Farmers are not meant to ride on development bandwagon!!

जाट किसान की असल कहानी
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Kisan problem main hai .....iska pata sabb ko hain.........no need of more videos to see.......ISKA SOLUTION KYA HAIN YE DISCUSS HONA CHAHIYE!

Mere hisab se Government ka interference hi problem ka EK MATR karan hain.
 
200 crore pending dues is on Malakpur Mill Baghpat since long time. Ajit Singh used this sugar mill for his survival but now politically finished. SP State govt hardly care as Jat doesnt vote SP. Every time Jat Sugarcane farmer lost.
Now question is new BJP MP:
Dil par aur dimag par hath rakhna , Did ever Ajit Singh raise this issue in parliament like as it has been raised by Dr Satyapal Singh Tomar IPS Ex Mumbai Pune Nagpur commissioner? I challenge all Jatlanders pls search it on google, and answer how many times Ajit Singh raise this important issue ?
below are video of Parliament proceeding .
https://www.facebook.com/drsinghsatyapal/videos

https://www.youtube.com/watch?v=w0pDgisD3mw

Now Answer... If you would be MP aap kya kartey ?
 
वो जो पुलिस कप्तान बनाया था सांसद अर डॉ बाल्यान ,उनके कोई ब्यान नहीं इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर ? बाकी सुनी स अक किसान संघठन हरयाने आले मुख्यमंत्री क पाछे लाग रे ह स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करवाने पर !

200 crore pending dues is on Malakpur Mill Baghpat since long time. Ajit Singh used this sugar mill for his survival but now politically finished. SP State govt hardly care as Jat doesnt vote SP. Every time Jat Sugarcane farmer lost.
Now question is new BJP MP:
Dil par aur dimag par hath rakhna , Did ever Ajit Singh raise this issue in parliament like as it has been raised by Dr Satyapal Singh Tomar IPS Ex Mumbai Pune Nagpur commissioner? I challenge all Jatlanders pls search it on google, and answer how many times Ajit Singh raise this important issue ?
below are video of Parliament proceeding .
https://www.facebook.com/drsinghsatyapal/videos

https://www.youtube.com/watch?v=w0pDgisD3mw

Now Answer... If you would be MP aap kya kartey ? Didnt he even pointing his own govt ministers ?
 
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What was Jayant chaudhary doing with Akhilesh Yadav

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Was he asking pending dues for poor Jat farmers or his own MLC seat ? Bcoz Ajit Singh did nt get RS MP seat . :) :redface:
Jat Jat keh kar bahut moorkh banaya ... We need development like we have in Faridabad, Gurgaon, Noida , Ghaziabad. iss 1-1 bigha kheti mein kuch na lagna haath mein.

http://www.jagran.com/thirdparty/ne...s-chief-minister-akhilesh-yadav-11680207.html

Neechey Khabar padho ? Did Jayant ask for pending sugarcane dues for poor Jat farmers of baghpat ? Or MLC seat for himself as cant win MLA even kyo ?
http://indianexpress.com/article/cities/lucknow/akhilesh-yadav-wont-hesitate-to-take-tough-decision/
 
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यहाँ अगर अभी भी कुछ मोदी समर्थक भाइयो का अपने किसानो की दयनीय स्थिति पर खून नहीं खोलता तो बड़े शर्म की बात है ! ऐसे तो देश का विकास हो ना हो पर किसानो का विनाश तय है !

bhai...congress ne kuch ni kiya..logga ne modi ko vote diya...modi se ummede thi..par ummede dhaarsaahi hoti dikh rahi hai kisano ki.....kisano ke alwa sab ke bare main kuch ne kuch bola jaa raha hai..iss aandata ki koi nahi soch raha...ek dihadi mazdoor bhi istai theek haalat main ....sab kisano ko choos rahe hai.....2 saal main tod paat jyaga iss modi ka bhi..dekho kimme kar do tai..

baaki court ne pooch hai government se ki swaminatahn report kab laago karoge....15 din main jawaab dene ke liye kaha hai....sharmindgi ki baat hai court ko yaad dilana pad raha hai government ko
 
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yeh sarkaar pakka kisaabn virodhi hai..yeh baat confirm hoti jaa rahi hai..............yeh padho...

http://money.bhaskar.com/news/NR-PA...et-to-rein-in-fiscal-deficit-4853913-NOR.html


