ravinderjeet
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काली घटा उमड़ती आवै ,
दिन मैं होगी रात जणू
रूसी सजनी , भी साजन ताण ,
सोचै कर ल्यूं बात जणू
बूँद पड़ी सारा छोह धू ग्या,
आज कसूता मींह बरस्या
गितवाड़े में गोस्से भीजे ,
इंधन आल्ला न्यारा होग्या
रोटी पौन न , आग बले ना,
चुहले ऊपर खाड़ा होग्या
पानी देख पर भूख भाज रही ,
आज कसूता मींह बरस्या
पशु पखेरू नाच उठे सब ,
पानी अमृत सा लाग्या
जोहड़ के माँ तिरं बाछ्ड़े
भैंसा के भी जी -सा आग्या
कुएं भरगे , पनघट सज ग्या
आज कसूता मींह बरस्या
(बेरा नि किः की लिखी होड़ स )
दिन मैं होगी रात जणू
रूसी सजनी , भी साजन ताण ,
सोचै कर ल्यूं बात जणू
बूँद पड़ी सारा छोह धू ग्या,
आज कसूता मींह बरस्या
गितवाड़े में गोस्से भीजे ,
इंधन आल्ला न्यारा होग्या
रोटी पौन न , आग बले ना,
चुहले ऊपर खाड़ा होग्या
पानी देख पर भूख भाज रही ,
आज कसूता मींह बरस्या
पशु पखेरू नाच उठे सब ,
पानी अमृत सा लाग्या
जोहड़ के माँ तिरं बाछ्ड़े
भैंसा के भी जी -सा आग्या
कुएं भरगे , पनघट सज ग्या
आज कसूता मींह बरस्या
(बेरा नि किः की लिखी होड़ स )