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(This post is in Devanagari script. If there is difficulty in reading the text, there is need to install ‘Mangal’ font)
देसी जुबान - अंग्रेजी जुगाड़
कहते हैं जहां चाह वहां राह । देहातों के लोग परेशान थे - खेतों से ‘भरोटे’ या दूसरे गट्ठड़ सिर पर ढोने पड़ते हैं, आजकल बैलगाड़ियां तो खत्म ही हो गईं हैं । सो, देसी लुहारों ने एक देसी खुली गाड़ी बना दी । एक पंपसेट चलाने वाले किर्लोस्कर इंजन को लोहे की ट्राली में फिट कर दिया, कामचलाऊ ब्रेक लगा दिये, लाईट वगैरा की जरूरत नहीं और न ही नंबर प्लेट की - और तैयार हो गई देसी गाड़ी जिसमें भरोटे ढ़ोवो या ‘ढ़ोवणी’ करो । बाद में ये गाड़ियां सड़कों पर सवारी भी ढ़ोने लगीं, नजदीक के कस्बों से - इन्होंने बेशक एक्सीडेंट भी खूब किये । इसको पहले 'स्काईलैब' कहते थे, बाद में इसका नाम रख दिया ‘जुगाड़’ ।
जाटलैंड पर भी एक जुगाड़ की जरूरत थी पर मुझे मिला नहीं - खुद ही जुगाड़ कर लिया । शुरू में देव दहिया आदि के देसी जुबान के धागे पढ़ता था जो रोमन में होते हैं । मैं भी इसी तरह लिखता था पर कोई खास मजा नहीं आ रहा था - जुबान देसी और लिखनी पड़ रही है सुसरी ए-बी-सी-डी के सहारे । करें भी क्या, मजबूरी है सबकी - सारे की-बोर्ड रोमन में मिलते हैं । वैसे तो हम कहते हैं कि हम आई-टी. में बड़े दादा बन गए हैं, पर अपना एक हिन्दुस्तानी की-बोर्ड भी नहीं बना सके । हिन्दुस्तानी बड़े कमजोर और नरम (soft) हैं, अंग्रेजों की तरह तेर-तर्रार, खुर्रांट और सख्त (hard) नहीं । इसलिए महारथ भी हासिल की ‘साफ्ट्वेयर’ में – ‘हार्डवेयर’ से अभी कोसों दूर हैं । कल-पुर्जे विदेशों से मंगा कर अपने यहां अपना लेबल लगाकर देसी कंप्यूटरों का जुगाड़ जरूर बैठा लेते हैं । गाड़ियां बनाते हैं अमरीकन, जर्मन और जापानी और ड्राईविंग करते हैं हमारे लोग । हार्डवेयर बनाते हैं अमरीकी, चीनी, जापानी - और सोफ्ट्वेयर हम - फिर भी हम कोई इंजन (Operating System) नहीं बना पाये - बेशक हमारे भाई माइक्रोसोफ्ट में यह काम कर रहे हैं । पर इससे क्या ? मकान बनाने वाले मिस्त्रियों और मजदूरों का उस मकान पर कोई हक नहीं होता, उसका फायदा आखिरकार मकान-मालिक को ही होता है । मेहनत हमारी और उसका ‘कापीराईट’ बिल गेट के पास - सो मुनाफा तो वही कमायेगा, चाहे तुम बेशक अपने आप को फन्ने-खाँ समझते रहो !
फिर भी मैने सोचा इस हिन्दी लिखने का भी कोई जुगाड़ तो जरूर किया होगा किसी ने । मैने जाटलैंड की Tech Talk फोरम में एक धागा लिखा - Tips for use of Hindi on your computer । यह धागा काफी पढ़ा गया और आजकल एक ‘sticky thread’ के रूप में मौजूद है । बस, वहीं पर मैने देखा कि एक बंगलौर की कंपनी ने देसी जुगाड़ किया हुआ है - उस पर कोई भी सवारी करो, बिल्कुल मुफ्त (www.baraha.com). की-बोर्ड पर टाईप करो ‘deswal’ और टाईप होगा ‘देसवाल’ । यह जुगाड़ अच्छा लगा और काम शुरू किया - अब तो पता नहीं मैं कितने ही धागे लिख चुका हूं इसी तरह - और यह भी इसी जुगाड़ पर बैठकर लिख रहा हूं । जाटलैंड Wiki के मोटे से पेज Haryanavi Language को पूरा द्विभाषी बना दिया इसी जुगाड़ से - अब पढ़ लो हरयाणवी डिक्शनरी को आराम से । आप में से जिनके पास Windows-XP सिस्टम है वे तो आराम से हिन्दी पढ़ लेते होंगे, बाकियों को ‘मंगल’ फोंट डाउनलोड करना पड़ता है । चलो, कुछ नए जुगाड़ तो बिल गेट भी करता रहता है - देखें उसके नये सिस्टम Windows Vistas में क्या नया जुगाड़ मिलता है ?
