bhagwan ki chaploosi.

ritu

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aajkal fb p dekh lo chahe real life me.mane itni maata er bhagwana ke naam nahi sunne the jitne aajkal sunan me er dekhan me aave se.savamani me bhandaare me hazaro rappiye la de se log.er koi ek be unne salah to de do koi ki utne pissa me gareeba ka koi bhala kar do.ghar me kaam karan waali naukrani te chahe chai ki kade mat bhujjho par tadke mandir m jaake bhagwan p jarur doodh te nahavege.pahle jaat in kaama m thode molad hoya karte .par aajkal kati bhedchaal me sabki gel mand rahe se.maje ki baat to ye hai ki pade likhe m er anpad m koi farak koni.apne apne matlab kadan ne sab us bhagwan ki aavbhagat me mande rahe se.mane te yu sardara ka gurduware ka langar fer bhi sahi laaga udde koi bhi aake roti kha sake se.
 
मानसिक रूप से कमजोर आदमी भगवान् का सहारा पकड़ता हे |
 
Bhai Ravinder....jaruri nahi ki mansik roop se kamjor hi bhagwaan main vishwas karta hai ya sahara pakadta hai...ye ashtha pe depend karta hai....Haan...per ye bhi galat hai ki aap sab kuchh chhod kar bhagwaan ke peechhey pad jao..pehle apni parivarik aivam samajik jimmedariyan puri karo, fir bhagwaan ka naam lo....
मानसिक रूप से कमजोर आदमी भगवान् का सहारा पकड़ता हे |
 
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जय श्री राम

केवल हिंदू धर्म विश्व का एकमात्र धर्म जहाँ आपको भगवान चुनने की आजादी है अगर आप शक्ति और बल के उपासक है तो बजरंगबली को अराध्य मान सकते है वैराग्य धारण करना है तो महादेव को और ग्रहस्थ है तो भगवान राम को और अर्थ मतलब पैसा चहिये तो माता लक्ष्मी और ज्ञान के लिये माँ सरस्वती और भी बहुत से उदाहरण है किसी धर्म की दो शाखायें हो तो वे परस्पर विरोद्दी हो जाते है हिंदू धर्म मैं करोडो शाखायें है परन्तु स्त्रोत एक है जिस प्रकार गंगा की सहायक नदियाँ गंगा मे मिलने से पहले अपना अस्तित्व होता होता है किंतु गंगा में गिरते ही सब गंगा बन जाती है इसलिये अपने आपको भाग्यशाली समझे की हिंदू धर्म आपका जन्म हुआ
 
मानसिक रूप से कमजोर आदमी भगवान् का सहारा पकड़ता हे |

रविन्द्रजीत सिंह जी ! वैसे तो आपके जितने भी धागे हैं वो बहुत बढ़िया होते हैं एवं मैं आपकी सभी बातों से सहमत भी हूँ. परन्तु आपका ये कहना कि "मानसिक रूप से निर्बल व्यक्ति ही भगवान का सहारा लेते हैं" इससे मैं सहमत नहीं हूँ. हमारा वैदिक धर्म पूरे ब्रह्माण्ड में विस्तृत है. हिन्दू धर्म (वैदिक धर्म) को सनातन धर्म भी कहते हैं. "सनातन" अर्थात जो पहले भी (भूत काल में) भी था, अब (वर्तमान में) भी है एवं भविष्य में भी इसका अस्तित्व रहेगा.

चूंकि हमारा विज्ञान अभी तक शैशवावस्था में ही है, इस ब्रह्माण्ड के रहस्यों से अभी बहुत सारे परदे उठने शेष हैं. प्राचीन समय में हमारे ऋषि-मुनि योग-साधना से अपने स्थूल शरीर को अल्पकाल के लिए त्यागकर सूक्ष्म शरीर में प्रवेश करके मन की गति से पूरे ब्रह्माण्ड का भ्रमण कर के पुनः पृथ्वी पर आ जाते थे. संभवतः मेरे कई मित्र इस बात पर मेरा परिहास भी कर सकते हैं, परन्तु ये सत्य है. हमारे चार वेद, १८ पुराण तथा २७ उपनिषद किसी पृथ्वी वासी ऋषि अथवा मुनि के लिखे हुए नहीं हैं अपितु ये पूरे ब्रह्माण्ड में जहाँ भी मानव निवास करते हैं, वहां पर ये सब वेद, पुराण एवं उपनिषद मिलेंगे.

