Etymology of the word Chaudhary/Chowdhary

Can someone explain it completely with reference ?

It can be a good starting point: WIKIPEDIA ---

"Choudhury (Hindi: चौधरी , Urdu: چودهری, Bengali: চৌধুরী) is a term in Indo-Aryan languages, literally meaning "holder of four". Choudhury (also spellt Chowdhury, Chaudhury, Chaudhry, Choudhary, Chowdhery, Chaudhary, or Choudhry) is a hereditary title of honor, awarded by Moghul Emperors to persons of eminence. Traditionally, the term is used as a title indicating the ownership of ancestral land, but in contemporary usage it is often taken as a surname or title.
During the Mughal era, a Taluqa or District usually consisted of 84 villages and a central town. The Taluqdar was required to collect taxes, maintain law and order, and provide military supplies and manpower to the provincial Government. In most cases the Taluqdars were entitled to retain a tenth of the collected revenue. However, some privileged Taluqdars were entitled to a quarter and hence were called Chowdhury, which also literally means owner of the fourth part.According to the Glossary of Punjab Castes, the Talukdars Minhas and Kassartribes of the Dhanni country (present day Chakwal) in the northwest of Punjab were among the first few to receive this honorific title from the Mughal Emperor, Zaheerudin Babur around the Empire. During the Mughal era, this title was only conferred upon a few privileged.
However, during the Sikh rule in Punjab this title became very common and quite a few village headmen or 'Lumberdars' were given 'Chowdhury' as a title by Maharaja Ranjit Singh. Ever since, the Chowdhurys of Chakwal style themselves as 'Chowdhurial' to distinguish themselves from the newly appointed men.[SUP][1][/SUP]
In northern Indian states such as Haryana, Rajasthan and Uttar Pradesh, the title is a synonym for Hindu Gujjars. This is also used by other landowning ethnic group and community.[SUP][2][/SUP]However, it is also used by the Brahman-Zamindar, Muslim, mewari-kayasth."

Also please see,
[h=4]History of the Chaudharies[/h]
 
Last edited:
Wikipedia is as reliable as it is. I 've gone through this page prior to starting the thread.

Does it actually mean ''the holder of four''?

How and when it came in local language?
 
http://genealogy.familyeducation.com/surname-origin/chowdhury


Indian (Bengal) and Bangladeshi: Muslim and Hindu status name for a head of a community or caste, from Sanskrit
​
čatus- ‘four-way’, ‘all-round’ + dhurīya ‘undertaking a burden (of responsibility)’ (Sanskrit dhura ‘burden’). The title was originally awarded to persons of eminence, both Muslims and Hindus, by the Mughal emperors. The Khatris have a clan called Chowdhury. In some traditions the term is said to derive from a title for a military commander controlling four different fighting forces, namely navy, cavalry, infantry, and elephant corps, but this is probably no more than folk etymology.

Read more on FamilyEducation: http://genealogy.familyeducation.com/surname-origin/chowdhury#ixzz1rhOsXYUM
 
In northern Indian states such as Haryana, Rajasthan and Uttar Pradesh, the title is a synonym for Hindu Gujjars. This is also used by other landowning ethnic group and community.[SUP][2][/SUP]However, it is also used by the Brahman-Zamindar, Muslim, mewari-kayasth."

who writes all this ?,I have never in my life seen any kayasth entitled as chaudhary! moreover they forgot to mention Jats,who dominate the landowning in North India.
 
who writes all this ?,I have never in my life seen any kayasth entitled as chaudhary! moreover they forgot to mention Jats,who dominate the landowning in North India.

"The thread was started:[h=2]Etymology of the word Chaudhary/Chowdhary[/h]
Can someone explain it completely with reference ?"

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In its reply in a post it was posted:

"It can be a good starting point: WIKIPEDIA ---
Also please see, History of the Chaudharies"

Then it was added in another post: Read more on FamilyEducation: http://genealogy.familyeducation.com...#ixzz1rhOsXYUM

Friend, nobody has said a final word on the topic, only the exercise is to reach to the roots of the term CHAUDHARY; you are welcome to add further information by quoting references on the topic of the thread.

Thanks

 
"चौधरी" शब्द का अर्थ क्या होता है?

