Farmers are not meant to ride on development bandwagon!!

हमारे नेता भी हमेशा शब्दों का जाल बुने रहते हैं ! जब भी किसान की कोई बात आती हैं तो ये लोग एक रटा रटाया जुमला कहते हैं ' हमारी सरकार किसानों के साथ खड़ी हैं और उन्हे किसी भी सूरत मे नुकसान नहीं होने दिया जाएगा ' | यह जुमला सुनने में इतना अच्छा लगता हैं कि भोला भला किसान सोचता हैं कि ले इस बार तेरा कोई सच्चा हमदर्द आया हैं | किसान सिर्फ इसी जुमले पर जज़बाती हो जाते हैं और इन नेताओं के आगे के शब्दों पर गौर नहीं करते ! आजकल यहीं जुमला एनडीए के मंत्रियों ने भी दोहराना शुरू कर रखा हैं पर इनके कई बयान व हरकते इनकी इस हमदर्दी पर शक जाहीर करते हैं ! जैसे कि ...पिछले महीने ही केन्द्रीय मंत्री रामबिलास पासवान ने कहा हैं कि इस बार एफ़सीआई पंजाब व हरियाणा में गेहूं की खरीद कम करेगा ! खैर मंत्री जी की ऊपर वाले ने सुन ली , ऊपर वाले ने वहीं काम कर दिया के न रहेगा बांस न रहेगी बांसुरी ! इससे मंत्री जी की समस्या का तो समाधान हो गया पर किसान की समस्या तो और ज्यादा बढ़ गई ! इस बार बरसात के वजह से किसानों का काफी नुकसान हुआ हैं , कुछ तो किसान को ऊपर वाले ने रुलाया और ऊपर से अब किसान को सरकार की पॉलिसियाँ रुला रही हैं ! 0 से 25 फीसदी तक खराब होने वाली फसलों के लिए अभी तक मुआवजे का प्रावधान नहीं बन सका हैं | इस कारण हरियाणा प्रदेश के 13 लाख किसानों को इस मुआवजे से महरूम रहना पड़ सकता हैं | राज्य सरकार ने ऐसे किसानों के लिए 100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस दिये जाने की मांग की हैं | केंद्र सरकार ने इस राशि का दिये जाने पर केवल विचार किए जाने का आश्वासन दिया हैं | मतलब किसानों के मुद्दे राज्य और केंद्र सरकार के बीच सिर्फ फूटबाल बन कर रह गए हैं !
ऐसा ही हमदर्दी का स्वामीनाथन रिपोर्ट नामक बाण भाजपा ने चुनाव से पहले हरियाणा में चलाया था , जिसके दम पर इन्हे सत्ता भी हासिल हुई ! परंतु सत्ता में आते ही इनके सुर बदलने शुरू हो गए | राज्य के कृषि मंत्री जी कभी संसाधनों का रोना रोते हैं तो कभी कहते हैं कि हमने इसके लिए केंद्र सरकार को लिखा हैं | अब इस पर केंद्र सरकार के मंत्री जी कहते हैं कि स्वामीनाथन रिपोर्ट हूबहू लागू नहीं कि जा सकती ! मंत्री जी ने कहाँ हैं कि यह रिपोर्ट अच्छी हो सकती हैं , लेकिन किसानों के लिए इसे रामबाण नहीं माना जा सकता | मंत्री जी फिर आप ही सुझा दो कि किसान के लिए रामबाण क्या हैं ?
अभी हरियाणा में भाजपा सरकार ने किसान हित का जो ताज़ा ताज़ा काम नहर विभाग को दिया वो नोटिस हैं जिसमे उन किसानों को जिनके नहर के साथ 300 फूट के दायरे में सिचाई के लिए ट्यूबवैल लगा रखे हैं , उखाड़ने को कहा गया हैं ! सरकार के इस फरमान से अब मर वे बेचारे गए जिन लोगों ने लाखों रुपए खर्च कर दूसरे खेतों मे सिचाई के लिए 3-4 किलोमीटर तक पाइप लाइन बिछा रखी हैं ! ऐसे किसानों का क्या ?
पूत के पाव पालने में दिख जाते हैं , ' विचार करेंगे वाला वाक्य ' इस कहावत को चरितार्थ करता दिखता हैं कि आप लोगों कि मंशा साफ नहीं हैं ! इन हरकतों को तो देखते हुए नहीं लगता के आप लोग किसान के साथ खड़े हैं ! कहने को तो राजनीति समाज सेवा का जरिया हैं पर अब नेताओं ने राजनीति सिर्फ तिजारत का जरिया बना दी हैं ! नेता बदलते रहते हैं पर जुमले और किसान की समस्या वही की वही रहती हैं ! नेता जी इन जुमले चमोलो से किसान की समस्या का समाधान नहीं होगा !
' जय योद्धेय '
 
