Hariyanvi Rhymes for children ( hariyanvi ) please contribute...

पहली ---
मेरा फूल दे ,फूलारी दे |
मेरी ना सें ते थारी दे |


दूसरी -------
मेरा शीशा दे मेरी कंघी दे |||
मेरी ना सें ते मांगी दे |||


( ये छोटो-छोटी छोरी कह्या करदी खेल्दी हाण ,जब वे दोनु हाथां की केंची बणा के अर एक दूसरी नु पकड़ कें अर गोल -गोल घुम्म्या करदी )
 
१----तू अर में यारी
साझे की चीज सारी
२---- इस्सी यारी
भींत के दे मारी


( ये जब कह्या करदे जब एक बालक दुसरे पे किम्मे खावन की चीज मांगे अर दुसरा नाट जावे )
 
गुज्जर गूं -गुज्जर गूं
में ते दूध बिलोउं सूँ
दूध में लिकड़ा घी टिंडी
घी ने खावेगा छोरा आंडी


( जब छोटे-छोटे बालक दूध बिलोंदी हाण आपणी माँ नु तंग करदे जब माँ कह्या करदी अर ऊँ भी कई बे छोटे बालकां के हाथ पकड़ के अर बिलोन की ढाल हलावे ते बालक घणे हांस्या करें )
 
chanderbhaan,ghadi ke kaan,
makode ne pakde donu kaan,
aaj aaj chorde mere jajmaan,
pher na aaoon gular khaan,
ganje ke sar pe do taali ,
ganja keh meri bahu chaali.
 
धर्डा र धर्डा
गाजर का नरडा
जोहड़ में गिर्डा
जोहड़ में पाई गार
साले के सर पे लित्तर मार


(म्हारी गाल में एक धर्डा था नीचे कद का उहने चीडाया करदे )
 
अडा बड़ा नून तेल का डला

हांडी फूटी लिकड़ पडा


(छोटा सा है हम खेलती हाना कहा करते )
 
मांगे राम मक्डोली का
दूध पी गा डोली का
डोली पड़गी रेत में
मांगे रोवे खेत में
खेत में पाई माँ
माँ ने मार्या लीतर
मांगे भाज्या भीतर
भीतर पाए भाई भाभी
भाभी ने मार्य़ा सोंटा
मांगे होग्या मोटा
 
झाऊ रे झाऊ
सुनील का ताऊ
बीटोडयाँ में रहूँ
घास फुंश खाऊं
 
बचपन की एक छोटी सी कहानी
सुणी थी हामने दादा- दादी की जुबानी
आज हमने उसे कविता में पिरोया
जाग उठा बचपन ,जो था सोया


काबर अर मेन्ह्स की काहणी:-


एक थी मेन्ह्स
एक थी काबर
दोनुआँ की थी करडी यारी
काबर बैठ के कड़ पे
कर्या करे थी मेंहस की सुवारी


कदे उछले,कदे कूदे
मेन्ह्स के सारे चिचड चुंडे
कदे कान में करे खाज
यु-ए था उनकी यारी का राज


एक दिन मेंहस ने न्यू सोची
उह के मन में एक बात आई ओछी
काबर का स मेरे ताण जीणा
मेरे पे हागे ,मेरे पे मुते
आज ताहि मेरे तें किम्मे ना दिहना


मेन्ह्स बोली आ-ए काबर
तू मेरे पे खेली -कूदी भोत
आज तू तले बैठ
में तेरे पे करुँगी चोथ


काबर ने भतेरे हाथ पाँ जोड़े
पर मेन्ह्स कती ना मानी
आज उह ने खाई थी
ताते बिन्दोले अर जुवार की सानी


मेन्ह्स तें ना कदे टूट जा यारी
न्यू सोच के तले बेठ्गी काबर बीचारी
मेन्ह्स ने उह पे मार दिया चोथ
अर चाल पड़ी , बुझया ना गोत


उड़े लव सी था एक मन्दर
उह पे बेठा लखावे था एक बंदर
बंदर ने काबर पे दया आई
काबर काढ के बाहर बगाई


