Dharti ke Lal

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dndeswal

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After I posted my play Kissa-e Maham-Chaubissi on this site on 16 April 2006, I have written another short play which I have titled “Dharti ke Lal” (sons of the Motherland). In India, although all castes are engaged in agriculture in one way or the other, Jats are truly the sons of soil - they not only plough the land and serve and respect it as their own mother, but protect it too by way of defending its frontiers. The present piece is written for reading pleasure only, not really for staging it, although it is not difficult. It could be a short story also but since it is a talk among some Jat farmers in their fields, it has acquired the plot of a short play. This piece is written in Hindi but the dialogues between the characters are in Haryanavi which is not much different from Hindi – some words with asterisk sign (*) have been explained at the end of the post, in English. If you have difficulty in finding the meaning of a particular word, please see Haryanavi Dictionary page : (click here) – this page has actually been expanded and thoroughly edited by myself.

If you have difficulty in viewing the Devanagri script on your computer, you need to install Hindi font ‘Mangal’ which can be downloaded from Internet or copied from another PC - please see my thread Tips for use of Hindi on your computer (“Tech Talk” forum).


ॐ

धरती के लाल (लघु नाटिका)

लेखक - दयानन्द देसवाल

स्थान : गाँव खेड़का गूजर, तहसील बहादुरगढ (जिला झज्जर, हरयाणा) - गांव से एक कोस दूर ताऊ बदले के खेत में स्थित लेसुवे के पेड़ के नीचे दोपहर को आराम करते हुए कुछ जाट किसान । गांव में मुख्य रूप से देसवाल जाट ही हैं, कुछ बाहमण, खात्ती, नाई, कुम्हार और लुहारों के घर हैं, एक छोटा सा मोहल्ला धाणक और चमारों का भी है। गांव अधिक बड़ा नहीं है और मुख्य सड़क (बहादुरगढ-झज्जर रोड) से एक किलोमीटर दूर बसा हुआ है। साथ वाले गावों के नाम ये हैं : दुल्हेड़ा, छुडाणी, भदाणी, कबलाणा, खुंघाई, गोयला कलां, गुभाणा, बुपणियां और डाबोदा खुर्द ।

समय : अक्तूबर 1971

पात्र :

चन्दगीराम : 8 कीले जमीन, हिन्दी पढ सकता है, गाँव के मौजिज व्यक्तियों में शामिल, पक्का आर्यसमाजी ।

चन्द्रभान: जमीन काफी (15 कीले), शरीर से तगड़ा, थोड़ा पढा लिखा ।

बदले : 6 कीले जमीन का मालिक, अनपढ किन्तु चालाक, ज्यादा काम धंधा उसके बसका नहीं, थोड़ा कंजूस भी।

भरतो : बदले की घरवाली ।

रोहतास : 18 साल का लड़का, मैट्रिक पास, बेरोजगार ।

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(बदले अकेला बैठा है, थोड़ी देर बाद चन्दगीराम का प्रवेश)

बदले : आ भई चन्दगी, आज तै वार* कर दी । हळ जोड़ रहया सै के ?

चन्दगी : अरै ना रै, बाजरे की चूंटणी मैं लाग-रे थे - एक कीले में थोड़े से झाड़ काटे थे, गंडासी का तै बीत्ता टूट-ग्या । एक तै इस साल मींह कम बरस्या, ऊपर तैं ये झाड़ और डाभ और दुखी करैं सैं ! और तै और, पाछलै साल तै कचरी की बेल निरी हुई थी खेत मैं, इस साल तै वे बी कम ऐं नजर आवैं सैं !

बदले : हां भाई, पाछलै साल तै म्हारी घर आळी नै घणीं सारी कचरी तोड़ कै सुखा दी थी - सारै साल खूब चटणी खाई, ईबके साल मींह ऐं कम बरस्या - तै कचरी बी कड़े तैं हो?

चन्दगी : पर वा भरतो आई नहीं ईब-लग - जवारा ले कै ?

बदले : अरै बेरा ना वा हर्या कित वार* ला रही सै? म्हारी तै देखी जा, बेचारे बुळधां नै भूख लाग रही सै । ईब तै बणी* मैं घास बी सूख ली । कोए बात ना, ले एक हुकटी* भर ल्यां, इतणै वा आ ज्यागी ।

चन्दगी : हां भाई इस बणी का जिकर आ-ग्या । उस जोहड़ के साथ आळी पाळ* पै जो बाबा का कोठड़ा सै, पहल्यां उसमैं एक बाबा रहया करता, नाम था मनकबाबा - उसके नाम पै इस बणी का नाम पड़-ग्या मनकाळा ! दूर-दूर ताहीं के लोग इस के नाम नै जाणैं सैं । बोझड़े तै इतणे हुया करते कि नजफगढ के साथ वाळे गामां के लोग बी आड़े तैं फळसी खातिर एकाध छोटे-मोटे बोझड़े नै काट कै ले ज्याया करते । और उस जोहड़ के साथ वाळी कूई का पाणी तै इतणा मीठा अमृत था कि जिसकै ताप चढ रह्या हो, उसका ताप उतर ज्याया करता । एक बै तै दिल्ली के एक सेठ की कार आई थी और कई सागळ पानी भर कै ले गये थे एक रोगी खातिर ।

बदले : पर ईब कुण सी आग लाग-गी इसमैं ?

चन्दगी : ना लागी सै तै लाग ज्यागी - न्यूं-ऐं चालता रहया तै । मन्नै सरपंच तैं बहुत कही कि भाई, इस बणी के रूखां नै मत बेच, फेर बी थोड़े से तै कसाई बेच कै मान्या । न्यूं के उसका पेट भरै सै, पी ज्यागा दारू उन पैस्यां की । कैर के पेड़ बी कम रह गये - साथ आळे गामां की धाणकी-चमारी टींट तोड़ कै ले ज्यां सैं, म्हारै हाथ ना आते । कुछ या रेही लाग-गी धरती मैं ! ईब इस बणी मैं नकछींकणी, कुरंढ, घिलोठ, झींझ, सांगर और पीहल बी पह्ल्यां कितणे कोन्यां होते । जोहड़ के साथ आळे पीपल के पेडां पै बरबंटी खूब हुया करती - ईब यो नया बाबा बी निकम्मा सै, ध्यान ना राखता - गाम आळे बी लापरवाह हो लिये - किमैं लोह खूंठा आर कुछ लोहार खोटा !