नई दिल्*ली। सरकारी खजाने को घाटे के बोझ से बचाने के लिए केंद्र सरकार कई मंत्रालय के बजट में कटौती करने जा रही है। स्*वास्*थ्*य मंत्रालय के बजट में करीब 20 फीसदी कटौती के बाद मोदी सरकार ने कृषि मंत्रालय के बजट पर भी कैंची चला दी है। वित्*त मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डिपार्टमेंट ऑफ एक्*सपेंडिचर (व्*यय विभाग) के विचार विमर्श के बाद वित्*त वर्ष 2014-15 के लिए कृषि मंत्रालय के योजनागत व्*यय में करीब 30 फीसदी कटौती करने का फैसला किया है।

कृषि मंत्रालय के बजट में कटौती का सीधा असर कृषि से जुड़े फ्लैगशिप कार्यक्रम जैसे राष्*ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्*ट्रीय बागवानी मिशन, राष्*ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और फसल बीमा योजना पर पड़ेगा। वित्*त मंत्री अरुण जेटली ने गत जुलाई में मोदी सरकार का पहला बजट पेश करते हुए खेती और किसानों से जुड़ी कई बड़े ऐलान किए थे। इनमें हरेक किसान को मृदा उर्वरता कार्ड, दो नए कृषि विश्*व*विद्यालयों की स्*थापना, एग्री टेक इंफ्रास्*ट्रक्*चर फंड, कीमतों के उतार-चढ़ाव पर अंकुश लगाने के लिए मूल्*य स्*ि*थरता कोष और किसान टीवी चैनल शुरू करने की घोषणाएं प्रमुख हैं।

कृषि बजट में कटौती का असर न सिर्फ मंत्रालय के कई साल से चली आ रही योजनाओं पर पड़ेगा बल्कि नई घोषणाओं के अमल पर भी इसका असर पड़ सकता है। इस साल ग्लोबल मार्केट में फसलों के दाम गिरने और अधिकांश फसलों के न्*यूनतम समर्थन मूल्*य में मामूले बढ़ोतरी के चलते किसानों की हालत पहले ही खराब है। एेसे में केंद्र सरकार के बजट में कटौती का सीधा असर खेती और किसानों के कल्*याण के लिए चलाई जा रही केंद्र की योजनाओं पर पड़ना तय है।

राजकोषीय घाटे को काबू में रखने की कवायद

कच्*चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और पेट्रोलियम आयात का बोझ काफी हद तक हल्*का होने के बावजूद मोदी सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.1 फीसदी के भीतर रखना चुनौती बना हुआ है। यूपीए सरकार ने भी अपने कार्यकाल के आखिरी साल यानी वर्ष 2013-14 में घाटे पर अंकुश लगाने के लिए कृषि बजट में करीब 10 फीसदी की कटौती की थी। अब मोदी सरकार भी उसी राह पर जाती दिख रही है। वित्*त वर्ष 2014-15 के लिए केंद्र सरकार ने कृषि एवं सहकारिता विभाग के लिए 22309 करोड़ रुपये का योजनागत व्*यय तय किया था, जिसे अब 16 हजार करोड़ रुपये के भीतर सीमित रखने की तैयारी है।

किसानों की हालत चिंताजनक

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की ताजा सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल 9.02 करोड़ किसान परिवारों में से 8.65 करोड़ परिवार ऐसे है, जिनकी खेती की आय महीने भर का घर का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिस कारण देश के 45% किसान मनेरगा में मजदूरी करने को विवश हैं। देश में किसान परिवारों की खेती से मासिक औसत आय सिर्फ 3081 रूपये है। यही वजह है कि खेती में लगे देश के करीब 50 फीसदी परिवार परिवार कर्ज के जाल में फंसे हैं।
 
According to TV news it has come to known that Central Government in a meeting of the Central cabinet, it has been decided to promulgate an ordinance on land acquisition for governmental purpose, infrastructure development, trade corridor laying and defense use etc, where no need of following earlier set procedure including seeking prior approval of the stake holders/farmers would apply. Other drastic changes have also been made about which the full details will be known when the proposed ordinance is promulgated.
 
yeh sarkaar pakka kisaabn virodhi hai..yeh baat confirm hoti jaa rahi hai..............yeh padho...

http://money.bhaskar.com/news/NR-PA...et-to-rein-in-fiscal-deficit-4853913-NOR.html


नई दिल्*ली। सरकारी खजाने को घाटे के बोझ से बचाने के लिए केंद्र सरकार कई मंत्रालय के बजट में कटौती करने जा रही है। स्*वास्*थ्*य मंत्रालय के बजट में करीब 20 फीसदी कटौती के बाद मोदी सरकार ने कृषि मंत्रालय के बजट पर भी कैंची चला दी है। वित्*त मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डिपार्टमेंट ऑफ एक्*सपेंडिचर (व्*यय विभाग) के विचार विमर्श के बाद वित्*त वर्ष 2014-15 के लिए कृषि मंत्रालय के योजनागत व्*यय में करीब 30 फीसदी कटौती करने का फैसला किया है।