60 वर्ष से बड़ी उम्र के किसानों के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने बहुत ही अच्छी घोषणा की हैं कि जो किसान 60 वर्ष से बड़ी उम्र के हैं उन्हे 5000 रुपए प्रतिमाह पेंशन मिलेगी ! यह घोषणा सुन कर चंद लोगों को तो जरूर राहत मिली होगी परंतु आज के समय में संयुक्त परिवारों की संख्या घटती जा रही हैं | उदाहरण के लिए हम दो भाई हैं अगर हम दोनों न्यारे हो जाते हैं और बुजुर्ग माता-पिता छोटे भाई की तरफ चले जाते हैं तो उस परिवार को तो इस पेंशन से कुछ सहारा मिल जाएगा पर मुझ जैसे का क्या ? मेरी उम्र 41 वर्ष हैं , इस हिसाब से मुझे इन पाँच हजार के लिए 19 साल इंतजार करना पड़ेगा ? ये तो बिलकुल वैसी ही बात हो गई के ' कब मरे सासु , कब आए आंसू ' ! यह तो किसान की मूल समस्या के समाधान से भागने वाली बात हो गई !
2004 की बात हैं हरियाणा में इनेलो की सरकार थी , उस दौरान एपीआरओ के पद के लिए नौकरी निकली थी , सिर्फ तीन ही पोस्ट थी | मेरे गाँव के एक भाई ने भी आवेदन कर दिया और एक दिन वो भाई सिफ़ारिश के लिए तड़के तड़के हमें दिल्ली नेता जी की कोठी पर ले गया | हम 7 बजे कोठी पर पहुँच गए , नेता जी बिलकुल फुर्सत में थे , उस भाई ने अपनी अर्जी नेता जी को दी , नेता जी ने देखते ही बड़ी ईमानदारी से कहा कि भाई तड़के तड़के झूठ नहीं बोलूँगा यह काम नहीं हो सकता किसी और पद के लिए कोई आवेदन हो तो बताओ ? अब इतना सुनते ही उस भाई को बेचैनी हो गई , क्योंकि एक तो बेरोजगार ऊपर से गाड़ी किराए पर करके हम जैसों को दिल्ली ले गया वो चाय पानी का खर्चा अलग , वो भाई नेता जी से बोला भाईसाहब देखो लो कुछ होता हो तो , मेरा तो यह लास्ट चान्स हैं ! नेता जी ने उसकी तरफ देख कर पूछा कितनी उम्र हो गई तेरी ? भाई बोला के 36 साल ! नेता जी बोले मूर्ख तुझे पता नहीं हमने हरियाणा में 45 साल उम्र कर दी हैं ! भाई बोला तो क्या मैं 9 साल तक आवेदन ही करता रहूँ ? प्रधानमंत्री जी की यह घोषणा भी बिलकुल ऐसी ही हैं !
हरियाणा में चुनाव से पहले प्रधानमंत्री जी की पार्टी ने घोषणा की थी कि हमारी सरकार आई तो प्रदेश में बुढ़ापा पेंशन 2000 रुपए प्रतिमाह कर देंगे ! सरकार भी आ गई पर अपनी खुद कि कहीं बात से ही मुकर गए बोले कि हर साल 200 रुपए बढ़ाएँगे पाँच साल में 2000 हो जाएगी ! लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री जी खुद प्रत्येक व्यक्ति के खाते में 15 लाख की बात करते थे और चुनाव के बाद अब उनके सिपाहसालार कहते हैं कि वो तो चुनावी जुमला था | इन नेताओं कि तो वहीं बात हो गई के ' दांतले खसम का हँसते का पता लगे ना रोते का ' ! कब किस बात को ये लोग चुनावी जुमला बता दे पता ही नहीं ? पहले लोगों को हसीन सुहाने सपने दिखाते हैं और फिर काम निकलने पर चुनावी जुमला बता रुलाते हैं ! इन सभी दलों के नेताओं पर हरयानवी कहावत फिट बैठती हैं के ' ताई आज तेरे छोटे बेटे का न्योता सै , ताई बोली मेरे तो सारे एक से सै " !
' सोते से जगाया क्यों मुझको ,
क्यों स्वपन दिखाए मुझको ,
मुझे फिर से स्वपन दिखाओं ,
मुझे वो सी नींद सुलाओ "
' जय योद्धेय '
 
