Hard hitting truth about so called minorities and their stone aged religion !!

“Islam is a religion of peace”. This is what our politically correct politicians keep telling us. But what is politically correct is not necessarily correct. The truth is that Islam is not a religion of peace. It is a religion of hate, of terror and of war. A thorough study of the Quran and Hadith reveal an Islam that is not being presented honestly by the Muslim propagandists and is not known to the majority of the people of the world including Muslim themselves.

http://www.faithfreedom.org/prologue/

Can anyone correct me on the below (I mean whether the interpretation is correct or not):

Source: http://www.youtube.com/watch?v=tsiKVc028I0
According to Quran:Surah 3, verse 28:

3:28 Let not the Believers take the Unbelievers as friends - rather than the Believers. And whoever does that, then there is nothing from Allâh in any matter; unless that you only protect yourselves from them a protection. Thus Allâh cautions you of Himself; for towards Allâh is the eventual coming.

Means a Muslim shall not befriend a non Muslim. Allah says that if they will befriend non Muslim, Allah will cut them off from himself.

According to Surah 98, verse 6, it says people of the book that means Jews and Christians are shalobaraya, the most evil of all creatures.
 
एक बिन्दु के पशचात प्रतेक धर्म एक धोखा है और मतिभर्मित करने वाला है.इसी के चलते धर्म अपने अस्तितव को बचा पता है। और यही बात धर्म को विज्ञान से अलग करती है, जहां विज्ञान किसी भी बात को सीध करके मानने पर ज़ोर देता है, धर्म उसके विपरीत प्रश्न करने को हतोत्साहित करता है। ये बात प्रतेक धर्म पर लागू होती है।
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A good find, a site created by Ex-muslims - http://apostatesofislam.com/index.htm

We are ex-Muslims. Some of us were born and raised in Islam and some of us had converted to Islam at some moment in our lives. We were taught never to question the truth of Islam and to believe in Allah and his messenger with blind faith. We were told that Allah would forgive all sins but the sin of disbelief (Quran 4:48 and 4:116). But we committed the ultimate sin of thinking and questioned the belief that was imposed on us and we came to realize that far from being a religion of truth, Islam is a hoax, it is hallucination of a sick mind and nothing but lies and deceits.


 
यह धर्म है बड़ी बेकार की चीज़ जो सारे फसाद की जड़ है i यह एक फ़ालतू की चीज़ है जिसकी हमें बिलकुल जरूरत नहीं i धर्म किसी भी समाज में विद्दमान अज्ञानता और अन्धविश्वास का प्रयाय होता है i जब यह ढकोसला कट्टरपंथियों के हाथों की कठपुतली बन जाता है तो शातिर राजाओं और आधुनिक सामंतों के लिए राजनैतिक सत्ता को शाश्वत बनाने का एक सशक्त साधन बन कर रह जाता है i हर वर्ग और समुदाय के कुछ अवसरवादी और शातिर लोग धर्म की दलाली शुरू कर देते हैं और उसे वोट में तब्दील करके देश के राजनैतिक आकाओं के हाथ बेच देते हैं i धर्म चाहे किसी भी रंग-रूप और समुदाय का रहा हो उसकी उपयोगिता सिर्फ समाज के संभ्रांत वर्ग के लिए ही रही है और ये मानव सभ्यता और वैज्ञानिक सोच का सबसे बड़ा दुश्मन रहा है i समाज में भाईचारे और सहिष्णुता के धागे का सत्यानाश धर्म ने ही किया है i अगर आदमी की नस्लें इस धर्म के पचड़े में नहीं पड़ती तो ना अरब-इस्रायल का झगडा होता ना हिन्दुस्तान-पकिस्तान का i ना फिलिस्तीन का मसला होता ना बोस्निया का, ना बोदो आन्दोलन होता ना कश्मीर का मसला i दुनिया के 90 प्रतिशत लोगों को शायद ही यह पता होगा कि वे किसी धरम विशेष का अनुकरण क्यों कर रहे हैं i उनके पास बस एक ही तर्क होता है कि क्योंकि उनके माँ बाप, परिवार और मोहल्ले वाले कर रहे हैं i दूसरा बड़ा कारण होता है सामाजिक सुरक्षा का i क्योंकि हमारा समाज धर्म के नाम पर लामबंद हो रहा है, इसलिए जो लोग धर्म में आस्था नहीं रखते, उनको भी मजबूरन अपने आपको इस धर्म नाम के ढकोसले से बंधे रहना पड़ता है, क्योंकि ऐसा न करने पर उनको कट्टरपंथी हिंसा का शिकार होना पड़ता है i

