Bhoondi baat laaggi

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ravinderjeet

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इब्ब पछली फ़रवरी में में गाम में गया था ३-४ दिन खातर | एक वाने में जाना था | ऊँ तो आई बरिया में किस्से रिश्तेदार की गाडी ले लिया करदा ,पर ईबके सबे के घरां में किम्मे ना किम्मे वाना था तो मन्ने गाडी मिली कोणी | में एर मेरी बड्डी साली रोहतक तें बस में चढ़ लिए सोनीपत खातर | बस जम्मा ठूकी पड़ी थी | बस में स्पोर्ट्समेन कद पे इंडिया लिखे होड़े , कमांडो एर घने सारे जवान मानस भी बेठे थे सिट्टाआं पे | एर घने सारे बूढ़े -बूढी एर बाल्कां आली लुगाई कड़ी थी | म्हारे बर्गे कईया ने कही भी रे ऊठ ल्यो पर कालू पुर चोकी ताहि एक भी बन्दा खड्या कोणी होया | लगभग एक घंटे का सफ़र था | माने नु सोची अक रे ये किस्से स्पोर्टस में सें एर किस्से कमांदी -एर सिपाही से जो आपने बूढ़े-बूढी लूगाइयां नु भी सीट देवन नु तैयार कोणी | इतना संस्कर्तिक पतन हरयाना का मन्ने पहली बार देख्या | एर या बात मन्ने घणी भुंडी लागी |
 
भाईसाहब जिब मै बालक होया करता , जिब मै अपने आप ए छोड़ दिया करता सीट....बुड्डा खातिर...
पर मेरे गैला के बना करती...ताऊ ताई ते उतर के चाल पड़ा करते .....अर्र उड़े फेर और कोई बैठ जाया करता ...फेर मैंने नु लगा करता मखा बेवकूफ बन गया.....उस पाछे मैंने कदे अपने आप सीट ना छोड़ी ...पर जै कोई बुड्डी कह दिया करती ते छोड़ दिया करता.....
अर्र इब ते बस में गए भी कई साल हो गए...इब ते मै bike पे ए लिफ्ट दे दिया करू....कोई ताऊ-ताई जीप की बाट में खड़े फस जा ते.....

लोग-बाग नु सोचे जा सै....कोई दूसरा अपने आप उठ जागा, अर बैठे रहवे सै....अर आजकल जो घनी समाज सेवा करा करे , वो दुखी रहा करे....
घन्करे मानसा ने किसे और ते कोई मतबल नहीं सै....सब अपना सुख देखे सै..
...किसे ते उम्मीद करनी ए नहीं चहिये
 
भाईसाहब जिब मै बालक होया करता , जिब मै अपने आप ए छोड़ दिया करता सीट....बुड्डा खातिर...
पर मेरे गैला के बना करती...ताऊ ताई ते उतर के चाल पड़ा करते .....अर्र उड़े फेर और कोई बैठ जाया करता ...फेर मैंने नु लगा करता मखा बेवकूफ बन गया.....उस पाछे मैंने कदे अपने आप सीट ना छोड़ी ...पर जै कोई बुड्डी कह दिया करती ते छोड़ दिया करता.....
अर्र इब ते बस में गए भी कई साल हो गए...इब ते मै bike पे ए लिफ्ट दे दिया करू....कोई ताऊ-ताई जीप की बाट में खड़े फस जा ते.....

लोग-बाग नु सोचे जा सै....कोई दूसरा अपने आप उठ जागा, अर बैठे रहवे सै....अर आजकल जो घनी समाज सेवा करा करे , वो दुखी रहा करे....
घन्करे मानसा ने किसे और ते कोई मतबल नहीं सै....सब अपना सुख देखे सै..
...किसे ते उम्मीद करनी ए नहीं चहिये

baat to teri theek se VJ , meri gelyaan bhi kai be ulti ban li ,me aagli past me bataaungaa,par eekaa matalab nu to koni ak purey samaaj kaa bhatthaa bethjaa er haam khadey-khadey dekhey jaawaange
 