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आज यह नजारा देख किसानों के मसीहा चौधरी छोटूराम की रूह भी रो रही होगी !
कहते हैं , किसान का एक-एक दाना खरीदेंगे ! जब एक-एक दाना ही खरीदना हैं तो फिर खरीद के यह नए नए नियम किस लिए ?

" तू सारी उम्र कमाया , तेरे हाथ कुछ ना आया ,
तूने बासी -खुसि खाई , खा गए लोग तेरी दूध मलाई ,
किसका फिरे तू बहकाया , किसने तेरी अक्ल मारी हैं ,
खा गए लोग तेरी कष्ट कमाई , बहुत हुई अब समाई "

" बताऊँ क्या तुम्हें , क्या चीज यह सरमायदारी हैं ?
यह अपने हाथ में तहजीब का फ़ानूस लेती हैं ,
मगर , मजदूर के तन से लहू तक चूस लेती हैं "

' जय योद्धेय
 
दुनियाँ में कोई तन का चोर , कोई मन का चोर तो कोई धन का चोर , किसान एक ऐसा जो पानी का चोर , बस इसी फिराक में रहता हैं कि कब उसे नहर में से पानी चोरी करने का मौका लगे | जब उसके खुद का नहरी पानी का वार आता है तो उसमे भी अपना समय पूरा होने के बाद दूसरे के समय में से पानी चुराने की फिराक में रहता है , कभी कभी तो यह चोरी खूनी रंजिश में भी बदल जाती है | जबकि वह बेचारा यह चोरी सबका पेट भरने के लिए करता हैं पर सरकारी रिकॉर्ड में वह चोर कहलाता हैं , पकड़े जाने पर मोटे तवान की पर्ची हाथ में थमा दी जाती है !
' जय योद्धेय
 
आप मीडिया से कभी नहीं जीत सकते : अमिताभ बच्चन


जनाब , इस षड्यंत्रकारी मीडिया ने तो आपको भगवान तक का दर्जा दे रखा हैं और कैसी जीत चाहिए आपको ?
एक उस अन्नदाता कि भी हद छाती देखिये जो वाक्य में भगवान के बराबर हैं पर जब उसके बारे में दो शब्द बोलने की बारी आती हैं तो षड्यंत्रकारी मीडिया का हलक सूख जाता हैं , और वो हैं कि कभी कोई शिकवा शिकायत ही नहीं करता ! आप नेता -अभिनेता और मीडिया के इस ट्वेंटी-ट्वेंटी खेल से तो वो बेचारा नहीं जीत पाया हैं आजतक !
' जय योद्धेय '
 
The issue is not only of Minimum support price which the Govt has in its hands but also of market price of agriculture products. When it is harvesting season the agriculture produce mainly wheat, rice, bajra, jawar, cotton etc. are available at Minimum support price but after a few months the market price of these products sky rocket. So the agriculturist does not get even the investment and labour used in the production and the consumer is robbed by sky rocketing price of these items. If Govt has control on support price why it does not care of the market price? The Govt must protect the interests of farmers and one way is that it gives incentive over and above the support price to at least bring the procurement price equal to farmer's investment and labour cost. This way the suicides by farmers can be avoided and their condition can be improved. There is also a demand to declare agriculture as an industry which should be tried by the Govt.
 
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