samarkadian
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Can someone explain it completely with reference ?
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In northern Indian states such as Haryana, Rajasthan and Uttar Pradesh, the title is a synonym for Hindu Gujjars. This is also used by other landowning ethnic group and community.[SUP][2][/SUP]However, it is also used by the Brahman-Zamindar, Muslim, mewari-kayasth."
who writes all this ?,I have never in my life seen any kayasth entitled as chaudhary! moreover they forgot to mention Jats,who dominate the landowning in North India.
क्या आपने कभी सोचा है कि "चौधरी" शब्द का अर्थ क्या होता है? - वैदिक आर्यन मान्यता के अनुसार इसका अर्थ होता है एक ऐसा इंसान जिसकी चारों वर्णों में पैठ हो, और चारों वर्ण उसके विचारों और आचारों को मान्यता देने के साथ-साथ उसकी मानते भी हों! चारों वर्ण यानि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शुद्र| चौ यानि चार और धरी यानि पैठ, यानि चारों में पैठ| - Phool Kumar Malik
जरा यहां गौर फरमायें -
जाट वीरों का इतिहास (लेखक दलीप सिंह अहलावत) - Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter II (पृष्ठ 83-84-85)
3. चौधरी
यह उपाधि केवल मुगलकाल से ही प्रचलित है। इसका अर्थ भी 'प्रमुख' है। बादशाहों ने प्रमुख वंशों व व्यक्तियों को यह उपाधि दी थी।
भरतपुर राजपरिवार के रिश्तेदारों, मथुरा के नौवार, हंगा, खड़ई गोत्र, मेरठ एवं अम्बाला कमिश्नरी के सभी जाटों को चौधरी कहलाने का गौरव प्राप्त है। बिजनौर में बारह गांव - बिजनौर, झालो, कुम्हेड़ा, आलमसराय, वलदिया, इस्मायलपुर, नांगल, सुवाहेड़ी, कीरतपुर, आदमपुर आदि के जाट चौधरी कहलाते आये हैं। हरयाणा के सब हिन्दू जाट और पंजाब में हिन्दू व मुसलमान जाट भी चौधरी कहे जाते हैं। चौधरी के साथ साहब भी कहलाने का गौरव जाटों को प्राप्त है। आम बातचीत करते समय जाट को चौधरी साहब कहकर पुकारा जाता है। चौधरी शब्द सुनते ही 'जाट' का बोध हो जाता है। चौधरी शब्द की बड़ी प्रतिष्ठा है। यहां तक कि 'सर' की ऊंची उपाधि मिलने पर भी सर छोटूराम को सर चौधरी छोटूराम कहा जाता है। इसी प्रकार चौधरी कहलाने वाले और भी हैं जैसे - सर सेठ छाजूराम जी चौधरी, सर चौधरी शहाबुद्दीन साहब विधानसभा अध्यक्ष, सर चौधरी जफरुल्ला खां (जाट गोत्र शाही), चीफ जज फेडरेल कोर्ट, राव बहादुर कैप्टन चौधरी लालचन्द जी आदि। फतेहपुर के दीक्षित, सहारनपुर-मेरठ के सभी राजपूत, कानपुर की घाटमपुर तहसील के ब्राह्मण तिवारी, शिकारपुर-बुलन्दशहर के रईस ब्राह्मण, बंगाल के कायस्थों का एक दल, यू० पी० के तगा, गूजर, अहीर मण्डियों के प्रमुख वैश्य भी चौधरी कहलाते हैं। इसी तरह हिन्दुओं की बहुत-सी अन्य जातियां भी अपने पुत्र व पुत्री के ससुर को या अपने सम्बन्धी को सम्मान के तौर पर चौधरी कह दिया करते हैं जो कि उनकी यह स्थायी उपाधि नहीं है।
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जरा यहां गौर फरमायें -
3. चौधरी
