bhagat singh:Yug ka Deepak

jaat bhahiyoo m really lucky ki jiss bhagat singh ne apne deesh ki aazadi ke liyee choti c umarr mai apni jaan deti usss bhagat ka potaa meraa frd hai....n mujhe uski shakal mai aisa lagta hai jaise swayamm shahid bhagat singh meree samnee ho....he lives in faridabad
 
jaat bhahiyoo m really lucky ki jiss bhagat singh ne apne deesh ki aazadi ke liyee choti c umarr mai apni jaan deti usss bhagat ka potaa meraa frd hai....n mujhe uski shakal mai aisa lagta hai jaise swayamm shahid bhagat singh meree samnee ho....he lives in faridabad

Sandeep bhai Shaheede Azam ka to byaah a koni hoya tha...........................
 
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What a Shame! Not even a single line published in remembrance of Legend Bhagat Singh by any news agency for that matter on his B'day anniversary. I strongly believe that the country who doesn't remember n' value its Martyrs .. will go down in gutter, sooner than later!


Long Live Revolution !!


 
भगत सिंह आर्यपौत्र, आर्यपुत्र, आर्य विद्य&#236

आर्य जी, ये सत्य है की भगत सिंह जी का परिवार कट्टर आर्यसमाजी था और उनका रुझान क्रांति की तरफ इसी कारण से था. परन्तु स्वयं भगत सिंह ने कई बार लिखा कि वो नास्तिक हैं.
समझ नहीं आता कि आर्य समाजी लोग क्यूँ बार बार भगत सिंह को आर्य समाजी सिद्ध करना चाहते हैं और क्यूँ हम उन लोगो का उल्लेख भी नहीं करते जो आर्य समाज के सिद्धांतो के प्रति पूर्ण समर्पित थे. सबसे बड़ा उदाहरण है- पंडित रामप्रसाद बिस्मिल. बिस्मिल कट्टर आर्यसमाजी थे और उनका चिंतन भी पूर्ण परिपक्व था. मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप जो शिविर लगाते हैं, उनमे बिस्मिल की जेल में लिखी गयी आतमकथा वितरित करें...

दीपेंद्रजी मैंने पूरे लेख में कहीं नही लिखा की भगत सिंह स्वयं को आर्य कह रहे हैं!!! हाँ भगत सिंह राष्ट्र को आर्य समाज की दें थे. आर्य परिवार में ही भगत सिंह जैसा युवक पैदा हो सकता है जहाँ विचारों की स्वतंत्रता हो. अपने परिवार का युवक बलिदान हो गया, जब उसकी आयु मात्र २४ वर्ष की थी. अभी तो उसने सिद्धांतों का प्रतिपादन करना था. भगत सिंह के आर्य संस्कार भी हुए थे-

१. यज्ञोपवित संस्कार (इसी संस्कार पर उनके दादा ने उसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया था, ये एक आर्य ही कर सकता है नास्तिक नही)
२. उनकी शिक्षा नेशनल कॉलेज लाहोरे में हुई थी (जो की लाला लाजपत राय द्वारा संचालित था, जो आर्य समाज और राष्ट्र के जाज्वल्यमान नक्षत्र थे )
३. सांडर्स की हत्या के बाद उन्हें छिपने के लिए कोलकाता में स्थान "आर्य समाज" ही मिला था कोई नास्तिकों का अड्डा नही.

और जहाँ उन्होंने स्वयं को नास्तिक लिखा है उससे पहली पंक्ति में लिखते हैं मेरा अध्यन european ज्यादा रहा है एशियाटिक नही और चर्च की माने तो आर्य लोग भी नास्तिक ही हैं और आज भी आम अवधारणा है आर्यसमाजी किसी को नही मानते!!!

तो इसका अर्थ ये है की आर्य नास्तिक होते हैं???
काठ की हांडी बार नही चढ़ती दीपेन्द्र जी, कम्मुनिष्टों ने बहूत कोशिश कर ली है पर तथ्य झूठ्लाये नही जा सकते.

भगत सिंह आर्यपौत्र, आर्यपुत्र, आर्य विद्यार्थी, आर्यमित्र और यहाँ तक की HRA के कानपूर ब्रांच के अध्यक्ष भी क्रन्तिगुरु रामप्रसाद बिस्मिल आर्य थे जैसा आपने लिखा है.
 
http://aryayuvamahasammelan.bl​ogspot.com/ क्रांतिकारियों को याद करने एवं संपूर्ण क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए "आर्य युवा सम्मलेन" में आप सब इष्ट मित्रों सहित आमंतरित हैं.
 
