Chaar laaine jo churayi na ho ....

shivamchaudhary

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Sayad ye dhaga pehlum bhi thaa.. close ho gaya lagta hai.. fer se suru kar raha hoon....

Koshish to yahi hai meri . kuch achchha likh pau ..

अनजाने रास्तों पे चलना, हमने कब शीखा था,
किसी से मुलाकात करना, हमने कब शीखा था,
बस दुनिया को देखकर, हम भी कुछ टेड़े-मेडे चल पड़े है;
किसी मुसाफिर का साथ पाना, हमने कब शीखा था !!
 
4 lines aur ...

सागर से ही जाकर है मिलना, हो हर नदी की तकदीर में जैसे,
हर सुबह खिलकर महकना, हो हर फूल की फितरत में जैसे,
खुद जलकर हमेशा, रोशन करना होता है हर उजाले को,
टूटना-जुड़ना फिर नए काफिले बनाना, हो हर राही का मुकद्दर जैसे.
..
 
4 lines aur ...

इन वादियों की नरम हवा ने, लोरी गा के हमें सुलाया है,
सुबह की भीनी धुप ने, कोमल पत्तियों को छू कर जगाया है,
बादलो की लम्बी छाव जैसे खेलने को कह रही हो दिन-भर,
इन्ही लम्हों को मिलाकर, जिंदगी ने हमें जीना सीखाया है !!
 
4 lines aur ...

“बदलते है रास्ते, बदलती है मंजिले,
बनते बिगड़ते रहते है काफिले,
पर साथ तेरा २ पल का अ-मुशाफिर,
सफ़र को सुहाना बना जातें है !!
 
valentine को तीन रात बीत गई
बेवफाई जाने किन-२ के साथ हुई !
टूटे होंगे लाखो के दिल
तभी तो जमकर बरसात हुई !!
 
kuch aashawadi lines.... jo tomar bhai ne likha hai unke liye...

इस बारिस के साथ, दर्द के आंसू बह जाने दो,
बंजर जमीन पे बने पैरो के निशाँ, धुल जाने दो,
एक दिन फिर से आयेगी वो सावन की बहारे,
बस, प्यार का पौधा अपने दिल में, मत मुरझाने दो .


:) :)
 
प्यार जिंदगी की एक ख़ास सौगात है,
ऐसा लगे जैसे खुशियों की बारात है.
संभाल कर रखना इसकी यादें अपने दिल में,
शायद मुश्किल फिर उससे अपनी मुलाकात है.
 
Last edited:
4 lines aur ...

यादो के सहारे, ये दिन-रात कैसे गुजारे,
बिन किसी और के सहारे, जिंदगी कैसे गुजारे;
हम भी लिखेंगे अपनी तकदीर एक दिन,
वो दिन आने तक, ये वक़्त कैसे गुजारे !!
 
4 lines aur ...

सोचना था नहीं अपने लिए, हमारी तकदीर में जैसे,
कोशिश की हर मुलाकात को,दोस्ती में बदलने की जैसे,
कल ही की बात हो यूँ, किसी चहरे पे रूकगयी थी नज़र,
आज तक पहुँचाने में ही, एक सदी गुजर गयी हो जैसे !!
 
4 lines aur ...

मंजीले और भी मिलेंगी, किनारे और भी मिलेंगे,
उजड़े रास्तों पे कभी महकती बहारे भी मिलेंगी,
इंसान का ये सफ़र है बना, यादों को संजोने के लिए,
ठहर न जाना कही ओ-राही, यहाँ सहारे और भी मिलेंगे !!
 
4 lines aur ...

हमें तो अपने से ये जाना है, होली कुछ इस तरह सुरु हुई थी,
साल का आखिरी दिन, सब गिले-सिकवे जलाने को हुई थी,
सब इकठ्ठा होकर खाए साथ-२ और याद आये भाई का प्यार..
फिर नए दिन की सुरुआत हो रंगों के साथ और दिलो को मिलाने की बात हुई थी
:)

[होली- फाल्गुन पूर्णिमा (साल का अंतिम दिन), धुलंडी- चत्र की पडवा (साल की सुरुआत) ]
 
4-1/2 Lines more...