यदि हमारे शास्त्रों की मानें तो हमारे पूर्वज मंगल ग्रह से ही आये थे, शनैः-शनैः सारे रहस्यों से पर्दा उठेगा. अमेरिकी अन्तरिक्ष संस्थान 'नासा' का अन्तरिक्ष यान "क्यूरिओसिटी" ५ अगस्त, २०१२ को मंगल की सतह पर सफलता पूर्वक उतर गया है.
हाँ एक बात और वो ये कि केवल हिन्दू धर्म ही ऐसा धर्म है जो मानव निर्मित धर्म नहीं है शेष सारे-सारे के धर्म मानव निर्मित हैं.
 
केवल हिंदू धर्म विश्व का एकमात्र धर्म जहाँ आपको भगवान चुनने की आजादी है अगर आप शक्ति और बल के उपासक है तो बजरंगबली को अराध्य मान सकते है वैराग्य धारण करना है तो महादेव को और ग्रहस्थ है तो भगवान राम को और अर्थ मतलब पैसा चहिये तो माता लक्ष्मी और ज्ञान के लिये माँ सरस्वती और भी बहुत से उदाहरण है किसी धर्म की दो शाखायें हो तो वे परस्पर विरोद्दी हो जाते है हिंदू धर्म मैं करोडो शाखायें है परन्तु स्त्रोत एक है जिस प्रकार गंगा की सहायक नदियाँ गंगा मे मिलने से पहले अपना अस्तित्व होता होता है किंतु गंगा में गिरते ही सब गंगा बन जाती है इसलिये अपने आपको भाग्यशाली समझे की हिंदू धर्म आपका जन्म हुआ

सूर (सूअर )(वराह अवतार ) ने क्यां खातर पूज्या करें ???इह देवता ने क्यूँ चुन्या करें ??
 
ek taraf to sawamani mai hajaro spend karne pe logo ko critize kar ruhi ho... doosri taraf gurudware ke langar ko sahi bata ruhi ho... mere khayal se sawamani mai, garibo ko khane se koi nahi rookta... to mugjhe dono mai koi farak pata nahi padta... so mai aapko suggest karounga ki pehle aap "mental tornedo" se bahar nikal ke vichar karein... or ek conclusion pe pahunche ki kisi bhi religion mai... unki manayetao ke hisab se, be-fizul ka kharch karna theek hai ya galat... (aap ek religion ki ek cheez ko doosre mai sahi nahi tehra sakte) or jab conclusion mil jaye to vichar-vimarsh karne ka kuch tuk hoga... warna directionless or confused topic ke thread pe post bhi directionless and confused hongae... dhanayawad...

aajkal fb p dekh lo chahe real life me.mane itni maata er bhagwana ke naam nahi sunne the jitne aajkal sunan me er dekhan me aave se.savamani me bhandaare me hazaro rappiye la de se log.er koi ek be unne salah to de do koi ki utne pissa me gareeba ka koi bhala kar do.ghar me kaam karan waali naukrani te chahe chai ki kade mat bhujjho par tadke mandir m jaake bhagwan p jarur doodh te nahavege.pahle jaat in kaama m thode molad hoya karte .par aajkal kati bhedchaal me sabki gel mand rahe se.maje ki baat to ye hai ki pade likhe m er anpad m koi farak koni.apne apne matlab kadan ne sab us bhagwan ki aavbhagat me mande rahe se.mane te yu sardara ka gurduware ka langar fer bhi sahi laaga udde koi bhi aake roti kha sake se.
 
pata nahi aaj kal ki jaatniyo ko kya ho gaya hai..pehle ladki ho ya bahu sar pe ooni dharya karti thi..par jab se iss videshi tattu pe sawaar hui hai..jyadatar ne yeh sab chhod diya hai..aur maze ki baat yeh hai ki padhi likhi ho ya anpadh sab iss andhi daud main shaamil hai..pata nahi inhe kab sadbhudhi aayegi..aur yeh apne sanskaro ko jinda rakhegi
 