दुनिया में कोई दो वस्तुएं समान नहीं हो सकती, चाहे वो धर्म ही क्यों ना हो i इसलिए ज़ाहिर है कि एक धर्म और समुदाय के लोगों की उग्रता दूसरे धर्म और समुदाय की उग्रता से भिन्न होगी i धार्मिक उग्रता और कट्टरवाद का मुकाबला समाज में धर्म कि नाम पर ध्रुवीकरण से करना कोई स्थाई समाधान नहीं है i देश को सख्त कानून की ज़रुरत है i धर्म को राजनैतिक उद्देश्यों से प्रयोग करने वालों और समाज में अराजकता और धार्मिक उन्माद पैदा करने वालों के लिए कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए, अगर इस देश को टुकड़े-टुकड़े होने से बचाना है तो i हम इतिहास के पहिये को उल्टा नहीं घुमा सकते i इसलिए आपसी सामंजस्य और सद्भाव से रहना ही उचित होगा और विघटनकारी ताकतों को एक मज़बूत सरकारी तंत्र के द्वारा ही खत्म करना होगा i मज़बूत सरकार चुनना आपके हाथ में i
 
Last edited:
Second with you both here, Religion is a slow poison it captures your mind and makes your thought process paralysed. Spiritualism is the real thing as it helps you to discover your trueself and promotes meditation. That's why I appreciate Sufism, Zen and Osho .. would like to quote something from Osho here -


It was good of Friedrich Nietzsche to declare God dead — I declare that he has never been born. It is a created fiction, an invention, not a discovery. Do you understand the difference between invention and discovery? A discovery is about truth, an invention is manufactured by you. It is man-manufactured fiction. Certainly it has given consolation, but consolation is not the right thing! Consolation is opium. It keeps you unaware of the reality, and life is flowing past you so quickly — seventy years will be gone soon. Anybody who gives you a belief system is your enemy, because the belief system becomes the barrier for your eyes, you cannot see the truth. The very desire to find the truth disappears. But in the beginning it is bitter if all your belief systems are taken away from you. The fear and anxiety which you have been suppressing for millennia, which is there, very alive, will surface immediately. No God can destroy it, only the search for truth and the experience of truth — not a belief — is capable of healing all your wounds, of making you a whole being. And the whole person is the holy person to me.




