Chaar laaine jo churayi na ho ....

वाह बहुत अच्छा !!!
इस धागे को फिर से चालू करके आपने बहुत अच्छा किया !!


खोलो ये दरवाज़े और ये खिड़कियाँ
ये चिराग जले किस तरह, इनको हवा भी तो चाहिए !
मैं वफ़ा करू तो यहाँ किससे करू
इस ज़माने में कोई बेवफा भी तो होना चाहिए !!
 
अनजान न बन हमसे अ-वक़्त के हमसफ़र,
कदमो को जमते, उखड़ते हमने भी देखा है !
यूँ नज़र न फेर धीरे चलने वालो से,
वक़्त से आगे भागने वालो का हाल, हमने भी देखा है !!
 
कश्मकश है की इधर जाये या उधर जाये,
क्या तुमसे किये वादों से मुकर जाये,
रास्ता तो एक ही चुनना पड़ेगा जानी,
अगर तुम उधर जाओ, तो हम इधर जाये !
 
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