भाई यो नाज़ खामखाँ मै सड़न लाग रह्या, जाण द्यो किसे के पेट मै i पाछे सी एक थ्रेड चाल्या था, जिसमे काफी लोग न्यू कह रहे थे अक, इसतैं आछा तो गरीबां नै बाँट देती सरकार i ईब थारा कहणा मान के सरकार नाज़ बाँटण लागी तो भी तम्ने एतराज़ i किम्मे करण द्योगे क नहीं?
रोटी की भूख आर पाणी की प्यास तो माणस की मूलभूत (बेसिक) जरूरत हैं जिनकी पूर्ति के साधन सरकार के द्वारा जुटाना समाज की जिम्मेवारी है i जिनके पास रोजगार नहीं है और निकट भविष्य में मिलने की उम्मीद भी नहीं है, या जिनकी मजदूरी इतनी कम है कि वे मंडी के भाव अनाज खरीदने की क्षमता नहीं रखते तो उनके लिए खाद्द सुरक्षा की गारंटी किसी भी सरकार का दायित्व है i इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि कोई भी सरकार योजनायें वोट को ध्यान में रखते हुए ही बनाती है और यही कारण है कि कुछ प्रमुख विपक्षी पार्टियों को भी आगामी चुनाव में गरीबों के वोटों को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर सरकार का साथ देना पड़ा i
लेकिन, इस सबके बावजूद, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हमारे देश में अभी तक की सभी सरकारें गरीबी उन्मूलन के लिए कारगर कदम उठाने में लगभग असफल रही हैं i और यह भी सही है कि यह खाद्य सुरक्षा बिल समस्या का कोई दूरगामी हल नहीं हो सकता i जब तक रोज़गार के साधन जुटाने की दिशा में कारगर कदम नहीं उठाये जायेंगे, गरीबी हटने वाली नहीं i यह सस्ता अनाज और सब्सिडी स्थाई और दूरगामी हल नहीं है i बीमारी का सिर्फ प्रथम उपचार है, पक्का इलाज़ नहीं i
Agreed bhaisaab...
par mudda ye bhi hai ki.. anaaz X sad raha hai aur sarkaar baantna chaah rahi hai N times of X. (agar us X ko hi baant de to koi dikkat nahi).
par ye N times of X ko baantne ke chakkar me desh ki lutiya dubone pe utarru hai sarkaar.
Nithallo ko free fund me anaaz dene se, achcha unse kuch kaam hi karwa le.
Kaam ke badle anaaz scheme hi laa de..
Gaon me kaam bhatere pade hain jo karwaye ja sakte hain, manhours ki koi kami hi nahi..
shauchalya banwanana, gaal pakki karwana, sakool ki marammat karwana, naya banwana, samudayik swasthya kendra banwana, sadke pakki banwana, solar street lights lagwana, johad khudwana.
jo log statistics ke hisab se bhookhe marr rahe hain, karenge kaam.. kyun na karenge...unka foffa bhi karega.... but agar sarkar NREGA ke naam pe free me paise luta rahi hai (bina kaam ke hoye, sirf kaagazo me kaam ke hoye).... uski jageah kaam ke badle anaaz me kuch kaam to honge...
+ keep it voluntary, ki jo bhookha mar raha hai, wo saamne aaye (sabko is scheme ke preview me lane ki koi jarurat nahi)
Gramin Infrastructure bhi sudhrega, aur gareeb bhoookhe ke pet me anaaz bhi jayega... vote bank bhi banega, aur virodhi parti ke bhi muh band.... aur anaaz bhi nahi sadega..