एक बिन्दु के पशचात प्रतेक धर्म एक धोखा है और मतिभर्मित करने वाला है.इसी के चलते धर्म अपने अस्तितव को बचा पता है। और यही बात धर्म को विज्ञान से अलग करती है, जहां विज्ञान किसी भी बात को सीध करके मानने पर ज़ोर देता है, धर्म उसके विपरीत प्रश्न करने को हतोत्साहित करता है। ये बात प्रतेक धर्म पर लागू होती है।
यह धर्म है बड़ी बेकार की चीज़ जो सारे फसाद की जड़ है i यह एक फ़ालतू की चीज़ है जिसकी हमें बिलकुल जरूरत नहीं i धर्म किसी भी समाज में विद्दमान अज्ञानता और अन्धविश्वास का प्रयाय होता है i जब यह ढकोसला कट्टरपंथियों के हाथों की कठपुतली बन जाता है तो शातिर राजाओं और आधुनिक सामंतों के लिए राजनैतिक सत्ता को शाश्वत बनाने का एक सशक्त साधन बन कर रह जाता है i हर वर्ग और समुदाय के कुछ अवसरवादी और शातिर लोग धर्म की दलाली शुरू कर देते हैं और उसे वोट में तब्दील करके देश के राजनैतिक आकाओं के हाथ बेच देते हैं i धर्म चाहे किसी भी रंग-रूप और समुदाय का रहा हो उसकी उपयोगिता सिर्फ समाज के संभ्रांत वर्ग के लिए ही रही है और ये मानव सभ्यता और वैज्ञानिक सोच का सबसे बड़ा दुश्मन रहा है i समाज में भाईचारे और सहिष्णुता के धागे का सत्यानाश धर्म ने ही किया है i अगर आदमी की नस्लें इस धर्म के पचड़े में नहीं पड़ती तो ना अरब-इस्रायल का झगडा होता ना हिन्दुस्तान-पकिस्तान का i ना फिलिस्तीन का मसला होता ना बोस्निया का, ना बोदो आन्दोलन होता ना कश्मीर का मसला i दुनिया के 90 प्रतिशत लोगों को शायद ही यह पता होगा कि वे किसी धरम विशेष का अनुकरण क्यों कर रहे हैं i उनके पास बस एक ही तर्क होता है कि क्योंकि उनके माँ बाप, परिवार और मोहल्ले वाले कर रहे हैं i दूसरा बड़ा कारण होता है सामाजिक सुरक्षा का i क्योंकि हमारा समाज धर्म के नाम पर लामबंद हो रहा है, इसलिए जो लोग धर्म में आस्था नहीं रखते, उनको भी मजबूरन अपने आपको इस धर्म नाम के ढकोसले से बंधे रहना पड़ता है, क्योंकि ऐसा न करने पर उनको कट्टरपंथी हिंसा का शिकार होना पड़ता है i

दुनिया में कोई दो वस्तुएं समान नहीं हो सकती, चाहे वो धर्म ही क्यों ना हो i इसलिए ज़ाहिर है कि एक धर्म और समुदाय के लोगों की उग्रता दूसरे धर्म और समुदाय की उग्रता से भिन्न होगी i धार्मिक उग्रता और कट्टरवाद का मुकाबला समाज में धर्म कि नाम पर ध्रुवीकरण से करना कोई स्थाई समाधान नहीं है i देश को सख्त कानून की ज़रुरत है i धर्म को राजनैतिक उद्देश्यों से प्रयोग करने वालों और समाज में अराजकता और धार्मिक उन्माद पैदा करने वालों के लिए कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए, अगर इस देश को टुकड़े-टुकड़े होने से बचाना है तो i हम इतिहास के पहिये को उल्टा नहीं घुमा सकते i इसलिए आपसी सामंजस्य और सद्भाव से रहना ही उचित होगा और विघटनकारी ताकतों को एक मज़बूत सरकारी तंत्र के द्वारा ही खत्म करना होगा i मज़बूत सरकार चुनना आपके हाथ में i
 
वी पी जी की बात एकदम सही सै.

बताओ यहूदी, हिन्दू, इसाई, आदिवासी, के सारे बुरे होगे? माणस की किहे तै तो बणै. इन्नै सारी दुनिया मै कोतक कर राख्या सै, कितै नै निगाह ठा के देख ल्यो . और सिर्फ माणस ऐ ना, ये ना बक्शते बेजुबान पशुओं नै बी. ईद पै करोड़ों पशुओं की निर्मम ह्त्या कर दे सै. और किसै टी वी चैनल या अखबार की औकात नहीं की इसके खिलाफ बोलज्या. और दिवाळी के महीने पहलया सारा मिडिया चिल्ल्ही मारण लाग ज्यागा. दिवे मत चासियो, जनता नै छोक लगाण नै तेल ना मिलता. ये हिन्दू दिवा मै फूक सै. पटाके मत छुटा दियो. जमा पर्दूषण फ़ैल ज्यागा. न्यू ऐ होळी या और त्योहारां नै, हिन्दुओं तै तो सीख देण और नीचा दिखाण तै मिडिया और सरकार थकती कोन्या.