क्या आपने कभी सोचा है कि "चौधरी" शब्द का अर्थ क्या होता है? - वैदिक आर्यन मान्यता के अनुसार इसका अर्थ होता है एक ऐसा इंसान जिसकी चारों वर्णों में पैठ हो, और चारों वर्ण उसके विचारों और आचारों को मान्यता देने के साथ-साथ उसकी मानते भी हों! चारों वर्ण यानि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शुद्र| चौ यानि चार और धरी यानि पैठ, यानि चारों में पैठ| - Phool Kumar Malik
 
जरा यहां गौर फरमायें -


जाट वीरों का इतिहास (लेखक दलीप सिंह अहलावत) - Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter II (पृष्ठ 83-84-85)

1. प्रधान

प्रधान शब्द वेदों में ईश्वर के लिए आया है। शिवजी महाराज ने गणराज्यों की स्थापना की। उन गणों के नेता को गणपति या प्रधान कहते थे। जाटों के बड़े-बड़े गणराज्य रहे हैं जिनका संचालक प्रधान कहलाता था। आजकल खापों की पंचायत के मुखिया को या किसी समूह-समारोह के प्रमुख व्यक्ति को प्रधान नाम से पुकारा जाता है । चुनी हुई ग्राम पंचायत के मुखिया को 'सरपंच' और कई जगह 'प्रधान' भी कहते हैं। प्रधान शब्द का प्रयोग प्रमुख वंशों के लिए भी होता आया है। मुरादाबाद, बिजनौर में (12 गांवों के चौधरियों को छोड़कर), सभी जाटों को 'प्रधान' के नाम से पुकारा जाता है।

मुजफ्फरनगर का पूर्वी भाग (भोकरहेड़ी को छोड़कर), मेरठ में मवाना की सारी तहसील, दौराला के अहलावत, ढकौली के ढाका, छपरौली के खोखर, बृज के डागुर, टीकरी (मेरठ) के राठियों का चौगांवा, गांवों के जाट 'प्रधान' की उपाधि से सम्बोधित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त जाटों में प्रधान उपाधि का कहीं प्रचलन नहीं।

2. ठाकुर


ठाकुर शब्द का प्रयोग मध्यकाल में ईश्वर, स्वामी या मन्दिर की प्रतिमा (मूर्ति) के लिए किया जाता था। मुगलकाल में शासकवर्ग ने इसका व्यवहार अपने नाम के साथ करना प्रारम्भ कर दिया। अक्तूबर 1720 ई० में देहली के सम्राट् मुहम्मदशाह ने चूड़ामन जाट को ठाकुर की पदवी तथा अधिकार देकर सम्मानित किया था। ठाकुर, परगने का शासक प्रबन्ध और शान्ति सुरक्षा के लिये जिम्मेदार होता था। इसी तरह राजा बदनसिंह को 18 मार्च 1723 ई० के दिन जयपुर नरेश सवाई जयसिंह ने अपने आमेर दरबार में ठाकुर की उपाधि से सम्मानित किया था।

राजपूतों में इस समय इसका प्रयोग अधिक है। राजस्थान, इलाहाबाद, आगरा, बरेली कमिश्नरी के राजपूत ठाकुर कहलाते है। राजस्थान और अवध में तो तमाम राजपूतों की उपाधि ठाकुर है और ठाकुर कह देने से ही राजपूत का पता लग जाता है। जाट लोग मथुरा, आगरा, अलीगढ़, बुलन्दशहर, भरतपुर, धौलपुर के सिनसिनवार, राणा, सिकरवार, भृंगुर, गोधे, चापोत्कट, ठकुरेले, ठेनवा, रावत - इन गोत्रों के जाट ही ठाकुर कहलाते हैं। यू० पी०, बिहार के पूर्वी भागों के राजपूत, ठाकुर के स्थान पर बाबू लिखते हैं। बंगाल के कुछ ब्राह्मण वंशों को भी ठाकुर कहा जाता है। राजपूताना, हरयाणा, मालवा, मध्यप्रदेश, पंजाब में कोई भी जाट अपने को ठाकुर नहीं लिखता है। जाट अपने ग्राम में जैसे कुम्हार को प्रजापति कहते हैं, वैसे ही अपने नाइयों को ठाकुर कहते हैं।

3. चौधरी

यह उपाधि केवल मुगलकाल से ही प्रचलित है। इसका अर्थ भी 'प्रमुख' है। बादशाहों ने प्रमुख वंशों व व्यक्तियों को यह उपाधि दी थी।