बदले : पर चन्दगी, यो इस कूई का पानी क्यूकर खराब हो-ग्या ?

चन्दगी : आड़े तैं 4 किले आगै नहर पड़ै सै - खूब भरी चाल्या करती - हरयाणा बणे पाछै तै पाणी इतणा ना आता । पहल्यां इसमैं काई लागी रहया करती । ईंख होण लाग-गे - मोकळा पाणी चाल्या करता - एक घंटे मैं एक कीला भर ज्याया करता । कई साल तै मौज रही - फेर इसका नुकसान दीखण लाग गया । चोवे का पाणी ऊपर आ-ग्या, धरती मैं रेही लाग-गी, इसा लागै सै ज्यूकर धरती पै नूण छिड़क राख्या सै ! नहर के साथ आळी जमीन बेकार हो-गी, न्यूं-ऐं इस कूई का पाणी बी खराब हो-ग्या ।

बदले : चलो, म्हारे और तेरे खेत तै बच रहे सैं ईब ताहीं । यो सिमाणा सै-ऐ ऊंचाई पै, न्यूं-ऐं तै इसका नाम ऊंचीजोळ पड़-ग्या ! नहर का पाणी तै इसमैं चढता ना ! चलो, इस साल मींह ना बरस्या तै चणे आर सिरसिम बो द्यांगे, गीहुआं की टाळ कर द्यांगे - दूसरे सिमाणे मैं नहर कै लागते दो कीले सैं, उसमैं गीहूं बो द्यांगे - खाण जोगे दाणे तै हो-ऐ जांगे !

चन्दगी : जब नबिया* के साल मैं डूबा आई थी, उस साल बी इस सिमाणे मैं पाणी खड़ा ना हुया था, इस नहर का पाणी क्यूकर आवैगा ? देखता नहीं वो जहांगीरपुर माईनर - बड्डे-बड्डे इंजन ला-राखे सैं - जिब कितै जा-कै पाणी चड्ढै सै उसमैं । अरै हां, मेरै खूब याद सै, नबिया* आळे साल तै इस धरती मैं चणे की खेती हुई थी - भाई तौड़ हो-ग्या था, इतने तगड़े चणे मन्नै आपणी जिन्दगी मैं नहीं देखे ।

बदले : हां भाई, तेरै तै खूब याद सै, मैं तै उस टाइम छोटा था, पर मन्नैं बी न्यूं ऐं सुण्या सै - तबाही तै खूब हुई थी पर फेर धरती की तिस बुझ गई थी - थळी पै बी चणे बो दिये थे लोगां नै, खूब पैदावार हुई थी । नबिया का काळ तै पाणी का काळ था, सूखे का नहीं ।

चन्दगी : भाई, पूरे 21 दिन तगड़ा मींह बरसता रहया था - गाम-के-गाम डूब गये, कच्चे मकान हुया करते, सारे ढह गये थे आर सबके घरां में जो राशन पाणी था, वो बी बह-ग्या । खेती सब खतम हो गई थी, साढू* आर सामणू* - दोनूं ! पर भाई जो ऊंची जमीन थी, उसमैं पाछै इसी तगड़ी साढू फसल हुई थी, तौड़ हो-ग्या था । पर लोगां धौरै खाण ताहीं कुछ ना बच्या था, सिर्फ एक टाईम की रोटी खातिर सारा दिन मजूरी करी थी । यो जो चन्द्रभान का घर सै ना, चूने मैं बण्या औड़, वो उसके दादा जोधाराम नै नबिया के काळ मैं बणवाया था - खात्तियां नै एक टाईम की रोटी खा-कै काम करा था, उन ताहीं चार आने मजूरी बी ना दी !

बदले : भाई, उस चन्द्रभान का खेत तै यो रहया, मेरे साथ आळा, कई दिन हो लिये डाक्की दीख्या ए ना !

(बदले की बहू का प्रवेश)

बदले : अरै हर्या रांड,इतणी वार कित कर दी आज ?

चन्दगी : क्यूं खामखा छोह में आ रहया सै बदले, बिचारी ले तै आई, जवारा-रोटी ।

भरतो : के बताऊं, रोटी पोवण मैं वार लाग-गी, किमैं छोटे छोहरे नै दुखी कर दी ।

बदले : ये दोनूं छोहरे तै लागै सै, निर्भाग लिकड़ैंगे, ल्या तावळी-सी घाल राबड़ी कचौळे* में - थौड़ी सी चन्दगी कै बी घाल दे ।

चन्दगी : अरै ना, मैं तै खा-पी कै आया था, हुक्टी बी पी लई, तू आराम तैं खा, मैं एक-बै चूंटणी करण आळ्यां नै संभाळ-कै योह आया !

(चन्दगीराम बाहर जाता है )

बदले : अरी भागवान, जा बुलध उन रूखां तळै बैठे सैं, यो जवारे का झल्ला ठा ले-ज्या, भूखे सैं घणी हाण के ।

(भरतो जाती है, रोहतास का प्रवेश)

बदले : आ भाई रोहतास, कित हांडै सै ?

रोहतास : काका, नहर आ रही सै, आज म्हारा औसरा सै - खेत मैं नाक्का कर-कै आया सूं - थोड़ी हाण पाच्छै जा-कै संभाळूंगा ।

बदले : आंच्छ्या, ले - इस कचौळे* मांह-तैं एक रोटी ले ले - खूब घी ला राख्या होगा तेरी काकी नै ।

रोहतास : ना काका, मन्नैं तै थोड़ी-सी वार हुई सै - घर तैं खा-कै आया था । मैं तै एक बीड़ी पी लूं, बस ।

बदले : अरै चन्दगी आवण आळा सै, फेर हुक्टी भरांगे - इस बीड़ी मैं किमैं ना धरया - या तै हलक नै फूक दे सै ! भाई, थारा यो खेत ठीक जगांह पै सै - नहर कै सहारै - उसमैं पाणी तै आ-ज्या सै नहर का - म्हारे आळे कील्यां मैं तै पाणी चढता-ए कोन्यां !