फेर बंदर के मन में आया लोभ
टिकड़,मांडे ते में खाऊं रोज
आज ते में काबर खा ल्यूं
जिन्दगी का नया मजा ल्यूं


बंदर ने काबर हाथ में ठाई
बंदर ने कती दया ना आई
काबर की भी बंध गी घी-घी
पर उह ने बचन की चाल चलाई


काबर बोली बंदर भाई
में गोबर में धंसी ना जाऊं खाई
पहलम तू मन्ने नुहा दे
फेर नूण मिर्च मिला दे


बंदर के भी बात समझ में आई
काबर ने धो के लाग्या खाण
काबर बोली आली क्यूँ खावे
घाम लिकड़र्या धर दे सुखाण


बंदर ने बात ली मान
काबर धर दी भींत पे सुखाण
काबर बोली नूण मिर्च ले आ
इतन: में करड़ा कर ल्यूं जिया


बंदर गया उछलदा पार
आया इतन्ने काबर ले गी उड़ार


शिक्षआ : मुर्ख लोगों की दोस्ती हमेशा नुक्सान दायक होती हे | और मुसीबत में बुद्धि हमेशा काम आती हे |
 
लाडू र लाडू

तन्ने ठा कें गाडून
मेरे पाछे
भाजे तेरा बाबू
तेरे बाबू की
खुल गी लान्गड़
मन्ने ठा के
मार्या बांगड़
बांगड़ के
होए दो टूक
मन्ने लागी
करडी भूख
आपां घरां जावांगे
रोटी मलाई खावांगे
 
जट्टां ने करी रामलीला


म्हारे गाम में एक स ऊंचा सा टील्ला
उह पे होया करदी आये साल रामलीला
पर इबके साल चाला पाट्गा
राम बण में जाण तें नाट्गा
दसरथ बोल्या ,एक बे चाला जा बेटा
राम बोल्या ,बाबू मत कर मेरे टोटा
दसरथ बोल्या ,राम तन्ने बण में जाना-ए पडेगा
ना ते देख ले फेर चढ़ावा कम चढ़ेगा
राम बोल्या अक इबके में थारी बातां में ना आऊं
खामखाँ बण में धक्के में ना खाऊं
जे एक मिनट में माण भी ल्यूं
अर बण में जाण की ठाण भी ल्यूं
ते वा सीता गेल्याँ पाँ ठावेगी
अर किम्मे ना किम्मे राड़ कर्वावेगी
अर न्यू कहवेगी,कित चाल्या मेरी ननद के भाई
इन् बल्धां की सूं ,में भी तेरी गेल आई
फेर वो लक्षमण गेल भाज्या आवेगा
उह के टिकडे कुण बनावेगा
इब्ब ना पावेगी किते पंचवटी
उड़े पहलम तें-ए झोपड़ियां तें अटी
ना रह रे उड़े पेड़
सारे बस गे जा के ढेढ़
माण लो हामने भी घाल ली एक झोंपड़ी
देख के ने घूम जा गी किस्से सुर्पंखां की खोपड़ी
फेर वा लंका के दार चढ़ेगी
अर रावण के कान भरेगी
फेर रावण आवेगा
अर मेरी बहु ने ठा ले जावेगा
ना रहे वे धर्म
अर ना रहे वे ईमान
बिना भाड़े के ले आवें सीता ने
कित रह रे सें वे हनुमान
माण लो रोला सुण कें सीता आ भी गई
अर अग्नि प्रीक्षआ की घटा छा भी गई
तो सरीत मार ले बाबू
इबके सीता जल के मरेगी
अर बहु जलाण के केस में
पुलीस मेरे घणे धरेगी
तो बाबू तू माण जा
अर इबके ते भरत बनवास काटेगा
राम ते न्यू-ए बण में जाण तें नाटेगा


( इबके गाम में गया जब बालकां पे सुंनी थी )


विशेष :-बाल्कां के घणी पसंद की स ज्यां ते इह में गेर दी
 
मिंह आया
मिंह आया
सामण में
पांणी बड़ग्या
दामण में
दामण की
टूट्गी डोर
बाँधी ना बंधी
ला लिया घणा जोर
 