भरतपुर राजपरिवार के रिश्तेदारों, मथुरा के नौवार, हंगा, खड़ई गोत्र, मेरठ एवं अम्बाला कमिश्नरी के सभी जाटों को चौधरी कहलाने का गौरव प्राप्त है। बिजनौर में बारह गांव - बिजनौर, झालो, कुम्हेड़ा, आलमसराय, वलदिया, इस्मायलपुर, नांगल, सुवाहेड़ी, कीरतपुर, आदमपुर आदि के जाट चौधरी कहलाते आये हैं। हरयाणा के सब हिन्दू जाट और पंजाब में हिन्दू व मुसलमान जाट भी चौधरी कहे जाते हैं। चौधरी के साथ साहब भी कहलाने का गौरव जाटों को प्राप्त है। आम बातचीत करते समय जाट को चौधरी साहब कहकर पुकारा जाता है। चौधरी शब्द सुनते ही 'जाट' का बोध हो जाता है। चौधरी शब्द की बड़ी प्रतिष्ठा है। यहां तक कि 'सर' की ऊंची उपाधि मिलने पर भी सर छोटूराम को सर चौधरी छोटूराम कहा जाता है। इसी प्रकार चौधरी कहलाने वाले और भी हैं जैसे - सर सेठ छाजूराम जी चौधरी, सर चौधरी शहाबुद्दीन साहब विधानसभा अध्यक्ष, सर चौधरी जफरुल्ला खां (जाट गोत्र शाही), चीफ जज फेडरेल कोर्ट, राव बहादुर कैप्टन चौधरी लालचन्द जी आदि। फतेहपुर के दीक्षित, सहारनपुर-मेरठ के सभी राजपूत, कानपुर की घाटमपुर तहसील के ब्राह्मण तिवारी, शिकारपुर-बुलन्दशहर के रईस ब्राह्मण, बंगाल के कायस्थों का एक दल, यू० पी० के तगा, गूजर, अहीर मण्डियों के प्रमुख वैश्य भी चौधरी कहलाते हैं। इसी तरह हिन्दुओं की बहुत-सी अन्य जातियां भी अपने पुत्र व पुत्री के ससुर को या अपने सम्बन्धी को सम्मान के तौर पर चौधरी कह दिया करते हैं जो कि उनकी यह स्थायी उपाधि नहीं है।

4. सरदार

दसवें गुरु गोविन्दसिंह जी ने जब नानक-पंथ को वीर खालसा का रूप दिया तब सभी सिक्ख शिष्यों को उन्होंने सरदार की उपाधि से सम्मानित किया। यानि जो वीर अपना सिर (सर) बलिदान करने के लिए सदा तैयार रहे, उसको सरदार कहा गया। यद्यपि पंजाब में रामदासिये, कलाल, भंगी, तरखान, रामगढिये आदि सभी को सिक्ख होने पर सरदार की उपाधि मिल जाती है। परन्तु जाटों के राज्य थे व इनकी बड़ी-बड़ी जमीदारियां अधिक होने और इनका खास प्रभाव होने के कारण ही गांवों में जाटों को ही सरदार कहा जाता है, छोटी जातियों को नहीं। सेना में जूनियर आफिसरों (JCOs) को भी सरदार कहा जाता है, विशेषकर हिन्दू जाट जे० सी० ओ० को। इन सैनिक जाट जे० सी० ओ० को सरदार बहादुर की उपाधि दी गई, जैसे - सरदार बहादुर मलिक भोरनसिंह, सूबेदार मेजर कुरमाली, सरदार बहादुर कैप्टन रघबीरसिंह ए० डी० सी० वायसराय आदि आदि।

5. मिर्धा

नागौर, जो जोधपुर राज्य में है, के राजवंशी जाटों को मिर्धा कहा जाता है। इस राज्य का डाक विभाग इनके हाथ में था। इस वंश को यह उपाधि राव जोधा जी ने दी थी। इस राज्य के जाटों में मिर्धा ही सर्वाधिक शिक्षित हैं।