इब्ब पछली फ़रवरी में में गाम में गया था ३-४ दिन खातर | एक वाने में जाना था | ऊँ तो आई बरिया में किस्से रिश्तेदार की गाडी ले लिया करदा ,पर ईबके सबे के घरां में किम्मे ना किम्मे वाना था तो मन्ने गाडी मिली कोणी | में एर मेरी बड्डी साली रोहतक तें बस में चढ़ लिए सोनीपत खातर | बस जम्मा ठूकी पड़ी थी | बस में स्पोर्ट्समेन कद पे इंडिया लिखे होड़े , कमांडो एर घने सारे जवान मानस भी बेठे थे सिट्टाआं पे | एर घने सारे बूढ़े -बूढी एर बाल्कां आली लुगाई कड़ी थी | म्हारे बर्गे कईया ने कही भी रे ऊठ ल्यो पर कालू पुर चोकी ताहि एक भी बन्दा खड्या कोणी होया | लगभग एक घंटे का सफ़र था | माने नु सोची अक रे ये किस्से स्पोर्टस में सें एर किस्से कमांदी -एर सिपाही से जो आपने बूढ़े-बूढी लूगाइयां नु भी सीट देवन नु तैयार कोणी | इतना संस्कर्तिक पतन हरयाना का मन्ने पहली बार देख्या | एर या बात मन्ने घणी भुंडी लागी |

bhai balhara sahab eb wo haryana na rehyaa ........................eb t koi seet chod bhi de t 2 bhai ukeena dekh k hasee gee rr keh geee bana leye number ..........................................sab matlabi ho re s......................kiseee n kisee t koi matlab nahi ....................
 
इब्ब सीट देवन एर लेवन की बात चाल्गी तो में एक -दो घटना और बताणा चाहूँगा | जब मेंने कोलेज में अदमीसन लिया तो में १४-१५ साल का था एर गात का भी हल्का था | मन्ने कोए नु नहीं कह सके था अक यो कोलेज में पढता होगा | घणे तोंह घणा ६-७ में पढता होगा नु कह्या करदे | सांझ नु गाम में जांदी हान बसां में अछि भीड़ हो जाया करदी | एक दिम में महम आली बस में बैठा था एर बस कसुती ठाड़ी भरी थी | मेरे साहरे एक कोलेज की छोरी खड़ी थी जो मेरे तें कम तें कम ४-५ साल बड्डी होगी | एर भीड़ के बोझ तें वा आछी दब रि थी | मन्ने सोची एक या म्हारे गाम की तो स कोणी आगे किते जांदी होगी एर मखा महारा गाम तो रोहतक तें चाल्दे-ए ८-१० मिनट में आले से | मन्ने ऊ ताहि कह दी अक बेबे तू सीट पे बैठ जा | तो वा नु बोली " तू के घणा सीट देनिया बणे स ,पडया रे बोल - बाला " | जब पाछे मन्ने आज ताहि, जा किस्से नु मांग ली तो बेशक ना तो जवान छोरी- लुगाई ताहि सीट ऑफर नहीं करी स | एर या बात मन्ने इतणी भुंडी लागी अक में आपने आप तें -ए कई दिन ताहि चिड सा गया था |
 
तेरा कसूर कोणी रविंदर... उस छोरी ने सुवाद आ र होगा भीड़ में खड़े होवन में .........तेंने भंग कर दिया ..... तेंने कोणी बेरा आज काल के बालका का .... ha ha ha ha ha h ah......


इब्ब सीट देवन एर लेवन की बात चाल्गी तो में एक -दो घटना और बताणा चाहूँगा | जब मेंने कोलेज में अदमीसन लिया तो में १४-१५ साल का था एर गात का भी हल्का था | मन्ने कोए नु नहीं कह सके था अक यो कोलेज में पढता होगा | घणे तोंह घणा ६-७ में पढता होगा नु कह्या करदे | सांझ नु गाम में जांदी हान बसां में अछि भीड़ हो जाया करदी | एक दिम में महम आली बस में बैठा था एर बस कसुती ठाड़ी भरी थी | मेरे साहरे एक कोलेज की छोरी खड़ी थी जो मेरे तें कम तें कम ४-५ साल बड्डी होगी | एर भीड़ के बोझ तें वा आछी दब रि थी | मन्ने सोची एक या म्हारे गाम की तो स कोणी आगे किते जांदी होगी एर मखा महारा गाम तो रोहतक तें चाल्दे-ए ८-१० मिनट में आले से | मन्ने ऊ ताहि कह दी अक बेबे तू सीट पे बैठ जा | तो वा नु बोली " तू के घणा सीट देनिया बणे स ,पडया रे बोल - बाला " | जब पाछे मन्ने आज ताहि, जा किस्से नु मांग ली तो बेशक ना तो जवान छोरी- लुगाई ताहि सीट ऑफर नहीं करी स | एर या बात मन्ने इतणी भुंडी लागी अक में आपने आप तें -ए कई दिन ताहि चिड सा गया था |
 
do baatein -

Pehele to bhai jab tum sahi kaam karo to apne par garv hona chahiye. Ab agle ke reaction se apne karmo ko nahi parakhna chahiye aur na hee sharmindgee honee chaheeye. Mein tumhaaree bhaavnaon ko achi tarah samajh sakta hoon par kya tum itne nirbal maansikta ke ho kee ek ladki ya ek anubhav ne fitrat hee badal dee. Mein to aisa nahi samajhta.. Ab uss baawli booch ke chakkar mein kitne aur log seat paane se vanchit reh gaye. Tumne kitno ko seat nahi dee. Mein to keheta hoon agar 5 mein se 3 bhi mana karde to apne acche karmo ko aur swabhaav ko nahi parakhna ya badla chahiye. iib agli baar fir poochiye aur koi naat jaye to bus muskuraa diye... :)