एक हिन्दू औरत झूठी-साची दहेज़ को रिपोर्ट कर दो..कुणबे के ज़मानत होणी बी मुश्किल..और तलाक लेवे तो 10-20 साल काटे जाओ कोर्ट-कचेडी के चक्कर ...और इनका तलाक-तलाक कही और सारी दिक्कत ख़त्म! मनै तो लागता ना, इस्या चाळा दुनिया के किसै और सभ्य देश मै बी होता हो


यह धर्म है बड़ी बेकार की चीज़ जो सारे फसाद की जड़ है i यह एक फ़ालतू की चीज़ है जिसकी हमें बिलकुल जरूरत नहीं i धर्म किसी भी समाज में विद्दमान अज्ञानता और अन्धविश्वास का प्रयाय होता है i जब यह ढकोसला कट्टरपंथियों के हाथों की कठपुतली बन जाता है तो शातिर राजाओं और आधुनिक सामंतों के लिए राजनैतिक सत्ता को शाश्वत बनाने का एक सशक्त साधन बन कर रह जाता है i हर वर्ग और समुदाय के कुछ अवसरवादी और शातिर लोग धर्म की दलाली शुरू कर देते हैं और उसे वोट में तब्दील करके देश के राजनैतिक आकाओं के हाथ बेच देते हैं i धर्म चाहे किसी भी रंग-रूप और समुदाय का रहा हो उसकी उपयोगिता सिर्फ समाज के संभ्रांत वर्ग के लिए ही रही है और ये मानव सभ्यता और वैज्ञानिक सोच का सबसे बड़ा दुश्मन रहा है i समाज में भाईचारे और सहिष्णुता के धागे का सत्यानाश धर्म ने ही किया है i अगर आदमी की नस्लें इस धर्म के पचड़े में नहीं पड़ती तो ना अरब-इस्रायल का झगडा होता ना हिन्दुस्तान-पकिस्तान का i ना फिलिस्तीन का मसला होता ना बोस्निया का, ना बोदो आन्दोलन होता ना कश्मीर का मसला i दुनिया के 90 प्रतिशत लोगों को शायद ही यह पता होगा कि वे किसी धरम विशेष का अनुकरण क्यों कर रहे हैं i उनके पास बस एक ही तर्क होता है कि क्योंकि उनके माँ बाप, परिवार और मोहल्ले वाले कर रहे हैं i दूसरा बड़ा कारण होता है सामाजिक सुरक्षा का i क्योंकि हमारा समाज धर्म के नाम पर लामबंद हो रहा है, इसलिए जो लोग धर्म में आस्था नहीं रखते, उनको भी मजबूरन अपने आपको इस धर्म नाम के ढकोसले से बंधे रहना पड़ता है, क्योंकि ऐसा न करने पर उनको कट्टरपंथी हिंसा का शिकार होना पड़ता है i

दुनिया में कोई दो वस्तुएं समान नहीं हो सकती, चाहे वो धर्म ही क्यों ना हो i इसलिए ज़ाहिर है कि एक धर्म और समुदाय के लोगों की उग्रता दूसरे धर्म और समुदाय की उग्रता से भिन्न होगी i धार्मिक उग्रता और कट्टरवाद का मुकाबला समाज में धर्म कि नाम पर ध्रुवीकरण से करना कोई स्थाई समाधान नहीं है i देश को सख्त कानून की ज़रुरत है i धर्म को राजनैतिक उद्देश्यों से प्रयोग करने वालों और समाज में अराजकता और धार्मिक उन्माद पैदा करने वालों के लिए कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए, अगर इस देश को टुकड़े-टुकड़े होने से बचाना है तो i हम इतिहास के पहिये को उल्टा नहीं घुमा सकते i इसलिए आपसी सामंजस्य और सद्भाव से रहना ही उचित होगा और विघटनकारी ताकतों को एक मज़बूत सरकारी तंत्र के द्वारा ही खत्म करना होगा i मज़बूत सरकार चुनना आपके हाथ में i
 
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What happened recently in Mumbai, this footage is enough to have a glimpse -

[video]http://www.jatland.com/forums/media.php?do=details&mid=314[/video]
 
वी पी जी की बात एकदम सही सै.