6. मलिक

मलिक का अर्थ मालिक है। मालिक की उपाधि मुस्लिम शाही काल में तुषारवंशी, लल्ल गोत्री तिवाना, गठवाला गोत्री जाटों को दी गई थी जो आज तक इस वंश में चली आती है। एक समय गठवारे (गठवाले) जाटों का राज्यशासन अफगानिस्तान में गजनी के चारों ओर था। सबसे पहले वहां पर इनकी प्रचण्ड वीरता के कारण इनको मालिक कहने लग गए यानि मलिक की उपाधि से सम्मानित किये गए। डबल्यू क्रूक साहब इस भांति लिखते हैं - “रोहतक जिले में गोहाना के पास इनका मुख्य स्थान आहुलाना है। पड़ौसी राजपूतों के साथ युद्ध में यह पूर्ण सफल रहे। इसलिए चारों ओर के अन्य जाटों ने इनको प्रधान मान लिया। दिल्ली के बादशाह ने मंदहार राजपूतों को दबाने के लिए इनको सहायतार्थ बुलाया था। विजयी होने पर बादशाह ने इनको मालिक (मलिक) की उपाधि दी।”

सरगोधा, झंग, मधियाने के तिवाना गोत्री मुसलमान जाट, हरयाणा और मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, मुरादाबाद के गठवाला लल्ल गोत्र के जाट मलिक कहलाते हैं। इस गोत्र के जाट अपने गोत्र गठवाला के स्थान पर मलिक लिखने और कहने का अधिक गौरव रखते हैं। लल्ल गठवाला मलिकों का विस्तार से वर्णन तृतीय अध्याय में लिखा जायेगा।

7. पटेल

यह उपाधि दक्षिण में मरहठों की ओर से पट्टीदार जमींदारों को दी गई थी। गुजरात में गूजर, कोली, कुनवी आदि कृषक जातियों में पटेल उपाधि का अत्यधिक प्रचलन है। उदयपुर, मेरवाड़ा, खान्देश, बरार, इन्दौर, भोपाल, मध्यप्रदेश, मन्दसौर, ग्वालियर के जाटों को पटेल उपाधि से सम्बोधित किया जाता है।

भारत के भूतपूर्व गृहमन्त्री सरदार वल्लभभाई पटेल जी सरदार और पटेल दोनों उपाधियों से सम्मानित थे।

8. फौजदार

यह उपाधि मुगल शासनकाल में उन शाही उच्च अधिकारियों को दी जाती थी जो कई परगनों या प्रान्त की शासन व्यवस्था करते थे। जाटों को यह उपाधि भरतपुर नरेश महाराजा सूरजमल ने देनी आरम्भ की थी। प्राचीन राजवंशज जाट जो महाराजा की सेना में बड़ी संख्या में भरती थे, उनको महाराजा सूरजमल ने यह फौजदार की उपाधि प्रदान की थी। भरतपुर के सभी सिनसिनवार गोत्र के जाट, अलीगढ, मथुरा के खूंटेल (कुन्तल), डागुर, चाहर, गंड और भगौर गोत्रों के जाट फौजदार कहलाते हैं।

9. राणा

यह एक खिताब या उपाधि है जो जाटों, राजपूतों तथा गोरखों में है। उदाहरणार्थ जाट क्षत्रियों में काकराणा, आदराणा, तातराणा, शिवराणा, चौदहराणा आदि वंश अपनी राणा उपाधि पर गर्व करते हैं। गोहद और धोलपुर राज्य नरेशों की उपाधि राणा की थी। जाटों में इस राणा उपाधि वाले गोत्रों तथा उनकी जनसंख्या बहुत है। मेवाड़, उदयपुर के राजपूत नरेशों की उपाधि राणा की थी जैसे महाराणा प्रतापसिंह आदि।

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Last edited:
Brother Phool,

It will be interesting to read about word "चौधरी" in detail as our community uses it. But where did you find its meaning? I am interested to know the source of "वैदिक आर्यन मान्यता". Could you please share a web link or a scan of the book mentioning this etc?


क्या आपने कभी सोचा है कि "चौधरी" शब्द का अर्थ क्या होता है? - वैदिक आर्यन मान्यता के अनुसार इसका अर्थ होता है एक ऐसा इंसान जिसकी चारों वर्णों में पैठ हो, और चारों वर्ण उसके विचारों और आचारों को मान्यता देने के साथ-साथ उसकी मानते भी हों! चारों वर्ण यानि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शुद्र| चौ यानि चार और धरी यानि पैठ, यानि चारों में पैठ| - Phool Kumar Malik
 
Last edited:
Deswal sir, with due respect to Mr Ahlawat - he has mentioned Seth Chhajju Ram Choudhary under "चौधरी कहलाने वाले और भी हैं" (means non Jat list) category. This is bad. He should knwo that Ch Chhajju ram was a Jat of Lamba Gotra.



