म्हरा गाम , म्हारे खेत | एक और सकूल (सवामी दयानंद सकूल ) | पहलम म्हारे गाम में दो-ए सकूल होया करदे सरकारी ,इब्ब बारा सकूल सें १२ मी ताहीं के ,बेरा ना इन्ने बालक किथों आवें सें |
म्हरा गाम , म्हारे खेत | इब्ब मेरे मांह कोए बाल्टी कोणी आंदी , कोए कांडा कोणी गर्दा, कोए पणिहारी गीत कोणी गाँदी , बस तन्हाई में सूना आसमान निहारूं , में एक्ला कूँआ किः ने पुकारूं |
म्हरा गाम , म्हारे खेत | बुर्जी ,कदे आड़े बड़ी चहल -पहल होया करदी , इब्ब ते कोए खोला भी ना आ के मरदी | "बोरस" यु लगभग आधा की.मी. लाम्बा म्हारे गामका सब तें बड्डा जोहड़ स | इस की खोज होणे के बाद दादा गुशल ने इह के साहरे आपणे तीन पुत्रों के साथ गाम बसाया था |
म्हरा गाम , म्हारे खेत | इससे-इससे म्हारे गाम में लगभग १० कुंए थे जिनमे डाँगराँ खातर पाणी की नाली अर भीतर जनानियां की खातर सनान्गार होया करदे ,इब्ब ते सारे खंडहर होए पड़े सें ,आपणी धरोहर बचाणे की खातर अपणे पुरखों की बणआई चीजों की जाणकारी होणा जरुरी स |
म्हरा गाम , म्हारे खेत | शिश्यां आली परस (चुपाड ) | इसमें कदे बड्डे-बड्डे अवतल शीशे लाग रे थे अर मुसलमानां की गेल होई लड़ाई के भीती चित्र थे | जब में फोटू लेण गया ते पुराणी परस तोड़ के ने नई बणा राखी थी | हमने अपना इतिहास बचाना नहीं सिखा |