prashanthooda
Banned
धन्यवाद अंजलि जी एक अत्यन्त विचारोत्तेजक कविता प्रस्तुत करने के लिए |
हम सब चुप क्यों हैं? कुछ कर क्यूँ नही गुजरते? हम लोग सदा इन सत्ता के भूखे भेड़ियों से डर कर कब तक जियेंगे. अब ये लडाई लड़ ही लेनी चाहिए आर या पार. कोई भी हमारे घर मैं घुस कर हमें थप्पड़ मार जाता है
और ये सरकार के तथाकथित नुमाइंदे अपनी मस्ती में मस्त रहते हैं.
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काजू भुनी प्लेट में ह्विस्की गिलास में।
उतरा है रामराज विधायक निवास में।
पक्के समाजवादी हैं तस्कर हों या डकैत
इतना असर है खादी के उजले लिबास में।
आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह
जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में।
पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें
संसद बदल गयी है यहाँ की नखास में।
जनता के पास एक ही चारा है बगावत
यह बात कह रहा हूँ मैं होशोहवास में ।