रोहतास : काका, मैं एक-बै नाक्के नै संभाळ कै ईब आया - दाहने* मैं पाणी की दाब लाग-कै नाक्का टूट ज्या सै - मैं तै फाहळी बी ऊड़ै ऐ छोड़ आया था !

बदले : ठीक सै, तावळा आईये !

(रोहतास बाहर जाता है - थोड़ी देर बाद चन्द्रभान प्रवेश करता है)


continued....
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Last edited:
Dharti ke Lal : Part-II

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....continued

बदले : आ भई चन्द्रभान, आज तू क्यूकर राह भूल ग्या? अरै खसम, तन्नैं आच्छ्या ट्रैक्टर लिया, म्हारै धौरै आणा ऐ छोड दिया ! पहल्यां तै दोफाहरी मैं आ ज्याया करता हुकटी पीवण, ईब तै भाई, तू करड़ा हो-कै कमावण लाग-ग्या !

चन्द्रभान : अरै ना रै बदले, इसी बात तै कोन्यां, मन्नै तै किमै ना ज्ञान सा आ रह्या इसमै - बुलध तै इस बणी मैं हरी-हरी घास पै मुंह मार कै छिक लिया करते, इस सुसरे मैं तै डीजल डालना पड़ै सै - ईबै पहल्यां एक टंकी तेल खतम हो लिया - आगले महीने गीहूं बोए जांगे तै और खर्च बद्धैगा |

बदले : भाई चन्द्रभान, एक छोटा-सा काम मेरा बी कर दे - एक कीले में गवार बो राख्या था - वो तै कट ज्यागा 2-3 दिन मैं । उसमैं झाड़ आर डाभ हो रहे सैं, मींह कम बरस्या सै, धरती पात्थर केसी हो रही सै, कसळेट घणी पावैंगी, हळ जोड़ूंगा तै बुळध बेचारे टूट लेंगे ! तू न्यूं कर, एक बै हैरो आच्छी-सी लागू कर-कै ट्रैक्टर हंडा दे - बाकी बोवा-बाही मैं आप कर ल्यूंगा ।

चन्द्रभान : भाई, टेम लाग-ग्या तै देखूंगा ।

बदले : अरै यार, या तै किमैं बात ना हुई - तन्नैं हां भी ना करी, ना बी नहीं ! भाई, यो काम तै करना पड़ैगा, फेर यारी किसी हुई ?

चन्द्रभान : अरै, मेरे हाथ मैं बी सारी बात ना सै - यो फूफा घास-फूस खा कै ना चालता, इसनै डीजल चाहिये - म्हारा बूढा छोह-मैं आ-ज्या सै किसै और का खेत बाह दूं तै ।

बदले : तू उसकी फिकर मतना करै - मैं आपणी पौळी मैं उस थारे बूढे नै रब्बै ला ल्यूंगा - होक्के पै बठाईं राखूंगा उसनै - होक्के का तै वो लाड़ा सै-ए ! तू पाच्छे-तैं एक-डेढ घंटे का जोट्टा मार दिये - भाई, म्हारै धौरै तै ट्रैक्टर खरीदण जोगे पईसे हों ना सारी उमर बी - भाई, किमैं भाड़ा मांगता हो तै बता, देखांगे !

चन्द्रभान : यार या बात ना सै, बूढे नै जाण पाट-ए जा सै, फेर वो मन्नैं धमकावै सै आक आपणा काम तै होता ना, दूसरयां की धरती बाहवण लाग रहया सै ।

बदले : भाई चन्द्रभान, या गारंटी मैं ले ल्यूं - मैं उस नै जाण ना पाट्टण दूं - तड़कै बखत तैं तू यो काम कर दे, बाकी दिन में उस कीले नै मैं दोस्सर कर दूंगा आपणे हळ तैं । वाह-ऐ बात सै - एक ताऊ भैंस हरी करवावण ले-ग्या, झोट्टे धौरै जा-कै बोल्या: "अरै मेरे यार, कर दे मेहरबानी - तेरी तै जरा-सी लागैगी, म्हारे घर मैं दूध हो-ज्यागा !"

चन्द्रभान : (हंस कर) बदले तू सै तै आंडी ! चल ठीक सै, मैं तेरा यो काम कर दूंगा - तेरा नाम बी बदले सै, बता मन्नै बदले में के देगा ?

बदले : यार, तेरे सारे कील्यां में सिरसम की आड मैं ला-द्यूंगा आपणे हळ तैं - यो काम तेरे ट्रैक्टर के बसका कोन्यां !

(रोहतास का प्रवेश)

बदले : हां भई रोहतास, देख आया नाक्के नै ?

रोहतास : हां काका, संभाळ आया - डेढ घंटे का ओसरा और रह रहया सै ।

चन्द्रभान : भाई रोहतास, तन्नैं तै दसवीं पास कर ली, ईब आगै पड्ढैगा ?

रोहतास : ना काका, मेरे बसका कोन्या, मैं तै एक-दो बै फैल बी हो लिया । कितै भर्ती हो-ज्यां तै ठीक सै ।

चन्द्रभान : भाई, देख ले यो झज्जर में कोलेज तै घणी दूर कोन्यां - म्हारे छोहरे नै तै पाछ्लै साल बी.ए. कर ली थी उड़े तैं ।

बदले : अरै रहण दे, क्यूं उल्टी पट्टी पढावै सै छोहरे नै, पाच्छै भर्ती की उमर बी लिकड़ ज्यागी । भाई कितै भरती होण गया था ?