बड्डे आये बड्डे आ के तुर्र गए ,
अस्सी वि चढ़दी उम्रे जावांगे ,
शौंक नहीं भीड़ विच ग्वाचन दा कोई ,
सर कड्ड के उत्ते आवांगे ,
जुल्म होया ते होऊ साड्डे इन्कुलाबिया ते ,
गल हक ते सच दी सुनावांगे ,
कल्ले पाणेया ते रत्त निचोड़ अपणा ,
इतिहास सुन्हेरी रचावांगे !!!!
–== सरदार भगत सिंह ==–
 
दीपेंद्रजी मैंने पूरे लेख में कहीं नही लिखा की भगत सिंह स्वयं को आर्य कह रहे हैं!!! हाँ भगत सिंह राष्ट्र को आर्य समाज की दें थे. आर्य परिवार में ही भगत सिंह जैसा युवक पैदा हो सकता है जहाँ विचारों की स्वतंत्रता हो. अपने परिवार का युवक बलिदान हो गया, जब उसकी आयु मात्र २४ वर्ष की थी. अभी तो उसने सिद्धांतों का प्रतिपादन करना था. भगत सिंह के आर्य संस्कार भी हुए थे-

१. यज्ञोपवित संस्कार (इसी संस्कार पर उनके दादा ने उसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया था, ये एक आर्य ही कर सकता है नास्तिक नही)
२. उनकी शिक्षा नेशनल कॉलेज लाहोरे में हुई थी (जो की लाला लाजपत राय द्वारा संचालित था, जो आर्य समाज और राष्ट्र के जाज्वल्यमान नक्षत्र थे )
३. सांडर्स की हत्या के बाद उन्हें छिपने के लिए कोलकाता में स्थान "आर्य समाज" ही मिला था कोई नास्तिकों का अड्डा नही.

और जहाँ उन्होंने स्वयं को नास्तिक लिखा है उससे पहली पंक्ति में लिखते हैं मेरा अध्यन european ज्यादा रहा है एशियाटिक नही और चर्च की माने तो आर्य लोग भी नास्तिक ही हैं और आज भी आम अवधारणा है आर्यसमाजी किसी को नही मानते!!!

तो इसका अर्थ ये है की आर्य नास्तिक होते हैं???
काठ की हांडी बार नही चढ़ती दीपेन्द्र जी, कम्मुनिष्टों ने बहूत कोशिश कर ली है पर तथ्य झूठ्लाये नही जा सकते.

भगत सिंह आर्यपौत्र, आर्यपुत्र, आर्य विद्यार्थी, आर्यमित्र और यहाँ तक की HRA के कानपूर ब्रांच के अध्यक्ष भी क्रन्तिगुरु रामप्रसाद बिस्मिल आर्य थे जैसा आपने लिखा है.

as much to me aryasamaj gives only teachings.its a relegion of thoughts,philosophies...its not like a scripted religion of practices,gods and identities as are others..sanatan hinduism,islam etc etc..
and according to bhagat singh as he mentioned in one of his own written document "why i m an etheist" says that "an aryasamijist is anything but atheist"
 
Last edited:
Not sure how much truth in this, but looks like Sobha Singh Father of Kushwant Singh and One Shadi Lal were the main witness for Bhagat Singh
http://en.wikipedia.org/wiki/Sobha_Singh_(builder)
Both were given many contracts and land holdings. Shadi Lal moved to Shamli in UP.

" जाट हारा नहीं कभी रण में तीर तोप तलवारों से ,
जाट तो हारा हैं , गद्दारों से दरबारों से |"
:sorrow:
 
मित्रो ओपरेशन ट्रोजन होर्से का सम्बन्ध अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव से हैं जिन्हें आज ही के दिन बर्बरतापूर्वक ब्रिटिश अधिकारियों ने मार दिया था । ब्रिटिश अधिकारियों ने ना नियमानुसार शवों का पोस्टमार्टम करवाया, ना शवों को परिजनों को सौंपा और न ही फांसी के लिए निश्चित दिन अथवा प्रक्रिया का ही पालन किया । ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जे. पी सैंडर्स के परिजनों के प्रतिशोध की भावना को तुष्ट करने के लिए इन तीनों क्रांतिवीरों की गर्दन तोड़ने से लेकर गोली मारने और फिर शवों का अपमान करने तक की बर्बर कार्यवाही तत्कालीन ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा की गयी । इस सब कार्यवाही के लिए गाँधी-नेहरु की मौन स्वीकृति के चलते कांग्रेस तब भी मौन थी और स्वतन्त्र भारत में ऐसे क्रांतिवीरों के जन्मस्थलों पर भरने वाले मेले कहीं राष्ट्रवाद को प्रबल और प्रखर ना कर दें इसलिए वही इतिहास पढाया जाता रहा जिसे ब्रिटिश काल में अंग्रेजों की स्तुति में लिखा गया था ।

