Gazals "The Finest Ever"

मिट्टी का जिस्म लेके मैं पानी के घर में हूँ
मंज़िल है मेरी मौत, मैं हर पल सफ़र में हूँ

होना है मेरा क़त्ल ये मालूम है मुझे
लेकिन ख़बर नहीं कि मैं किसकी नज़र में हूँ

पीकर भी ज़हरे-ज़िन्दगी ज़िन्दा हूँ किस तरह
जादू ये कौन-सा है, मैं किसके असर में हूँ

अब मेरा अपने दोस्त से रिश्ता अजीब है
हर पल वो मेरे डर में है, मैं उसके डर में हूँ

मुझसे न पूछिए मेरे साहिल की दूरियाँ
मैं तो न जाने कब से भँवर-दर-भँवर में हूँ
 
एक चेहरा साथ साथ रहा



एक चेहरा साथ साथ रहा जो मिला नहीं
किसको तलाश करते रहे कुछ पता नहीं


शिद्दत की धूप तेज़ हवाओं के बावजूद
मैं शाख़ से गिरा हूँ नज़र से गिरा नहीं


आख़िर ग़ज़ल का ताजमहल भी है मकबरा
हम ज़िन्दगी थे हमको किसी ने जिया नहीं


जिसकी मुखालफ़त हुई मशहूर हो गया
इन पत्थरों से कोई परिंदा गिरा नहीं


तारीकियों में और चमकती है दिल की धूप
सूरज तमाम रात यहां डूबता नहीं


किसने जलाई बस्तियाँ बाज़ार क्यों लुटे
मैं चाँद पर गया था मुझे कुछ पता नहीं



बशीर बद्र


 
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है


अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है


बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है


ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है


ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा
हर गाम पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है


आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है

---- निदा फ़ाज़ली
 
bahoot khoob Anjali ji

bahut hi umda rachnaayen hain...Anjli ji tahe dil se dhanyavad.... aapne to lagta hai duniya bhar ke gulistaan main se chun chun kar sabhi mohak phool yahan is mahephil main saja diya hain........

दुश्मन को भी सीने से लगाना नहीं भूले
हम अपने बुज़ुर्गों का ज़माना नहीं भूले

तुम आँखों की बरसात बचाये हुये रखना
कुछ लोग़ अभी आग़ लगाना नहीं भूले

ये बात अलग हाथ कलम हो गये अपने
हम आप की तस्वीर बनाना नहीं भूले

इक ऊम्र हुई मैं तो हँसी भूल चुका हूँ
तुम अब भी मेरे दिल को दुखाना नहीं भूले



ग़ज़ल : सागर आज़मी
 
bahut khoob amrita ji....

Ab ke saawan mein shararat ye mere saath hui,
Mera ghar chhod ke kul shahar mein barsaat hui.


Aap mat puchiye kya hum pe safar mein gujri,
The luteron ka jahan gaon, wahin raat hui.
 
bahut hi umda rachnaayen hain...anjli ji tahe dil se dhanyavad.... Aapne to lagta hai duniya bhar ke gulistaan main se chun chun kar sabhi mohak phool yahan is mahephil main saja diya hain........


शुक्रिया हौंसला अफजाई के लिए
 
अपनी रुसवाई तेरे नाम का चर्चा देखूँ

अपनी रुसवाई तेरे नाम का चर्चा देखूँ
एक ज़रा शेर कहूँ और मैं क्या क्या देखूँ


नींद आ जाये तो क्या महफ़िलें बरपा देखूँ
आँख खुल जाये तो तन्हाई की सहर देखूँ


शाम भी हो गई धुंधला गई आँखें भी मेरी
भूलनेवाले मैं कब तक तेरा रस्ता देखूँ


सब ज़िदें उस की मैं पूरी करूँ हर बात सुनूँ
एक बच्चे की तरह से उसे हँसता देखूँ


मुझ पे छा जाये वो बरसात की ख़ुश्बू की तरह
अंग-अंग अपना उसी रुत में महकता देखूँ


तू मेरी तरह से यक्ता है मगर मेरे हबीब
जी में आता है कोई और भी तुझ सा देखूँ


मैं ने जिस लम्हे को पूजा है उसे बस एक बार
ख़्वाब बन कर तेरी आँखों में उतरता देखूँ


तू मेरा कुछ नहीं लगता है मगर जान-ए-हयात
जाने क्यों तेरे लिये दिल को धड़कता देखूँ


परवीन शाकिर


 
Nice one

Hanste hue, aankhon main kyun aa jaate hain ye aansoo
yun khushi ko adhoora sa bana jaate hain ye aansoo

Dard itna hai saha, khaali ho gaya samandar ashkon ka
Jaane kahan se aankhon main bhar jaate hain ye aansoo

Khush hoon main, koi shikwa zamane se na taqdeer se
Meri iss baat ko jhoota kyun bana jaate hain ye aansoo

Shayad khabar hai in ko bhi kis qadar tanha hoon main
Tanhaayi main mera saath nibha jaate hain ye aansoo !!
 