रोहतास : काका, सारै हांड लिया - रोहतक, दिल्ली, गुड़गामा - कित्तै बी बात ना बणती । म्हारी तै कोए सिपारिश बी कोन्यां ।

बदले : देख ले भाई चन्द्रभान, छह फुटा जवान सै - इसका दादा अंग्रेजां के टाईम में पुलिस में था, आर आज इसा बखत आ-ग्या म्हारे छोहरां नै कोए पुलिस-फौज मैं ना बूझता । भाई, इस छोहरे का तै काम बणना चाहिये, इन धौरै तै धरती बी थोड़ी ए सै ।

चन्द्रभान : चन्दगी बतावै था - एक बै महात्मा गांधी और चौधरी छोटूराम की बातचीत हुई । गांधी वोल्या - भाई छोटूराम, थारे जाटां के छोहरे अंग्रेजी फौज और पुलिस मैं भर्ती हो-कै इन अंग्रेजां की-ए मदद करैं सैं, न्यूं तै आजादी ना मिल्लै - हाम तै इनकी हरेक चीज का बायकाट करां सां, आर थारे छोहरे अंग्रेजी पुलिस-फौज में भर्ती हो कै इन गोरे साहबां का हाथ मजबूत करैं सैं - तू इन तैं कह दे आक ये अंग्रेजी फौज-पुलिस मैं भर्ती होणा छोड दें। छोटूराम बोल्या: " रै गांधी, तू तै म्हारे पेट पै लात मारै सै ! जाट धौरै तै दो-ए चीज हों सैं - हळ और तलवार ! तेरे बाणियां के छोहरे आपणी ताखड़ी नै छोड देंगे के ? देख लेना, म्हारे छोहरे उनकी फौज-पुलिस मैं हो-कै उन्हैं-ऐं पीट देंगे आर देश नै आजादी दिला देंगे - तेरे चर्खा कातण तैं आर भूख हड़ताल करण तैं आजादी ना मिल्लै ! आजादी तै डंडे के जोर तैं लई जा-सै, यो काम तै म्हारे छोहरे-ए कर सकैं सैं ।"

बदले : अरै, ठीक कही चौधरी छोटूराम नै - आजाद हिन्द फौज के जवानां नै अंग्रेजां की फौज कै लात मार दी और सुभाषचंद्र बोस की गैल हो लिये । आपणे गाम का सुरते बी तै उस फौज मै था - वो बतावै था कि उसनै खुद नेताजी का झंडा उठाया था । यो सुरते तै पांच साल जापान की कैद में रहया था - घर-क्यां नै सोच्या आक लड़ाई मैं मर-ग्या होगा । बताओ, आजादी ताहीं लड़ण का के फायदा मिल्या इन्हैं - ईब ताहीं पेंशन बी ना हुई बिचारे सुभाष के फौजी जवानां की ।

चन्द्रभान : भाई, छोटूराम के मरे पाछै नेहरू का राज आ-ग्या, उसकी और सुभाष की आपस में बण्या ना करती - फेर वो क्यूं करता उनकी पेंशन ? फौजियां की तै उसनै कतई-बी कद्र ना करी - चीन नै सन 62 मैं हमला कर दिया, जब याद आई उसनै फौज की - फेर के होणा था - डेढ साल पाच्छै वो खुद-ऐ हुकटी पी-ग्या** ।

बदले : यो नेहरू क्यूं जाट्टां तै इतणा चिड़ै था ?

चन्द्रभान : भाई, कुछ ना कुछ बात जरूर थी ! न्यूं बी ये बाहमण जाटां तै सदा तैं ऐं चिड़ते आए सैं । के बेरा, एकाध जाट सिपाही नै जेळ मैं उसकै एक-दो डंडे मार दिये हों - हो सकै सै रोहतास के दादा नै ऐं एकाध ठोक दिया हो उसकै, वो भी तै अंग्रेजां की पुलिस मैं था ! जिब ताहीं नेहरू जीवै था, उसनै चरण सिंह को यू.पी. का चीफ मिनिस्टर ना बणन दिया । पहल्यां चरण सिंह बी कांग्रेस मैं था । वोट ले-कै तै आता वो, नेहरू चीफ मिनिस्टर बणा देता उस चन्द्रभानु गुप्ता नै ! नेहरू के मरण तैं पाच्छै चौधरी साहब नै कांग्रेस कै मारी लात और आपणी न्यारी पार्टी बणा-कै यू.पी. पै राज करया । चौधरी छोटूराम पाछै एक यो चौधरी चरण सिंह इसा लीडर हुया सै जिसनै जमींदार का कुछ भला करया सै । बाकियां नैं तै हाम लूटे-ऐ सां !

बदले : ठीक कहै सै तू चन्द्रभान - चन्दगी आवण आळा होगा, वो बी आच्छी-आच्छी बात बताया करै ।

(भरतो का प्रवेश)

भरतो : बुळ्धां नै तै सान्नी खा ली सै, पाणी प्याणा पड़ैगा ।

रोहतास : काकी, ल्या मैं पाणी प्या ल्याऊं बुळधां नै , म्हारे खेत धौरै नहर भरी चाल्लै सै । मैं नाक्के नै बी देख आऊंगा ।

बदले : अरै शाबाश भाई, जा यो काम कर दे । अरी भागवान, इतणै तू जवार की पूळियां का एक भरौटा बांध दे - मैं जीत्ते के छोहरे नै कह दूंगा - सांझ नै वो घरां ले आवैगा ।

(भरतो और रोहतास जाते हैं, थोड़ी देर बाद चन्दगीराम का प्रवेश)

बदले : आ चन्दगी, बैठ - मैं इतणैं या हुक्टी की चिलम भर ल्याऊं - आग दूर सिलगा राखी सै |

(बदले जाता है)

चन्द्रभान : तेरा ऐ जिकर हो रहया था । आजाद हिंद फौज का बी किस्सा चाल रहया था |

चन्दगी : अरै, फौज-वोज की बात फेर कर ल्यांगे - न्यूं बता उस मेरे साथ आळे कीले मैं के बोवैगा ?

