ज़िन्दगी से यही ग़िला है मुझे - Gulam Ali
ज़िन्दगी से यही ग़िला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे।
हमसफ़र चाहिए हुजूम नहीं
मुसाफ़िर ही काफ़िला है मुझे।
दिल धड़कता नहीं सुलगता है
वो जो ख़्वाहिश थी आबला है मुझे
लबकुशा हूँ तो इस यक़ीन के साथ
क़त्ल होने का हौसला है मुझे।
कौन जाने कि चाहतों में ‘फ़राज़’
क्या गँवाया है क्या मिला है मुझे।
ज़िन्दगी से यही ग़िला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे।
हमसफ़र चाहिए हुजूम नहीं
मुसाफ़िर ही काफ़िला है मुझे।
दिल धड़कता नहीं सुलगता है
वो जो ख़्वाहिश थी आबला है मुझे
लबकुशा हूँ तो इस यक़ीन के साथ
क़त्ल होने का हौसला है मुझे।
कौन जाने कि चाहतों में ‘फ़राज़’
क्या गँवाया है क्या मिला है मुझे।