A Gazal sung by Chitra Singh is also good. Following are the wordings:

"Yeh kya jaane main jaana hai, jate ho kahan hokar? Main jab janun mere dil se chale jao juda hokar"
 
a gazal sung by chitra singh is also good. Following are the wordings:

"yeh kya jaane main jaana hai, jate ho kahan hokar? Main jab janun mere dil se chale jao juda hokar"
सुश्री चन्द्र प्रभा सिंह जी
आपके लिए ...
..


ये क्या जाने में जाना है , जाते हो खफा होकर
मैं तब जानू मेरे दिल से चले जाओ जुदा होकर

क़यामत तक उडेगी दिल से उठकर ख़ाक आँखों तक
इसी रास्ते गया है हसरतों का काफिला होकर

तुम्हीं अब दर्द -ऐ -दिल के नाम से घबराए जाते हो
तुम्हीं तो दिल में शायद आये थे दर्द -ऐ -आशियाँ होकर

यूं ही हमदम घडी भर को मिला करते तो बहतर था
के दोनों वक़्त जैसे रोज़ मिलते हैं जुदा होकर

सीमाब अकबराबादी
 
सुश्री चन्द्र प्रभा सिंह जी
आपके लिए ...
..


ये क्या जाने में जाना है , जाते हो खफा होकर
मैं तब जानू मेरे दिल से चले जाओ जुदा होकर

क़यामत तक उडेगी दिल से उठकर ख़ाक आँखों तक
इसी रास्ते गया है हसरतों का काफिला होकर

तुम्हीं अब दर्द -ऐ -दिल के नाम से घबराए जाते हो
तुम्हीं तो दिल में शायद आये थे दर्द -ऐ -आशियाँ होकर

यूं ही हमदम घडी भर को मिला करते तो बहतर था
के दोनों वक़्त जैसे रोज़ मिलते हैं जुदा होकर

सीमाब अकबराबादी

Hey, thanks you so much....:) Can you please provide the lyrics of "Mere jaise bann jaoge jab ishq tumhe ho jayega" (sung by Chitra & Jagjit Singh)???
 
hey, thanks you so much....:) can you please provide the lyrics of "mere jaise bann jaoge jab ishq tumhe ho jayega" (sung by chitra & jagjit singh)???

शुक्रिया ,
आप ही के लिए



मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

हर बात गवारा कर लोगे मन्नत भी उतारा कर लोगे
ताबीज़ें भी बंधवाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

तन्हाई के झूले खूलेंगे हर बात पुरानी भूलेंगे
आईने से तुम घबराओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

जब सूरज भी खो जायेगा और चाँद कहीं सो जायेगा
तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

बेचैनी बढ़ जायेगी और याद किसी की आएगी
तुम मेरी गज़लें गाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा



सईद राही
 
उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो

उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो
खर्च करने से पहले कमाया करो

ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे
बारिशों में पतंगें उड़ाया करो

दोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर
नीम की पत्तियों को चबाया करो

शाम के बाद जब तुम सहर देख लो
कुछ फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो

अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बाँधकर
आसमानों का ज़र्फ़ आज़माया करो

चाँद सूरज कहाँ, अपनी मंज़िल कहाँ
ऐसे वैसों को मुँह मत लगाया करो


राहत इन्दौरी
 
शुक्रिया ,
आप ही के लिए



मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

हर बात गवारा कर लोगे मन्नत भी उतारा कर लोगे
ताबीज़ें भी बंधवाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

तन्हाई के झूले खूलेंगे हर बात पुरानी भूलेंगे
आईने से तुम घबराओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

जब सूरज भी खो जायेगा और चाँद कहीं सो जायेगा
तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

बेचैनी बढ़ जायेगी और याद किसी की आएगी
तुम मेरी गज़लें गाओगे जब इश्क तुम्हें हो जायेगा



सईद राही

Thank you so very much. See, now I have become greedy... :) Can you please provide the lyrics of "Gham ka khajana tera bhi hai mera bhi. yeh afsana tera bhi hai mera bhi"?
 
Thank you so very much. See, now I have become greedy... :) Can you please provide the lyrics of "Gham ka khajana tera bhi hai mera bhi. yeh afsana tera bhi hai mera bhi"?

I will try to fulfill your wish.

ग़म का खजाना तेरा भी है मेरा भी
ये नज़राना तेरा भी है मेरा भी

अपने ग़म को गीत बनाके गा लेना
राग पुराना तेरा भी है मेरा भी

तू मुझको और मैं तुझको समझाऊं क्या
दिल दीवाना तेरा भी है मेरा भी

शहरों शहरों गलियों जिस का चर्चा है
वो अफ़साना तेरा भी है मेरा भी

मैखाने की बात न कर वाइज़ मुझ से
आना जाना तेरा भी है मेरा भी



शाहिद कबीर
 
I will try to fulfill your wish.