रविन्द्रजीत सिंह जी ! वैसे तो आपके जितने भी धागे हैं वो बहुत बढ़िया होते हैं एवं मैं आपकी सभी बातों से सहमत भी हूँ. परन्तु आपका ये कहना कि "मानसिक रूप से निर्बल व्यक्ति ही भगवान का सहारा लेते हैं" इससे मैं सहमत नहीं हूँ. हमारा वैदिक धर्म पूरे ब्रह्माण्ड में विस्तृत है. हिन्दू धर्म (वैदिक धर्म) को सनातन धर्म भी कहते हैं. "सनातन" अर्थात जो पहले भी (भूत काल में) भी था, अब (वर्तमान में) भी है एवं भविष्य में भी इसका अस्तित्व रहेगा.

चूंकि हमारा विज्ञान अभी तक शैशवावस्था में ही है, इस ब्रह्माण्ड के रहस्यों से अभी बहुत सारे परदे उठने शेष हैं. प्राचीन समय में हमारे ऋषि-मुनि योग-साधना से अपने स्थूल शरीर को अल्पकाल के लिए त्यागकर सूक्ष्म शरीर में प्रवेश करके मन की गति से पूरे ब्रह्माण्ड का भ्रमण कर के पुनः पृथ्वी पर आ जाते थे. संभवतः मेरे कई मित्र इस बात पर मेरा परिहास भी कर सकते हैं, परन्तु ये सत्य है. हमारे चार वेद, १८ पुराण तथा २७ उपनिषद किसी पृथ्वी वासी ऋषि अथवा मुनि के लिखे हुए नहीं हैं अपितु ये पूरे ब्रह्माण्ड में जहाँ भी मानव निवास करते हैं, वहां पर ये सब वेद, पुराण एवं उपनिषद मिलेंगे.

यदि हमारे शास्त्रों की मानें तो हमारे पूर्वज मंगल ग्रह से ही आये थे, शनैः-शनैः सारे रहस्यों से पर्दा उठेगा. अमेरिकी अन्तरिक्ष संस्थान 'नासा' का अन्तरिक्ष यान "क्यूरिओसिटी" ५ अगस्त, २०१२ को मंगल की सतह पर सफलता पूर्वक उतर गया है.
हाँ एक बात और वो ये कि केवल हिन्दू धर्म ही ऐसा धर्म है जो मानव निर्मित धर्म नहीं है शेष सारे-सारे के धर्म मानव निर्मित हैं.


Kamaal kar diya Dular Bhai ji reasoning ki to jamae taang todh ke dhar di.:tears_of_joy:
 
Various studies have indicated that rates of suicide and depression are significantly higher in atheists than theists (believers). Not the symptoms of sound mental health
 
We all need somebody or something in crisis------for some it may be friends / family ------or for some The Lord Almighty-------

just the idea that he can do miracles or he is watching over us --------gives strength to deal with crisis .

As somebody said -------Every good deed is rewarded in a way or another .

What I believe in - do not let go any single chance of helping anyone -------one may not get such chance again.
 
" pata nahi aaj kal ki jaatniyo ko kya ho gaya hai..pehle ladki ho ya bahu sar pe ooni dharya karti thi "

Kinda curious , just by covering one's head would prove how decent a gal is ------no matter how foul her language would be----
Its too much of cliche - covering head n all that ------One must know how to behave ----be nice n kind -respect all -----
thats it------it has got nothing to do with covering head or not
 
bhai saab aapki baat satya bhi ho sakti hai... but, hu to mai bhi atheist, to abhi se apna suicide likh du kya??? halaki mera aaj tak to aisa koi vichar hua nahi hai... but hua to geetika ne jaise kanda ko lapet diya... waise hi ek-aadhe ka ghaak to mai bhi ho jaounga... :)

Various studies have indicated that rates of suicide and depression are significantly higher in atheists than theists (believers). Not the symptoms of sound mental health
 