....continued
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देसी जुबान - अंग्रेजी जुगाड़
कहते हैं जहां चाह वहां राह । देहातों के लोग परेशान थे - खेतों से ‘भरोटे’ या दूसरे गट्ठड़ सिर पर ढोने पड़ते हैं, आजकल बैलगाड़ियां तो खत्म ही हो गईं हैं । सो, देसी लुहारों ने एक देसी खुली गाड़ी बना दी । एक पंपसेट चलाने वाले किर्लोस्कर इंजन को लोहे की ट्राली में फिट कर दिया, कामचलाऊ ब्रेक लगा दिये, लाईट वगैरा की जरूरत नहीं और न ही नंबर प्लेट की - और तैयार हो गई देसी गाड़ी जिसमें भरोटे ढ़ोवो या ‘ढ़ोवणी’ करो । बाद में ये गाड़ियां सड़कों पर सवारी भी ढ़ोने लगीं, नजदीक के कस्बों से - इन्होंने बेशक एक्सीडेंट भी खूब किये । इसको पहले 'स्काईलैब' कहते थे, बाद में इसका नाम रख दिया ‘जुगाड़’ ।
जाटलैंड पर भी एक जुगाड़ की जरूरत थी पर मुझे मिला नहीं - खुद ही जुगाड़ कर लिया । शुरू में देव दहिया आदि के देसी जुबान के धागे पढ़ता था जो रोमन में होते हैं । मैं भी इसी तरह लिखता था पर कोई खास मजा नहीं आ रहा था - जुबान देसी और लिखनी पड़ रही है सुसरी ए-बी-सी-डी के सहारे । करें भी क्या, मजबूरी है सबकी - सारे की-बोर्ड रोमन में मिलते हैं । वैसे तो हम कहते हैं कि हम आई-टी. में बड़े दादा बन गए हैं, पर अपना एक हिन्दुस्तानी की-बोर्ड भी नहीं बना सके । हिन्दुस्तानी बड़े कमजोर और नरम (soft) हैं, अंग्रेजों की तरह तेर-तर्रार, खुर्रांट और सख्त (hard) नहीं । इसलिए महारथ भी हासिल की ‘साफ्ट्वेयर’ में – ‘हार्डवेयर’ से अभी कोसों दूर हैं । कल-पुर्जे विदेशों से मंगा कर अपने यहां अपना लेबल लगाकर देसी कंप्यूटरों का जुगाड़ जरूर बैठा लेते हैं । गाड़ियां बनाते हैं अमरीकन, जर्मन और जापानी और ड्राईविंग करते हैं हमारे लोग । हार्डवेयर बनाते हैं अमरीकी, चीनी, जापानी - और सोफ्ट्वेयर हम - फिर भी हम कोई इंजन (Operating System) नहीं बना पाये - बेशक हमारे भाई माइक्रोसोफ्ट में यह काम कर रहे हैं । पर इससे क्या ? मकान बनाने वाले मिस्त्रियों और मजदूरों का उस मकान पर कोई हक नहीं होता, उसका फायदा आखिरकार मकान-मालिक को ही होता है । मेहनत हमारी और उसका ‘कापीराईट’ बिल गेट के पास - सो मुनाफा तो वही कमायेगा, चाहे तुम बेशक अपने आप को फन्ने-खाँ समझते रहो !
फिर भी मैने सोचा इस हिन्दी लिखने का भी कोई जुगाड़ तो जरूर किया होगा किसी ने । मैने जाटलैंड की Tech Talk फोरम में एक धागा लिखा - Tips for use of Hindi on your computer । यह धागा काफी पढ़ा गया और आजकल एक ‘sticky thread’ के रूप में मौजूद है । बस, वहीं पर मैने देखा कि एक बंगलौर की कंपनी ने देसी जुगाड़ किया हुआ है - उस पर कोई भी सवारी करो, बिल्कुल मुफ्त (www.baraha.com). की-बोर्ड पर टाईप करो ‘deswal’ और टाईप होगा ‘देसवाल’ । यह जुगाड़ अच्छा लगा और काम शुरू किया - अब तो पता नहीं मैं कितने ही धागे लिख चुका हूं इसी तरह - और यह भी इसी जुगाड़ पर बैठकर लिख रहा हूं । जाटलैंड Wiki के मोटे से पेज Haryanavi Language को पूरा द्विभाषी बना दिया इसी जुगाड़ से - अब पढ़ लो हरयाणवी डिक्शनरी को आराम से । आप में से जिनके पास Windows-XP सिस्टम है वे तो आराम से हिन्दी पढ़ लेते होंगे, बाकियों को ‘मंगल’ फोंट डाउनलोड करना पड़ता है । चलो, कुछ नए जुगाड़ तो बिल गेट भी करता रहता है - देखें उसके नये सिस्टम Windows Vistas में क्या नया जुगाड़ मिलता है ?
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