Dulhan ne dulhe ki tarah ki ghudchadi!

kuldeeppunia25

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भिवानी ठेठ ग्रामीण माहौल में पली-बढ़ी मोनिका ने हौसले से बदलाव की नई इबारत लिखी है। वह बुधवार को जब पगड़ी पहन आत्मविश्वास से घोड़ी पर बैठकर गांव की गलियों में निकली तो सदियों के तमाम बंधन एक ही झटके में टूट गए। भिवानी के खापड़ीवास गांव की इस बेटी ने शादी से पूर्व दूल्हे की तरह गांव में घुड़चढ़ी की रस्म अदा की। बेटी के इस हौसले को मां-बाप व भावी पति का भी भरपूर समर्थन मिला है। मां ने शगुन से दूध का गिलास दिया तो पूरा गांव ढोल-नगाड़ों से गूंज उठा। ग्रामीण पहली बार अपनी किसी बेटी की घुड़चढ़ी में बड़े उल्लास से शामिल हुए। ऐसा लगता था कि हर कोई इस इतिहास का साक्षी बनने को तत्पर है। 23 वर्षीय मोनिका ने इस दौरान हर वह रस्म अदा कि जो दूल्हा शादी से पूर्व घुड़चढ़ी के दौरान करता है। घोड़ी पर सवार वह गांव के मंदिर में पहुंची व सभी रस्में पूरी कीं। वह गुरुवार को गांव भारीवास निवासी कंप्यूटर इंजीनियर संदीप से विवाह बंधन में बंधेंगी। संदीप एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। भावी पत्नी के हौसले का सम्मान करते हुए संदीप कहते हैं कि मोनिका ने जो मान कमाया है उससे वह काफी उत्साहित हैं। वह शादी में आठवां फेरा लेकर बेटी बचाने की शपथ भी लेंगे। मोनिका के इस अभियान को जागो एवं आर्ट ऑफ लिविंग तथा रेडक्रास ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर समर्थन किया। बेटी बचाओ अभियान के सूत्रधार एवं आठवां फेरा के संस्थापक श्याम सुंदर ने कहा कि बेटियां अब किसी भी मायनों में लड़कों से कम नहीं हैं।
 
बहुत ही अच्छी सुरुआत हे | इस प्रकार के समाज सुधार कार्यकर्म और भी चलाये जाने चाहीये और बाकी समाज उनका समर्थन और अनुसरण करे | जेसे नशा मुक्ति अभियान की भी अत्यंत आवश्यकता हे|
जेसे कुछ दिन पहले मेने सुना था की लड़की का बाप लड़के वालों से आजकल ये शरत रखता हे की शादी से पहले घर में शोचालय बनवाना होगा | उसी प्रकार सगाई के समय शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवा लेने चाहिए की लड़का किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेगा | क्योंकि नशा हर तरह की बर्बादी ले कर आता हे घर में |
 
...................उसी प्रकार सगाई के समय शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवा लेने चाहिए की लड़का किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेगा | क्योंकि नशा हर तरह की बर्बादी ले कर आता हे घर में |


Er je waa aawan aali BEEDI peewan laag gyi byah paachhey to? Donuaa ke sign hone chahiye शपथ पत्र पर nahi to exploit howega ghar aala......
 
दूल्हा फेर तो
लहंगा एर घूँघट में न आया हो.अधिकारों की सम्मानता ठीक बात है .पर ये तो बचकाना सा काम है.कुछ चीज़े जो जैसी है वैसी ही की जाए तो जचती है.शादी में दहेज़ में एक भी रुपैया माँ बाप का न लगवाती तो जचती .यु के भोंडापण सा कर दिया रस्मो का.
 
दूल्हा फेर तो
लहंगा एर घूँघट में न आया हो.अधिकारों की सम्मानता ठीक बात है .पर ये तो बचकाना सा काम है.कुछ चीज़े जो जैसी है वैसी ही की जाए तो जचती है.शादी में दहेज़ में एक भी रुपैया माँ बाप का न लगवाती तो जचती .यु के भोंडापण सा कर दिया रस्मो का.
haha..quite right...just wot I thought.
some things are better left old-school or old traditions
 
दूल्हा फेर तो
लहंगा एर घूँघट में न आया हो.अधिकारों की सम्मानता ठीक बात है .पर ये तो बचकाना सा काम है.कुछ चीज़े जो जैसी है वैसी ही की जाए तो जचती है.शादी में दहेज़ में एक भी रुपैया माँ बाप का न लगवाती तो जचती .यु के भोंडापण सा कर दिया रस्मो का.

