ravinderjeet
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एक बे एक हत्थे (देशी बार ) में बड्डी-बड्डी मूंछयाँ आले दो माणसआँ ने आमी- सामी तखत पे बैठ के ने दारु की बोत्तल धर ली | आर लागे पिंदी हाण बतलाण |पहल्डा---आ भाई तू कुण स ?
दुसरा ---- में राजपूत -ठाक्कर -छतरी सूं | अर तू कुण स भाई ?
पहल्डा ---- में जाट-चौधरी -तम्बू सूं भाई |
दुसरा ---- बाकी ते सब ठीक स ,पर यु तम्बू समझ में कोणी आई ,यु के सौदा स ?
पहल्डा ---- तम्बू में तेरे बरगी हजारां छतरी आज्या करें |
( आजै -सुण्या था पह्ल्डी बार ,बेरा ना पुन्झअड़ी लागेगी अक बचेगी )
दुसरा ---- में राजपूत -ठाक्कर -छतरी सूं | अर तू कुण स भाई ?
पहल्डा ---- में जाट-चौधरी -तम्बू सूं भाई |
दुसरा ---- बाकी ते सब ठीक स ,पर यु तम्बू समझ में कोणी आई ,यु के सौदा स ?
पहल्डा ---- तम्बू में तेरे बरगी हजारां छतरी आज्या करें |
( आजै -सुण्या था पह्ल्डी बार ,बेरा ना पुन्झअड़ी लागेगी अक बचेगी )