जरा यहां गौर फरमायें -


जाट वीरों का इतिहास (लेखक दलीप सिंह अहलावत) - Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter II (पृष्ठ 83-84-85)

3. चौधरी

यह उपाधि केवल मुगलकाल से ही प्रचलित है। इसका अर्थ भी 'प्रमुख' है। बादशाहों ने प्रमुख वंशों व व्यक्तियों को यह उपाधि दी थी।

भरतपुर राजपरिवार के रिश्तेदारों, मथुरा के नौवार, हंगा, खड़ई गोत्र, मेरठ एवं अम्बाला कमिश्नरी के सभी जाटों को चौधरी कहलाने का गौरव प्राप्त है। बिजनौर में बारह गांव - बिजनौर, झालो, कुम्हेड़ा, आलमसराय, वलदिया, इस्मायलपुर, नांगल, सुवाहेड़ी, कीरतपुर, आदमपुर आदि के जाट चौधरी कहलाते आये हैं। हरयाणा के सब हिन्दू जाट और पंजाब में हिन्दू व मुसलमान जाट भी चौधरी कहे जाते हैं। चौधरी के साथ साहब भी कहलाने का गौरव जाटों को प्राप्त है। आम बातचीत करते समय जाट को चौधरी साहब कहकर पुकारा जाता है। चौधरी शब्द सुनते ही 'जाट' का बोध हो जाता है। चौधरी शब्द की बड़ी प्रतिष्ठा है। यहां तक कि 'सर' की ऊंची उपाधि मिलने पर भी सर छोटूराम को सर चौधरी छोटूराम कहा जाता है। इसी प्रकार चौधरी कहलाने वाले और भी हैं जैसे - सर सेठ छाजूराम जी चौधरी, सर चौधरी शहाबुद्दीन साहब विधानसभा अध्यक्ष, सर चौधरी जफरुल्ला खां (जाट गोत्र शाही), चीफ जज फेडरेल कोर्ट, राव बहादुर कैप्टन चौधरी लालचन्द जी आदि। फतेहपुर के दीक्षित, सहारनपुर-मेरठ के सभी राजपूत, कानपुर की घाटमपुर तहसील के ब्राह्मण तिवारी, शिकारपुर-बुलन्दशहर के रईस ब्राह्मण, बंगाल के कायस्थों का एक दल, यू० पी० के तगा, गूजर, अहीर मण्डियों के प्रमुख वैश्य भी चौधरी कहलाते हैं। इसी तरह हिन्दुओं की बहुत-सी अन्य जातियां भी अपने पुत्र व पुत्री के ससुर को या अपने सम्बन्धी को सम्मान के तौर पर चौधरी कह दिया करते हैं जो कि उनकी यह स्थायी उपाधि नहीं है।

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Very nice information sir, but I find it incomplete. Isko ek version ki tarah liya ja sakta hai, jaise maine ek version put kiya hai, (Anil Sangwan, mere ko mere dada ji ne is baare bataya tha), kyonki Mughals ne isko ya to sirf Jats ko confer kiya hoga otherwise sabko jaise ki ismen mentioned hai kiya tha to fir iska adhaar kyaa tha? thanks!

जरा यहां गौर फरमायें -




3. चौधरी

यह उपाधि केवल मुगलकाल से ही प्रचलित है। इसका अर्थ भी 'प्रमुख' है। बादशाहों ने प्रमुख वंशों व व्यक्तियों को यह उपाधि दी थी।