र हरदेवा चपड़ासी
तन्ने कदे ना आवे हांसी
तू घंटी क्यूँ ना बजावे
हामने घेर घोट के बिठावे
जा तन्ने हेडमास्टर बुलावे
तोड़ेगा तन्ने फांसी
र हरदेवा चपड़ासी
र हरदेवा चपड़ासी
( म्हारे सकूल में एक हरदेवा चपड़ासी था उह ने चीडाया करदे बालक )
 
यु राकेश सहरावत सारी हाण मेरे खोद मारें जावे स | आज में इह के खोद मारूंगा( खोद का बदला खोद ) :-

राकेश छोरा अजाब का
हुई बात ने दाब जा
काम किम्मे ना ठाली था
तोड़े बल्धां की टाल्ली था
बल्धां ने कसुते मारे सींग
राकेश खोर पे बैठ के रींग
रींगते -रींगते के आई पूणी
भादरगढ़ में जा लाइ धूणी
धूणी में लागी आग
राकेश उड़े तें लिया भाज
भाजते भाजते धेड पड्या
पाग्या उहने सोने का कडा
कडा बेच के बणाया महल
महल पूरा खाली था
काम किम्मे ना ठाली था
तोड़े बल्धां की टाल्ली था
 
यु राकेश सहरावत सारी हाण मेरे खोद मारें जावे स | आज में इह के खोद मारूंगा( खोद का बदला खोद ) :-

राकेश छोरा अजाब का
हुई बात ने दाब जा
काम किम्मे ना ठाली था
तोड़े बल्धां की टाल्ली था
बल्धां ने कसुते मारे सींग
राकेश खोर पे बैठ के रींग
रींगते -रींगते के आई पूणी
भादरगढ़ में जा लाइ धूणी
धूणी में लागी आग
राकेश उड़े तें लिया भाज
भाजते भाजते धेड पड्या
पाग्या उहने सोने का कडा
कडा बेच के बणाया महल
महल पूरा खाली था
काम किम्मे ना ठाली था
तोड़े बल्धां की टाल्ली था


hahaha .... gajab ravinder ji .... aaj to rakesh bhaaja nahi thave .... is weekend to rakeshi bhai balkan ne nu kah ga ki chalo tamne kite ghuma lau... ib JL te to thode din ki chutti bhi mil jagi ... or itne yo mamla bhi thanda ho lega .. :):)
 
माँ में जांगा फौज में
देश रहवेगा मौज में .............


दुश्मनां के खींढाऊँ हाड
सीम पे खड्या रहूँ रोज में
............ माँ में जांगा फौज में |
तेरा फोटू राखूँ गोझ में
तेरी याद में जीउँ रोज में
............. माँ में जांगा फौज में |
धरती माँ की रक्षआ करूँ
शत्रु मारूँ खोज में
.................माँ में जांगा फौज में |
भारत माँ का सर राखूँ ऊंचा
नहीं रहण दयूं कोए बोझ में
............... माँ में जांगा फौज में
देश रहवेगा मौज में .
माँ में जांगा फौज में
देश रहवेगा मौज में .............



(उप्पर की दो पंक्ति मन्ने कदे रेडिओ पे सुणी थी बालक पण में ,आगे की याद कोणी थी ,पर मन्ने उस्से तरज पे आगे का जोड्या स ,आशा स भाइयां के पसंद आवेगा )
 
Ravinderjeet bhai... This thread dedicated to you... A very nice contribution from you ... Thank you very much...
 
Ravinderjeet bhai... This thread dedicated to you... A very nice contribution from you ... Thank you very much...

तेरा भी घणा धन्यवाद भाई
भोत दिनाँ में तागे की याद आई
इब्ब तांही तागा फेर भी चाले था
कोए ना कोए किम्मे ते घाले था
इब्ब तू आग्या संभाल ले फेर
ला दे बाल कविता का ढेर
 
मछली जल की रानी स
जीवन उह का पाणी स
हाथ लायें तें डर जावे
बाहर काढें तें मर जावे
दो दन धर दे ते सड़ जावे
 
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