बताओ यहूदी, हिन्दू, इसाई, आदिवासी, के सारे बुरे होगे? माणस की किहे तै तो बणै. इन्नै सारी दुनिया मै कोतक कर राख्या सै, कितै नै निगाह ठा के देख ल्यो . और सिर्फ माणस ऐ ना, ये ना बक्शते बेजुबान पशुओं नै बी. ईद पै करोड़ों पशुओं की निर्मम ह्त्या कर दे सै. और किसै टी वी चैनल या अखबार की औकात नहीं की इसके खिलाफ बोलज्या. और दिवाळी के महीने पहलया सारा मिडिया चिल्ल्ही मारण लाग ज्यागा. दिवे मत चासियो, जनता नै छोक लगाण नै तेल ना मिलता. ये हिन्दू दिवा मै फूक सै. पटाके मत छुटा दियो. जमा पर्दूषण फ़ैल ज्यागा. न्यू ऐ होळी या और त्योहारां नै, हिन्दुओं तै तो सीख देण और नीचा दिखाण तै मिडिया और सरकार थकती कोन्या.

एक हिन्दू औरत झूठी-साची दहेज़ को रिपोर्ट कर दो..कुणबे के ज़मानत होणी बी मुश्किल..और तलाक लेवे तो 10-20 साल काटे जाओ कोर्ट-कचेडी के चक्कर ...और इनका तलाक-तलाक कही और सारी दिक्कत ख़त्म! मनै तो लागता ना, इस्या चाळा दुनिया के किसै और सभ्य देश मै बी होता हो

कृषण भाई, आपकी बात बिलकुल सही है i धार्मिक उग्रता मानव सभ्यता के लिए आज सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है i जब तक धर्म के पाखंडों से मुक्ति नहीं मिलेगी, दुनिया सुख से नहीं रह पायेगी i कुछ धर्म और समुदाय इतना उग्र रूप धारण कर चुके हैं कि अब उनको काबू में करने के लिए दुनिया की उन बड़ी बड़ी ताकतों के भी पसीने छूटे हुए हैं जो पहले दूसरों के घरों में लगी आग में रोटियाँ सेकते थे i आप जैसे भाइयों का गुस्सा बिलकुल ठीक है, परन्तु इसका कोई समाधान तो सुझाओ i
 
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Thanks Deswal ji for true video, this must be sent to congress party think tankers that where they are taking India?
What happened recently in Mumbai, this footage is enough to have a glimpse -

[video]http://www.jatland.com/forums/media.php?do=details&mid=314[/video]
 
It is going to be almost 82 years, a young man wrote this.....I would like to share it with you…
"As regard the origin of God, my thought is that man created God in his imagination when he realized his weaknesses, limitations and shortcomings. In this way he got the courage to face all the trying circumstances and to meet all dangers that might occur in his life and also to restrain his outbursts in prosperity and affluence. God, with his whimsical laws and parental generosity was painted with variegated colors of imagination. He was used as a deterrent factor when his fury and his laws were repeatedly propagated so that man might not become a danger to society. He was the cry of the distressed soul for he was believed to stand as father and mother, sister and brother, brother and friend when in time of distress a man was left alone and helpless. He was Almighty and could do anything. The idea of God is helpful to a man in distress."