भोंडापन नि होना चाहिए ये तो ठीक हे पर कई सारे खाम खा के खर्चे और पर्था निभाई जाती हैं उनको बंद करना चाहिए , इस घटना में एक तथ्य उभर कर सामने आता हे की लड़की ने स्थापित मानदंडों को तोड़ने का प्रयास किया हे |
 
baandar ke haath me ustara de diya to apni gardan bhi kaat liya karre....issi chori kaal ne saasu te pa bhi dabbvaavegi.sattapit maapdando ki toddne ki shuruwaat jo issi hui to.....
भोंडापन नि होना चाहिए ये तो ठीक हे पर कई सारे खाम खा के खर्चे और पर्था निभाई जाती हैं उनको बंद करना चाहिए , इस घटना में एक तथ्य उभर कर सामने आता हे की लड़की ने स्थापित मानदंडों को तोड़ने का प्रयास किया हे |
 


भिवानी ठेठ ग्रामीण माहौल में पली-बढ़ी मोनिका ने हौसले से बदलाव की नई इबारत लिखी है। वह बुधवार को जब पगड़ी पहन आत्मविश्वास से घोड़ी पर बैठकर गांव की गलियों में निकली तो सदियों के तमाम बंधन एक ही झटके में टूट गए। भिवानी के खापड़ीवास गांव की इस बेटी ने शादी से पूर्व दूल्हे की तरह गांव में घुड़चढ़ी की रस्म अदा की। बेटी के इस हौसले को मां-बाप व भावी पति का भी भरपूर समर्थन मिला है। मां ने शगुन से दूध का गिलास दिया तो पूरा गांव ढोल-नगाड़ों से गूंज उठा। ग्रामीण पहली बार अपनी किसी बेटी की घुड़चढ़ी में बड़े उल्लास से शामिल हुए। ऐसा लगता था कि हर कोई इस इतिहास का साक्षी बनने को तत्पर है। 23 वर्षीय मोनिका ने इस दौरान हर वह रस्म अदा कि जो दूल्हा शादी से पूर्व घुड़चढ़ी के दौरान करता है। घोड़ी पर सवार वह गांव के मंदिर में पहुंची व सभी रस्में पूरी कीं। वह गुरुवार को गांव भारीवास निवासी कंप्यूटर इंजीनियर संदीप से विवाह बंधन में बंधेंगी। संदीप एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। भावी पत्नी के हौसले का सम्मान करते हुए संदीप कहते हैं कि मोनिका ने जो मान कमाया है उससे वह काफी उत्साहित हैं। वह शादी में आठवां फेरा लेकर बेटी बचाने की शपथ भी लेंगे। मोनिका के इस अभियान को जागो एवं आर्ट ऑफ लिविंग तथा रेडक्रास ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर समर्थन किया। बेटी बचाओ अभियान के सूत्रधार एवं आठवां फेरा के संस्थापक श्याम सुंदर ने कहा कि बेटियां अब किसी भी मायनों में लड़कों से कम नहीं हैं।

Some animal rights groups around the world also use socially shocking techniques to draw attention to their main agenda i.e., generating sensitivity towards animals in the world. Regards, Urmila.
 
waa bhi beedi peewan lagi to dono katthe pee liya karenge.kharcha bhi kam aawega kuchh. :) :)
Er je waa aawan aali BEEDI peewan laag gyi byah paachhey to? Donuaa ke sign hone chahiye शपथ पत्र पर nahi to exploit howega ghar aala......
 
sansany failane ka maksad hota hai aise case mai.koi badhiya kaam to kiya nahi jiske liye use smriti chinh diya hai.oppose us custom ka hona chahiye jisse preshani ho.us engineer ka to bhagwan hi rakhwala hai ab.aisi gharwaali to ib use din mai 1-2 baar patke bhi karegi.