कृषि मंत्रालय के बजट में कटौती का सीधा असर कृषि से जुड़े फ्लैगशिप कार्यक्रम जैसे राष्*ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्*ट्रीय बागवानी मिशन, राष्*ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और फसल बीमा योजना पर पड़ेगा। वित्*त मंत्री अरुण जेटली ने गत जुलाई में मोदी सरकार का पहला बजट पेश करते हुए खेती और किसानों से जुड़ी कई बड़े ऐलान किए थे। इनमें हरेक किसान को मृदा उर्वरता कार्ड, दो नए कृषि विश्*व*विद्यालयों की स्*थापना, एग्री टेक इंफ्रास्*ट्रक्*चर फंड, कीमतों के उतार-चढ़ाव पर अंकुश लगाने के लिए मूल्*य स्*ि*थरता कोष और किसान टीवी चैनल शुरू करने की घोषणाएं प्रमुख हैं।

कृषि बजट में कटौती का असर न सिर्फ मंत्रालय के कई साल से चली आ रही योजनाओं पर पड़ेगा बल्कि नई घोषणाओं के अमल पर भी इसका असर पड़ सकता है। इस साल ग्लोबल मार्केट में फसलों के दाम गिरने और अधिकांश फसलों के न्*यूनतम समर्थन मूल्*य में मामूले बढ़ोतरी के चलते किसानों की हालत पहले ही खराब है। एेसे में केंद्र सरकार के बजट में कटौती का सीधा असर खेती और किसानों के कल्*याण के लिए चलाई जा रही केंद्र की योजनाओं पर पड़ना तय है।

राजकोषीय घाटे को काबू में रखने की कवायद

कच्*चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और पेट्रोलियम आयात का बोझ काफी हद तक हल्*का होने के बावजूद मोदी सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.1 फीसदी के भीतर रखना चुनौती बना हुआ है। यूपीए सरकार ने भी अपने कार्यकाल के आखिरी साल यानी वर्ष 2013-14 में घाटे पर अंकुश लगाने के लिए कृषि बजट में करीब 10 फीसदी की कटौती की थी। अब मोदी सरकार भी उसी राह पर जाती दिख रही है। वित्*त वर्ष 2014-15 के लिए केंद्र सरकार ने कृषि एवं सहकारिता विभाग के लिए 22309 करोड़ रुपये का योजनागत व्*यय तय किया था, जिसे अब 16 हजार करोड़ रुपये के भीतर सीमित रखने की तैयारी है।

किसानों की हालत चिंताजनक

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की ताजा सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल 9.02 करोड़ किसान परिवारों में से 8.65 करोड़ परिवार ऐसे है, जिनकी खेती की आय महीने भर का घर का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिस कारण देश के 45% किसान मनेरगा में मजदूरी करने को विवश हैं। देश में किसान परिवारों की खेती से मासिक औसत आय सिर्फ 3081 रूपये है। यही वजह है कि खेती में लगे देश के करीब 50 फीसदी परिवार परिवार कर्ज के जाल में फंसे हैं।

Satta se pahle- Sabka Saath, Sabka Vikas..

Satta ke Baad- Sabki jeb me hamara haath, sirf Bahman-Baniya ka Vikas.
 
Such statements are proving the obvious. I am not sure how development is inconclusive without farmers and farming sector. How the BJPian friends here would comment on it.. Its a shame.


http://www.deccanchronicle.com/1412...t-farmers-die-says-bjp-mp-akola-sanjay-dhotre

Mumbai: BJP MP from Akola Sanjay Dhotre kicked up a controversy on Sunday when, addressing a conference, he said “…let the farmers die.”

The BJP MP, however, defended his comments and said the statement from his speech at an event was shown by television channels out of context.

The controversial remark came at a time when 12 farmers from Vidarbha have committed suicide in 72 hours.

Speaking at an agriculture exhibition and conference of farmers in Akola on Sunday morning where revenue minister Eknath Khadse was present Mr Dhotre said, “The farmers are in trouble due to our wrong policies. Sometimes I say angrily say, ‘Let the farmers die, do not pay attention. Those who can afford farming will do it, others will not do it.’”

The comment immediately sparked outrage.

