very many thanks for educating. This is the very reason, all babas exploite the masses, because even learned people blineded/fooled/brain washed. My personal openion is that the public has contributed for baba more than what baba has done, he has done all in his self interest. But friends, no competition, you keep your openion intect and I shall & will keep mine under seven locks, Dear sangwan, if you remember, I expressed my openion about chander mohan & that time also many of us were in disagreement and lateron, they themselves realised & seen the truth, similarly, things will be clear about ramdev but it may take little more time. or miracle can take place and I may be forced to change my openion, let us waite peacefully. regards
 
I agree with you !!! 100000000% ....... ;) Baba has contributed to Janata... and Janata has contributed to Baba...... Uttar-Paatar....& Lolll -m - lollll !!! :rock :rock :rock :rock !!!

Very many thanks for educating. This is the very reason, all babas exploite the masses, because even learned people blineded/fooled/brain washed. My personal openion is that the public has contributed for baba more than what baba has done, he has done all in his self interest. But friends, no competition, you keep your openion intect and I shall & will keep mine under seven locks, Dear sangwan, if you remember, I expressed my openion about chander mohan & that time also many of us were in disagreement and lateron, they themselves realised & seen the truth, similarly, things will be clear about ramdev but it may take little more time. or miracle can take place and I may be forced to change my openion, let us waite peacefully. regards
 
ye dekh lo bhai... Ye congressi aur media aale pichhe laag liye sain Baba Ramdev kei -