चन्द्रभान : उसमै गीहूं बोवण का तै फायदा ना, न्यूं सोचूं सूं उसमैं सिरसम बुवा दूं आगले हफते । मन्नै बदले का एक कीला आपणे ट्रैक्टर तैं बाहवण की हां भर ली, उस मेरे आळे कीले मैं बदले बो देगा सिरसम - हळ तैं ।

चन्दगी : अरै, यो काम तै तेरा मैं बी कर दूंगा - बस, आगै पैरां** मैं मेरी थोड़ी सी मदद कर दिये - ढोवणी करवावण मैं ।

चन्द्रभान : देख ल्यांगे - ईबै के लामणी आ-गी - पहल्यां बोवा-बाही तै हो ज्याण दे । आगै-आगै तै सब कै धौरै ट्रैक्टर हो ज्यांगे - मेरी सुसराड़ सै दिल्ली बिजवासण मैं - ऊड़ै तै घनखरे लोगां नै ट्रैक्टर ले लिये ।

चन्दगी : वो तै ठीक सै, पर वे रहैंगे कितणे दिन ? दिल्ली के गामां मैं तै धरती न्यूं ऐं खतम होती जा सै । पहल्यां नारायणे की जमीन फौज नै कब्जा ली, पालम की धरती मैं हवाई अड्डा बण-ग्या, झाड़ौदे मैं सी-आर-पी आण बड़ी और छावले मैं बी-एस-एफ । बिजवासण आळे कितने दिन बचा लेंगे आपणी धरती नै ? मुंह मैं जाड़-दांत थे जिब चणे नसीब ना हुये, और जिब चणे मिल्ले तै जाड़-दांत ना रहे ! जिब धरती ऐ ना बच्चैगी तै ये ट्रैक्टर के चाटणे सैं हामनै ?

(बदले का प्रवेश - हुकटी के साथ)

चन्द्रभान : ल्या बदले, तगाजे तैं दो घूट मार कै चालूंगा मैं बी । अरै हां, चन्दगी, इस ट्रैक्टर के किस्से नै छोड़, गाम मैं बिजली लगवा ली कईयां नै, तू बी लगवा ले - मन्नै तै दो महीने पहल्यां लगवा ली थी - जी-सा आ रहया सै ।

बदले : हां भाई, यो काम तै आच्छ्या हो-ग्या । बंसीलाल नै बणे दो-ढाई साल हो-गे, और बी घणे काम करवावैगा । पर मैं के करूं, मेरा घर तै गाम के परले सिमाणे पै हो-ग्या - ऊड़े ताहीं तै खम्भे ना गड्डे सैं । पर मन्नै लागै तै सै डर इस रास्से तैं - मेरी भाण ब्याह राखी सै सिमचाणे गाम मैं - उसके छोहरे का हाथ लाग-ग्या बिजली के तार कै, मुश्किल तैं बच्या सै !

चन्दगी : चलो, एक बात तै सै, यो बंसीलाल अपना जाट भाई सै, कुछ तै काम करवावैगा । पहल्यां भगवत दयाल शर्मा और राव वीरेन्द्र सिंह के जमाने में तै किमैं काम हुए ना ।

चन्द्रभान : कुछ तै काम हुया था - म्हारे बहादुरगढ हल्के मैं तै हरद्वारी लाल नै घणे सारे स्कूलां का दर्जा बढा दिया - जित पांचवीं ताहीं के स्कूल थे, वे मिडिल कर दिये और आठवीं ताहीं के स्कूल हाई स्कूल हो-गे ।

चन्दगी : हां, ठीक सै - राव वीरेन्द्र सिंह की सरकार चाल्ली थोड़े दिन - आयाराम गयाराम चालता रहया - ईब याह बीमारी सारे देश में फैल ज्यागी । यो छारा गाम का मोड्डा हरद्वारी लाल सै तै म्हारा गोत्ती भाई, पढ्या- लिख्या बी खूब सै, पर इसनै कई काम करे उल्टे - पाछली सरकार मैं यो शिक्षा मत्री था - यो न्याऊ न्यूं कहण लाग्या कि हरयाणे के स्कूलां मैं संस्कृत की जगह उर्दू पढाई जाया करैगी । न्यूं ऐं कर कै झज्जर गुरुकुल वाला आचार्य भगवान देव उसके खिलाफ होग्या और आगले इलैक्सन मैं हरद्वारी लाल हार ग्या और प्रियव्रत का भाई प्रताप जीत-ग्या।

बदले : भाई, कुछ बी कहो इस हरद्वारी लाल नैं मान्नैं तैं सब-ऐं सैं । बंसीलाल एक जलसे मैं न्यूं बोल्या आक जाट लीडरां मैं तै सिर्फ ढाई आदमी पढे-लिखे सैं - एक डाक्टर सरूप सिंह, एक यो हरद्वारी लाल आर आधा मैं - बाकी तै सारे अनपढ बस्सैं सैं !

चन्द्रभान : पर उस प्रताप के जीतण का के फायदा हुया ? इस मोड्डे नै उस इलैक्सन का पीटीशन कर दिया चंडीगढ हाई-कोर्ट में और केस जीत गया - यो खुद बी तै वकील सै ! छह महीने पाछै फेर इलैक्सन हुए तै यो मोड्डा फेर बण-ग्या ।

चन्दगी : न्यूं ऐं तै मैं कहूं था आक आपणे इलाके मैं घणे काम कोन्यां हों । यो हरद्वारी लाल रोज बंसीलाल गैल पंगे लेता रहै सै, काम ना होण देता - राजनीति की तोड़ -फोड़ तै इस घौरै कितणी-ए करवा ल्यो !

बदले : हां भाई, खूब याद आई - यो प्रताप आपणे गाम मैं आ रहया था - इसके और इसके बड्डे भाई प्रियव्रत के घणे भट्ठे तै सैं-ऐं। जब प्रताप बोलण लाग्या तै आपणे गाम का इन्दराज टूटा उसतैं न्यूं बोल्या : "अरै पापी, तू म्हारा के भला करैगा, तन्नैं तै चोए ताहीं के बी भूंड फूक गिरे" !