Various studies have indicated that rates of suicide and depression are significantly higher in atheists than theists (believers). Not the symptoms of sound mental health

Bhai Krishan, I dont think being atheist makes someone mentally weak. Shouldn't it be other way round? Mostly such people are fearless. There can be n number of reasons for a person to commit suicide.. Jo Kisaan karj me doobe hue hai or apna karj nahi utaar paa rahe hai does it matter for them if they are atheist or not??
Being a theist can only help in cursing God if a person has decided to commit suicide.. "bla rey manne itne vrat kare, pooja-paath karya ar tanne fer bhi mere gel issi banayi"

Is dharti pe aaye ho to kuch karam karo.. Aade bhi bhagwan ke naam ki e mala jape gaye to ghar ne kun sambhalega? Kisi bhi vyakti ka khudkhushi karna ya karne ke baare me sochna uski kamjor soch ka ya uske dwaara liye gaye faisle ke kaaran utpann hui pristhithiyo ka roop hai..naa ki uska bhagwan me vishwas karna ya na karna..


PS : Ye mere niji vichar hai.. dusro ke vichar "bhinn" ho sakte hai ya fer "bhinn ke bhinn" bhi ho sakte hai ..! ;)
 
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रविन्द्रजीत सिंह जी ! वैसे तो आपके जितने भी धागे हैं वो बहुत बढ़िया होते हैं एवं मैं आपकी सभी बातों से सहमत भी हूँ. परन्तु आपका ये कहना कि "मानसिक रूप से निर्बल व्यक्ति ही भगवान का सहारा लेते हैं" इससे मैं सहमत नहीं हूँ. हमारा वैदिक धर्म पूरे ब्रह्माण्ड में विस्तृत है. हिन्दू धर्म (वैदिक धर्म) को सनातन धर्म भी कहते हैं. "सनातन" अर्थात जो पहले भी (भूत काल में) भी था, अब (वर्तमान में) भी है एवं भविष्य में भी इसका अस्तित्व रहेगा.

चूंकि हमारा विज्ञान अभी तक शैशवावस्था में ही है, इस ब्रह्माण्ड के रहस्यों से अभी बहुत सारे परदे उठने शेष हैं. प्राचीन समय में हमारे ऋषि-मुनि योग-साधना से अपने स्थूल शरीर को अल्पकाल के लिए त्यागकर सूक्ष्म शरीर में प्रवेश करके मन की गति से पूरे ब्रह्माण्ड का भ्रमण कर के पुनः पृथ्वी पर आ जाते थे. संभवतः मेरे कई मित्र इस बात पर मेरा परिहास भी कर सकते हैं, परन्तु ये सत्य है. हमारे चार वेद, १८ पुराण तथा २७ उपनिषद किसी पृथ्वी वासी ऋषि अथवा मुनि के लिखे हुए नहीं हैं अपितु ये पूरे ब्रह्माण्ड में जहाँ भी मानव निवास करते हैं, वहां पर ये सब वेद, पुराण एवं उपनिषद मिलेंगे.

यदि हमारे शास्त्रों की मानें तो हमारे पूर्वज मंगल ग्रह से ही आये थे, शनैः-शनैः सारे रहस्यों से पर्दा उठेगा. अमेरिकी अन्तरिक्ष संस्थान 'नासा' का अन्तरिक्ष यान "क्यूरिओसिटी" ५ अगस्त, २०१२ को मंगल की सतह पर सफलता पूर्वक उतर गया है.
हाँ एक बात और वो ये कि केवल हिन्दू धर्म ही ऐसा धर्म है जो मानव निर्मित धर्म नहीं है शेष सारे-सारे के धर्म मानव निर्मित हैं.

