ज़िन्दगी के रंग - सीमा कुमार
ज़िन्दगी कभी-कभी
कहीं खत्म सी हो जाती है,
कहीं थम सी जाती है
और फिर कहीं
शुरू हो जाती है ।
Rock on
Jit
सोये हैं पेड़ - माहेश्वर तिवारी
कुहरे में
सोये हैं पेड़।
पत्ता-पत्ता नम है
यह सबूत क्या कम है
लगता है
लिपट कर टहनियों से
बहुत-बहुत
रोये हैं पेड़।
जंगल का घर छूटा,
कुछ कुछ भीतर टूटा
शहरों में
बेघर होकर जीते
सपनो में खोये हैं पेड़।
हर लम्हा एक विस्मय - सीमा कुमार
वक्त रेत की तरह
फिसलता रहा
मेरी भिंची हुई मुठ्ठियों से
और मैं रेत के एक-एक कण को
बिना आहट
फर्श पर तरलता से
बिखरते देखती रही ।
Hi...a small try just to add on to what neelam is doing...
अक्सर भटक ही जाते हैं बाहर निकल के लोग,
हर घर से निकला आदमी गौतम नहीं होता।
सोये हैं पेड़ - माहेश्वर तिवारी
कुहरे में
सोये हैं पेड़।
पत्ता-पत्ता नम है
यह सबूत क्या कम है
लगता है
लिपट कर टहनियों से
बहुत-बहुत
रोये हैं पेड़।
जंगल का घर छूटा,
कुछ कुछ भीतर टूटा
शहरों में
बेघर होकर जीते
सपनो में खोये हैं पेड़।
वक्त रेत की तरह
फिसलता रहा
मेरी भिंची हुई मुठ्ठियों से
और मैं रेत के एक-एक कण को
बिना आहट
फर्श पर तरलता से
बिखरते देखती रही ।
Khubsoorat hain wo lub
Jo pyari batein kertey hain
khubsoorat hain wo batein
Jo kisi ka dil na dukhaein
Khubsoorat hain wo aankhein
Jin mein pakizgi ho
Sharm - o - haya ho
khubsoorat hain wo aansoo
Jo kisi ke dard ko
Mehsoos kerke bah jaein
Khubsoorat hain wo Hath
Jo kisi ko mushkil
Waqt mein thaam lein
.
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