....Continued
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Last edited:
Dharti ke Lal - Part-III

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.......Continued

चन्दगी : बदले, डाक्की, तू तै दादा बस्तीराम की भजन मंडली मैं होता तै ठीक रहता - इसे-इसे चमौले सुणा कै लोगां नै हंसाता रहता - पर खैर, दादा तै ईब इस दुनियां में सै-ए ना - आपणे गाम मैं कई बै आया था प्रचार खातिर ।

चन्द्रभान : अरै ना चन्दगी, यो बदले तै खोपर लखमीचन्द सांगी की टौळी मैं ठीक रहता ।

बदले : ना भाई, हाम तै आपणे खेत मैं ऐं ठीक सां - यो बस्तीराम आर लखमीचन्द थे तै दोनूं बाहमण ! हाम जाट्टां का के काम उन गैल्यां !

चन्द्रभान : अरै हां चन्दगी, बाहमणां का जिकर करया बदले नै - नेहरू बी तै बाहमण था - थोड़ी हाण पहल्यां मैं आर बदले उस नेहरू का जिकर कर रहे थे - वो झज्जर बी तै आया था ना एक बै ?

चन्दगी : भूल-ग्या इसा तावळा - 10 साल पहल्यां की ए तै बात सै । नेहरू और कैरो दोनूं आये थे - उनकी कार 5 मिनट ताहीं दुल्हेड़े गाम के स्कूल कै आगै बी रुक्की थी - बाळ्कां नै माळा बी पहराई थी उस ताहीं । फेर जिब वे इस कोलिज की नींव धरण गये तै पहल्यां एक जलसा हुया था - एक बढिया रागनी सुणाई थी भजनीयां नैं - कात्तिक बदी अमावस थी आर दिन था खास दिवाळी का, आंख्यां के मांह आंसू आ-गे घर देख्या जिब हाळी का ।

बदले : मैं तै उस जलसे मैं था ना - एक तै वो सुसरा सिखड़ा कैरों आर दूसरा वो कश्मीरी बाहमण नेहरू - उनकै के पल्लै पड़ी होगी या रागनी !

चन्द्रभान : या म्हारी जुबान उनकै पल्लै ना पड़ै ! बैठे रहे होंगे अरड़ू बणे !

(रोहतास का प्रवेश)

बदले : आ भाई रोहतास, बैठ, म्हारी तै राजनीति की बात खतम हों-ऐं ना !

रोहतास : काका, बुळ्धां नै पाणी प्या ल्याया सूं - मेरा नहर का ओसरा बी खतम हो-ग्या, बस जां सूं घरां !

बदले : भाई चन्दगी, यो रोहतास बहुत सूधा छोहरा सै, भगवान करै इसका काम तावळा बण-ज्या ।

चन्दगी : हिम्मत कर भाई, भगवान जरूर सुणैगा - कौशिश करता रहै !

रोहतास : कर ऐ रहया सूं ताऊ !

बदले : भाई तू गाम कानि जाता हो तै यो जवार का गद्दा ठा ले-ज्या, तेरा भला होगा - तेरी काकी तै चली गई होगी - आर वो जीत्ते का छोहरा तै बेरा-ना आवैगा आक ना !

रोहतास : ठीक सै काका, मैं ले ज्यांगा - जाऊं सूं - राम-राम ।

बदले : राम-राम भाई, तड़कै बी एक गेड़ा मार दिये उरे-नै ।

चन्द्रभान : बदले, चालां भाई, आज तै घणी हाण होगी बैठ्यां नै ।

चन्दगी : हां बदले चालूं मैं-बी । आर बदले, न्यूं करिये - तड़कै उळगा*** हो-ज्या तै एक-दो हळाई मेरे खेत मैं घलवा दिये - आगलै हफ्तै एक जोट्टा मैं तेरे खेत मैं मरवा दूंगा ।

बदले : ठीक सै भाई, देख ल्यांगे । अरै चन्द्रभान, तू फेर गायब मत हो ज्याइये - तड़कै फेर आ ज्याइये इस लेसुवे के पेड़ तळै !

(सब जाते हैं - पर्दा गिरता है )


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संक्षिप्त नोट:

(1) सभी पात्रों के नाम वास्तविक हैं क्योंकि यह मेरे ही गांव की कहानी है । चन्दगीराम और चन्द्रभान इस समय इस दुनियां में नहीं हैं । बदले अब काफी बूढा हो गया है और 'आंडी ताऊ' के नाम से जाना जाता है । ताऊ बदले, उसके दोनों लड़कों और आजाद हिंद फौज के सिपाही ताऊ सुरते के बारे में मैं इस वेबसाइट पर पहले भी लिख चुका हूं - पढिये मेरा धागा : ताऊ बदले की करामात । वह लेसुवे का पेड़ आज भी वहीं खड़ा है, ताऊ बदले का कहना है कि अपने जीते-जी वह इसको कटने नहीं देगा ।

(2) बिल्ली के भाग से छीका टूटा - दो महीने बाद यानी दिसंबर 1971 में भारत-पाक युद्ध छिड़ गया और सैनिक बलों में काफी भर्ती हुई - रोहतास का दाव लग गया और वह बी-एस-एफ में भर्ती हो गया । पूरे 28 साल की सेवा के बाद रिटायर हुआ और आज पेंशन पा रहा है, गांव में ही रहता है । आज भी वह कभी-कभी उस लेसुवे के पेड़ के नीचे बैठता है और पुराने दिनों को याद करके और आज के हालात देखकर आंसू बहाता है ।

(3) आजाद हिंद सेना के फौजियों की पेंशन इंदिरा गांधी ने मार्च 1972 में आरम्भ की थी - भारत-पाक युद्ध के बाद ।