भरतपुर राजपरिवार के रिश्तेदारों, मथुरा के नौवार, हंगा, खड़ई गोत्र, मेरठ एवं अम्बाला कमिश्नरी के सभी जाटों को चौधरी कहलाने का गौरव प्राप्त है। बिजनौर में बारह गांव - बिजनौर, झालो, कुम्हेड़ा, आलमसराय, वलदिया, इस्मायलपुर, नांगल, सुवाहेड़ी, कीरतपुर, आदमपुर आदि के जाट चौधरी कहलाते आये हैं। हरयाणा के सब हिन्दू जाट और पंजाब में हिन्दू व मुसलमान जाट भी चौधरी कहे जाते हैं। चौधरी के साथ साहब भी कहलाने का गौरव जाटों को प्राप्त है। आम बातचीत करते समय जाट को चौधरी साहब कहकर पुकारा जाता है। चौधरी शब्द सुनते ही 'जाट' का बोध हो जाता है। चौधरी शब्द की बड़ी प्रतिष्ठा है। यहां तक कि 'सर' की ऊंची उपाधि मिलने पर भी सर छोटूराम को सर चौधरी छोटूराम कहा जाता है। इसी प्रकार चौधरी कहलाने वाले और भी हैं जैसे - सर सेठ छाजूराम जी चौधरी, सर चौधरी शहाबुद्दीन साहब विधानसभा अध्यक्ष, सर चौधरी जफरुल्ला खां (जाट गोत्र शाही), चीफ जज फेडरेल कोर्ट, राव बहादुर कैप्टन चौधरी लालचन्द जी आदि। फतेहपुर के दीक्षित, सहारनपुर-मेरठ के सभी राजपूत, कानपुर की घाटमपुर तहसील के ब्राह्मण तिवारी, शिकारपुर-बुलन्दशहर के रईस ब्राह्मण, बंगाल के कायस्थों का एक दल, यू० पी० के तगा, गूजर, अहीर मण्डियों के प्रमुख वैश्य भी चौधरी कहलाते हैं। इसी तरह हिन्दुओं की बहुत-सी अन्य जातियां भी अपने पुत्र व पुत्री के ससुर को या अपने सम्बन्धी को सम्मान के तौर पर चौधरी कह दिया करते हैं जो कि उनकी यह स्थायी उपाधि नहीं है।


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Very nice information sir, but I find it incomplete. Isko ek version ki tarah liya ja sakta hai, jaise maine ek version put kiya hai, (Anil Sangwan, mere ko mere dada ji ne is baare bataya tha), kyonki Mughals ne isko ya to sirf Jats ko confer kiya hoga otherwise sabko jaise ki ismen mentioned hai kiya tha to fir iska adhaar kyaa tha? thanks!

Phool, maybe Dalip Singh Ahlawat might have lapsed at a certain point, but the word "चौधरी" does not seem to be the original Vedic word, but could perhaps be a derivative (अपभ्रंश) of some original word. It would be interesting to search that original word in some old book of Vedic times.

By the explanation you have given in your first post, my guess is that it could be:

1. "चतुर्धृतः - ( चतु: + धृत: ) - जो चारों जगह (वर्णों में) धृत है (या रखा है/ मौजूद है) या जो चारों को धारण किये है।
2. "चतुर्दृढ" - ( चतु: + दृढ ) - जो चारों (वर्णों में) दृढ है या मजबूत है (या जिसकी पैठ है)।

No. 1 above is more close to "चौधरी".

This is only my hypothesis and I have not seen words like चतुर्दृढ or चतुर्धृत in old literature, which could lead to its present form "चौधरी".

As Anil has said, please try to dig out more details of the source of "वैदिक आर्यन मान्यता".

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Ji sir aapne bahut hi beautiful explanation daali hai, actually I got to know it from my grandfatther. Apne yahaan jats mein original traditions ko aaj bhi "वैदिक आर्यन मान्यता" hi kahte hain..... aur hum vaise bhi by nature khud ko arya jyada maante hain aur hindu kam.....so filhaal ke liye to itna hi reason de sakta hu jiske base pe dada ji ne mere ko yah baat batai thi, baaki yes iski roots tak jana jaroori hai..... but practicality ke hisaab se mujhe dada ji ki baat mein dam bhi lagta hai, kyonki humko chaaron varn "chaudhary" kah ke bulaate hain kyonki hum kisaan hone ke naate baaki sab varnon ka pet bharne ka bhi kaam karte aaye hain, isliye bhi iska seedha-seedha connection baithat hai


Phool, maybe Dalip Singh Ahlawat might have lapsed at a certain point, but the word "चौधरी" does not seem to be the original Vedic word, but could perhaps be a derivative (अपभ्रंश) of some original word. It would be interesting to search that original word in some old book of Vedic times.

By the explanation you have given in your first post, my guess is that it could be:

1. "चतुर्धृतः - ( चतु: + धृत: ) - जो चारों जगह (वर्णों में) धृत है (या रखा है/ मौजूद है) या जो चारों को धारण किये है।
2. "चतुर्दृढ" - ( चतु: + दृढ ) - जो चारों (वर्णों में) दृढ है या मजबूत है (या जिसकी पैठ है)।

No. 1 above is more close to "चौधरी".

This is only my hypothesis and I have not seen words like चतुर्दृढ or चतुर्धृत in old literature, which could lead to its present form "चौधरी".

As Anil has said, please try to dig out more details of the source of "वैदिक आर्यन मान्यता".

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