He was non other then an Indian nationalist named "Saheed Bhagat Singh" .....I too don't believe in religion, cast, creed, color etc. Even, my profession also doesn’t allow me to do so…because Science is my religion.... Science is nothing but the “karma”…. However, It is difficult to imagine, how possibly a young man of just 23 years old can write such deep and implicit thoughts…..I often do keep in mind while meeting a person….I am not meeting him/her but rather a thought process….and best part of my life is….. “Whenever I meet a person who has really good thoughts, I say to myself that particular day was worth living…
 
यह धर्म है बड़ी बेकार की चीज़ जो सारे फसाद की जड़ है i समाज में अराजकता और धार्मिक उन्माद पैदा करने वालों के लिए कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए, अगर इस देश को टुकड़े-टुकड़े होने से बचाना है तो i हम इतिहास के पहिये को उल्टा नहीं घुमा सकते i इसलिए आपसी सामंजस्य और सद्भाव से रहना ही उचित होगा और विघटनकारी ताकतों को एक मज़बूत सरकारी तंत्र के द्वारा ही खत्म करना होगा i मज़बूत सरकार चुनना आपके हाथ में i

विजयपाल जी , ये सारी बात सब ने बेरा स ,अर कहण में या फेर प्रवचन देण खातर आछी लागें सें | पर जिह देश में धर्म अर धर्म निरपेक्षता की व्याख्या-ए गलत करी जावे स ,ते परिणाम भी गलत-ए आवेंगे | समझ ते आप गए होंगे |
 
“Islam is a religion of peace”. This is what our politically correct politicians keep telling us. But what is politically correct is not necessarily correct. The truth is that Islam is not a religion of peace. It is a religion of hate, of terror and of war. A thorough study of the Quran and Hadith reveal an Islam that is not being presented honestly by the Muslim propagandists and is not known to the majority of the people of the world including Muslim themselves.

http://www.faithfreedom.org/prologue/

Can anyone correct me on the below (I mean whether the interpretation is correct or not):

Source: http://www.youtube.com/watch?v=tsiKVc028I0

According to Quran:Surah 3, verse 28:

3:28 Let not the Believers take the Unbelievers as friends - rather than the Believers. And whoever does that, then there is nothing from Allâh in any matter; unless that you only protect yourselves from them a protection. Thus Allâh cautions you of Himself; for towards Allâh is the eventual coming.

Means a Muslim shall not befriend a non Muslim. Allah says that if they will befriend non Muslim, Allah will cut them off from himself.

According to Surah 98, verse 6, it says people of the book that means Jews and Christians are shalobaraya, the most evil of all creatures.


Bhai If this what they are taught then their chances of assimilation with others are very less. Issues can be resolved diplomatically. Also, our law and order should maintain its prerogative. Perpetrators must be brought to justice.
 
Last edited:
Bhai, read so called 'Peace loving religion' and their religious followers peace acts!


अफगानिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हेलमंद प्रांत में तालिबान चरमपंथियों ने 15 पुरुषों और दो महिलाओं का सिर कलम कर दिया है क्योंकि वो एक नृत्य और संगीत के कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे. इससे अलग तालिबान चरमपंथियों के एक अन्य हमले में हेलमंद में ही 10 अफ़गान सैनिक भी मारे गए हैं. ये हमला एक सुरक्षा चौकी पर रविवार को हुआ था.


http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/08/120827_afghan_beheading_akd.shtml



Bhai If this what they are taught then their chances of assimilation with others are very less. Issues can be resolved diplomatically. Also, our law and order should maintain its prerogative. Perpetrators must be brought to justice.
 
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Bhai, read so called 'Peace loving religion' and their religious followers peace acts!


अफगानिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हेलमंद प्रांत में तालिबान चरमपंथियों ने 15 पुरुषों और दो महिलाओं का सिर कलम कर दिया है क्योंकि वो एक नृत्य और संगीत के कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे. इससे अलग तालिबान चरमपंथियों के एक अन्य हमले में हेलमंद में ही 10 अफ़गान सैनिक भी मारे गए हैं. ये हमला एक सुरक्षा चौकी पर रविवार को हुआ था.