Dooji baat - Jawaan ladkiyon ko shaareerik taur par itna kamzor nahi samajhna chahiye, kee woh safar mein khadi nahi rehe sakti. Woh har jagah mukaabla karna chahti hai aur apne ko kahin bhi kam nahi samajhti. haan jab bus mein dabba dabbi ho rahi ho to baat mein farak se...



इब्ब सीट देवन एर लेवन की बात चाल्गी तो में एक -दो घटना और बताणा चाहूँगा | जब मेंने कोलेज में अदमीसन लिया तो में १४-१५ साल का था एर गात का भी हल्का था | मन्ने कोए नु नहीं कह सके था अक यो कोलेज में पढता होगा | घणे तोंह घणा ६-७ में पढता होगा नु कह्या करदे | सांझ नु गाम में जांदी हान बसां में अछि भीड़ हो जाया करदी | एक दिम में महम आली बस में बैठा था एर बस कसुती ठाड़ी भरी थी | मेरे साहरे एक कोलेज की छोरी खड़ी थी जो मेरे तें कम तें कम ४-५ साल बड्डी होगी | एर भीड़ के बोझ तें वा आछी दब रि थी | मन्ने सोची एक या म्हारे गाम की तो स कोणी आगे किते जांदी होगी एर मखा महारा गाम तो रोहतक तें चाल्दे-ए ८-१० मिनट में आले से | मन्ने ऊ ताहि कह दी अक बेबे तू सीट पे बैठ जा | तो वा नु बोली " तू के घणा सीट देनिया बणे स ,पडया रे बोल - बाला " | जब पाछे मन्ने आज ताहि, जा किस्से नु मांग ली तो बेशक ना तो जवान छोरी- लुगाई ताहि सीट ऑफर नहीं करी स | एर या बात मन्ने इतणी भुंडी लागी अक में आपने आप तें -ए कई दिन ताहि चिड सा गया था |
 
nitin bhaai aap ki baat ek dum solaa aane saachi se, naa haamne seat deni chhodi , er itney kamjor maansiktaa ke naa saa bhai, haam to aaj bhi seat dewaan saan par haalaat dekh kein.saawdhaani se.er issi baat hondi to me yo thread suru naa kardaa.
 
एक बे में ट्रेन में कित्ते जाऊं था | एक लुगाई आपने पति गेल्याँ ट्रेन में चढ़ गी एर घनी भीड़ थी जयां तें मन्ने ऊ ताहि सीट दे दी | आड़े मुंबई में सीट देवन की कम्मे रिवाज से | एर माड़ी वार पाछे जब दूसरी सीट खाली होई तो उने आपणा पति खींच के आपणे धोरे बिठा लिया एर ऊ ताहि सीट देवानिया खडा रह्या लखान्दा | एर इस्सी घटना मेरी गेल्याँ २-३ बे और बणी | मन्ने लूगाइयां का यो सवार्थ पणा घणा भुंडा लाग्या |
 
रविंदर ये पुराने किस्से सोश्यल रिस्पोंसिबिलिटी में क्यूँ गेरे स.......

इनका एक नया तागा शुरू कर ले " शरीफ बालका गेल भूंडी बननी"
 
रविंदर ये पुराने किस्से सोश्यल रिस्पोंसिबिलिटी में क्यूँ गेरे स.......

इनका एक नया तागा शुरू कर ले " शरीफ बालका गेल भूंडी बननी"

social responcablity me naa aawenge to aur kit aawenge , ye baat samaaj ke saath sambandhit se, er issi ghatnaa naa ghatein yaa jo bandey padhey wey kam toh kam isaa naa karein ak ye baat galat sein
 
मेरे ताऊ की छोरी का बियाह था | सारे काम ठीक -ठाक निबट गे | जब परस माँ तें हाम खाट ठावन गए बारात जाए पाछे तो उनकी घंखरियाँ की पांद कटी पाई | जब छोरे आल्याँ तें सिकायत करी तो वे नु बोले अक के कराँ दारु पि के ने कुछ बालका ने यो काम कर दिया होगा | उने नु नि सोची अक जिन गेलयाँ आज रिश्तेदारी बनावन लाग रे सो उनका नुक्सान कर के के फेदा मिलेगा | एर या बात मन्ने घणी भुंडी लागी | इस्से बेवकूफ भी सें |
 