भिवानी ठेठ ग्रामीण माहौल में पली-बढ़ी मोनिका ने हौसले से बदलाव की नई इबारत लिखी है। वह बुधवार को जब पगड़ी पहन आत्मविश्वास से घोड़ी पर बैठकर गांव की गलियों में निकली तो सदियों के तमाम बंधन एक ही झटके में टूट गए। भिवानी के खापड़ीवास गांव की इस बेटी ने शादी से पूर्व दूल्हे की तरह गांव में घुड़चढ़ी की रस्म अदा की। बेटी के इस हौसले को मां-बाप व भावी पति का भी भरपूर समर्थन मिला है। मां ने शगुन से दूध का गिलास दिया तो पूरा गांव ढोल-नगाड़ों से गूंज उठा। ग्रामीण पहली बार अपनी किसी बेटी की घुड़चढ़ी में बड़े उल्लास से शामिल हुए। ऐसा लगता था कि हर कोई इस इतिहास का साक्षी बनने को तत्पर है। 23 वर्षीय मोनिका ने इस दौरान हर वह रस्म अदा कि जो दूल्हा शादी से पूर्व घुड़चढ़ी के दौरान करता है। घोड़ी पर सवार वह गांव के मंदिर में पहुंची व सभी रस्में पूरी कीं। वह गुरुवार को गांव भारीवास निवासी कंप्यूटर इंजीनियर संदीप से विवाह बंधन में बंधेंगी। संदीप एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। भावी पत्नी के हौसले का सम्मान करते हुए संदीप कहते हैं कि मोनिका ने जो मान कमाया है उससे वह काफी उत्साहित हैं। वह शादी में आठवां फेरा लेकर बेटी बचाने की शपथ भी लेंगे। मोनिका के इस अभियान को जागो एवं आर्ट ऑफ लिविंग तथा रेडक्रास ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर समर्थन किया। बेटी बचाओ अभियान के सूत्रधार एवं आठवां फेरा के संस्थापक श्याम सुंदर ने कहा कि बेटियां अब किसी भी मायनों में लड़कों से कम नहीं हैं।
 
I would say good initiative and to come into the picture too even for a short time. But yes, we made customs ans sometimes they needed to be broken. If only to break the new generation wants, then this gonna not be sufficient, the "Y" should be creative enough too for the customs and social norms.
 
Ravinder jee, jo chhora sapeth patra pe sign kare pacche bhee nasha karan laaga, jab chhori wala ke karega, pher ke bhyahye pacche apni chhori ne ulta le aawega....

Arr je bera konni kee chhori ke ghodi pe chadde te kaun saa samaj sudhar ho jaaga, aur maan baabu ke do peese jyade kharch karwa diye ... Ritu jee ne sahi kaha hai kuch cheeze samajik riti rivaz se hee ho to hee acchi lagti hai.........mere khyal te samaj main sudhar chhoriya te acchi education aur accha mahol de ke aa sake hai naa kee aise aises riti rivaz badal ke..hhahaha arr jo chhora kuch deena main naukri chodd ke sasuaral aa gaya arr kehn laga kee jee main ghar kaa samhal lunga aap chhori ne bhej do kit naukri karan tai.........
बहुत ही अच्छी सुरुआत हे | इस प्रकार के समाज सुधार कार्यकर्म और भी चलाये जाने चाहीये और बाकी समाज उनका समर्थन और अनुसरण करे | जेसे नशा मुक्ति अभियान की भी अत्यंत आवश्यकता हे|
जेसे कुछ दिन पहले मेने सुना था की लड़की का बाप लड़के वालों से आजकल ये शरत रखता हे की शादी से पहले घर में शोचालय बनवाना होगा | उसी प्रकार सगाई के समय शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवा लेने चाहिए की लड़का किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेगा | क्योंकि नशा हर तरह की बर्बादी ले कर आता हे घर में |
 
Ravinder jee, jo chhora sapeth patra pe sign kare pacche bhee nasha karan laaga, jab chhori wala ke karega, pher ke bhyahye pacche apni chhori ne ulta le aawega....

