chhatri ar tambu

ravinderjeet

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एक बे एक हत्थे (देशी बार ) में बड्डी-बड्डी मूंछयाँ आले दो माणसआँ ने आमी- सामी तखत पे बैठ के ने दारु की बोत्तल धर ली | आर लागे पिंदी हाण बतलाण |पहल्डा---आ भाई तू कुण स ?
दुसरा ---- में राजपूत -ठाक्कर -छतरी सूं | अर तू कुण स भाई ?
पहल्डा ---- में जाट-चौधरी -तम्बू सूं भाई |
दुसरा ---- बाकी ते सब ठीक स ,पर यु तम्बू समझ में कोणी आई ,यु के सौदा स ?
पहल्डा ---- तम्बू में तेरे बरगी हजारां छतरी आज्या करें |


( आजै -सुण्या था पह्ल्डी बार ,बेरा ना पुन्झअड़ी लागेगी अक बचेगी )
 
..ha ha ha..nice one ravinder sir ..nd i think new also...
..मन्ने लाग्गे जाट चौधरी अरे तम्बू सुन्या पाछे ते ठाकर कांकर काढ गया होग्या ..
 
पिसे खारा स वो...... माहरे माहरे लाया करे ..........!!!


हाँ ,तेरी गेल्याँ ते स्पेशल दुश्मनी स उह की | तन्ने उह की फटफटी की फूंक काढी थी ना
 
..ha ha ha..nice one ravinder sir ..nd i think new also...
..मन्ने लाग्गे जाट चौधरी अरे तम्बू सुन्या पाछे ते ठाकर कांकर काढ गया होग्या ..

बेरा ना भाई कर्मिंदर ,आपणे आगे ते जितने ठाकर सें वे काँकर के ,ढीम काढ्या करें | एक लाख तें एक लड़ावाँ ते आपां जाट कुहावाँ |
 
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