http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/63604/1/25

इटारसी। इटारसी में पिछले 4 दिन से चल रहे बाबा रामदेव का योग विज्ञान शिविर कल समाप्त हो गया। इस दौरान बाबा और पतंजलि योग समिति एवं भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओं की राजनीतिक इच्छाशक्ति उभरकर सामने आई। स्पष्ट हो गया कि वे योग शिविर के बहाने मप्र में अपनी राजनीतिक धरातल बनाने आए हैं। यही नहीं, इस दौरान भविष्य में राजनीतिक दल बनने वाले भारत स्वाभिमान के अकेले होशंगाबाद जिले में 55 हजार कार्यकर्ता बनाए गए हैं। यह बात अलग है कि ये कार्यकर्ता राजनीतिक उपयोग के लिए नहीं, बल्कि पतंजलि समिति में अपनी भागीदारी समझकर बने है। क्या किसी योगी, संत को राजनीति में आना चाहिए?
हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ की स्थापना करने वाले बाबा रामदेव ने आज से ।5 साल पहले योग और प्राणायाम के माध्यम से देश-विदेश में भारी ख्याति प्राप्त की और ऋषि पतंजलि के बाद उन्हें योग ऋषि और योग गुरु का दर्जा और सम्मान मिलने लगा। लगभग एक वर्ष पूर्व तक 'योग भगाए रोग, योग करें स्वस्थ रहेंÓ का नारा बुलंद करने वाले बाबा रामदेव अब भारत स्वाभिमान आंदोलन के जरिए राजनीति का दरवाजा खटखटाने लगे हैं। अब वे बीमारी, बुराई, भ्रष्टïाचार से मुक्त भारत, स्वस्थ, समृद्ध, संस्कारवान और वैभवशाली भारत की बात करने लगे हैं। भारत निर्माण की दिशा में उनकी राजनीतिक सोच उभरकर सामने आई है। धर्म से राजनीति के बाद अब योग प्राणायाम से राजनीतिक सफर की तैयारी करने वाले वे पहले संत हो गए हैं। इटारसी रेलवे ग्राउंड के योग शिविर, कई गांव में उनके दौरे, बाल्मिक बस्ती के घरों में दस्तक के दौरान उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा उभरकर सामने आई है। वे भारत स्वाभिमान आंदोलन के नाम पर सब हाथों को काम देने, विदेशी बैंकों में जमा भारत के काले धन की वापसी और इसे विकास कार्यों में लगाने, समान शिक्षा व्यवस्था, किसानों को लाभदायक खेती, भ्रष्टाचार की समाप्ति के साथ ही बड़ी करेंसी को वापस लेने की बात कर रहे हैं। वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तन की बात दोहराने लगे हैं। योग ऋषि बाबा रामदेव राजनीति में आने वाले हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। इटारसी की पत्रकारवार्ता में जब पत्रकारों ने जानना चाहा कि उनके द्वारा भविष्य में बनाए जाने वाले राजनीतिक दल का क्या नाम होगा और उनका झंडा क्या होगा तो बाबा रामदेव ने स्पष्ट किया कि भारत स्वाभिमान आंदोलन का एजेंडा ही पार्टी का एजेंडा रहेगा, बाकी बातें बाद में बता दी जाएंगी। योग के सहारे अपनी राजनीतिक धरातल की तलाश में निकले बाबा रामदेव हमेशा की तरह इस बार भी योग से कई असाध्य रोगों को दूर करने का अपना दावा दोहराते दिखे, जबकि कैंसर और हेपेटाइटिस जैसे बीमारियों को दूर करने के उनके दावे को कई बार चुनौती भी मिल चुकी है। रक्तचाप, मधुमेह जैसी प्राणघातक रोगों को क्योर करने के उनके दावे भी लोगों के गले से नीचे नहीं उतर सके। यह बात अलग है कि योग और आयुर्वेद के सहारे कुछ बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। योग के रास्ते राजनीति में प्रवेश के लिए लोगों का दरवाजा खटखटाना शुरू कर चुके बाबा रामदेव राजनीति में आने का साहस तो कर रहे हैं, किंतु अपनी खुद की सुरक्षा को लेकर भी उनकी चिंता स्पष्ट रूप से उभकर सामने आई है। योग, प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और आयुर्वेद के बाद राजनीतिक पार्टी की शुरुआत करने जा रहे स्वामी रामदेव का स्पष्ट झुकाव भाजपा की ओर है। संभवत: यही कारण है कि वे भाजपा शासित गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे भाजपा शासित मप्र के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की तारीफों के पुल बांधने लगे हैं। वे न सिर्फ इनकी विकास योजनाओं और नीतियों को योग सीखने आए लोगों के सामने बेहतर बताते हैं, बल्कि उनकी ईमानदारी की प्रति मूर्ति बताकर प्रशंसा भी करते हैं। वे अपने योग शिविर के दौरान कांग्रेस शासित केंद्र सरकार की आलोचना करने से भी नहीं चूकते। यह बात अलग है कि इटारसी के कीरतपुर डेयरी फार्म में मिलने जा रही 300 एकड़ की कीमती जमीन इसमें उत्प्रेरक का काम कर रही है। राजनीति में लगातार मजबूत कदम रखने वाले और लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच रहे राहुल गांधी की राजकुमार कहकर आलोचना और मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की भूरि-भूरि प्रशंसा करने वाले बाबा रामदेव के राजनीतिक में प्रवेश को अब कांग्रेस नेता आड़े हाथों भी लेने लगे हैं। शिवराजसिंह चौहान के डम्पर कांड को उजागर कर लोकायुक्त जांच के दायरे में लाने वाले वरिष्ठï अधिवक्ता और कांग्रेस नेता रमेश के. साहू ने तो बाबा को चुनौती ही दे डाली। देश का राजनीतिक इतिहास बताता है कि देश की जनता ने कभी किसी साधु-संत को सर्वोच्च राजनीतिक शिखर पर नही पहुंचाया। साध्वी उमा भारती जैसा उद्ïघाटन भी सामने आता है, जिनके लगातार बढ़ते राजनीतिक कद को उनके ही दल के बड़े नेताओं ने ही काट डाला। ऐसे में बाबा रामदेव की राजनीतिक यात्रा की सफलता-असफलता पर भी सवाल उठने लगे है। भ्रष्टïाचारियों और अपराधियों को राजनीति से दूर रखने, विदेशों में जमा काले धन को भारत वापस लाकर इसे विकास कार्यों में लगाने के एजेंडा का हर स्तर पर स्वागत होना चाहिए, किंतु यह कार्य इतना चुनौती पूर्ण है, जिसे पूरा किया जाना कम से कम अभी के राजनीतिक वातावरण में असंभव लगता है। बाबाओं, साधु-संतों, मठाधीशों का राजनीति में आने या न आने का मसला बहस का मुद्दा हो सकता है, किंतु यह बात स्पष्ट हो गई है कि योग ऋषि स्वामी रामदेव राजनीति में उतर रहे हैं। यह बात अलग है कि उनकी सफलता या असफलता ठीक साढ़े चार साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद सामने आएगी।

 
Well, who else can the media write against? Media knows that it can not keep on writing all positive news. When it can not write against the congress party which is the government now, it has to find other soft targets.

The last lok sabha elections were worst in the media history. Media earned crores.. and congress got the government… they both enjoyed a fruitful relationship.

The only one who suffered is the common person and the farmer. Whopping 15-20% inflation for almost two - three years now. Prices of every thing has doubled, if not tripled. Despite this much of increase, the farmer is still getting the same price when he goes to sell. After tolling hard, a farmer gets just 2 rs compared to 20rs that the middleman earns.
But media blames all this to global economic condition, because it too wants it's share without the hard work.
 
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