Arr je bera konni kee chhori ke ghodi pe chadde te kaun saa samaj sudhar ho jaaga, aur maan baabu ke do peese jyade kharch karwa diye ... Ritu jee ne sahi kaha hai kuch cheeze samajik riti rivaz se hee ho to hee acchi lagti hai.........mere khyal te samaj main sudhar chhoriya te acchi education aur accha mahol de ke aa sake hai naa kee aise aises riti rivaz badal ke..hhahaha arr jo chhora kuch deena main naukri chodd ke sasuaral aa gaya arr kehn laga kee jee main ghar kaa samhal lunga aap chhori ne bhej do kit naukri karan tai.........

न्यू ते भाई सारा-ए सौदा उलटा हो जा गा | छोरी बरात ले के जावेगी | छोरे का बाबू "युवक दान' करेगा | एर फेर छोरा आपने बाबू के कान्ध्याँ के लाग-लाग रोवेगा | एर मुकलावे में तील ल्यावेगा | हा हा हा हा फेर तो सब किम्मे उलट-पुलट |
 
hahahhaha bhaisahb pher te aapne bhee keese ke bhyah main chawal bikheran kaa mauka mil jyaga.....
न्यू ते भाई सारा-ए सौदा उलटा हो जा गा | छोरी बरात ले के जावेगी | छोरे का बाबू "युवक दान' करेगा | एर फेर छोरा आपने बाबू के कान्ध्याँ के लाग-लाग रोवेगा | एर मुकलावे में तील ल्यावेगा | हा हा हा हा फेर तो सब किम्मे उलट-पुलट |
 
ho sake hai wa chhori aapne maa-babu ke ek e aulad ho..!!!
par yu to ek publicity stunt hai...
haan, baki es baat pe comment ni kar sakte k wa kaal ne sasu-susre ka sir phoregi ya chhore ka jeena haram kar degi....!!

nyu b ho sake hai sara e koonba sanki ho unka jyat-e wa ghodi chad gi..ar ghar k b gail laag liye...!!

baki ek aadhi ghatna to hondi reh hai isi isi...
 
न्यू ते भाई सारा-ए सौदा उलटा हो जा गा | छोरी बरात ले के जावेगी | छोरे का बाबू "युवक दान' करेगा | एर फेर छोरा आपने बाबू के कान्ध्याँ के लाग-लाग रोवेगा | एर मुकलावे में तील ल्यावेगा | हा हा हा हा फेर तो सब किम्मे उलट-पुलट |

Aadambar se nire famous hon ke. Ak akhbaar me mhara bhi naam aa jaga jeemte-jee. :)
 
[FONT=&quot]वैसे तो घुड़चढी की प्रथा ही अपने आप में एक कुरीति है जो सामंतवादी[/FONT] [FONT=&quot]परिपाटियों को जीवंत रखने में अहम् भूमिका निभा रही है [/FONT]I [FONT=&quot]इस प्रथा पर[/FONT] [FONT=&quot]चर्चा करने से पहले इस बात का जानना आवश्यक है की इसका प्रारंभ कब क्यों और[/FONT] [FONT=&quot]कहाँ[/FONT] [FONT=&quot]हुआ [/FONT]I [FONT=&quot]मेरी कल्पना यह है कि प्राचीन काल में राजा-महाराजाओं को जो[/FONT] [FONT=&quot]कोई सुंदर लडकी पसंद आ जाती थी उसका अपहरण कर लेते थे और पतिरोध की अवस्था[/FONT] [FONT=&quot]में वे अपनी सेना को साथ ले जा कर बलपूर्वक उस लडकी को डोली में बिठाकर ले[/FONT] [FONT=&quot]आते थे[/FONT] I [FONT=&quot]राजाओं की देखा देखी दूसरे लोंगों[/FONT], [FONT=&quot]विशेषकर सामंतों[/FONT], [FONT=&quot]ने भी इस[/FONT] [FONT=&quot]प्रथा का अनुकरण किया होगा और धीरे धीरे यह एक[/FONT] [FONT=&quot]रिवाज़ बन गया [/FONT]I [FONT=&quot]सो सेना[/FONT] [FONT=&quot]की जगह बरात ने ले ली और हाथी घोड़ों की जगह हीरांनंद घोड़ी वाले की कमजोर सी[/FONT] [FONT=&quot]घोड़ी ने ले ली [/FONT]I [FONT=&quot]ताज की कमी[/FONT] [FONT=&quot]एक मैले कुचेले और बदबूदार सेहरे ने पूरी[/FONT] [FONT=&quot]कर दी और यह सेहराबंदी का ताम झाम एक अच्छा-खासा व्यापर बन गया [/FONT]I [FONT=&quot]चूंकि यह[/FONT] [FONT=&quot]सिर्फ मेरी एक कल्पना भर है[/FONT], [FONT=&quot]इसलिए आप अपने अपने नेक विचार इस प्रथा के[/FONT] [FONT=&quot]बारे में प्रस्तुत कर सकते हैं और मेरी इस [/FONT]thesis [FONT=&quot]को [/FONT]reject [FONT=&quot]कर सकते है[/FONT], [FONT=&quot]परन्तु आधुनिक युग में इस प्रथा की उपयोगिता के बारे में अपने तर्क अवश्य[/FONT] [FONT=&quot]दें.[/FONT]