यह उपाधि केवल मुगलकाल से ही प्रचलित है। इसका अर्थ भी 'प्रमुख' है। बादशाहों ने प्रमुख वंशों व व्यक्तियों को यह उपाधि दी थी।
भरतपुर राजपरिवार के रिश्तेदारों, मथुरा के नौवार, हंगा, खड़ई गोत्र, मेरठ एवं अम्बाला कमिश्नरी के सभी जाटों को चौधरी कहलाने का गौरव प्राप्त है। बिजनौर में बारह गांव - बिजनौर, झालो, कुम्हेड़ा, आलमसराय, वलदिया, इस्मायलपुर, नांगल, सुवाहेड़ी, कीरतपुर, आदमपुर आदि के जाट चौधरी कहलाते आये हैं। हरयाणा के सब हिन्दू जाट और पंजाब में हिन्दू व मुसलमान जाट भी चौधरी कहे जाते हैं। चौधरी के साथ साहब भी कहलाने का गौरव जाटों को प्राप्त है। आम बातचीत करते समय जाट को चौधरी साहब कहकर पुकारा जाता है। चौधरी शब्द सुनते ही 'जाट' का बोध हो जाता है। चौधरी शब्द की बड़ी प्रतिष्ठा है। यहां तक कि 'सर' की ऊंची उपाधि मिलने पर भी सर छोटूराम को सर चौधरी छोटूराम कहा जाता है। इसी प्रकार चौधरी कहलाने वाले और भी हैं जैसे - सर सेठ छाजूराम जी चौधरी, सर चौधरी शहाबुद्दीन साहब विधानसभा अध्यक्ष, सर चौधरी जफरुल्ला खां (जाट गोत्र शाही), चीफ जज फेडरेल कोर्ट, राव बहादुर कैप्टन चौधरी लालचन्द जी आदि। फतेहपुर के दीक्षित, सहारनपुर-मेरठ के सभी राजपूत, कानपुर की घाटमपुर तहसील के ब्राह्मण तिवारी, शिकारपुर-बुलन्दशहर के रईस ब्राह्मण, बंगाल के कायस्थों का एक दल, यू० पी० के तगा, गूजर, अहीर मण्डियों के प्रमुख वैश्य भी चौधरी कहलाते हैं। इसी तरह हिन्दुओं की बहुत-सी अन्य जातियां भी अपने पुत्र व पुत्री के ससुर को या अपने सम्बन्धी को सम्मान के तौर पर चौधरी कह दिया करते हैं जो कि उनकी यह स्थायी उपाधि नहीं है।
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Very nice information sir, but I find it incomplete. Isko ek version ki tarah liya ja sakta hai, jaise maine ek version put kiya hai, (Anil Sangwan, mere ko mere dada ji ne is baare bataya tha), kyonki Mughals ne isko ya to sirf Jats ko confer kiya hoga otherwise sabko jaise ki ismen mentioned hai kiya tha to fir iska adhaar kyaa tha? thanks!
Phool, maybe Dalip Singh Ahlawat might have lapsed at a certain point, but the word "चौधरी" does not seem to be the original Vedic word, but could perhaps be a derivative (अपभ्रंश) of some original word. It would be interesting to search that original word in some old book of Vedic times.
By the explanation you have given in your first post, my guess is that it could be:
1. "चतुर्धृतः - ( चतु: + धृत: ) - जो चारों जगह (वर्णों में) धृत है (या रखा है/ मौजूद है) या जो चारों को धारण किये है।
2. "चतुर्दृढ" - ( चतु: + दृढ ) - जो चारों (वर्णों में) दृढ है या मजबूत है (या जिसकी पैठ है)।
No. 1 above is more close to "चौधरी".
This is only my hypothesis and I have not seen words like चतुर्दृढ or चतुर्धृत in old literature, which could lead to its present form "चौधरी".
As Anil has said, please try to dig out more details of the source of "वैदिक आर्यन मान्यता".
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