आसमान मैं काली घटायें छाईं हैं
आज हम ने भी दिल पे गंडासियां खाईं हैं
मेरा दोस्त बहुत समझाता है कि मत देख अपनी इन नज़रों से उसने

पर म्हारी भी के गलती
आज वा छोरी फिर से पंजाब का पटोला और हरियाणे का गंडासा बन के आई है...
 
Last edited:
पहर पजामा मार मंडासा जिद जाट कसी ठावे
देख जाट की शान यो अम्बर ढोल बजावे
चिड़िया, कबूतर, बुगले खेतां में आपी ए गीत गावे
ट्रक्टर पे जिद वो बेठे लागे सची ए राम चाला आवे

दुफारी में लुगाई चा रोटी जिद लावे
गन्ठे ने मार मुका वो तोड़ बगावे
जिद लावे मिर्च में टुक इसा जीसा आवे
के देख उसने यो अम्बर ढोल बजावे

खा रोटी टुक फेर बीडी वो सुल्गावे
बीडी पीके खेत में वो फेर जुट जावे
जाड्यां में जिद सारे सोड में बड जावे
यो जाट एक्ला सारी रात पानी लावे
पहर पजामा मार मंडासा जिद जाट कसी ठावे







Note :भुंडी हो तो हन्सियो ना रए.
 
Last edited:
तू दिली की बान्नी, में जाट हिसार आला सूं
कुकर मेल बेठे आपना में मानस मेहेंसा आला सूं

तू चाले मारुती में, में ट्रक्टर आला सूं
तू पहरे लांडी कुर्ती में धोती कुरते आला सूं

तू राखे रोटी पौन ने, में चुल्ले पुन्कनी आला सूं
कुकर मेल बेठे आपना में मानस मेहेंसा आला सूं

तेने भावे चाव मिंग, में निरे बाजरे आला सूं
तू पीवे कैम्पा कोला, में सिरफ़ लासी पीनीया सूं

तेने भावे 'फ्रेंच कट' में मुछआं के भरोटे आला सूं
कुकर मेल बेठे आपना में मानस मेहेंसा आला सूं







लाइन तो कोन्या चोरी की पर तुक बंदी एक रागनी की हे
 
तू दिली की बान्नी, में जाट हिसार आला सूं
कुकर मेल बेठे आपना में मानस मेहेंसा आला सूं

तू चाले मारुती में, में ट्रक्टर आला सूं
तू पहरे लांडी कुर्ती में धोती कुरते आला सूं

तू राखे रोटी पौन ने, में चुल्ले पुन्कनी आला सूं
कुकर मेल बेठे आपना में मानस मेहेंसा आला सूं

तेने भावे चाव मिंग, में निरे बाजरे आला सूं
तू पीवे कैम्पा कोला, में सिरफ़ लासी पीनीया सूं

तेने भावे 'फ्रेंच कट' में मुछआं के भरोटे आला सूं
कुकर मेल बेठे आपना में मानस मेहेंसा आला सूं







लाइन तो कोन्या चोरी की पर तुक बंदी एक रागनी की हे

Sunil Jogi ki bhi ek kavita hai !!

Muskil hai apna prem priye, ye pyar nahi hai khel priye ....

http://meri-bakwaas.blogspot.com/2006/09/mushkil-hai-apna-mel-priye.html
 
4 lines aur ...

सहिलो पे सजी थी किस्तिया, फिर भी दरिया में डूब कर हम पार आये,
बने हुए थे express highways, फिर भी हमको कच्चे पथरीले रास्तें ही पाए;
नहीं मिलता अनुभव यहाँ पर, किसी मुसाफिर की कहानियां सुनकर,
ठोखर खाकर ही सीखा जाता है इस ज़माने में, तभी तो हम इन उजालो में आये !!
 
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