ravinderjeet
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agreed people....about all the explanation you have given for the clothing of women...and about sindoor and bindi and mangalsutra...i think ...i haven't seen my grandmum's wearing any of these ever.... these things we just adopted in a generation ( i don't know from where) and if we leave them now...i don't think its a big deal![]()
लुगाई का सिंगार स हया ।
जो आज कल कोणी रहया ॥
जाट संस्कर्ती में कदे बिंदी ,सिन्दूर ,मंगलसूत्र कोणी रहए ,ये सब जट्टों में पाछले १० -१५ साल तें बड़े सें , जब तें जाट भामण वाद के चक्कर में पड़े सें । ओहला भी जाट संस्क्रती में कोणी था ,यु भी १५ वि -१६ वि शताब्दी में मुसलमानों के आगमन के बाद शुरू होया स । जट्टां में लुगाई का ब्याहली होण की निशानी स चुन्दड (घोटे आला ),ज्याँ तें फेरयाँ पे भी चुन्दड ओढाया जाया करे आर दूसरी बारी ब्याह हो ,उहने भी चुन्दडी गेरना ,लत्ता ओढ़ाना ,चादर डालना कह्या करें न्यारे-न्यारे इलाक्याँ में । साडी भी जाटनियाँ का पहरावा कदे नि रहया । जाटनी शूंट में भतेरी आछी लाग्गें सें ,और किम्मे आग-अडंगा पहरण की जरूते ना ।