ग़म का खजाना तेरा भी है मेरा भी
ये नज़राना तेरा भी है मेरा भी

अपने ग़म को गीत बनाके गा लेना
राग पुराना तेरा भी है मेरा भी

तू मुझको और मैं तुझको समझाऊं क्या
दिल दीवाना तेरा भी है मेरा भी

शहरों शहरों गलियों जिस का चर्चा है
वो अफ़साना तेरा भी है मेरा भी

मैखाने की बात न कर वाइज़ मुझ से
आना जाना तेरा भी है मेरा भी



शाहिद कबीर

Hats off to you. Now, hmmm......okay provide the lyrics of "Jawani ke hile haya ke bahane yeh mana ki tum mujhse parda karogi. yeh Duniya magar itni bholi nahin hai chupakar mohabat ko ruswa karogi" :)
 
जवानी के हीले हया के बहाने

hats off to you. Now, hmmm......okay provide the lyrics of "jawani ke hile haya ke bahane yeh mana ki tum mujhse parda karogi. Yeh duniya magar itni bholi nahin hai chupakar mohabat ko ruswa karogi" :)

इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह जी और चित्र सिंह ने पाकिस्तान में गया था

एल्बम : लाइव इन पाकिस्तान


जवानी के हीले हया के बहाने
ये माना के तुम मुझ से पर्दा करोगी
ये दुनिया मगर तुझ सी भोली नहीं है
छुपा के मुहब्बत को रुसवा करोगी

बड़ी कोशिशों से बड़ी ख्वाहिशों से
तमन्ना के सहमी हुई साजिशों से
मिलेगा जो मौका तो बेचैन होकर
दरीचों से तुम मुझको देखा करोगी

सताएगी जब चाँदनी की उदासी
दुखायेगी दिल जब फिजा की खामोशी
उफक की तरफ खाली नज़रें जमाकर
कभी जो न सोचा वो सोचा करोगी

कभी दिल की धड़कन महसूस होगी
कभी ठंडी साँसों की तूफ़ान उठेगी
कभी गिर के बिस्तर पे आहें भरोगी
कभी झुक के तकिये पे रोया करोगी


प्रेम वारबर्तोनी
 
Just for you......must read it

Hr sapna khushi pane se pura nai hota
Koi kisi k bina adhira nai hota
Jo chand roshan karta hai raat bhar sab ko
Hr raat wo bhi tu pora nahi hota
HA NA ???
 
जो ख़ुद कुशी के बहाने तलाश करते हैं

जो ख़ुद कुशी के बहाने तलाश करते हैं
वो नामुराद बहुत ज़िन्दगी से डरते हैं

मेरा मकान पुरानी सराय जैसा है
कई थके हुए राही यहाँ ठहरते हैं

ये बात दर्ज़ है इतिहास की किताबों में
कि बादशाहों की ख़ातिर सिपाही मरते हैं

वो टूटते हैं मगर क़हक़हा लगाते हुए
कि बुलबुले कहाँ अपनी क़ज़ा से डरते हैं

खड़ा हुआ है अँधेरे में तू दिया लेकर
तेरे वजूद का सब एहतराम करते हैं

ज्ञान प्रकाश विवेक



 
तहज़ीब यह नई है, इसको सलाम कहिए

यह रचना श्री द्विजेन्द्र 'द्विज' के ग़ज़ल संग्रह "जन- गण- मन" से ली गयी है, इसमें आज के हालत का सटीक वर्णन किया हैं श्री द्विजेन्द्र 'द्विज' जी ने ;






तहज़ीब यह नई है, इसको सलाम कहिए
‘रावण’ जो सामने हो, उसको भी ‘राम’ कहिए

जो वो दिखा रहे हैं , देखें नज़र से उनकी

रातों को दिन समझिए, सुबहों को शाम कहिए

जादूगरी में उनको , अब है कमाल हासिल

उनको ही ‘राम’ कहिए, उनको ही ‘श्याम’ कहिए

मौजूद जब नहीं वो ख़ुद को खुदा समझिए

मौजूदगी में उनकी , ख़ुद को ग़ुलाम कहिए

उनका नसीब वो था, सब फल उन्होंने खाए

अपना नसीब यह है, गुठली को आम कहिए

जिन—जिन जगहों पे कोई, लीला उन्होंने की है

उन सब जगहों को चेलो, गंगा का धाम कहिए

बेकार उलझनों से गर चाहते हो बचना

वो जो बताएँ उसको अपना मुक़ाम कहिए

इस दौरे—बेबसी में गर कामयाब हैं वो

क़ुदरत का ही करिश्मा या इंतज़ाम कहिए

दस्तूर का निभाना बंदिश है मयक़दे की

जो हैं गिलास ख़ाली उनको भी जाम कहिए

बदबू हो तेज़ फिर भी, कहिए उसे न बदबू

‘अब हो गया शायद, हमको ज़ुकाम’ कहिए

यह मुल्क का मुक़द्दर, ये आज की सियासत

मुल्लाओं में हुई है, मुर्ग़ी हराम कहिए

‘द्विज’ सद्र बज़्म के हैं, वो जो कहें सो बेहतर

बासी ग़ज़ल को उनकी ताज़ा क़लाम कहिए
 
Back
Top