एक बे में आपने बालकां की गेल रोहतक तें दिल्ली जाऊ था ट्रेन पकड़न खातर | हाम रोअडवेज की बस में बेठे थे | एर कई सवारी बीडी सिगरेट पीवन लागरी थी| जाड्यां के दिन थे एर सारी खिड़की बंद थी | घना कसूता दम घुटन लाग्या तो में कंडेक्टर ताहि बोल्या एक भाई यो बंद करवा एर ऊँ भी बीडी सिगरेट पीनी अलाऊड ना से , ऊ तेई कहन का के फेदा था वो आप बीडी मांग कें पीवन लाग्या | हाम सारे भी दुखी हो लिए थे , फेर म्हारी गेल एक बुड्ढा ताऊ एर एक सरदार भी बोलन लागे अक बंद करो | २ जणे बुझा दे तो और २, ३ जणे किते हो पीवन लाग्ज्याँ | फेर हाम कई जाने एर २-३ लुगाई भो बोलन लागी अक बीडी पीनी बंद करो | घणा रोला होगया तो नांगलोई धोरे सी जा कें कंडेक्टर नु बोल्या जिन्ने तकलीफ से वे उतर जाओ हाम तो नुएइ पिवांगे | कंडेक्टर , ड्राइवर एर कई सवारियां का यो ढीठ पणा मन्ने घणा भुंडा लाग्या, जो बिना सोचे समझे लोका नु तकलीफ दे |
 
इब्ब पछली फ़रवरी में में गाम में गया था ३-४ दिन खातर | एक वाने में जाना था | ऊँ तो आई बरिया में किस्से रिश्तेदार की गाडी ले लिया करदा ,पर ईबके सबे के घरां में किम्मे ना किम्मे वाना था तो मन्ने गाडी मिली कोणी | में एर मेरी बड्डी साली रोहतक तें बस में चढ़ लिए सोनीपत खातर | बस जम्मा ठूकी पड़ी थी | बस में स्पोर्ट्समेन कद पे इंडिया लिखे होड़े , कमांडो एर घने सारे जवान मानस भी बेठे थे सिट्टाआं पे | एर घने सारे बूढ़े -बूढी एर बाल्कां आली लुगाई कड़ी थी | म्हारे बर्गे कईया ने कही भी रे ऊठ ल्यो पर कालू पुर चोकी ताहि एक भी बन्दा खड्या कोणी होया | लगभग एक घंटे का सफ़र था | माने नु सोची अक रे ये किस्से स्पोर्टस में सें एर किस्से कमांदी -एर सिपाही से जो आपने बूढ़े-बूढी लूगाइयां नु भी सीट देवन नु तैयार कोणी | इतना संस्कर्तिक पतन हरयाना का मन्ने पहली बार देख्या | एर या बात मन्ने घणी भुंडी लागी |

reminds me of a student of mine who would greet me with his hand on his heart! - so gracious!
 
reminds me of a student of mine who would greet me with his hand on his heart! - so gracious!


आछा करया उर्मिला जी , आप इह तागे नु उप्पर ले आई ,में कई दिन तें इहने फेर सुरु करण की सोच रया था |

अर आप ने जो उप्पर लिखा स वो तो न्यू कहना चाहिए था " या बात मन्ने घणी आछी लागी "|
 
आछा करया उर्मिला जी , आप इह तागे नु उप्पर ले आई ,में कई दिन तें इहने फेर सुरु करण की सोच रया था |

अर आप ने जो उप्पर लिखा स वो तो न्यू कहना चाहिए था " या बात मन्ने घणी आछी लागी "|

you may be right. i got reminded of a positive incident in regards to giving respect (as stated above)
 
कई माणस जाण पिछान के किताब मांग ले जावें अर फेर उलटी ना देवें | या बात मन्ने भोत भुंडी लागी अक आप ते किम्मे खरीद के पढ़े कोणी अर दुसर्यां की ले आवें ते उलटी ना देवें |
 
कई लोग जब किहे के घरां जावें तें वे उड़े बैठ के ने बीडी क: सिगरेट पीवण लाग ज्यां सें | इब्ब आगले ना पींदे हों तें उनके सारे घर में बांस फेल जा अर फेर कई घंटे वा बांस ना लिकड़े | ख़ास कर महानगरआँ में जित फ्लेट सिस्टम स उह में ते घणी दिक्कत बण जा स | मन्ने या बात भोत भुंडी लागे स अक लोग बिना बुझे किहे क घर में बीडी सिगरेट पीवें |
 
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