[FONT=&quot]जहाँ तक उस लडकी के द्वारा घोड़ी पर चढ़ [/FONT]कर[FONT=&quot] लड़के की तरह रस्मो रिवाज़[/FONT] [FONT=&quot]पूरे करने की बात है[/FONT], [FONT=&quot]उसने शायद यह बताने की कोशिश की है कि लड़के और[/FONT] [FONT=&quot]लडकी का सामाजिक दर्जा[/FONT] [FONT=&quot]और अधिकार बराबर होने चाहिए [/FONT]I [FONT=&quot]और जरूरी नहीं कि जो[/FONT] [FONT=&quot]लड़की समान अधिकारों की बात करे वो खराब हो और शादी के बाद [/FONT]अपनी[FONT=&quot] सास से पैर[/FONT] [FONT=&quot]दबवाए [/FONT]I [FONT=&quot]कई घूंघट में छिपी हुई लाजवंती भी कम खतरनाक नहीं होती [/FONT]I [FONT=&quot]इसके[/FONT] [FONT=&quot]विपरीत आधुनिक द्रष्टिकोण रखने वाली सुशिक्षित लड़कियां अच्छी बहूएँ साबित[/FONT] [FONT=&quot]हो जाती हैं.[/FONT]
 
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सामान सामाजिक दर्जा और बराबर अधिकार ने ऐ ते दुनिया की इसी तीसी कर राखी है .....पुरे विश्व में आदमी के साथ भेदभाव किया जाता है! अगर औरत अपनी शादी में थोडा बहुत भी सामान ले आती तो सारी उम्र का दहेज़ का फंदा गले में डाल दे है आदमी के .....नु न देखती की आदमी की सारी कमाई औरत और उसके बच्चे इस्तेमाल करते है! औरतो के लिए दुनिया भर की ऍन. जी. ओ. और सामाजिक संस्थाए है ....आदमियों के बारे में ऐसा कुछ नहीं सुना जाता! मिडिया में भी औरतो की समस्याएँ उठाई जाती है और उनपे विचार विमर्श किया जाता है....आदमी का क्या ....आदमी औरत को पिटे तो आदमी गलत, अगर औरत आदमी को पिटे तो भी आदमी गलत .....औरत का बलात्कार हो तो आदमी गलत ...अगर आदमी तलाक ले तो भी आदमी गलत ...औरत की नौकरी न लगे तो आदमी गलत ....किसी औरत की शादी न हो तो भी आदमी गलत ....हमेश आदमी को ही अपनी निर्दोस्ता का प्रमाण देना पड़ता है ....

इतना सब कुछ होने क बाद भी औरत को अबला और असहाय माना जाता है .....और ऊपर से विधि का विधान देखिये की आदमी ये सब जनता है और फिर भी कुछ नहीं करता .....आदमी भी औरत की तरह औरत को ही आदर्श मानता है .....
 
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