(4) उस जमीन के आस-पास कई चिमनी भट्ठे लग चुके हैं, साथ वाली बणी उजड़ चुकी है, वहां पर भट्ठे वालों ने मजदूरों के लिये झुग्गियां डाल दीं हैं । दूर दूर तक की जमीन को खोदकर ईंटें तैयार हो रहीं हैं जो पास वाले भट्ठों में पका कर दिल्ली और गुड़गांव जैसी जगहों पर भेजी जा रहीं हैं । गांव की जो भूमि 'ऊंचीजोळ' के नाम से जानी जाती है और जो नबिया* के साल में भी उस भयंकर जलप्रलय से बच गई थी, आज उसमें भट्ठों की कृपा से 6-6 फुट के गड्ढे हो गये हैं और बरसात का पानी खड़ा हो जाता है । पुराने हलों का स्थान ट्रैक्टरों ने ले लिया है और चने और बाजरे की खेती बिल्कुल नहीं होती ।

(5) स्वयं मेरे हिस्से की थोड़ी जमीन उस क्षेत्र में पड़ती है और जब मैं कभी साल भर बाद भारत जाता हूं और उस जमीन की यह दशा देखता हूं तो दिल से एक टीस निकलती है । रोहतास मेरा ही पड़ौसी और बचपन का दोस्त है और मुझसे मिलकर बहुत खुश होता है पर आज के हालात से दुखी है ।

(6) यू.पी. और हरयाणा के जो इलाके दिल्ली की 50 किलोमीटर की परिधि में हैं, वे इस समय भयंकर दबाव में हैं । सरकार नई-नई योजनाओं की घोषणा कर रही है, एक कीले की कीमत 30 लाख रुपये से ऊपर तक सुनी जा रही है । जमीनों के सौदागर चक्कर लगा रहे हैं, खेती उजड़ रही है, धरती-माता का चीरहरण हो रहा है और हम सब तमाशा देख रहे हैं । पर्यावरण वैज्ञानिकों की बात मानें तो इस शताब्दि के अन्त तक दिल्ली और उसके आस-पास के इलाके में कोई बड़ी प्राकृतिक तबाही होनी निश्चित है । यदि हमारे जीवित रहते प्रकृति कोई भयानक विनाशलीला रच दे तो कम से कम मुझे इसमें कोई हैरानी नहीं होगी ।

(7) अपनी पिछ्ली पीढी के बुजुर्गों और अपने ही गांव की यह कहानी आप लोगों को सुनाकर मुझे भी मानसिक संतुष्टि मिल रही है ।


*****************इति समाप्तम् ।******************

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Meanings of some difficult words:

पाळ* - The higher spot near the village pond.

वार* - Delay

बणी* - Mini forest

हुकटी* - A small-sized hukka

नबिया आळा साल* - विक्रमी संवत 1990 : Vikrami or Desi year 1990 (i.e 1933 AD). Vikrami era is 57 years ahead of Christian era – as of now, Vikrami era 2063 is going on. During the monsoon of 1933 AD northern India, especially Jatland areas, were heavily flooded due to torrential rains for 3 weeks (non-stop) and famine was caused by this deluge.

साढू* - Crops grown in rainy season (Kharif crops)

सामणू* - Crops grown in Winter (Rabi crops)

कचौळा* - Mini ‘thaali’

दाहना* - The drain of fresh water in the fields (for irrigation). Also known as ‘Naalli’ (नाळी) and ‘khaalli’ (खाळी/ खाळ).

हुकटी पी-ग्या** - Died

पैर** - The plot of land used for extracting seeds from the harvested crop.

उळगा*** - Free/ not too busy.

(At this moment, some of these words do not figure in the Haryanavi Dictionary page of this site – would be added shortly).



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Last edited:
EXCEllent work deswal ji

Uncle ji your work is unsurpassed.....koi todd nahi hai......I dont have words......senti karr diya aapne to....mein ghanni der ka dekhun tha......er mane nyu bhi bhe tha kitte koi sa chep jya aapke purra karan te pehlyan.....kher......manne thodda sa paddhya se iibe kamte kamtte 45 min chahiye paddhan ne er itna time konya iibe......paache paddhunga iss ne.....lekin kamal ka play likhya yu te......aapki te e-BOOK chaapni padegi.....waha waha......ghanna kardda laath gaad diya yu te aapne...lath ke tambu ka tambu se yu te.....er yu te paate bhi konya........:D :p
 
Uncle Ji,

Poora padhha sei... Bahot e badhiya... You are simply superb!!!!

Aur haan... aap ne Subash Chandra Bose waali INA ki baat kahi hai na. Mere dada bhi usi fouj mein they aar Japan mein 6 saal kaidd kaat ke aaye they.
Singapore mein ek INA ka monument hai... uski foto lee thee maine last week.. bhejoonga aap sab koo
 
Last edited:
Purra padhhya arr dhyaan tein padhhya arr issa lagya jannu mei hudde-e thha NAKKE pei panni pherran nei katti tyaar....Ow Samme Temm hogya sei PANNI FERRUN SUUN.........ha...ha..ha WA HMT GHADDI ARR TUKK_TUKK KARTI SECOND KI SUI...ARR FALLI. Great stuff Deswal ji...Katti issa lagya jannu ow lhesuwei ka pedd jannu merre dhprre-e tha.Thank you so much for taking us down memory lane.....aanssu aa ge aankhyan mei......THOSE WERE THE DAYS...WONDERFUL,SIMPLE AND LOVE FILLED...abb to sab bikhar chukka...APNNI APNNI DAFFLI ARR APPNA APPNA RAAG.


Apke patience ki bhi[Hindi likhne ki] dadd deni paddegi....simply awesome sir.
 
Deswal sir

Well written play and ur message is really good. I also remember some things when i was a child and at tht time we used to live in our village even things were not bad at tht time in upto 1992-93. But all started after this IT boom and today everywhere every person is running after money no time for social gatherings. Par aapka Natak padh kar manne bhee apna Khet arr gaam kee banni yaad aagee. Really nice stuff apreciate ur efforts.