कुछ वर्षों पूर्व ब्रिटेन में एक पुस्तक का लोकार्पण किया गया था "“Secrets unfurled by an Intelligence Bureau Agent of British-India” इस पुस्तक में उन तथ्यों पर प्रकाश डालने की चेष्टा की गयी है जिनके चलते अमर शहीद भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव के मृत शरीरों का ना तो नियमानुसार पोस्ट मार्टम करवाया गया और ना ही शवों को परिजनों को सौंपा गया । आपको जान कर ये आश्चर्य होगा कि पुस्तक में लिखे गए सभी तथ्य तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्य के सबसे विश्वसनीय एजेंट दिलीप सिंह इलाहबादी के रिकार्ड से लिए गए हैं । ये दिलीप सिंह इलाहबादी वही है जो नेहरु के घर में एक बागवान के रूप में वर्षों तक रहा, और ये वही इलाहबादी है जिसने साइमन कमीशन के विरुद्ध एक प्रदर्शन के दौरान जवाहर लाल नेहरु को सार्वजनिक रूप से चांटा मारा था । स्वतंत्र भारत में जब ब्रिटिश यहाँ से गए तब इस इलाहबादी को अपने साथ ब्रिटेन ले गए जहाँ वो 1986 तक जीवित था । इस पुस्तक को कुलवंत सिंह कुन्नर ने लिखा है जो दिलीप सिंह इलाहबादी का दत्तक प्रपोत्र है । इसी पुस्तक में ये बताया गया है कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की हत्या के दुष्कृत्य को ब्रिटिश सरकार ने "ओपरेशन ट्रोजन होर्से" का नाम दिया था । ब्रिटिश अधिकारी सैंडर्स के ससुर को इन तीनो शहीदों को गोली मारने और इनके शव का अपमान करके अपने प्रतिशोध की अग्नि बुझाने की अनुमति प्रदान की गयी थी। पुस्तक में रहस्योद्घाटन किया गया है कि सैंडर्स के ससुर ने तीनो युवा शहीदों के सीने और सिर में गोली मारी थी ।

Mr V.N. Smith Superintendent of Police (political) Criminal Investigation Department, Punjab, wrote in his memoirs on “The Saunders Murder Case” being preserved in a microfilm at the British Library London, — “Normally execution took place at 8 am, but it was decided to act at once before the public could become aware of what had happened” — He further wrote that “at about 7 pm shouts of Inquilab Zindabad were heard from inside the jail. This was correctly, interpreted as a signal that the final curtain was about to drop”.


आइये इन महान शहीदों की पावन स्मृति में हमारे महान जाट शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस पर उन्हें कोटिश: नमन करें। वन्दे माँ भारती ! शहीद भगत सिंह अमर रहे !!
 
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इस आदमी ने बोर्ड पर.. पंजाबी में.. कुछ लिखा है..।
क्या आपको.. पता है कि.. यह क्या लिखा है..?

यह लिखा है :
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"शहीद-ए -आजम.. सरदार भगत सिंह".. के 101-वें जन्मदिन.. के अवसर पर.. यहाँ जूते मुफ्त में पॉलिश किये जाएंगे..!!

एक भूखा गरीब आदमी देश के शहीदों के लिए अपनी आमदनी छोड़ सकता है पर..
देखो.. भारत के.. बेशर्म नेताओं को .. किसी ने भी.. भगत सिंह जयंती पर.. एक शब्द भी नहीं बोला..!!!

 
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जब भी 23 वर्ष के उस युवा क्रांतिकारी भगत सिंह के विषय में सोचता हु तो सर अनायास उन के चरणों में झुक सा जाता है ......

एक ऐसा व्यक्ति जिस का नाम "भगत सिंह" पुरे भारत वर्ष में राष्ट्रभक्त व्यक्तित्व का पर्यावाची बन कर रह गया और मैं उस दिव्य आत्मा के चरणों में बस इतना ही निवेदन करता हु की हमें निरंतर राष्ट्र भक्ति के मार्ग में चलने की प्रेरणा देते रहे .....

नमन वंदन ..... वन्दे मातरम् ...भारत माता की जय

 
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