Criticising Mr Dhotre, Congress spokesperson Sachin Sawant said it showed the ruling alliance’s “perverted mentality”.

“If the BJP leadership is heading in this direction then we condemn it. The comment by Mr Dhotre shows their perverted mentality. It is sad that the comment was made on a public forum and in presence of senior leaders (sic),” he said.
 
" हाथ दराती, कंधे कस्सी , सर पे जबर भरोटा सै ,
सारी उम्र कमाने वाले फेर भी तेरे टोटा सै "

हमारे खेत भी सोना बरसाते हैं , पर उस सोने को लूटने वाले ज्यादा हैं | एक कमा रहा हैं दूसरा उड़ा रहा हैं , यह कैसा न्याय ? यह कैसा धर्म ? बावला किसान धर्म व धर्म के ठेकेदारों के लिए लड़-मरने को तैयार रहता हैं पर क्या कभी धर्म व धर्म के ठेकेदारों ने किसान की सुध ली ? धर्म को खतरा बता ठेकेदार इस बेचारे को बहकाते हैं | इसे क्या पता कि खतरा धर्म को नहीं तेरे तन को हैं ! धर्म तो बहाना हैं , तेरी कष्ट कमाई असल इनका निशाना हैं !
' जय योद्धेय '
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इसते तो इसका बाबू भला !!
फत्तू गली मे खड़ा होके पेशाब करा करता ना न्यू देखता के लुगाई पताई आवे सै , उसकी इस आदत त सब परेशान , सब उसने गाल बकया करते | फत्तू का जब मरण का टेम आया तो अपने छोरे रलदु न बूला के बोल्या के बेटा मैंने सारी उम्र लोगा की गाली ली सै , मेरे जाये पीछे तू कोई ईसा काम कर दिये कि मैं भला कहवा जाऊ | फत्तू के मरने के बाद रलदु ने सोची के ईसा के काम करू के बाबू भला कहला जा , रलदु ने आखिर एक ऐ तरकीब सूझी , वो अपने बाबू त दो कदम आगे लिकड़ा , उसने गाल मे खड़ा होके चौगारदे घूम के पेशाब करना शुरू कर दिया | अब लोग रलदु त और गणे परेशान ..... बोले इसते तो इसका बाबू ऐ भला था !

याहे बात इस भाजपा पर लागू हो सै | कांग्रेस से लोग भारी परेशान थे जिस कारण लोगो ने भाजपा को बहुमत दिया | कांग्रेस जिससे सब लोग परेशान थे उसने जाते जाते किसान हित मे भूमि अधिग्रहण बिल पास कर दिया जिसका समर्थन भाजपा ने भी किया था | अब भाजपा ने सत्ता मे आते ही उस बिल को पलट दिया जिसका इनहोने खुद समर्थन किया था | भाजपा के ये कर्म देख के तो ऐसा लगता हैं कि ये लोग अब कॉंग्रेस को भला कहलाना चाहते हैं !
 
मोदी सरकार का नया फैसला ' अब किसानों को भी रखना होगा पैन कार्ड '
यह फैसला काले धन पर नकेल डालेगा ....

मोदी जी अगर किसानों के पास काला धन होता तो ये बेचारे किसान पीले गुलाबी कार्ड न बनवाते ! काला धन कहाँ हैं किसके पास हैं वह पता आपको भी हैं , पर वहीं बात हैं कि कानून की मूर्ति की आँखों पर तो पट्टी बंधी हैं, देखे कैसे ?
अब इस पैन कार्ड को लेकर आधे बेचारे किसान तो यहीं सोचेंगे की यह भी पीले गुलाबी कार्ड की तरह गरीब की मदद के लिए कोई नया कार्ड आया हैं !
रलदु जीमने चला गया ... काफी देर तक पत्तल लिए बैठा रहा पर कोई ना आया ... आखिर में जीमाने वालों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए रलदु को एक तरकीब सूझी , उसने अपनी पत्तल के नीचे रेत का कुढ़ा लगा लिया ! जो वहाँ जीमा रहे थे उनमे से एक ने देखा और रलदु से बोला पत्तल के नीचे क्या हैं ? रलदु बोला तेरा ध्यान पत्तल के नीचे बहुत गया ऊपर ना गया ? पत्तल के ऊपर क्या हैं ?
मोदी जी आपके ये पैन कार्ड तो ठीक हैं पर इन किसानों की पत्तल के ऊपर नीचे कुछ नहीं हैं , बिलकुल साफ हैं , इनकी पत्तल का जुगाड़ कर दो !
' जय योद्धेय '
 
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