Abhimanyu Phougat
 
Lajawab!

dndeswal said:
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.......Continued

चन्दगी : बदले, डाक्की, तू तै दादा बस्तीराम की भजन मंडली मैं होता तै ठीक रहता - इसे-इसे चमौले सुणा कै लोगां नै हंसाता रहता - पर खैर, दादा तै ईब इस दुनियां में सै-ए ना - आपणे गाम मैं कई बै आया था प्रचार खातिर ।


(At this moment, some of these words do not figure in the Haryanavi Dictionary page of this site – would be added shortly).


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(Extra quoted text deleted by Admn.)
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Lajawab tha Deswal saheb! itanee door baithe baithe manne to gaam ki mitti ki khushboo an lagee. isa jee kare se ki gaam ke chappar mai baith ke seet, bajare ki roti, saag ar pyaz ka ghantha hari mirch le ke baith jaoo. ar saaree dupher adosi padosi galyan batiyaoo. Kore ghade ke pani khushbu te ib sapna e hogi se. gam me bhi aaj kal ghade surahi kam rah gaye se. par apke ise Gaam ke sajeev chitra ne beete dino ki yaad dila dee.
Dhnyawad
 
Last edited by a moderator:
Deswalji, its really good... poora to abhi nahi pad paya lekin sudhh haryanavi bhasa mein padkar majja aa gaya... keep posting more like this.

-vinod
 
Very Interesting

Deswal ji,

manne tey print out e ley liya sey , aaram tey beth key padhu ga arr balak ne kissey school ke balaka te bhi iss pe drama karan ki soch raha hu(i hope u wont sue me for copyright).

Great going, keep it up.

regards,
 
nd stuff !!

deswal sir i was waiting for a long time,,,,,,,,,very well written ......... meham chaubissi aala bhi ghana badhiyaa thaa,,,, aur yu to jama toord sey,,,,,,,,, deswal sir,,,, kimmey jaani choor key baarey mein bhi likhoo kadey,,,,,sirf sunya hai uskey baarey mein,,, bera kuch koni..........
 
downtoearth said:
,,,,,,,, deswal sir,,,, kimmey jaani choor key baarey mein bhi likhoo kadey,,,,,sirf sunya hai uskey baarey mein,,, bera kuch koni..........

भाई रूपी, मैने इस जानी चोर का नाम तो सुना है, पर उसके बारे में मुझे कोई खास पता नहीं है, इसलिये इस किस्से को तो अभी छोडो । देखते हैं इस वाले को कितने लोग पढते हैं ! अगर कुछ मल्लिका का किस्सा लिखा जाये या उस 'सोनाली को बचाओ' वाला छोटा सा किस्सा लिखा जाये, फिर तो धूमा ऊठता दीखैगा - ज्यूकर गुड़ कै माखी चिपट ज्यां सैं !

हमारे जाट समाज में दो पेशों का खास महत्व रहा है - हाळी (हल चलाने वाला) और पाळी (पशुओं को जंगल में चराने वाला)। कृष्ण भगवान भी तो 'पाळी' थे - और राम भी ! मैने हाळी का किस्सा तो यह लिख दिया है - सोचता हूं कि एक छोटा सा इस 'पाळी' पर भी लिख दूं - चाहे कोई पढे या ना पढे, उनकी मर्जी !
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Ghana suthra

Bhai Dayanand Ram Ram !!
Bhai Ghana Suthra likkha sai. bas padh kai soot baith gaya. issi dhal likhe jaa.
jaihin jai jaat.
 
very well said..........

Bhai sahab.. bahut hi badhiya likha hai aapne......... abhi nearly raat ke 2 baj gaye hain aapka kissa padhte-padhte .. sochu tha beech me chod du kaal padoonga per main bhi aaje poora padh ke maannya..........aapne itna aacha likh rakhya sai ak beech me choddan ka jee ee naa manya.......
bhaisahab keep it up............
jee saa aa gaya.......
regards
Ram
 
Deswal Ji....subah-subah aatey hi sabse pahley ye laghu-natika padhi....aisa laga ki sarey scene aankyan ke syami honn laag rey sain....dhaney ki baat aatey hi ji karya akk daank maru arr khoob chhaball-chhaball karun paani mai....aap shabdon ka itna sunder prayog kartey hain ki poora ghatnakram ek dum jeevant sa lagta hai....aaj to din ki shuruat achi ho gayi....aur rahi baat Mallika arr Sonali ki tai 4 din ke tottkey sain we arr asli heeray ki pehchan johri ko hi hoti hai....Mallika arr Sonali to dalley sain....mada sa meenh aatey hi unka dalla sa bheej jyaga....;) :D :) :p
 
Deswal Sir,

Pura pada, aur dil khush ho gaya jis tareh se aapne sachhe ghatna ko shawdon mai piroha hai.

Sir, Please aage bhee likhte rahiye.

Bus aab to ye yadien hee bachengee.

Gaon ka ashishtav khatre mai hai.
 
दुल्हेड़ा, छुडाणी, भदाणी, कबलाणा, खुंघाई, गोयला कलां, गुभाणा, बुपणियां और डाबोदा खुर्द ।


Deswal Saab!

Saare Gaam gina diye. beech mein Kheri Asra Bhul gaye.

Hude mere nana-nani rhya karen. Beetey din yaad diwa diye apne.
 
dahiyarules said:
दुल्हेड़ा, छुडाणी, भदाणी, कबलाणा, खुंघाई, गोयला कलां, गुभाणा, बुपणियां और डाबोदा खुर्द ।


Deswal Saab!

Saare Gaam gina diye. beech mein Kheri Asra Bhul gaye.

Hude mere nana-nani rhya karen. Beetey din yaad diwa diye apne.

Sumit ji,

Thanks you pointed out - Yes, of course, Kheri Asra is also near to our village but its borders do not touch our 'seem'. I have mentioned only those whose 'simaana' or 'seem' touch that village.
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hey uncle..........

hey cute uncle..........;):)

this was the masterpice till date of this jatland`s accessories dear uncle......:):)

although it took me long to read it out bt it was raelly good...nd written with a lot of patience nd this really reflects how much hard work u put in this play kaka...........its really apprecitive........:);):cool:

thanks for this kinda work u r doin nd the time u spend on jatland.........u r awesum...:):cool:
 
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