बढिया है - जब और कोई नहीं बचा, सारे मुसलमान ही रह गए तो आपस में ही कट कर मरेंगे, किसी न किसी बहाने।

वैसे इस्लाम और उसके कट्टरवाद के बारे में जानकारी लेनी हो तो एक अच्छा-सा बेवसाइट है -
http://islam-watch.org/
 
विजयपाल जी , ये सारी बात सब ने बेरा स ,अर कहण में या फेर प्रवचन देण खातर आछी लागें सें | पर जिह देश में धर्म अर धर्म निरपेक्षता की व्याख्या-ए गलत करी जावे स ,ते परिणाम भी गलत-ए आवेंगे | समझ ते आप गए होंगे |

रविंदरजीत, बिलकुल ठीक बात कही आपने i ये बात प्रवचन में ही अच्छी लगती हैं कि फलाणे नै मार देणा चाहिए, आर अमुक धर्म वालों को देश तैं बाहर काढ देणा चाहिए i निचोड़ ये है कि यह बात तो कानून के दायरे में रह कर ही सुलझाई जाएगी i भाई, ये कट्टरपंथी और उग्रवादी मेरी और आप की तरह इतने शरीफ माणस नहीं कि जाटलैंड का कोए अल्बादी माणस इन नै कचोद मार के, आर उलटे सीधे दो सस्ते से चमोले बगा के भजा दे i इन नै जन्नत मै हूर दिखाई दे रही हैं और ये मरने से नहीं डरते i मामला घणा गंभीर दीखे सै i प्रवचन देण की बजाये कर्मयोगी, कर्मठ और क्रांतिकारी गाभरूआँ नै आगै आणा चाहिए राजनीति मै i आर फेर सत्ता में रह कर इस समस्या का समाधान लोकतान्त्रिक प्रणाली से संविधान के दायरे में रहकर ही करना चाहिए i इसका और कोई समाधान नहीं चाहे तीन ताल कूदो या चार ताल i रविंदरजीत भाई नै तै राजनीति मै आण की भाइयां की फरमायास मानी नहीं i भाई जीत ताखर नै और बूझ के देख लियो i नहीं तो दुलार साहब जिसा कोए बुद्दिजीवी क्रांतिकारी भी के बुरा सै, इनके ओजस्वी विचारों से भी गाहे बगाहे क्रांति कि खुशबू यों आती रहती है, जैसे किसी मद्रासी महिला के जूड़े से चमेली के गजरे की महक i

रविंदरजीत भाई आपने ठीक कह्या, धर्म निरपेक्षता की गलत व्याख्या करना भोत गलत बात सै i जब व्याख्या गलत होगी तो परिणाम तो गलत होंगे ही i मै समझ ग्या यो काम कौन करै सै i इसमे जरूर असामाजिक और अवसरवादी ताकतों का हाथ है i मैं आपकी सारी बात आछी ढाल समझ ग्या i भाई की बात क्यूकर नहीं समझूंगा, मन्ने के आड़े रहना कोणी i
 
अंकुर,
शहीद भगत सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, वे एक कट्टर देशभक्त होने के साथ-साथ, एक महान दूरदर्शी, दार्शनिक तथा समाजवादी भी थे.

महान वैज्ञानिक रोबर्ट ओपेनहाईमर, जिनको परमाणु बम का जनक भी कहा जाता है, को गीता, वेद और महाभारत मै अटूट विश्वास था. गीता का अध्ययन उन्होंने मौलिक भाषा संस्कृत मै किया था. अपने व्याख्यानों मै वे अक्सर गीता के श्लोकों को उदधृत किया करते थे. मैनहट्टन प्रोजेक्ट (प्रथम परमाणु विस्फोट) के बाद जब उनसे एक छात्र ने मासूमियत से पूछा की, क्या ये दुनिया का पहला परमाणु विस्फोट है? उनका उत्तर था; "हाँ, आधुनिक समय में (
Well, yes. In modern times, of course.)"