मंगल गृह के निवासी , वहाँ के कैलाश पर्वत पर विचरण करने वाले अमर अजर ऋषि , स्वप्न में आये और पूछा की राजपाल जी को जल्द ही उड़न तश्तरी के माध्यम से मंगल गृह पर बुलाएँगे ! पृथ्वी पर धर्म अत्यधिक मात्र में विस्तृत हो चुका है और जहाँ से शुरू हुआ था वहाँ खत्म हो रहा है अत : राजपाल जी की आवश्कयता वहाँ अधिक है ! राजपाल जी , नासा जैसी तुच्छ वस्तु उस ऋषि के आगे कुछ नहीं थी , उनके नाख़ून में ही कई तरह के बटन लगे थे जिनसे वो अनेक दिशा - निर्देश दे रहे थे ! आप कृपया वहाँ जाए और वहाँ से ये सारी विद्या सिख कर जाट कौम का भला करे !

इसे मजाक न समझे क्यूँ की ये कतई मजाक नहीं है !

अनुग्रहित !
 
जय श्री राम

भाई रविन्द्रजीत हमारे धर्म ग्रंथो मे हर प्राणी को भगवान से जोड दिया गया ताकि उस प्रजाति का समूल नाश न हो जैसे बंदर हाथी शेर साँप बैल चूहा मोर आदि ।वराह अवतार मे भगवान विष्णु ने सुअर का रूप धारण किया आपने ने कहा इसे किस तरह पूजे सूअर प्रकति का शोधक है मल मूत्र गली सडी वस्तु खा कर हमारे लिये वातावरण साफ करता जिस तरह पेड पौधे खुद कार्बन डाइ आक्साइड लेकर हमें आक्सीजन देते है उसी प्रकार ये जीव भी हमारा भला करता है ये और बात है कि हम इसके महत्व को नही समझते
 
मंगल गृह के निवासी , वहाँ के कैलाश पर्वत पर विचरण करने वाले अमर अजर ऋषि , स्वप्न में आये और पूछा की राजपाल जी को जल्द ही उड़न तश्तरी के माध्यम से मंगल गृह पर बुलाएँगे ! पृथ्वी पर धर्म अत्यधिक मात्र में विस्तृत हो चुका है और जहाँ से शुरू हुआ था वहाँ खत्म हो रहा है अत : राजपाल जी की आवश्कयता वहाँ अधिक है ! राजपाल जी , नासा जैसी तुच्छ वस्तु उस ऋषि के आगे कुछ नहीं थी , उनके नाख़ून में ही कई तरह के बटन लगे थे जिनसे वो अनेक दिशा - निर्देश दे रहे थे ! आप कृपया वहाँ जाए और वहाँ से ये सारी विद्या सिख कर जाट कौम का भला करे !

इसे मजाक न समझे क्यूँ की ये कतई मजाक नहीं है !

अनुग्रहित !


ये ऋषि-मुनि सतयुग में थे, तभी की बात लिखी थी, सतयुग में सभी कार्य मन्त्रों से होते थे तथा अभी कलयुग में यंत्रों (मशीन) से कार्य होते हैं.
अभी तो घोर कलयुग चल रहा है.
आपने मंगल गृह लिखा है जो कि ग्रह होता है, गृह घर को बोलते हैं, अपनी भाषा में सुधार कर लीजियेगा.

मंगल पर अभी जीवन नहीं है, अरबों वर्ष पहले अवश्य वहां हमारे पूर्वज निवास करते थे. शनैः-शनैः मंगल के सारे रहस्य खुल जायेंगे.
 
भाई रविन्द्रजीत हमारे धर्म ग्रंथो मे हर प्राणी को भगवान से जोड दिया गया ताकि उस प्रजाति का समूल नाश न हो जैसे बंदर हाथी शेर साँप बैल चूहा मोर आदि ।वराह अवतार मे भगवान विष्णु ने सुअर का रूप धारण किया आपने ने कहा इसे किस तरह पूजे सूअर प्रकति का शोधक है मल मूत्र गली सडी वस्तु खा कर हमारे लिये वातावरण साफ करता जिस तरह पेड पौधे खुद कार्बन डाइ आक्साइड लेकर हमें आक्सीजन देते है उसी प्रकार ये जीव भी हमारा भला करता है ये और बात है कि हम इसके महत्व को नही समझते

इस विष्णु न भी पूजन खातर घु भी खा लिया ! कसूता ए टेलेंटेड देवता था ! सूर भी न छोड़ा अवतार बिना !
 
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