स्वयं अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा है कि, "धर्म के बिना विज्ञान पंगु है और विज्ञान के बिना धर्म दृष्टिहीन"

वर्तमान में चिकित्सा और प्राकृतिक विज्ञान मे, यहूदी वैज्ञानिको का कोई सानी नहीं. लेकिन, लगबग सारे के सारे नोबेल पुरुस्कार विजेता भी अपनी टोपी (कीप्पा कहते है उसको शायद) पहनना नहीं भूलते. हालांकि ये टोपी उनके लिए धार्मिक कारणों से आवश्यक नहीं है, वो केवल भगवान के प्रति अपना सम्मान जताने के लिए ऐसा करते है. और आप कह रहे हो कि मेरा रोज़गार मुझको धर्म मे विश्वास करने कि मंज़ूरी नहीं देता! विज्ञान को धर्म का दर्जा भी दे दिया !


It is going to be almost 82 years, a young man wrote this.....I would like to share it with you…
"As regard the origin of God, my thought is that man created God in his imagination when he realized his weaknesses, limitations and shortcomings. In this way he got the courage to face all the trying circumstances and to meet all dangers that might occur in his life and also to restrain his outbursts in prosperity and affluence. God, with his whimsical laws and parental generosity was painted with variegated colors of imagination. He was used as a deterrent factor when his fury and his laws were repeatedly propagated so that man might not become a danger to society. He was the cry of the distressed soul for he was believed to stand as father and mother, sister and brother, brother and friend when in time of distress a man was left alone and helpless. He was Almighty and could do anything. The idea of God is helpful to a man in distress."


He was non other then an Indian nationalist named "Saheed Bhagat Singh" .....I too don't believe in religion, cast, creed, color etc. Even, my profession also doesn’t allow me to do so…because Science is my religion.... Science is nothing but the “karma”…. However, It is difficult to imagine, how possibly a young man of just 23 years old can write such deep and implicit thoughts…..I often do keep in mind while meeting a person….I am not meeting him/her but rather a thought process….and best part of my life is….. “Whenever I meet a person who has really good thoughts, I say to myself that particular day was worth living…
 
bhai peaceful to hain hi... pehle wahan music chal ruha tha.. party ho ruhi thi.. log dance kar ruhe the... ab koi ja ke dekho kitni shanti ka mahol hoga... to religion and followers to peaceful hai hi... mahol ko bilkul shant kar dete hain... :)

Bhai, read so called 'Peace loving religion' and their religious followers peace acts!


अफगानिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हेलमंद प्रांत में तालिबान चरमपंथियों ने 15 पुरुषों और दो महिलाओं का सिर कलम कर दिया है क्योंकि वो एक नृत्य और संगीत के कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे. इससे अलग तालिबान चरमपंथियों के एक अन्य हमले में हेलमंद में ही 10 अफ़गान सैनिक भी मारे गए हैं. ये हमला एक सुरक्षा चौकी पर रविवार को हुआ था.


http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/08/120827_afghan_beheading_akd.shtml
 
तालिबान चरमपंथियों

Islam n taliban kinda different-----sab jante hai taliban is orthodox

just on this incident basis you can not claim some thing about islam

agar aisa hai toh-----sabse zyada music groups---n band---pakistan mei hi hai-----all muslims
 
Bhai, read so called 'Peace loving religion' and their religious followers peace acts!


अफगानिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हेलमंद प्रांत में तालिबान चरमपंथियों ने 15 पुरुषों और दो महिलाओं का सिर कलम कर दिया है क्योंकि वो एक नृत्य और संगीत के कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे. इससे अलग तालिबान चरमपंथियों के एक अन्य हमले में हेलमंद में ही 10 अफ़गान सैनिक भी मारे गए हैं. ये हमला एक सुरक्षा चौकी पर रविवार को हुआ था.


http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/08/120827_afghan_beheading_akd.shtml

भाई तेरी कई बात सची हे पर इस दुर्घटना में मरने वाले और मारने वाले दोनों ही मुस्लिम थे (रिपोर्ट बतावे हे के वे स्थानीय लोग थे तो अनुमानिक तौर पे मुस्लिम ही होंगे) तो कोई निष्कर्ष निकलना बेमानी हे
 
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